वित्तीय बाजार Part 1
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वित्तीय बाजार Part 1 के 50 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, विस्तृत व्याख्याओं और विषयवार SEO सामग्री के साथ।
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💡 व्याख्या
वित्तीय बाजार: अर्थ, संरचना और प्रमुख कार्य
वित्तीय बाजार वह व्यवस्था है जो बचतकर्ताओं और धन की आवश्यकता वाले व्यक्तियों, व्यवसायों तथा संस्थाओं के बीच वित्तीय संसाधनों के प्रवाह को सुगम बनाती है। इसमें विभिन्न वित्तीय परिसंपत्तियों की खरीद-बिक्री, मूल्य निर्धारण और धन के कुशल आवंटन की प्रक्रिया शामिल होती है।
वित्तीय बाजार का मूल अर्थ
वित्तीय बाजार का मुख्य कार्य वित्तीय संसाधनों को उन पक्षों तक पहुँचाना है जहाँ उनकी आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया से बचत और निवेश के बीच संबंध स्थापित होता है तथा अर्थव्यवस्था में पूंजी का प्रवाह बेहतर होता है।
वित्तीय बाजार के प्रमुख खंड
वित्तीय बाजार के प्रमुख खंडों में मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार शामिल हैं। इनके अतिरिक्त शेयर बाजार, बांड बाजार तथा सरकारी प्रतिभूति बाजार जैसे विशिष्ट बाजार भी वित्तीय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वित्तीय परिसंपत्तियों की खरीद-बिक्री
वित्तीय बाजार का एक प्रमुख कार्य वित्तीय परिसंपत्तियों की खरीद-बिक्री की सुविधा प्रदान करना है। इससे निवेशकों को अपनी बचत को विभिन्न वित्तीय साधनों में लगाने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बेचने का अवसर मिलता है।
मुद्रा बाजार
मुद्रा बाजार सामान्यतः अल्पावधि वाले वित्तीय साधनों से संबंधित होता है। इसका संबंध ऐसी वित्तीय आवश्यकताओं से है जिनकी अवधि अपेक्षाकृत कम होती है और जिनमें तरलता का विशेष महत्व रहता है।
मुद्रा बाजार के प्रमुख साधन
मुद्रा बाजार में वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाणपत्र, कॉल मनी और रेपो जैसे प्रमुख वित्तीय साधन शामिल होते हैं। ये साधन अल्पकालिक धन की आवश्यकता और तरलता प्रबंधन में सहायता करते हैं।
वाणिज्यिक पत्र
वाणिज्यिक पत्र एक अल्पकालिक वित्तीय साधन है। इसका उपयोग पात्र संस्थाओं द्वारा अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।
जमा प्रमाणपत्र
जमा प्रमाणपत्र मुद्रा बाजार का एक प्रमुख साधन है। यह एक निश्चित अवधि के लिए जमा धन से संबंधित परक्राम्य वित्तीय साधन के रूप में समझा जाता है।
कॉल मनी बाजार
कॉल मनी बाजार बहुत अल्पकालिक धन की आवश्यकताओं से संबंधित होता है। इसमें वित्तीय संस्थाएँ अपनी अल्पकालिक तरलता आवश्यकताओं के प्रबंधन के लिए धन का लेन-देन करती हैं।
रेपो लेन-देन
रेपो एक ऐसा लेन-देन है जिसमें प्रतिभूतियों के बदले धन प्राप्त किया जाता है और पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद की जाती है। यह अल्पकालिक तरलता प्रबंधन का महत्वपूर्ण साधन है।
मुद्रा बाजार का उद्देश्य
मुद्रा बाजार का मुख्य उद्देश्य अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना और वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने में सहायता करना है।
पूंजी बाजार
