पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार, स्थलीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं, क्षरण और बहाली
⌄पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार, स्थलीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं, क्षरण और बहाली - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार, स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं, पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण, पारिस्थितिकी बहाली और पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन पर 600+ शब्दों में जानकारी।
लोडिंग...
💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार Types of Ecosystem पारिस्थितिकी तंत्र को कई आधारों पर बांटा जाता है। सबसे मुख्य वर्गीकरण प्राकृतिक और कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र है। प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र वह है जो प्रकृति में स्वयं बनता है जैसे वन, घासभूमि, मरुस्थल और महासागर। कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र मनुष्य द्वारा बनाया गया है जैसे खेत, बगीचा, एक्वेरियम और शहर। दूसरा वर्गीकरण स्थलीय और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र है। स्थलीय भूमि पर और जलीय जल में होता है। आकार के आधार पर विशाल पारिस्थितिकी तंत्र जैसे महासागर और सूक्ष्म पारिस्थितिकी तंत्र जैसे तालाब भी होते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकारों में ऊर्जा स्रोत के आधार पर सौर ऊर्जा चालित और ईंधन चालित भी होते हैं। भारत में 4 प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र हैं - वन, घासभूमि, आर्द्रभूमि और समुद्री। स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र Terrestrial Ecosystem भूमि पर पाए जाने वाले पारिस्थितिकी तंत्र हैं। स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के 4 मुख्य प्रकार हैं - वन पारिस्थितिकी तंत्र, घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र, मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र और टुंड्रा पारिस्थितिकी तंत्र। वन पारिस्थितिकी तंत्र सबसे अधिक जैव विविधता वाला है और भारत में उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार, शुष्क पर्णपाती और शीतोष्ण वन हैं। वन में उत्पादक बड़े पेड़, उपभोक्ता हाथी बाघ और अपघटक कवक होते हैं। घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र में घास प्रमुख है और भारत में सवाना घासभूमि है जैसे मध्य प्रदेश की घासभूमि। इसमें हिरण, बाइसन और शेर पाए जाते हैं। मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पानी कम और तापमान अधिक होता है जैसे थार मरुस्थल। इसमें कैक्टस, ऊंट और सांप अनुकूलित होते हैं। टुंड्रा में बर्फ होती है और लाइकेन पाए जाते हैं। स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण अजैविक घटक है। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र Aquatic Ecosystem जल में पाए जाने वाले पारिस्थितिकी तंत्र हैं। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के दो प्रकार हैं - मीठे जल और खारे जल। मीठे जल में लोटिक बहता जल जैसे नदी और लेंटिक स्थिर जल जैसे झील, तालाब और आर्द्रभूमि आते हैं। खारे जल में महासागर, मुहाना और प्रवाल भित्ति आते हैं। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पादक फाइटोप्लांकटन और शैवाल, उपभोक्ता मछली और अपघटक बैक्टीरिया होते हैं। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्रकाश, तापमान, ऑक्सीजन और लवणता महत्वपूर्ण हैं। भारत में जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में गंगा नदी, चिल्का झील, सुंदरवन मैंग्रोव और लक्षद्वीप प्रवाल भित्ति प्रसिद्ध हैं। प्रवाल भित्ति समुद्र का वर्षावन कहलाती है और इसमें 25% समुद्री जीव रहते हैं। