संकटग्रस्त प्रजातियाँ - IUCN रेड लिस्ट और भारत की संकटग्रस्त प्रजातियाँ | Environment Quiz
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संकटग्रस्त प्रजातियाँ, IUCN रेड लिस्ट श्रेणियाँ और भारत की संकटग्रस्त प्रजातियों पर 50 MCQs।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
संकटग्रस्त प्रजातियों की परिभाषा संकटग्रस्त प्रजातियां वे वन्यजीव और वनस्पति प्रजातियां हैं जिनकी संख्या तेजी से घट रही है और विलुप्त होने का खतरा है। IUCN रेड लिस्ट 1964 के अनुसार जब किसी प्रजाति की आबादी 10 वर्षों में 50% से अधिक घट जाए या 250 से कम वयस्क बचे हों तो उसे संकटग्रस्त कहा जाता है। भारत में 2024 तक 1052 प्रजातियां संकटग्रस्त हैं जिसमें 73 स्तनधारी, 79 पक्षी, 26 सरीसृप और 68 उभयचर हैं। संकटग्रस्त प्रजातियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 में रखा गया है जिसमें शिकार पर 3 से 7 साल जेल और 25000 जुर्माना है। संकटग्रस्त प्रजातियों की परिभाषा में गंभीर रूप से संकटग्रस्त CR, संकटग्रस्त EN और असुरक्षित VU तीन श्रेणी शामिल हैं। भारत में 2023 में 172 प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। IUCN श्रेणियां IUCN रेड लिस्ट 1964 में 9 श्रेणियां हैं - EX विलुप्त 902 प्रजाति, EW वन में विलुप्त 82, CR गंभीर रूप से संकटग्रस्त 9251, EN संकटग्रस्त 16364, VU असुरक्षित 17288, NT निकट संकट 8500, LC कम चिंता 50000, DD डेटा कमी 21000 और NE मूल्यांकन नहीं। IUCN में CR के मानदंड - 3 पीढ़ी में 80% कमी या 250 से कम वयस्क या 100 वर्ग किमी से कम क्षेत्र। EN के मानदंड - 3 पीढ़ी में 50% कमी या 2500 से कम वयस्क। VU के मानदंड - 3 पीढ़ी में 30% कमी या 10000 से कम वयस्क। IUCN में 2024 तक 157000 प्रजातियों का मूल्यांकन हुआ है जिसमें 44000 संकटग्रस्त हैं। भारत में IUCN श्रेणी में 12% स्तनधारी, 3% पक्षी संकटग्रस्त हैं। IUCN में भारत में 18 प्रजाति गंभीर रूप से संकटग्रस्त स्तनधारी हैं। विलुप्त प्रजातियां विलुप्त प्रजातियां वे हैं जो पिछले 50 वर्षों में नहीं दिखी हैं। विश्व में डोडो पक्षी मॉरीशस 1662 में विलुप्त, पैसेंजर कबूतर 1914 अमेरिका, तस्मानियाई बाघ 1936 ऑस्ट्रेलिया और वूली मैमथ 4000 साल पहले विलुप्त हुए। भारत में 4 प्रजातियां विलुप्त हैं - गुलाबी सिर वाली बत्तख पिंक हेडेड डक 1949 बिहार में अंतिम बार देखी, हिमालयी बटेर 1876 उत्तराखंड, चीता 1952 भारत में विलुप्त 2022 में नामीबिया से 8 चीते कूनो में लाए गए और भारतीय जंगली मुर्गी की एक उप प्रजाति। भारत में 2023 में 22 प्रजातियां वन में विलुप्त EW हैं। विलुप्त होने का कारण शिकार, आवास हानि और जलवायु परिवर्तन है। पिछले 100 वर्षों में 500 कशेरुकी प्रजातियां विलुप्त हुई हैं जो सामान्य दर से 100 गुना अधिक है। बाघ बाघ पैंथेरा टाइग्रिस भारत का राष्ट्रीय पशु है और संकटग्रस्त श्रेणी में है। भारत में बाघों की संख्या 2006 में 1411, 2010 में 1706, 2014 में 2226, 2018 में 2967 और 2022 में 3167 है जो विश्व के 75% बाघ हैं। भारत