पूंजी बाजार मुख्यतः मध्यम और दीर्घकालिक वित्तीय संसाधनों से संबंधित होता है। इसके माध्यम से कंपनियाँ और अन्य संस्थाएँ दीर्घकालिक धन जुटा सकती हैं तथा निवेशकों को विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश का अवसर मिलता है।
पूंजी बाजार के प्रमुख घटक
पूंजी बाजार में प्राथमिक बाजार और द्वितीयक बाजार महत्वपूर्ण घटक हैं। शेयर बाजार और बांड बाजार भी पूंजी बाजार की गतिविधियों से निकटता से जुड़े हैं।
प्राथमिक बाजार
प्राथमिक बाजार में नई प्रतिभूतियाँ पहली बार निवेशकों को जारी की जाती हैं। इस प्रक्रिया में जारीकर्ता को निवेशकों से सीधे पूंजी प्राप्त होती है।
प्राथमिक बाजार में जारीकर्ता को धन
जब नई प्रतिभूतियाँ प्राथमिक बाजार में जारी की जाती हैं, तो प्राप्त धन सामान्यतः जारीकर्ता के पास जाता है। इस प्रकार प्राथमिक बाजार पूंजी जुटाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
प्राथमिक बाजार में निर्गम के तरीके
प्राथमिक बाजार में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम, अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम और अधिकार निर्गम जैसे तरीकों से प्रतिभूतियाँ जारी की जा सकती हैं।
द्वितीयक बाजार
द्वितीयक बाजार में पहले से जारी प्रतिभूतियों का निवेशकों के बीच कारोबार होता है। यहाँ प्रतिभूति का जारीकर्ता सामान्यतः प्रत्येक खरीद-बिक्री लेन-देन का प्रत्यक्ष पक्ष नहीं होता।
द्वितीयक बाजार की तरलता
द्वितीयक बाजार का प्रमुख लाभ यह है कि निवेशक अपनी प्रतिभूतियों को अपेक्षाकृत आसानी से खरीद या बेच सकते हैं। इस क्षमता को बाजार की तरलता से जोड़ा जाता है।
द्वितीयक बाजार में धन का प्रवाह
द्वितीयक बाजार में खरीद-बिक्री के दौरान धन सामान्यतः खरीदार और विक्रेता के बीच स्थानांतरित होता है। इससे पहले से जारी प्रतिभूतियों के लिए बाजार उपलब्ध रहता है।
शेयर बाजार
शेयर बाजार में मुख्यतः कंपनियों की इक्विटी प्रतिभूतियों का कारोबार होता है। शेयर खरीदने वाला निवेशक संबंधित कंपनी में स्वामित्व हित प्राप्त करता है।
बांड बाजार
बांड बाजार ऋण प्रतिभूतियों का बाजार है। इसमें बांड जारी करने वाला निवेशकों से धन उधार लेता है और निर्धारित शर्तों के अनुसार भुगतान करने का दायित्व स्वीकार करता है।
बांड से मिलने वाला प्रतिफल
बांड से मिलने वाला प्रतिफल सामान्यतः ब्याज या कूपन भुगतान तथा परिपक्वता पर मूलधन की वापसी से संबंधित हो सकता है।
बाजार ब्याज दर और बांड कीमत
अन्य परिस्थितियाँ समान रहने पर बाजार ब्याज दर बढ़ने से पहले से जारी निश्चित कूपन वाले बांड की कीमत पर सामान्यतः नीचे की ओर दबाव पड़ सकता है।
इक्विटी बाजार में निवेशक का हित
इक्विटी में निवेशक को कंपनी में स्वामित्व हित प्राप्त होता है। शेयर के मूल्य में परिवर्तन और संभावित लाभांश उसके निवेश प्रतिफल के महत्वपूर्ण घटक हो सकते हैं।
सरकारी प्रतिभूतियाँ
सरकारी प्रतिभूतियाँ सरकार द्वारा जारी ऋण साधन हैं। इनका उपयोग सरकार की वित्तीय आवश्यकताओं और उधारी को पूरा करने के लिए किया जाता है।
केंद्र सरकार के अल्पकालिक साधन
केंद्र सरकार की अल्पकालिक उधारी से संबंधित प्रमुख साधनों में ट्रेजरी बिल शामिल होते हैं। ये मुद्रा बाजार में महत्वपूर्ण सरकारी साधन हैं।
राज्य सरकार की प्रतिभूतियाँ
राज्य सरकारों द्वारा जारी प्रतिभूतियों को राज्य विकास ऋण कहा जाता है। ये राज्य सरकारों की उधारी से संबंधित ऋण साधन हैं।
