वित्त आयोग Part 2

⌄
-- Questions Economy

वित्त आयोग Part 2 - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

वित्त आयोग Part 2 के 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, विस्तृत व्याख्याओं और विषयवार SEO सामग्री के साथ।

प्रश्न 1 / --
00:00
2%
प्रश्न 1

लोडिंग...

💡 व्याख्या

वित्त आयोग: संरचना, सिफारिशें और राजकोषीय संघवाद

वित्त आयोग भारत में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण को संतुलित करने वाली महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। इसका मुख्य आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 है। आयोग करों के वितरण, अनुदान-सहायता और राजकोषीय असंतुलन से जुड़े विषयों पर राष्ट्रपति को सिफारिशें देता है।

वित्त आयोग की सिफारिशें किसे प्रस्तुत की जाती हैं?

वित्त आयोग अपनी सिफारिशें राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति इन सिफारिशों और उन पर की गई कार्रवाई के स्पष्टीकरण को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं।

अनुच्छेद 281 और वित्त आयोग की सिफारिशें

अनुच्छेद 281 वित्त आयोग की सिफारिशों को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखने से संबंधित है। इसलिए अनुच्छेद 280 और 281 को साथ समझना उपयोगी है: अनुच्छेद 280 आयोग के गठन और कार्यों का आधार देता है, जबकि अनुच्छेद 281 सिफारिशों को संसद के समक्ष रखने से संबंधित है।

कर हस्तांतरण और विभाज्य कर पूल

कर हस्तांतरण के अंतर्गत राज्यों को संघीय करों की शुद्ध प्राप्तियों के विभाज्य पूल में निर्धारित हिस्सा मिलता है। यह राज्यों के लिए महत्वपूर्ण राजकोषीय संसाधन उपलब्ध कराता है और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को मजबूत करता है।

ऊर्ध्वाधर वितरण

ऊर्ध्वाधर वितरण मुख्यतः केंद्र और राज्यों के बीच कर संसाधनों के वितरण को दर्शाता है। इसका संबंध इस बात से है कि विभाज्य कर पूल में से राज्यों को कुल कितना हिस्सा दिया जाए।

क्षैतिज वितरण

क्षैतिज वितरण राज्यों के बीच उपलब्ध कर हस्तांतरण को बाँटने से संबंधित है। इसमें अलग-अलग राज्यों की वित्तीय क्षमता, आवश्यकताओं और अन्य निर्धारित मानदंडों को ध्यान में रखा जा सकता है।

राजकोषीय समानता का उद्देश्य

राजकोषीय समानता का उद्देश्य राज्यों के बीच राजस्व जुटाने की क्षमता और सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध कराने की क्षमता में मौजूद अंतर को कम करने में सहायता करना है। इसका लक्ष्य सभी राज्यों को समान बनाना नहीं, बल्कि वित्तीय अवसरों और सेवाओं में अत्यधिक असमानता को कम करना है।

वित्त आयोग से जुड़े अनुदान

वित्त आयोग अनुदान-सहायता से संबंधित सिफारिशें भी करता है। इनमें स्थानीय निकाय अनुदान, राजस्व घाटा अनुदान और आपदा से संबंधित सहायता जैसे व्यापक क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।

स्थानीय निकाय अनुदान

स्थानीय निकाय अनुदान का उद्देश्य स्थानीय संस्थाओं के संसाधनों को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तथा बुनियादी सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

स्थानीय निकायों के लिए संवैधानिक प्रावधान

अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग स्थानीय निकायों के संसाधनों को बढ़ाने के लिए राज्य की संचित निधि में वृद्धि हेतु आवश्यक उपायों के सिद्धांतों पर सिफारिश कर सकता है।

स्थानीय निकायों को मिलने वाले हस्तांतरण

स्थानीय निकायों को अपेक्षाकृत पूर्वानुमेय वित्तीय हस्तांतरण मिलने से स्थानीय शासन, सार्वजनिक सेवाओं, बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।

राजस्व घाटा अनुदान

राजस्व घाटा अनुदान का उद्देश्य ऐसे राज्यों के राजस्व खाते में मौजूद अंतर को सहायता देना है जहाँ निर्धारित मानकों के अनुसार राजस्व प्राप्तियाँ उनके राजस्व व्यय की आवश्यकताओं को पूरा करने में पर्याप्त नहीं होतीं।

आपदा से संबंधित अनुदान

आपदा से संबंधित अनुदान का संबंध आपदा प्रबंधन और आपदाओं से उत्पन्न वित्तीय आवश्यकताओं के लिए राजकोषीय सहायता से हो सकता है। वित्त आयोग समय-समय पर इस क्षेत्र को अपनी सिफारिशों में शामिल करता रहा है।