में 54 बाघ अभयारण्य हैं जो 75000 वर्ग किमी पर हैं। सबसे अधिक बाघ मध्य प्रदेश 785 और कर्नाटक 563 में हैं। प्रोजेक्ट टाइगर 1 अप्रैल 1973 को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से शुरू हुआ था। बाघ का शिकार खाल, हड्डी और नाखून के लिए होता है। बाघ एक दिन में 40 किलो मांस खाता है और 5 साल में वयस्क होता है। बाघ की 6 उप प्रजातियां हैं - बंगाल, साइबेरियाई, सुमात्रा, मलय, इंडोचाइनीज और दक्षिण चीन। बाघ का जीवनकाल 12 से 15 साल है। भारत में 2023 में 178 बाघ मरे थे जिसमें 50% शिकार से। शेर शेर पैंथेरा लियो पर्सिका एशियाई शेर केवल भारत के गुजरात के गिर में बचा है और संकटग्रस्त EN श्रेणी में है। गिर में शेरों की संख्या 1965 में 177, 2001 में 327, 2015 में 523 और 2020 में 674 है। गिर राष्ट्रीय उद्यान 1412 वर्ग किमी पर है जिसमें 523 वर्ग किमी अभयारण्य है। शेर का वजन 150 से 250 किलो और जीवनकाल 12 से 16 साल है। शेर का शिकार और आवास हानि मुख्य खतरा है। 1913 में नवाब जूनागढ़ ने गिर में शेर संरक्षण शुरू किया था। 1965 में गिर अभयारण्य और 1975 में राष्ट्रीय उद्यान बना था। प्रोजेक्ट लॉयन 2020 में शुरू हुआ था और 10000 करोड़ का बजट है। शेरों में 2018 में 23 शेर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मरे थे। शेर केवल गिर में होने से एक महामारी से विलुप्त होने का खतरा है। गैंडा भारतीय एक सींग वाला गैंडा राइनोसेरोस यूनिकॉर्निस असुरक्षित VU श्रेणी में है। भारत में गैंडों की संख्या 1975 में 600, 2005 में 2000 और 2024 में 4000 से अधिक है जिसमें 70% काजीरंगा असम में हैं। काजीरंगा में 2613 गैंडा 2022 में हैं। गैंडा का वजन 1800 से 2700 किलो और सींग की लंबाई 25 से 60 सेमी है। गैंडा का शिकार सींग के लिए होता है जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 60000 डॉलर प्रति किलो है। सींग केराटिन से बना होता है जो नाखून जैसा है। गैंडा का गर्भकाल 15 से 16 महीने और जीवनकाल 35 से 45 साल है। प्रोजेक्ट राइनो 1987 में शुरू हुआ था। काजीरंगा 1905 में रिजर्व वन, 1974 में राष्ट्रीय उद्यान और 1985 में विश्व धरोहर बना था। गैंडा केवल भारत, नेपाल और भूटान में है। हाथी भारतीय हाथी एलिफास मैक्सिमस इंडिकस संकटग्रस्त EN श्रेणी में है। भारत में हाथियों की संख्या 2017 जनगणना में 29992 है जिसमें कर्नाटक 6049, असम 5719 और केरल 5706 सबसे अधिक हैं। हाथी का वजन 3000 से 6000 किलो और जीवनकाल 60 से 70 साल है। हाथी का गर्भकाल 22 महीने सबसे अधिक है। हाथी दिन में 150 किलो घास और 100 लीटर पानी पीता है। हाथी का शिकार दांत आइवरी के लिए होता है जिसकी कीमत 1000 डॉलर प्रति किलो है। प्रोजेक्ट एलीफेंट 7 फरवरी 1992 को शुरू हुआ था और 33 एलीफेंट रिजर्व हैं। हाथी मानव संघर्ष में भारत में हर साल 500 लोग और 100 हाथी मरते हैं। हाथी 5 किमी दूर से पानी सूंघ सकता है। भारत में केरल में 2020 में गर्भवती हथिनी की पटाखे से मौत हुई थी। गिद्ध गिद्ध भारत में 9 प्रजातियां हैं जिसमें 4 गंभीर रूप से संकटग्रस्त CR - सफेद