सरकारी प्रतिभूतियों का महत्व
सरकारी प्रतिभूतियाँ वित्तीय बाजार में महत्वपूर्ण ऋण साधन हैं। इनका उपयोग निवेश, सरकारी उधारी और वित्तीय बाजार में सुरक्षित एवं संदर्भित निवेश साधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है।
SEBI का वैधानिक आधार
SEBI का वैधानिक ढाँचा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 से जुड़ा है। यह पूंजी बाजार के नियमन और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण संस्था है।
SEBI की प्रमुख भूमिका
SEBI की प्रमुख भूमिका प्रतिभूति बाजार को विनियमित करना, बाजार की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना तथा निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।
SEBI और प्रवर्तन
SEBI प्रतिभूति बाजार में नियमों के उल्लंघन, धोखाधड़ी और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई से जुड़ा है।
प्राथमिक और द्वितीयक बाजार का अंतर
प्राथमिक बाजार में नई प्रतिभूतियाँ जारी होती हैं और जारीकर्ता पूंजी जुटाता है, जबकि द्वितीयक बाजार में पहले से जारी प्रतिभूतियों का निवेशकों के बीच कारोबार होता है।
| बाजार | मुख्य गतिविधि | धन का प्रमुख प्राप्तकर्ता |
|---|---|---|
| प्राथमिक बाजार | नई प्रतिभूतियों का निर्गम | जारीकर्ता |
| द्वितीयक बाजार | पहले से जारी प्रतिभूतियों का कारोबार | विक्रेता |
| मुद्रा बाजार | अल्पकालिक वित्तीय साधनों का कारोबार | अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकता वाले पक्ष |
| पूंजी बाजार | मध्यम और दीर्घकालिक धन जुटाना | दीर्घकालिक धन की आवश्यकता वाले पक्ष |
प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम
प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ प्राथमिक बाजार से संबंधित है। इसमें कोई कंपनी अपनी प्रतिभूतियाँ पहली बार व्यापक सार्वजनिक निवेशकों के लिए जारी कर सकती है।
अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम और अधिकार निर्गम
अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम और अधिकार निर्गम भी प्राथमिक बाजार में प्रतिभूतियाँ जारी करने के तरीके हैं। इनके माध्यम से कंपनी अतिरिक्त पूंजी जुटा सकती है।
द्वितीयक बाजार में तरलता का अर्थ
द्वितीयक बाजार में तरलता का अर्थ है कि निवेशक किसी प्रतिभूति को उचित समय और अपेक्षाकृत कम लेन-देन लागत पर खरीद या बेच सके।
शेयर की कीमत को प्रभावित करने वाले कारक
शेयर की कीमत मांग और आपूर्ति, कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, भविष्य की आय की अपेक्षाओं, व्यापक आर्थिक परिस्थितियों और बाजार की धारणा जैसे कई कारकों से प्रभावित हो सकती है।
शेयर बाजार में अस्थिरता
शेयर बाजार में अस्थिरता से आशय कीमतों में समय के साथ होने वाले उतार-चढ़ाव की मात्रा से है। अधिक अस्थिरता का अर्थ कीमतों में अपेक्षाकृत अधिक परिवर्तन हो सकता है।
मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार का अंतर
मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार में प्रमुख अंतर वित्तीय साधनों की अवधि से जुड़ा है। मुद्रा बाजार अल्पकालिक साधनों पर केंद्रित होता है, जबकि पूंजी बाजार मध्यम और दीर्घकालिक वित्तीय संसाधनों से संबंधित होता है।