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में सबसे अधिक उत्पादकता मुहाना और आर्द्रभूमि में होती है। पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं Ecosystem Services प्रकृति से मनुष्य को मिलने वाले लाभ हैं। पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का वर्गीकरण 2005 में Millennium Ecosystem Assessment में किया गया था। इसके अनुसार 4 प्रकार की सेवाएं हैं - प्रावधान सेवाएं Provisioning जैसे भोजन, जल, लकड़ी, दवा, नियामक सेवाएं Regulating जैसे जलवायु नियंत्रण, बाढ़ नियंत्रण, परागण, सांस्कृतिक सेवाएं Cultural जैसे मनोरंजन, पर्यटन, आध्यात्मिक और सहायक सेवाएं Supporting जैसे पोषक चक्र, मिट्टी निर्माण। पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का आर्थिक मूल्य बहुत अधिक है - वैश्विक स्तर पर 125 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष। भारत में पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्य GDP का 3 गुना है। उदाहरण के लिए वन कार्बन अवशोषण, आर्द्रभूमि बाढ़ नियंत्रण और मधुमक्खी परागण सेवाएं देती हैं। पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए भुगतान PES योजना भी चल रही है। पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण Ecosystem Degradation पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता और सेवाओं में कमी है। क्षरण के कारण हैं - प्राकृतिक जैसे जलवायु परिवर्तन, ज्वालामुखी और मानवीय जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण, अत्यधिक दोहन, शहरीकरण और आक्रामक प्रजातियां। WWF के अनुसार 1970 से 2020 तक वन्यजीव आबादी 69% कम हुई है। IPBES के अनुसार 10 लाख प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं। भारत में क्षरण के उदाहरण हैं - हिमालय में वन कटाव, पश्चिमी घाट में खनन, सुंदरवन में समुद्र स्तर वृद्धि और यमुना में प्रदूषण। क्षरण से पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं 60% तक कम हुई हैं। क्षरण से मरुस्थलीकरण, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन बढ़ता है। पारिस्थितिकी बहाली Ecosystem Restoration क्षरित पारिस्थितिकी तंत्र को पुन: स्थापित करना है। संयुक्त राष्ट्र ने 2021-2030 को पारिस्थितिकी बहाली दशक घोषित किया है। बहाली के प्रकार हैं - पुनर्वास Rehabilitation, पुनर्निर्माण Reconstruction और पुनर्स्थापन Reclamation। बहाली के तरीके हैं - वनीकरण, आर्द्रभूमि बहाली, प्रवाल बहाली, घासभूमि बहाली और नदी बहाली। भारत में बहाली के उदाहरण हैं - नमामि गंगे में गंगा बहाली, हरियाली मिशन में वनीकरण, चिल्का झील बहाली जो रामसर पुरस्कार विजेता है और बन्नी घासभूमि बहाली। भारत ने बॉन चैलेंज के तहत 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि बहाली का लक्ष्य रखा है जिसमें 2023 तक 12 मिलियन हेक्टेयर पूरा हुआ है। बहाली से जैव विविधता 44% और पारिस्थितिकी सेवाएं 25% बढ़ती हैं। पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन Ecosystem Management पारिस्थितिकी तंत्र का सतत उपयोग और संरक्षण है। प्रबंधन के सिद्धांत हैं - समग्रता, अनुकूलन, भागीदारी और दीर्घकालिक। प्रबंधन के तरीके हैं - एकीकृत प्रबंधन, समुदाय आधारित प्रबंधन, सह-प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित प्रबंधन EBM। भारत में प्रबंधन के लिए कई कानून हैं - पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वन संरक्षण अधिनियम 1980, जैव विविधता अधिनियम 2002 और आर्द्रभूमि नियम 2017। भारत में प्रबंधन के लिए JFM, BMC और इको-डेवलपमेंट समितियां हैं। पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन में GIS, रिमोट सेंसिंग और AI तकनीक का उपयोग होता है। प्रबंधन का लक्ष्य सतत विकास SDG 15 स्थलीय जीवन और SDG 14 जलीय जीवन है।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार प्राकृतिक वन घासभूमि कृत्रिम खेत, स्थलीय भूमि जलीय जल, भारत में 4 प्रमुख वन घासभूमि आर्द्रभूमि समुद्री, आकार विशाल महासागर सूक्ष्म तालाब।