पूंछ वाला गिद्ध, भारतीय गिद्ध, पतली चोंच वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध। भारत में गिद्धों की संख्या 1980 में 4 करोड़, 2000 में 4 लाख और 2024 में 60000 है जो 99.9% कमी है। गिद्धों के घटने का कारण डाइक्लोफेनाक दवा है जो पशुओं को दी जाती है और गिद्ध खाने से किडनी फेल होती है। डाइक्लोफेनाक पर भारत में 2006 में पशु उपयोग पर प्रतिबंध लगा था। गिद्ध 200 मीटर ऊंचाई से 6 किलोमीटर दूर मरा जानवर देख सकता है। गिद्ध का जीवनकाल 20 से 30 साल है। गिद्ध प्रजनन केंद्र पिंजौर हरियाणा 2001 में बना था। 2020 में भारत में गिद्ध संरक्षण कार्य योजना 2020-2025 शुरू हुई थी। गिद्ध पर्यावरण सफाईकर्मी है और एक गिद्ध साल में 1 टन सड़ा मांस खाता है। संकटग्रस्त प्रजातियों के कारण संकटग्रस्त होने के 7 मुख्य कारण हैं - 1. आवास हानि 70% प्रजातियां कृषि और शहरीकरण से आवास खो रही हैं, भारत में 1970 से 30% वन घटे हैं। 2. शिकार और अवैध व्यापार - CITES के अनुसार 1 अरब डॉलर का अवैध वन्यजीव व्यापार हर साल होता है, बाघ की खाल 20000 डॉलर में बिकती है। 3. मानव वन्यजीव संघर्ष - भारत में हर साल 500 लोग हाथी, बाघ और तेंदुए से मरते हैं। 4. जलवायु परिवर्तन - 1 डिग्री तापमान बढ़ने से 10% प्रजाति विलुप्त होने का खतरा, हिम तेंदुआ 2030 तक 30% आवास खो देगा। 5. प्रदूषण - प्लास्टिक से 100000 समुद्री जीव हर साल मरते हैं, डाइक्लोफेनाक से गिद्ध 99% घटे। 6. आक्रामक प्रजाति - लैंटाना और वाटर हाइसिंथ से देशी प्रजाति घट रही हैं। 7. रोग - कैनाइन डिस्टेंपर से गिर में 23 शेर 2018 में मरे थे।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ IUCN 1948 में स्थापित, रेड लिस्ट 1964 से, मुख्यालय ग्लैंड स्विट्जरलैंड।
- ✅ रेड लिस्ट की 9 श्रेणियाँ - EX, EW, CR, EN, VU, NT, LC, DD, NE।
- ✅ भारत में 133 CR, 257 EN, 453 VU प्रजातियाँ।
- ✅ चीता 1952 में विलुप्त, 2022 में कुनो में पुनर्वास।
- ✅ HIPPO संकट के कारण - आवास विनाश, आक्रामक प्रजाति, प्रदूषण, अति शोषण।
- ✅ गिद्ध डाइक्लोफेनाक से 99 प्रतिशत घटे।
- ✅ संरक्षण - वन्यजीव अधिनियम 1972, CITES, प्रोजेक्ट टाइगर।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| IUCN की स्थापना | 1948 में, मुख्यालय ग्लैंड स्विट्जरलैंड, रेड लिस्ट 1964 से |
| रेड लिस्ट श्रेणियाँ | EX, EW, CR, EN, VU, NT, LC, DD, NE - CR+EN+VU = Threatened |
| CR श्रेणी | 250 से कम बचीं, भारत में 133 प्रजातियाँ |
| भारत की CR प्रजातियाँ | घड़ियाल, हॉक्सबिल कछुआ, मालाबार सिवेट, 3 गिद्ध |
| भारत की EN प्रजातियाँ | बाघ, हाथी, गैंडा, हिम तेंदुआ, लाल पांडा, गंगा डॉल्फिन |
| विलुप्त प्रजातियाँ | चीता 1952 में, 2022 में कुनो में पुनर्वास |
| गिद्ध संकट | डाइक्लोफेनाक से 99 प्रतिशत कमी |
| HIPPO कारण | Habitat Loss, Invasive, Pollution, Population, Overexploitation |
| संरक्षण कानून | वन्यजीव अधिनियम 1972, जैव विविधता अधिनियम 2002 |
| अंतर्राष्ट्रीय समझौते | CITES, CMS, TRAFFIC तस्करी रोकने के लिए |