बायोस्फीयर रिजर्व की परिभाषा, उद्देश्य और जोन | Environment Quiz

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बायोस्फीयर रिजर्व की परिभाषा, उद्देश्य और जोन | Environment Quiz - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

बायोस्फीयर रिजर्व की परिभाषा, उद्देश्य और जोन पर 50 MCQs। हिंदी में Quiz खेलें।

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💡 व्याख्या

📚 विस्तृत जानकारी

बायोस्फीयर रिजर्व की परिभाषा बायोस्फीयर रिजर्व एक विशेष प्रकार का संरक्षित क्षेत्र है जो स्थलीय, समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करता है और सतत विकास को बढ़ावा देता है। बायोस्फीयर रिजर्व की परिभाषा यूनेस्को MAB कार्यक्रम 1971 में दी गई थी - जैव विविधता संरक्षण, सतत विकास और अनुसंधान व शिक्षा के तीन कार्य। बायोस्फीयर रिजर्व राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य से बड़ा होता है और मानव आबादी भी रहती है। बायोस्फीयर रिजर्व का उद्देश्य जैव विविधता बचाना, स्थानीय लोगों को रोजगार देना और जलवायु परिवर्तन पर अनुसंधान करना है। बायोस्फीयर रिजर्व में 3 जोन होते हैं - कोर, बफर और ट्रांजिशन। बायोस्फीयर रिजर्व में भारत में 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं और विश्व में 748 बायोस्फीयर रिजर्व 134 देशों में हैं। बायोस्फीयर रिजर्व में भारत में 12 बायोस्फीयर रिजर्व यूनेस्को सूची में हैं। बायोस्फीयर रिजर्व की अवधारणा 1968 में यूनेस्को सम्मेलन में आई थी। संरचना बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में 3 जोन होते हैं जो संकेंद्रित वृत्त की तरह होते हैं। बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में सबसे अंदर कोर जोन, उसके बाहर बफर जोन और सबसे बाहर ट्रांजिशन जोन होता है। बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में कोर जोन 10% से 20% क्षेत्र होता है और पूरी तरह संरक्षित होता है। बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में बफर जोन 20% से 30% होता है और अनुसंधान व शिक्षा के लिए होता है। बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में ट्रांजिशन जोन 50% से 70% होता है और मानव बस्ती, कृषि और पर्यटन के लिए होता है। बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में कानूनी संरक्षण कोर में सबसे अधिक और ट्रांजिशन में सबसे कम होता है। बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, वन अधिनियम 1927 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 लागू होते हैं। बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना में प्रबंधन केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करती है। कोर बफर ट्रांजिशन जोन कोर जोन बायोस्फीयर रिजर्व का हृदय है जो पूरी तरह संरक्षित और मानव रहित होता है। कोर जोन में कोई मानवीय गतिविधि नहीं होती है और केवल वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुमति होती है। कोर जोन में भारत में राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य होते हैं जैसे नीलगिरि में 6 राष्ट्रीय उद्यान। कोर जोन का क्षेत्र भारत में नीलगिरि में 1240 वर्ग किमी, सुंदरबन में 1699 वर्ग किमी है। बफर जोन कोर के चारों ओर होता है जिसमें सीमित मानवीय गतिविधि, अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण होता है। बफर जोन में स्थानीय लोगों को वन उत्पाद, मछली पकड़ना और इको टूरिज्म की अनुमति होती है। बफर जोन में भारत में आरक्षित वन होते हैं। ट्रांजिशन जोन सबसे बाहर और सबसे बड़ा जोन है जिसमें मानव बस्ती, कृषि, गांव और शहर होते हैं। ट्रांजिशन जोन में 50% से 70% क्षेत्र और 90% आबादी रहती है। ट्रांजिशन जोन में सतत विकास, कृषि वानिकी और पर्यटन होता है। ट्रांजिशन जोन में भारत में नीलगिरि में 10 लाख लोग रहते हैं। कोर बफर ट्रांजिशन का अनुपात 20:30:50 होता है। यूनेस्को MAB कार्यक्रम यूनेस्को MAB का पूरा नाम मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम है जो 1971 में यूनेस्को