वित्तीय बाजार का मूल्य खोज कार्य
मूल्य खोज का अर्थ है कि वित्तीय परिसंपत्तियों की मांग और आपूर्ति तथा बाजार में उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनके कारोबार का मूल्य निर्धारित होने की प्रक्रिया।
वित्तीय बाजार में तरलता का लाभ
तरलता निवेशकों को वित्तीय परिसंपत्तियों को अपेक्षाकृत आसानी से नकद में बदलने का अवसर देती है। इससे निवेशकों की वित्तीय लचीलापन बढ़ता है।
वित्तीय बाजार के प्रतिभागी
वित्तीय बाजार में व्यक्तिगत निवेशक, संस्थागत निवेशक, कंपनियाँ, सरकारें, वित्तीय संस्थाएँ और अन्य बाजार प्रतिभागी शामिल हो सकते हैं।
अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकता
मुद्रा बाजार कार्यशील पूंजी, अस्थायी नकदी आवश्यकता और अन्य अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में सहायता करता है।
वाणिज्यिक पत्र का स्वरूप
वाणिज्यिक पत्र सामान्यतः अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकता पूरी करने वाला मुद्रा बाजार साधन है। इसे पात्र संस्थाओं द्वारा जारी किया जा सकता है।
जमा प्रमाणपत्र की श्रेणी
जमा प्रमाणपत्र मुद्रा बाजार में रखा जाने वाला अल्पकालिक वित्तीय साधन है। यह निश्चित अवधि की जमा राशि से संबंधित परक्राम्य साधन हो सकता है।
रेपो का संबंध
रेपो का संबंध प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक धन प्राप्त करने और बाद में निर्धारित शर्तों के अनुसार प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद करने वाले लेन-देन से है।
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति और मुद्रा बाजार
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति मुद्रा बाजार में ब्याज दरों और तरलता की परिस्थितियों को प्रभावित कर सकती है। नीति दरों तथा तरलता प्रबंधन में बदलाव से अल्पकालिक धन की लागत और उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
वित्तीय बाजार और संसाधनों का प्रवाह
वित्तीय बाजार बचतकर्ताओं से धन की आवश्यकता वाले पक्षों तक वित्तीय संसाधनों के प्रवाह को सुगम बनाता है। इससे बचत को उत्पादक निवेश में लगाने की प्रक्रिया को सहायता मिलती है।
वित्तीय बाजार और मूल्य निर्धारण
वित्तीय बाजार में मांग, आपूर्ति और उपलब्ध जानकारी के आधार पर वित्तीय परिसंपत्तियों के मूल्य निर्धारित होने में सहायता मिलती है। यही प्रक्रिया मूल्य खोज के रूप में जानी जाती है।
वित्तीय बाजार में जोखिम और प्रतिफल
अलग-अलग वित्तीय साधनों में जोखिम और संभावित प्रतिफल की प्रकृति अलग हो सकती है। निवेशक अपनी आवश्यकताओं और जोखिम वहन क्षमता के अनुसार वित्तीय परिसंपत्तियों का चयन कर सकते हैं।
वित्तीय बाजार और निवेश
वित्तीय बाजार निवेशकों को विभिन्न वित्तीय साधनों में निवेश का अवसर देता है। इसके माध्यम से बचत को कंपनियों, सरकारों और अन्य धन की आवश्यकता वाले पक्षों तक पहुँचाया जा सकता है।
वित्तीय बाजार और पूंजी निर्माण
पूंजी बाजार के माध्यम से दीर्घकालिक धन जुटाया जा सकता है, जिससे निवेश और पूंजी निर्माण की प्रक्रिया को सहायता मिलती है। कंपनियाँ शेयर और बांड जैसे साधनों के माध्यम से वित्तीय संसाधन जुटा सकती हैं।
प्राथमिक बाजार में पूंजी जुटाना
