जैव विविधता हॉटस्पॉट, खतरे और विलुप्ति | Environment Quiz
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जैव विविधता हॉटस्पॉट, खतरे, विलुप्ति और संरक्षण पर आधारित 50 MCQs। हिंदी में Quiz खेलें।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
जैव विविधता के पिछले भाग में हमने जैव विविधता की परिभाषा, प्रकार और महत्व को समझा था। इस भाग में हम जैव विविधता हॉटस्पॉट, जैव विविधता को खतरे, विलुप्ति और उसके पैटर्न को विस्तार से समझेंगे जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और UPSC Prelims में हर साल 2 से 3 प्रश्न यहीं से पूछे जाते हैं।
जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspot) की अवधारणा सबसे पहले 1988 में नॉर्मन मायर्स ने दी थी और बाद में कंजर्वेशन इंटरनेशनल ने इसे आगे बढ़ाया। हॉटस्पॉट वह क्षेत्र होता है जहाँ जैव विविधता बहुत अधिक होती है लेकिन खतरा भी बहुत अधिक होता है और संरक्षण की तत्काल आवश्यकता होती है। हॉटस्पॉट घोषित करने के दो कठोर मापदंड हैं - 1) वहाँ कम से कम 1500 स्थानिक संवहनी पौधों की प्रजातियाँ होनी चाहिए जो दुनिया में कहीं और न पाई जाती हों और 2) वहाँ की 70 प्रतिशत से अधिक मूल वनस्पति नष्ट हो चुकी हो। वर्तमान में विश्व में 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं जो पृथ्वी के केवल 2.4 प्रतिशत क्षेत्र पर फैले हैं लेकिन विश्व की 60 प्रतिशत पौधों और जानवरों की प्रजातियाँ यहीं पाई जाती हैं। भारत में 4 हॉटस्पॉट पाए जाते हैं - हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट और श्रीलंका, और सुंडालैंड जिसमें निकोबार द्वीप समूह आता है। इनमें से हिमालय और पश्चिमी घाट पूरी तरह से भारत में स्थित हैं जबकि अन्य दो आंशिक रूप से हैं। पश्चिमी घाट में 5000 से अधिक फूलों के पौधे हैं जिनमें 1500 से अधिक स्थानिक हैं और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है। हॉटस्पॉट का संरक्षण इसलिए आवश्यक है क्योंकि यहाँ एक बार प्रजाति नष्ट हुई तो वह पूरी दुनिया से विलुप्त हो जाएगी।
जैव विविधता को खतरे (Threats to Biodiversity) को HIPPO और Evil Quartet शब्द से याद रखा जाता है जिसे जेरेड डायमंड ने दिया था - H-Habitat Loss, I-Invasive Species, P-Pollution, P-Population, O-Overexploitation। आवास विनाश सबसे बड़ा खतरा है, जैसे वनों की कटाई, कृषि विस्तार और शहरीकरण से अमेजन वर्षावन तेजी से नष्ट हो रहा है और हर साल 1.5 करोड़ हेक्टेयर वन नष्ट हो रहे हैं। भारत में भी जंगल कृषि, बांध और सड़कों के लिए काटे जा रहे हैं जिससे बाघ और हाथियों का आवास सिकुड़ रहा है। विदेशी आक्रामक प्रजातियाँ जैसे जलकुंभी, लैंटाना कैमारा, पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस, नील पर्च मछली और अफ्रीकी कैटफिश देशी प्रजातियों को नष्ट कर रही हैं और भोजन तथा आवास में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। प्रदूषण जैसे प्लास्टिक प्रदूषण से समुद्री कछुए, कीटनाशक DDT से गिद्ध, जल प्रदूषण से मछलियाँ और वायु प्रदूषण से लाइकेन नष्ट हो रहे हैं। जनसंख्या वृद्धि से संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और अति शोषण जैसे बाघ का शिकार खाल के लिए, हाथी का शिकार दांत के लिए, गैंडे का शिकार सींग के लिए और औषधीय पौधों का अवैध व्यापार बड़े खतरे हैं।