द्वारा शुरू किया गया था। MAB कार्यक्रम का उद्देश्य मानव और पर्यावरण के बीच संबंध सुधारना है। MAB कार्यक्रम में 1976 में पहला बायोस्फीयर रिजर्व बना था। MAB कार्यक्रम में 2024 तक 748 बायोस्फीयर रिजर्व 134 देशों में हैं। MAB कार्यक्रम में हर साल नए बायोस्फीयर रिजर्व जोड़े जाते हैं। MAB कार्यक्रम में भारत में 2000 में नीलगिरि पहला यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व बना था। MAB कार्यक्रम में भारत में 12 बायोस्फीयर रिजर्व यूनेस्को सूची में हैं - नीलगिरि 2000, मन्नार की खाड़ी 2001, सुंदरबन 2001, नंदा देवी 2004, नोकरेक 2009, पंचमढ़ी 2009, सिमलीपाल 2009, अचानकमार-अमरकंटक 2012, ग्रेट निकोबार 2013, अगस्त्यमलाई 2016, कंचनजंगा 2018 और पन्ना 2020। MAB कार्यक्रम में 10 साल में समीक्षा होती है और खराब प्रबंधन पर सूची से हटाया जाता है। MAB कार्यक्रम में 3 कार्य - संरक्षण, विकास और लॉजिस्टिक समर्थन। MAB कार्यक्रम का मुख्यालय पेरिस में है। भारत में बायोस्फीयर रिजर्व भारत में 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं जो 91600 वर्ग किमी पर हैं। भारत में पहला बायोस्फीयर रिजर्व नीलगिरि 1986 में बना था। भारत में सबसे बड़ा बायोस्फीयर रिजर्व मन्नार की खाड़ी 10500 वर्ग किमी और कच्छ 12454 वर्ग किमी है। भारत में सबसे छोटा डिब्रू सैखोवा 765 वर्ग किमी है। भारत में 18 बायोस्फीयर रिजर्व - नीलगिरि 5520 वर्ग किमी तमिलनाडु केरल कर्नाटक, मन्नार की खाड़ी 10500 तमिलनाडु, सुंदरबन 9630 पश्चिम बंगाल, नंदा देवी 6407 उत्तराखंड, नोकरेक 820 मेघालय, पंचमढ़ी 4926 मध्य प्रदेश, सिमलीपाल 5569 ओडिशा, अचानकमार-अमरकंटक 3835 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़, ग्रेट निकोबार 885 अंडमान, अगस्त्यमलाई 3500 केरल तमिलनाडु, कंचनजंगा 2619 सिक्किम, पन्ना 2998 मध्य प्रदेश, कच्छ 12454 गुजरात, शीत मरुस्थल 7770 हिमाचल, सेशाचलम 4755 आंध्र, डिब्रू सैखोवा 765 असम, देहांग देबांग 5112 अरुणाचल। भारत में 12 यूनेस्को में हैं। भारत में बायोस्फीयर रिजर्व का प्रबंधन पर्यावरण मंत्रालय 1986 से करता है। नीलगिरि बायोस्फीयर नीलगिरि बायोस्फीयर भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व है जो 1 सितंबर 1986 को बना था और 5520 वर्ग किमी पर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में है। नीलगिरि बायोस्फीयर 2000 में यूनेस्को सूची में पहला भारतीय बायोस्फीयर बना था। नीलगिरि में 6 राष्ट्रीय उद्यान - बांदीपुर, नागरहोल, मुदुमलाई, मुकुर्थी, साइलेंट वैली और वायनाड और 3 अभयारण्य हैं। नीलगिरि में कोर जोन 1240 वर्ग किमी, बफर 3238 और ट्रांजिशन 1042 वर्ग किमी है। नीलगिरि में 3500 फूल, 100 स्तनधारी, 350 पक्षी, 80 सरीसृप और 39 मछली प्रजाति हैं। नीलगिरि में नीलगिरि तहर, शेर पूंछ वाला बंदर और नीलकुरिंजी फूल प्रसिद्ध हैं जो 12 साल में एक बार खिलता है 2018 में खिला था। नीलगिरि में 10 लाख लोग रहते हैं जिसमें टोडा, कोटा और कुरुंबा आदिवासी हैं। नीलगिरि की सबसे ऊंची चोटी डोड्डाबेट्टा 2637 मीटर है। नीलगिरि में यूनेस्को ने 2000 में मान्यता दी थी। सुंदरबन बायोस्फीयर सुंदरबन बायोस्फीयर पश्चिम बंगाल में 9630 वर्ग किमी पर है और 1989 में बना था। सुंदरबन 2001 में यूनेस्को सूची में आया था। सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन और डेल्टा है जो गंगा ब्रह्मपुत्र मेघना पर है। सुंदरबन में कोर जोन 1699 वर्ग किमी, बफर 2233 और ट्रांजिशन 5698 वर्ग किमी है। सुंदरबन में 105 रॉयल बंगाल टाइगर 2022 में हैं जो खारे पानी में तैर सकते हैं। सुंदरबन में 334 पौधे, 49 स्तनधारी, 320 पक्षी, 400 मछली और 8 किंगफिशर प्रजाति हैं। सुंदरबन में सुंदरी पेड़ प्रसिद्ध है जिससे नाम पड़ा है। सुंदरबन में 44 लाख लोग रहते हैं। सुंदरबन 1987 में विश्व धरोहर बना था। सुंदरबन में जलवायु परिवर्तन से समुद्र स्तर 3 मिमी साल बढ़ रहा है और 10% क्षेत्र 2000 से डूबा है। सुंदरबन में साइक्लोन अम्फान 2020 में आया था। सुंदरबन भारत और बांग्लादेश दोनों में है और कुल 10000 वर्ग किमी है।

⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु

  • ✅ बायोस्फीयर रिजर्व - यूनेस्को MAB 1971, भारत में 1986, पहला नीलगिरि 1986।
  • ✅ राष्ट्रीय उद्यान से अलग - उद्यान में सभी गतिविधि बंद, बायोस्फीयर में संरक्षण विकास अनुसंधान तीनों।
  • ✅ 18 रिजर्व भारत में, 12 यूनेस्को WNBR में, अलग से घोषित।
  • ✅ तीन उद्देश्य - संरक्षण, विकास, अनुसंधान, हर 10 साल समीक्षा।
  • ✅ कोर जोन 15-20 प्रतिशत कोई गतिविधि नहीं, बफर 30-40 प्रतिशत सीमित गतिविधि।
  • ✅ ट्रांजिशन जोन सबसे बाहर 40-60 प्रतिशत सभी गतिविधि सतत विकास।
  • ✅ प्रमुख - नीलगिरि, नंदा देवी, सुंदरवन, मन्नार खाड़ी, कंचनजंघा, पन्ना।

📊 Important Facts Table

TopicFact
परिभाषा और शुरुआतयूनेस्को MAB 1971 में, पहला रिजर्व 1976 में, भारत में 1986 में, पहला नीलगिरि 1986
यूनेस्को परिभाषास्थलीय समुद्री तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, संरक्षण और सतत उपयोग में सामंजस्य
भारत में स्थिति18 रिजर्व 1.5 लाख वर्ग किमी, 12 यूनेस्को WNBR में, अलग से घोषित
तीन उद्देश्यसंरक्षण, विकास, अनुसंधान - तीनों को महत्व
कोर जोनसबसे अंदर, कोई गतिविधि नहीं, केवल अनुसंधान, 15-20 प्रतिशत
बफर जोनकोर के चारों ओर, सीमित गतिविधि, 30-40 प्रतिशत
ट्रांजिशन जोनसबसे बाहर, सभी गतिविधि सतत विकास अनुसार, 40-60 प्रतिशत
प्रमुख रिजर्वनीलगिरि 1986, नंदा देवी 1988, सुंदरवन 1989, मन्नार खाड़ी 1989
अन्य रिजर्वपचमढ़ी 1999, कंचनजंघा 2000, कच्छ 2008, पन्ना 2011
यूनेस्को नेटवर्क12 रिजर्व शामिल, हर 10 साल में समीक्षा