प्राथमिक बाजार में नई प्रतिभूतियों के निर्गम से जारीकर्ता को पूंजी प्राप्त होती है। इसलिए यह कंपनियों और अन्य पात्र संस्थाओं के लिए वित्त जुटाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
द्वितीयक बाजार और बाजार की निरंतरता
द्वितीयक बाजार पहले से जारी प्रतिभूतियों के लिए निरंतर खरीद-बिक्री की सुविधा उपलब्ध कराता है। इससे निवेशकों को अपने निवेश को आवश्यकतानुसार बदलने में सहायता मिलती है।
शेयर और स्वामित्व
शेयर किसी कंपनी में स्वामित्व हित का प्रतिनिधित्व करता है। शेयरधारक को कंपनी के प्रदर्शन और बाजार मूल्य में बदलाव के आधार पर लाभ या हानि हो सकती है।
बांड और ऋण संबंध
बांड ऋण प्रतिभूति है। बांड जारी करने वाला पक्ष निवेशकों से धन प्राप्त करता है और निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज तथा मूलधन के भुगतान का दायित्व लेता है।
निश्चित कूपन वाले बांड
निश्चित कूपन वाले बांड में निर्धारित ब्याज भुगतान होता है। बाजार ब्याज दरों में बदलाव होने पर ऐसे बांडों के बाजार मूल्य में विपरीत दिशा में परिवर्तन हो सकता है।
सरकारी उधारी और वित्तीय बाजार
सरकार वित्तीय बाजार के माध्यम से विभिन्न ऋण साधनों द्वारा धन जुटा सकती है। सरकारी प्रतिभूतियाँ सरकारी उधारी और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय साधन हैं।
मुद्रा बाजार में तरलता प्रबंधन
मुद्रा बाजार वित्तीय संस्थाओं और अन्य प्रतिभागियों को अल्पकालिक नकदी आवश्यकताओं तथा तरलता प्रबंधन में सहायता करता है।
मौद्रिक नीति का संचरण
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति में परिवर्तन अल्पकालिक ब्याज दरों, धन की उपलब्धता और मुद्रा बाजार की परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है। इससे व्यापक वित्तीय परिस्थितियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
वित्तीय बाजार की दक्षता
वित्तीय बाजार का कुशल संचालन संसाधनों के बेहतर आवंटन, मूल्य खोज और तरलता में सहायता करता है। पारदर्शिता और उचित नियमन बाजार की विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं।
वित्तीय बाजार में निवेशक संरक्षण
निवेशक संरक्षण का उद्देश्य बाजार में निष्पक्ष व्यवहार, पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन को बढ़ावा देना है। प्रतिभूति बाजार के नियमन में SEBI की महत्वपूर्ण भूमिका है।
| प्रमुख बाजार | मुख्य अवधि या साधन | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| मुद्रा बाजार | अल्पकालिक साधन | अल्पकालिक धन और तरलता प्रबंधन |
| पूंजी बाजार | मध्यम और दीर्घकालिक साधन | दीर्घकालिक वित्त जुटाना |
| प्राथमिक बाजार | नई प्रतिभूतियाँ | जारीकर्ता द्वारा पूंजी जुटाना |
| द्वितीयक बाजार | पहले से जारी प्रतिभूतियाँ | निवेशकों के बीच कारोबार और तरलता |
त्वरित पुनरावृत्ति: मुद्रा बाजार
मुद्रा बाजार — अल्पकालिक वित्तीय साधन; वाणिज्यिक पत्र — अल्पकालिक साधन; जमा प्रमाणपत्र — मुद्रा बाजार साधन; कॉल मनी — बहुत अल्पकालिक धन; रेपो — प्रतिभूतियों से जुड़ा अल्पकालिक लेन-देन।
त्वरित पुनरावृत्ति: पूंजी बाजार
पूंजी बाजार — मध्यम और दीर्घकालिक वित्त; प्राथमिक बाजार — नई प्रतिभूतियों का निर्गम; द्वितीयक बाजार — पहले से जारी प्रतिभूतियों का कारोबार; शेयर — स्वामित्व हित; बांड — ऋण प्रतिभूति।
त्वरित पुनरावृत्ति: सरकारी प्रतिभूतियाँ