विलुप्ति (Extinction) तीन प्रकार की होती है - प्राकृतिक विलुप्ति जो विकास का हिस्सा है, सामूहिक विलुप्ति और मानव जनित विलुप्ति। पृथ्वी पर अब तक 5 सामूहिक विलुप्ति हो चुकी हैं जिनमें सबसे बड़ी पर्मियन-ट्रायसिक विलुप्ति थी 25 करोड़ साल पहले जिसमें 90 प्रतिशत प्रजातियाँ नष्ट हो गई थीं और सबसे प्रसिद्ध क्रिटेशियस विलुप्ति थी 6.5 करोड़ साल पहले जिसमें डायनासोर नष्ट हुए थे। वर्तमान में छठी सामूहिक विलुप्ति चल रही है जो मानव गतिविधियों के कारण हो रही है और इसकी दर प्राकृतिक दर से 100 से 1000 गुना अधिक तेज है। इसे Anthropocene विलुप्ति भी कहते हैं। विलुप्ति को IUCN रेड लिस्ट द्वारा श्रेणियों में बांटा गया है - विलुप्त, जंगल में विलुप्त, गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त, सुभेद्य, निकट संकट और कम चिंताजनक। भारत में चीता 1952 में विलुप्त हो गया था जिसे 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुनो नेशनल पार्क में फिर लाया गया है। डोडो पक्षी, पैसेंजर कबूतर, तस्मानियाई बाघ मानव जनित विलुप्ति के प्रमुख उदाहरण हैं।
जैव विविधता के पैटर्न में अक्षांशीय प्रवणता (Latitudinal Gradient) और प्रजाति-क्षेत्र संबंध महत्वपूर्ण हैं। अक्षांशीय प्रवणता का अर्थ है भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर जैव विविधता घटती है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सबसे अधिक विविधता होती है क्योंकि वहाँ अधिक सूर्य प्रकाश, स्थिर जलवायु, अधिक वर्षा और अधिक उत्पादकता होती है। प्रजाति-क्षेत्र संबंध (Species-Area Relationship) अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट ने दिया था - क्षेत्र बढ़ने पर प्रजातियों की संख्या बढ़ती है लेकिन एक सीमा तक, समीकरण log S = log C + Z log A जहाँ Z का मान 0.1 से 0.2 होता है। जैव विविधता को बचाने के लिए स्व-स्थाने संरक्षण जैसे राष्ट्रीय उद्यान और बाह्य-स्थाने संरक्षण जैसे चिड़ियाघर आवश्यक है जिसे अगले अध्याय में विस्तार से पढ़ेंगे। यह टॉपिक UPSC Prelims, Mains, State PSC और NEET सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ हॉटस्पॉट की अवधारणा नॉर्मन मायर्स ने 1988 में दी, विश्व में 36 हॉटस्पॉट हैं जो 2.4% क्षेत्र पर 60% प्रजातियों को रखते हैं।
- ✅ भारत में 4 हॉटस्पॉट हैं - हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट और सुंडालैंड, हिमालय और पश्चिमी घाट पूरी तरह भारत में।
- ✅ HIPPO और Evil Quartet जैव विविधता के खतरे हैं - आवास विनाश सबसे बड़ा खतरा है।
- ✅ अब तक 5 सामूहिक विलुप्ति हो चुकी हैं, छठी मानव जनित विलुप्ति चल रही है जो 100-1000 गुना तेज है।
- ✅ अक्षांशीय प्रवणता - भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जैव विविधता घटती है, उष्णकटिबंध में सर्वाधिक होती है।
- ✅ प्रजाति-क्षेत्र संबंध हम्बोल्ट ने दिया - log S = log C + Z log A, भारत में चीता 1952 में विलुप्त हुआ था।
- ✅ IUCN रेड लिस्ट में विलुप्त से लेकर कम चिंताजनक तक 7 श्रेणियाँ हैं, संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| हॉटस्पॉट की अवधारणा किसने दी | नॉर्मन मायर्स ने 1988 में दी, 2 मापदंड - 1500 स्थानिक पौधे और 70% वनस्पति नष्ट |
| विश्व में हॉटस्पॉट की संख्या | 36 हॉटस्पॉट, पृथ्वी के 2.4% क्षेत्र पर 60% प्रजातियाँ, कंजर्वेशन इंटरनेशनल द्वारा मान्यता |
| भारत में हॉटस्पॉट | 4 हॉटस्पॉट - हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट-श्रीलंका, सुंडालैंड (निकोबार द्वीप) |
| जैव विविधता को खतरा HIPPO | H-Habitat Loss, I-Invasive Species, P-Pollution, P-Population, O-Overexploitation, Evil Quartet |
| सबसे बड़ा खतरा | आवास विनाश (Habitat Loss) सबसे बड़ा खतरा, हर साल 1.5 करोड़ हेक्टेयर वन नष्ट |
| विदेशी आक्रामक प्रजातियाँ भारत में | जलकुंभी, लैंटाना, पार्थेनियम, नील पर्च, अफ्रीकी कैटफिश |
| सामूहिक विलुप्ति कितनी हुई | अब तक 5 सामूहिक विलुप्ति, छठी मानव जनित Anthropocene विलुप्ति चल रही है |
| सबसे बड़ी विलुप्ति | पर्मियन-ट्रायसिक विलुप्ति, 25 करोड़ साल पहले, 90% प्रजातियाँ नष्ट |
| अक्षांशीय प्रवणता | भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जैव विविधता घटती है, उष्णकटिबंध में सर्वाधिक |
| प्रजाति-क्षेत्र संबंध किसने दिया | अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट ने, log S = log C + Z log A, Z=0.1-0.2 |