- ✅ स्थलीय 4 प्रकार वन घासभूमि मरुस्थल टुंड्रा, वन सबसे विविध भारत में 21.76% शुष्क पर्णपाती 38%, घासभूमि हिरण शेर थार कैक्टस ऊंट मिट्टी महत्वपूर्ण।
- ✅ जलीय मीठा लोटिक नदी लेंटिक झील खारा महासागर मुहाना प्रवाल, उत्पादक फाइटोप्लांकटन, चिल्का सुंदरवन लक्षद्वीप, प्रवाल वर्षावन 25% जीव मुहाना सबसे उत्पादक।
- ✅ पारिस्थितिकी सेवाएं 4 प्रकार Millennium 2005 प्रावधान नियामक सांस्कृतिक सहायक, मूल्य वैश्विक 125 ट्रिलियन भारत GDP 3 गुना, वन कार्बन आर्द्रभूमि बाढ़ नियंत्रण।
- ✅ क्षरण गुणवत्ता कमी कारण वन कटाई प्रदूषण अत्यधिक दोहन आक्रामक प्रजाति, WWF 69% वन्यजीव कम 1970-2020 IPBES 10 लाख विलुप्ति कगार पर सेवाएं 60% कम।
- ✅ बहाली क्षरित पुन: स्थापना UN दशक 2021-2030, पुनर्वास पुनर्निर्माण, तरीके वनीकरण आर्द्रभूमि प्रवाल, भारत बॉन चैलेंज 26 मिलियन हेक्टेयर चिल्का रामसर पुरस्कार जैव विविधता 44% बढ़ती।
- ✅ प्रबंधन सतत उपयोग सिद्धांत समग्रता भागीदारी, तरीके एकीकृत समुदाय EBM, कानून पर्यावरण 1986 वन 1980 जैव विविधता 2002, JFM BMC GIS AI SDG 14 15।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार | प्राकृतिक वन घासभूमि और कृत्रिम खेत एक्वेरियम, स्थलीय भूमि पर जलीय जल में, आकार विशाल महासागर सूक्ष्म तालाब, भारत में 4 प्रमुख वन घासभूमि आर्द्रभूमि समुद्री। |
| स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र | 4 प्रकार वन घासभूमि मरुस्थल टुंड्रा, वन सबसे अधिक जैव विविधता भारत में शुष्क पर्णपाती 38%, घासभूमि में हिरण शेर, थार मरुस्थल कैक्टस ऊंट, मिट्टी महत्वपूर्ण अजैविक। |
| जलीय पारिस्थितिकी तंत्र | दो प्रकार मीठा लोटिक नदी लेंटिक झील और खारा महासागर मुहाना प्रवाल, उत्पादक फाइटोप्लांकटन उपभोक्ता मछली, चिल्का झील सुंदरवन मैंग्रोव प्रवाल वर्षावन 25% जीव, मुहाना सबसे उत्पादक। |
| पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं | Millennium Assessment 2005 में 4 प्रकार प्रावधान भोजन जल नियामक जलवायु बाढ़ परागण सांस्कृतिक मनोरंजन सहायक पोषक चक्र, मूल्य वैश्विक 125 ट्रिलियन डॉलर भारत में GDP का 3 गुना। |
| पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण | गुणवत्ता और सेवाओं में कमी, कारण मानवीय वन कटाई प्रदूषण अत्यधिक दोहन आक्रामक प्रजातियां, WWF 1970-2020 में 69% वन्यजीव कम IPBES 10 लाख प्रजाति विलुप्ति कगार पर, सेवाएं 60% कम। |
| पारिस्थितिकी बहाली | क्षरित तंत्र पुन: स्थापना, UN दशक 2021-2030, प्रकार पुनर्वास पुनर्निर्माण पुनर्स्थापन, तरीके वनीकरण आर्द्रभूमि प्रवाल बहाली, भारत बॉन चैलेंज 26 मिलियन हेक्टेयर लक्ष्य 12 मिलियन पूरा चिल्का रामसर पुरस्कार। |
| पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन | सतत उपयोग और संरक्षण, सिद्धांत समग्रता अनुकूलन भागीदारी दीर्घकालिक, तरीके एकीकृत समुदाय सह-प्रबंधन EBM, कानून पर्यावरण 1986 वन 1980 जैव विविधता 2002, JFM BMC, GIS AI उपयोग SDG 14 15। |
| वन पारिस्थितिकी तंत्र | स्थलीय में सबसे बड़ा, उत्पादक पेड़ उपभोक्ता हाथी बाघ अपघटक कवक, भारत में 21.76% वन आवरण, कार्य कार्बन अवशोषण जल चक्र। |
| प्रवाल भित्ति | जलीय में सबसे विविध समुद्र का वर्षावन, 25% समुद्री जीव, भारत में 4 क्षेत्र मन्नार की खाड़ी कच्छ लक्षद्वीप अंडमान, खतरा ब्लीचिंग प्रदूषण, बहाली में कोरल गार्डनिंग। |
| Millennium Ecosystem Assessment | 2001-2005 में UN द्वारा 95 देशों के 1360 वैज्ञानिकों ने किया, 4 सेवाएं वर्गीकृत, रिपोर्ट 60% सेवाएं क्षरित, मानव कल्याण और पारिस्थितिकी संबंध बताया। |