15वें वित्त आयोग का गठन

15वें वित्त आयोग का गठन वर्ष 2017 में किया गया था। इसके अध्यक्ष एन. के. सिंह थे और इसकी सिफारिशें मुख्यतः वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि से संबंधित थीं।

15वें वित्त आयोग का ऊर्ध्वाधर कर हस्तांतरण

15वें वित्त आयोग ने राज्यों के लिए विभाज्य पूल में 41 प्रतिशत ऊर्ध्वाधर कर हस्तांतरण की सिफारिश की। यह 14वें वित्त आयोग की 42 प्रतिशत सिफारिश से 1 प्रतिशत अंक कम था।

15वें वित्त आयोग का क्षैतिज वितरण सूत्र

क्षैतिज वितरण में राज्यों के बीच हिस्सेदारी निर्धारित करने के लिए आय दूरी, जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन एवं पारिस्थितिकी, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन तथा कर एवं राजकोषीय प्रयास जैसे मानदंडों का उपयोग किया गया।

पर्यावरण संबंधी मानदंड

15वें वित्त आयोग की क्षैतिज वितरण व्यवस्था में वन एवं पारिस्थितिकी एक महत्वपूर्ण पर्यावरण संबंधी मानदंड था। इससे राज्यों की पारिस्थितिक भूमिका को वित्तीय वितरण में स्थान मिला।

कर एवं राजकोषीय प्रयास

कर एवं राजकोषीय प्रयास क्षैतिज वितरण सूत्र में राज्यों के राजस्व जुटाने के प्रयासों को ध्यान में रखने वाला मानदंड था। इसका उद्देश्य बेहतर राजस्व प्रयासों को वितरण व्यवस्था में उचित स्थान देना था।

15वें वित्त आयोग के प्रमुख तथ्यविवरण
गठन2017
अध्यक्षएन. के. सिंह
सिफारिश अवधि2021-22 से 2025-26
राज्यों का ऊर्ध्वाधर हिस्सा41 प्रतिशत

16वें वित्त आयोग का गठन

16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर 2023 को किया गया था। इसके अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया हैं। इसका पुरस्कार काल 1 अप्रैल 2026 से शुरू होता है।

16वें वित्त आयोग का कार्यकाल

16वें वित्त आयोग की सिफारिशें 2026-27 से शुरू होने वाली पुरस्कार अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण से संबंधित हैं।

16वें वित्त आयोग के कार्यक्षेत्र

16वें वित्त आयोग के कार्यक्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच करों की शुद्ध प्राप्तियों के वितरण तथा राज्यों के बीच हिस्सेदारी के निर्धारण से संबंधित विषय शामिल हैं।

राज्यों के बीच संसाधन वितरण

वित्त आयोग केवल राज्यों की कुल हिस्सेदारी पर विचार नहीं करता, बल्कि राज्यों के बीच उस हिस्से के वितरण के लिए भी मानदंड और सिद्धांतों पर सिफारिश करता है।

राजकोषीय क्षमता और आवश्यकताएँ

क्षैतिज वितरण में राजकोषीय क्षमता के साथ राज्यों की आवश्यकताओं, जनसांख्यिकीय परिस्थितियों, क्षेत्रफल और अन्य निर्धारित कारकों को ध्यान में रखा जा सकता है।

वित्त आयोग की व्यापक भूमिका

वित्त आयोग की व्यापक भूमिका केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के बीच राजकोषीय संसाधनों के संतुलित वितरण में सहायता करना है।

अनुदानों की व्यापक श्रेणियाँ

सामान्य उद्देश्य और विशिष्ट उद्देश्य वाले अनुदानों को व्यापक रूप से राजकोषीय हस्तांतरण की व्यवस्था के अंतर्गत समझा जा सकता है। इनका उद्देश्य विभिन्न वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराना है।

आपदा सहायता और वित्त आयोग

आपदा से संबंधित वित्तीय सहायता राज्यों और स्थानीय स्तर की संस्थाओं की आपदा प्रबंधन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकती है।

जनसांख्यिकीय प्रदर्शन

15वें वित्त आयोग की क्षैतिज वितरण व्यवस्था में जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को जनसंख्या संबंधी मानदंड के साथ संतुलित किया गया। इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण और बेहतर जनसांख्यिकीय परिणामों के प्रयासों को ध्यान में रखना था।

15वें वित्त आयोग की अवधि

15वें वित्त आयोग की सिफारिश अवधि 2021-22 से 2025-26 थी। इसलिए इस आयोग से संबंधित प्रश्नों में इसकी अवधि और 41 प्रतिशत ऊर्ध्वाधर कर हस्तांतरण को विशेष रूप से याद रखना उपयोगी है।

16वें वित्त आयोग की पुरस्कार अवधि

16वें वित्त आयोग की पुरस्कार अवधि 1 अप्रैल 2026 से आरंभ होने वाली है। आयोग का कार्य केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण के लिए अगले चरण के सिद्धांतों और सिफारिशों से जुड़ा है।