ट्रेजरी बिल — केंद्र सरकार के अल्पकालिक उधारी साधन; राज्य विकास ऋण — राज्य सरकारों की प्रतिभूतियाँ; सरकारी प्रतिभूतियाँ — सरकार द्वारा जारी ऋण साधन।
त्वरित पुनरावृत्ति: नियमन
SEBI — प्रतिभूति बाजार का नियमन और निवेशक संरक्षण; प्राथमिक बाजार — पूंजी जुटाना; द्वितीयक बाजार — तरलता और कारोबार।
वित्तीय बाजार का समग्र महत्व
वित्तीय बाजार बचत, निवेश, पूंजी निर्माण, तरलता और मूल्य खोज को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था है। मुद्रा बाजार अल्पकालिक आवश्यकताओं पर और पूंजी बाजार मध्यम तथा दीर्घकालिक वित्तीय आवश्यकताओं पर केंद्रित रहता है।
वित्तीय बाजार की अवधारणा
वित्तीय बाजार वह व्यवस्था है जहाँ बचतकर्ताओं और निवेशकर्ताओं के बीच वित्तीय संसाधनों का प्रवाह होता है। इसमें मुद्रा, प्रतिभूतियों और अन्य वित्तीय साधनों की खरीद-बिक्री तथा पूंजी के आवंटन की प्रक्रिया शामिल होती है।
बॉन्ड बाजार
बॉन्ड बाजार में सरकार, कंपनियाँ और अन्य संस्थाएँ ऋण जुटाने के लिए बांड जारी करती हैं। निवेशक इन प्रतिभूतियों को खरीदकर ब्याज आय प्राप्त कर सकते हैं। यह बाजार दीर्घकालीन वित्त जुटाने और निवेश के लिए महत्वपूर्ण है।
SEBI की भूमिका
SEBI भारतीय प्रतिभूति बाजार का प्रमुख नियामक है। इसका उद्देश्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना, प्रतिभूति बाजार का विकास करना और बाजार की निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बनाए रखना है।
वित्तीय बाजार के मूल तथ्य
वित्तीय बाजार से जुड़े मूल तथ्यों में मुद्रा बाजार, पूंजी बाजार, प्राथमिक बाजार, द्वितीयक बाजार, शेयर, बांड, सरकारी प्रतिभूतियाँ और बाजार नियमन जैसे विषय शामिल हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इनकी परिभाषा और अंतर विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
वित्तीय बाजार के विस्तृत पहलू
त्वरित पुनरावृत्ति
| वित्तीय बाजार का भाग | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| मुद्रा बाजार | अल्पकालीन धन और वित्तीय साधनों से संबंधित |
| पूंजी बाजार | मध्यम और दीर्घकालीन वित्त से संबंधित |
| प्राथमिक बाजार | नई प्रतिभूतियों के निर्गम से संबंधित |
| द्वितीयक बाजार | पहले से जारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री |
| मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स | Treasury Bills, Commercial Paper और Certificate of Deposit जैसे साधन |
परीक्षा से पहले मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार, प्राथमिक और द्वितीयक बाजार, तथा प्रमुख मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स के बीच अंतर का पुनरावलोकन करें।
समग्र महत्त्व
वित्तीय बाजार अर्थव्यवस्था में बचत को निवेश में बदलने, संसाधनों के कुशल आवंटन, तरलता उपलब्ध कराने और सरकार तथा कंपनियों के लिए वित्त जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में वित्तीय बाजार की संरचना, उसके विभिन्न खंड, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, डेरिवेटिव, म्यूचुअल फंड और नियामक संस्थाओं से जुड़े प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसलिए अवधारणाओं के साथ प्रमुख साधनों की विशेषताओं को याद रखना आवश्यक है।