भारत के 4 जैव विविधता हॉटस्पॉट - संरक्षण और खतरे | Environment Quiz

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भारत के 4 जैव विविधता हॉटस्पॉट - संरक्षण और खतरे | Environment Quiz - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

भारत के 4 हॉटस्पॉट, उनके जीव, खतरे और संरक्षण पर 50 MCQs। हिंदी में Quiz खेलें।

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भारत के 4 हॉटस्पॉट भारत में 4 जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं जो विश्व के 36 हॉटस्पॉट में से हैं। भारत में 4 हॉटस्पॉट - 1. हिमालय हॉटस्पॉट 750000 वर्ग किमी जिसमें पश्चिमी हिमालय 500000 और पूर्वी हिमालय 250000 वर्ग किमी है और भारत में जम्मू कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। 2. पश्चिमी घाट और श्रीलंका हॉटस्पॉट 190000 वर्ग किमी जिसमें पश्चिमी घाट 160000 और श्रीलंका 30000 वर्ग किमी है और भारत में महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु शामिल हैं। 3. इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट 2373000 वर्ग किमी जिसमें भारत के 7 पूर्वोत्तर राज्य असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल का हिस्सा और म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, वियतनाम, कंबोडिया, चीन का दक्षिणी हिस्सा शामिल है। 4. सुंडालैंड हॉटस्पॉट 1500000 वर्ग किमी जिसमें भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह 572 द्वीप और इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रुनेई शामिल हैं। भारत के 4 हॉटस्पॉट में 2.4% विश्व भूमि पर 8% जैव विविधता है और 18000 फूल, 500 स्तनधारी, 1300 पक्षी हैं। भारत में 4 हॉटस्पॉट में 50% पौधे स्थानिक हैं। भारत में 2011 में सुंडालैंड को चौथा हॉटस्पॉट जोड़ा गया था इससे पहले 3 हॉटस्पॉट थे। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट विश्व का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट है जो 2373000 वर्ग किमी पर है और 7000 स्थानिक पौधे, 73 स्थानिक स्तनधारी, 64 स्थानिक पक्षी, 204 स्थानिक सरीसृप और 154 स्थानिक उभयचर हैं। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में भारत में 7 पूर्वोत्तर राज्य 255000 वर्ग किमी पर हैं जिसमें असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और अरुणाचल का दक्षिणी हिस्सा शामिल है। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में 1300 पक्षी, 500 स्तनधारी और 1200 फूल भारत में हैं। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में प्रसिद्ध प्रजातियां - एक सींग वाला गैंडा काजीरंगा 2613, एशियाई हाथी 27000, बाघ 500, गिब्बन भारत का एकमात्र वानर और गोल्डन लंगूर। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में 95% आवास नष्ट हुआ है और केवल 118000 वर्ग किमी यानी 5% ही बचा है। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में सबसे अधिक खतरा स्थानांतरण खेती झूम खेती से है जिससे हर साल 10000 हेक्टेयर वन नष्ट होता है। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में 2004 में कंचनजंगा और 2013 में ग्रेट निकोबार को बायोस्फीयर घोषित किया गया था। इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट में भारत में 30 राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य हैं। सुंडालैंड हॉटस्पॉट सुंडालैंड हॉटस्पॉट 1500000 वर्ग किमी पर है और विश्व में सबसे अधिक 15000 स्थानिक पौधे हैं जो विश्व में सबसे अधिक हैं। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में 59 स्थानिक स्तनधारी, 153 स्थानिक पक्षी, 210 स्थानिक सरीसृप और 210 स्थानिक उभयचर हैं। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में भारत में अंडमान निकोबार द्वीप समूह 572 द्वीप 8249 वर्ग किमी पर हैं जिसमें अंडमान 6408 और निकोबार 1841 वर्ग किमी है। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में भारत में 2200 फूल, 100 स्तनधारी, 300 पक्षी, 100 सरीसृप हैं जिसमें 50% स्थानिक हैं। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में प्रसिद्ध प्रजातियां - ओरंगुटान, सुमात्रा गैंडा, जावा गैंडा, निकोबार मेगापोड और अंडमान जंगली सूअर। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में 92% आवास नष्ट हुआ है और केवल 120000 वर्ग किमी यानी 8% ही बचा है। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में भारत में सबसे अधिक खतरा समुद्र स्तर वृद्धि से है जो 3.2 मिमी साल बढ़ रहा है और 2004 सुनामी में 30% मैंग्रोव नष्ट हुए थे। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में भारत में 2013 में ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर यूनेस्को में शामिल हुआ था। सुंडालैंड हॉटस्पॉट में भारत में 9 राष्ट्रीय उद्यान और 96 अभयारण्य हैं। हॉटस्पॉट में खतरे हॉटस्पॉट में 5 मुख्य खतरे हैं - 1. आवास हानि - हिमालय में 70%, पश्चिमी घाट में 90%, इंडो-बर्मा में 95% और सुंडालैंड में 92% आवास नष्ट हुआ है। भारत में 1970 से 2020 तक 30% वन घटे हैं और हर साल 10000 हेक्टेयर वन कृषि के लिए कटता है। 2. जलवायु परिवर्तन - हिमालय में तापमान 0.6 डिग्री 10 साल में बढ़ रहा है और 1 डिग्री बढ़ने से 100 मीटर ऊंचाई पर प्रजाति विस्थापित होती है, 2030 तक हिम तेंदुआ 30% आवास खो देगा। 3. मानव जनसंख्या - पश्चिमी घाट में 50 मिलियन, हिमालय में 50 मिलियन और इंडो-बर्मा में 300 मिलियन लोग रहते हैं। 4. अवैध शिकार और व्यापार - CITES के अनुसार 1 अरब डॉलर का व्यापार हर साल, बाघ की खाल 20000 डॉलर, गैंडा सींग 60000 डॉलर किलो। 5. आक्रामक प्रजाति - लैंटाना पश्चिमी घाट में 40% क्षेत्र में फैला है, वाटर हाइसिंथ और पार्थेनियम। हॉटस्पॉट में खतरे में 2020 में अम्फान साइक्लोन से सुंदरबन में 30% मैंग्रोव नष्ट हुए थे। हॉटस्पॉट में खतरे में 2023 में जोशीमठ हिमालय में 700 घर दरके थे। हॉटस्पॉट संरक्षण हॉटस्पॉट संरक्षण के 6 उपाय हैं - 1. संरक्षित क्षेत्र - भारत में हॉटस्पॉट में 150 राष्ट्रीय उद्यान, 500 अभयारण्य, 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं। 2. जैव विविधता अधिनियम 2002 और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण NBA 2003 चेन्नई में बना है। 3. प्रोजेक्ट टाइगर 1973, प्रोजेक्ट एलीफेंट 1992, प्रोजेक्ट राइनो 1987 और प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड 2009। 4. यूनेस्को MAB कार्यक्रम 1971 में भारत में 12 बायोस्फीयर यूनेस्को में हैं। 5. इको सेंसिटिव जोन ESZ - पश्चिमी घाट में 60000 वर्ग किमी ESZ घोषित है। 6. स्थानीय समुदाय - टोडा, कोटा, कुरुंबा, बिश्नोई और जेंटिया समुदाय संरक्षण करते हैं। हॉटस्पॉट संरक्षण में भारत में 2022 में कुनमिंग मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क में 30% भूमि 2030 तक संरक्षण का लक्ष्य है। हॉटस्पॉट संरक्षण में 1 डॉलर खर्च पर 100 डॉलर लाभ मिलता है। भारत में हॉटस्पॉट संरक्षण में 2023 में 20% पर्यावरण बजट हॉटस्पॉट में जाता है। गाडगिल समिति गाडगिल समिति का पूरा नाम पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल WGEEP है जो 2010 में पर्यावरण मंत्रालय ने माधव गाडगिल की अध्यक्षता में बनाई थी। गाडगिल समिति में 14 सदस्य थे और रिपोर्ट 31 अगस्त 2011 को 522 पृष्ठों में आई थी। गाडगिल समिति ने पश्चिमी घाट को 3 जोन में बांटा था - ESZ1 60000 वर्ग किमी सबसे संवेदनशील कोई नया उद्योग नहीं, ESZ2 10000 वर्ग किमी मध्यम संवेदनशील और ESZ3 16000 वर्ग किमी कम संवेदनशील। गाडगिल समिति ने पूरे पश्चिमी घाट को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने, कोई नया बांध, खनन, उद्योग, SEZ नहीं और 50% क्षेत्र में जैविक खेती की सिफारिश की थी। गाडगिल समिति ने 160000 वर्ग किमी पश्चिमी घाट में 137 तालुक 6 राज्यों में शामिल किए थे। गाडगिल समिति की रिपोर्ट को 6 राज्यों महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात ने विरोध किया था और कहा था कि विकास रुकेगा। गाडगिल समिति को 2012 में सरकार ने खारिज कर दिया था। कस्तूरीरंगन समिति कस्तूरीरंगन समिति 2012 में गाडगिल रिपोर्ट की समीक्षा के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में बनाई थी और 10 सदस्य थे। कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट अप्रैल 2013 में आई थी और 175 पृष्ठों की थी। कस्तूरीरंगन समिति ने पश्चिमी घाट के 60% यानी 60000 वर्ग किमी को सांस्कृतिक परिदृश्य और 40% यानी 60000 वर्ग किमी को प्राकृतिक परिदृश्य बताया था। कस्तूरीरंगन समिति ने 60000 वर्ग किमी में से 37% यानी 59940 वर्ग किमी को इको सेंसिटिव एरिया ESA घोषित करने की सिफारिश की थी। कस्तूरीरंगन समिति ने ESA में खनन, उत्खनन, रेत खनन, थर्मल पावर, बड़ी इमारत 20000 वर्ग मीटर से अधिक और उद्योग पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी लेकिन बांध और कृषि की अनुमति दी थी। कस्तूरीरंगन समिति ने गाडगिल से कम सख्त रिपोर्ट दी थी। कस्तूरीरंगन समिति को 2014 में सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दी थी और 2018 में मसौदा अधिसूचना जारी की थी। कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट को भी केरल में 2013 में 100000 किसानों ने विरोध किया था। कस्तूरीरंगन समिति में 6 राज्य शामिल हैं और महाराष्ट्र में सबसे अधिक 17000 वर्ग किमी ESA है।

⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु

  • ✅ भारत में 4 हॉटस्पॉट हैं - हिमालय 3000 किमी और पश्चिमी घाट 1600 किमी लंबे हैं।
  • ✅ हिमालय में 10000 पौधे और 3160 स्थानिक, हिम तेंदुआ और लाल पांडा प्रमुख जीव हैं।
  • ✅ पश्चिमी घाट में 5000 पौधे, 1500 स्थानिक, शेर-पूंछ मकाक और नीलगिरि तहर स्थानिक जीव हैं।
  • ✅ इंडो-बर्मा में पूर्वोत्तर के 8 राज्य, एक सींग वाला गैंडा और हूलॉक गिब्बन मिलते हैं।
  • ✅ सुंडालैंड में निकोबार द्वीप, 25000 पौधे और निकोबारी कबूतर, 2004 सुनामी से प्रभावित।
  • ✅ हॉटस्पॉट के खतरे - खनन, बागान, झूम खेती, जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण।
  • ✅ संरक्षण के लिए जैव विविधता अधिनियम 2002, गाडगिल और कस्तूरीरंगन कमेटी की सिफारिशें।

📊 Important Facts Table

TopicFact
भारत में 4 हॉटस्पॉट का विस्तारहिमालय 3000 किमी, पश्चिमी घाट 1600 किमी, इंडो-बर्मा और सुंडालैंड
हिमालय हॉटस्पॉट के जीवहिम तेंदुआ, लाल पांडा, मोनाल, कस्तूरी मृग, 10000 पौधे, 3160 स्थानिक
पश्चिमी घाट के स्थानिक जीवशेर-पूंछ मकाक, नीलगिरि तहर, मालाबार सिवेट, 5000 पौधे, 1500 स्थानिक
इंडो-बर्मा हॉटस्पॉटपूर्वोत्तर भारत के 8 राज्य, 13000 पौधे, एक सींग वाला गैंडा, हूलॉक गिब्बन
सुंडालैंड में भारत का हिस्सानिकोबार द्वीप, 25000 पौधे, निकोबारी कबूतर, 2004 सुनामी से नुकसान
पश्चिमी घाट के खतरेखनन, चाय-कॉफी बागान, बांध, शहरीकरण, गाडगिल और कस्तूरीरंगन कमेटी
हिमालय के खतरेजलवायु परिवर्तन, सड़क निर्माण, पर्यटन, वनों की कटाई
इंडो-बर्मा के खतरेझूम खेती, कोयला खनन, तेल शोधन, अवैध शिकार, सबसे तेजी से वन नष्ट
संरक्षण कानूनजैव विविधता अधिनियम 2002, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
संरक्षित क्षेत्र पश्चिमी घाट मेंसाइलेंट वैली, पेरियार, अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व