16वें वित्त आयोग और राज्यों के बीच वितरण

16वें वित्त आयोग के कार्यक्षेत्र में राज्यों के बीच कर हस्तांतरण के वितरण से जुड़े सिद्धांतों पर सिफारिश करना भी शामिल है।

कुल हिस्सेदारी के अतिरिक्त सिफारिशें

वित्त आयोग राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी के अतिरिक्त अनुदान-सहायता और राज्य की संचित निधि को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों के सिद्धांतों पर भी सिफारिशें कर सकता है।

राजकोषीय क्षमता और अन्य कारक

राज्यों के बीच वितरण करते समय राजकोषीय क्षमता के साथ जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन एवं पारिस्थितिकी, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन और राजस्व जुटाने के प्रयास जैसे कारकों को ध्यान में रखा जा सकता है।

राजकोषीय हस्तांतरण की व्यापक व्यवस्था

कर हस्तांतरण और अनुदान-सहायता मिलकर केंद्र-राज्य राजकोषीय हस्तांतरण व्यवस्था के प्रमुख घटक हैं। इनका उद्देश्य संसाधनों की उपलब्धता और वित्तीय आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन बनाना है।

राजकोषीय संघवाद की प्रमुख चुनौती

राजकोषीय संघवाद में केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों तथा व्यय दायित्वों के संतुलन को बनाए रखना एक प्रमुख चुनौती है। राज्यों के बीच वित्तीय क्षमता में अंतर भी वितरण व्यवस्था को जटिल बनाता है।

वितरण सूत्र में संतुलन

वितरण सूत्र तैयार करते समय आवश्यकता, वित्तीय क्षमता, जनसंख्या, क्षेत्रफल, प्रदर्शन और राजस्व प्रयास जैसे विभिन्न विचारों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

स्थानीय निकायों की वित्तीय चुनौती

स्थानीय निकायों से जुड़ी प्रमुख वित्तीय चुनौतियों में पर्याप्त संसाधनों की कमी और हस्तांतरण की पूर्वानुमेयता का अभाव शामिल हो सकता है। वित्त आयोग के माध्यम से इनके संसाधनों को मजबूत करने के उपाय सुझाए जा सकते हैं।

व्यय दायित्वों का महत्व

केंद्र और राज्यों के व्यय दायित्वों का महत्व इसलिए है क्योंकि राजस्व जुटाने की क्षमता और सार्वजनिक सेवाओं पर व्यय की जिम्मेदारियाँ समान स्तर पर नहीं होतीं। यही अंतर ऊर्ध्वाधर राजकोषीय असंतुलन का कारण बन सकता है।

वित्त आयोग और राजकोषीय संघवाद

वित्त आयोग भारत के राजकोषीय संघवाद में केंद्र और राज्यों के वित्तीय संबंधों को व्यवस्थित करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। इसकी सिफारिशें संसाधनों के वितरण और वित्तीय असंतुलन को कम करने में सहायता करती हैं।

अनुदान-सहायता और वित्तीय हस्तांतरण

अनुदान-सहायता वित्तीय हस्तांतरण का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके द्वारा उन वित्तीय आवश्यकताओं को सहायता दी जा सकती है जिन्हें केवल कर हस्तांतरण से पूरा करना पर्याप्त न हो।

स्थानीय संस्थाओं के दो व्यापक प्रकार

स्थानीय निकाय अनुदान मुख्यतः ग्रामीण स्थानीय संस्थाओं अर्थात पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय संस्थाओं अर्थात नगर निकायों से संबंधित हो सकते हैं।

वितरण का प्रकारमुख्य संबंध
ऊर्ध्वाधर वितरणकेंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों का वितरण
क्षैतिज वितरणराज्यों के बीच संसाधनों का वितरण
राजकोषीय समानताराज्यों की वित्तीय क्षमता और आवश्यकताओं के अंतर को कम करना
स्थानीय निकाय हस्तांतरणस्थानीय शासन की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना

15वें वित्त आयोग का 41 प्रतिशत हिस्सा

15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित 41 प्रतिशत ऊर्ध्वाधर कर हस्तांतरण राज्यों को विभाज्य पूल में संघीय करों की शुद्ध प्राप्तियों का हिस्सा देने से संबंधित था।

वित्त आयोग की सिफारिशों का समग्र महत्व

वित्त आयोग की सिफारिशों का व्यापक उद्देश्य संसाधनों के उचित वितरण, राजकोषीय असंतुलन को कम करने और सहकारी संघवाद को वित्तीय आधार प्रदान करने से जुड़ा है।

वित्त आयोग के विस्तृत पहलू

वित्त आयोग की सिफारिशें

वित्त आयोग की सिफारिशें केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों के बंटवारे, अनुदानों तथा वित्तीय हस्तांतरण की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परीक्षा में यह समझना जरूरी है कि सिफारिशें वित्तीय संघवाद को अधिक संतुलित बनाने का प्रयास करती हैं।

कर विभाजन में राज्यों की हिस्सेदारी

कर विभाजन में राज्यों की हिस्सेदारी वित्त आयोग के प्रमुख विचार क्षेत्रों में शामिल है। केंद्र द्वारा एकत्र किए जाने वाले विभाज्य करों में राज्यों की हिस्सेदारी तय करने के लिए विभिन्न आर्थिक और वित्तीय संकेतकों को ध्यान में रखा जाता है।

क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर वितरण

ऊर्ध्वाधर वितरण केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों के बंटवारे से संबंधित है, जबकि क्षैतिज वितरण राज्यों के बीच उपलब्ध संसाधनों के वितरण से जुड़ा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में दोनों अवधारणाओं के बीच अंतर अक्सर पूछा जाता है।

राजकोषीय समानता

राजकोषीय समानता का उद्देश्य राज्यों की अलग-अलग राजस्व क्षमता और व्यय आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना है। वित्त आयोग ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रयास करता है जिससे कमजोर वित्तीय क्षमता वाले राज्यों को भी सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त संसाधन मिल सकें।

अनुदान के प्रकार

अनुदान वित्तीय हस्तांतरण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत राज्यों को राजस्व सहायता से जुड़े अनुदानों की सिफारिश कर सकता है। अनुदानों को उनके उद्देश्य और शर्तों के आधार पर समझना परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

15वाँ वित्त आयोग

15वें वित्त आयोग ने 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के वित्तीय संबंधों से जुड़ी सिफारिशें कीं। इसकी सिफारिशों में करों के बंटवारे, अनुदान और स्थानीय निकायों के लिए संसाधनों जैसे विषय महत्वपूर्ण रहे।

16वाँ वित्त आयोग

16वाँ वित्त आयोग आगामी वित्तीय अवधि के लिए केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों से संबंधित सिफारिशें तैयार करने वाला संवैधानिक निकाय है। इसकी भूमिका को समझते समय आयोग की अवधि, कार्यक्षेत्र और वित्तीय संघवाद से जुड़े विषयों पर ध्यान देना चाहिए।

स्थानीय निकायों से संबंधित सिफारिशें

वित्त आयोग स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण सिफारिशें करता है। ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और अन्य स्थानीय संस्थाओं को संसाधन उपलब्ध कराने से जमीनी स्तर पर सार्वजनिक सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलती है।

वित्त आयोग की चुनौतियाँ

वित्त आयोग के सामने राज्यों की अलग-अलग वित्तीय आवश्यकताओं, राजस्व क्षमता, जनसंख्या, क्षेत्रफल, विकास स्तर और राजकोषीय अनुशासन जैसे अनेक मुद्दों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती रहती है। बदलती अर्थव्यवस्था में वित्तीय संघवाद को प्रभावी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

वित्त आयोग से जुड़े परीक्षा तथ्य

परीक्षा के लिए अनुच्छेद 280, आयोग की नियुक्ति, संरचना, करों का वितरण, अनुदान, ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज वितरण और हाल के वित्त आयोगों से जुड़े तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। अवधारणात्मक प्रश्नों में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध और राजकोषीय समानता को भी प्राथमिकता दें।

त्वरित पुनरावृत्ति

विषयमुख्य बात
वित्त आयोग की सिफारिशेंकेंद्र-राज्य वित्तीय संसाधनों के संतुलन से संबंधित
ऊर्ध्वाधर वितरणकेंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों का वितरण
क्षैतिज वितरणराज्यों के बीच संसाधनों का वितरण
अनुदानराज्यों और स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय सहायता का माध्यम
15वाँ और 16वाँ वित्त आयोगवित्तीय संघवाद की समकालीन व्यवस्था को समझने के लिए महत्वपूर्ण

परीक्षा से पहले अनुच्छेद 280, कर विभाजन, अनुदान, ऊर्ध्वाधर-क्षैतिज वितरण और प्रमुख वित्त आयोगों की सिफारिशों का तुलनात्मक पुनरावलोकन करें।

समग्र महत्त्व

वित्त आयोग भारतीय वित्तीय संघवाद का एक केंद्रीय संवैधानिक संस्थान है। इसकी सिफारिशों के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अधिक संतुलित वितरण करने का प्रयास किया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस अध्याय से तथ्यात्मक और अवधारणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसलिए अनुच्छेद 280 से लेकर कर विभाजन, अनुदान, राजकोषीय समानता, स्थानीय निकायों और हाल के वित्त आयोगों तक पूरे विषय को एक साथ समझना उपयोगी है।