भारत की संकटग्रस्त प्रजातियां और संरक्षण उपाय | Environment Quiz
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भारत की संकटग्रस्त प्रजातियों और संरक्षण उपायों पर 50 MCQs। हिंदी में Quiz खेलें।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
भारत जैव विविधता के दृष्टिकोण से विश्व के 17 महाविविधता वाले देशों में से एक है। यहाँ लगभग 7 से 8 प्रतिशत वैश्विक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जबकि भारत का क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.4 प्रतिशत ही है। इतनी समृद्ध जैव विविधता के बावजूद मानवीय गतिविधियों और पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण भारत की कई प्रजातियाँ संकटग्रस्त श्रेणी में पहुँच गई हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर यानी आईयूसीएन द्वारा जारी रेड लिस्ट के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों को मुख्य रूप से विलुप्त, जंगली में विलुप्त, गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और असुरक्षित श्रेणियों में बाँटा जाता है। भारत में वर्तमान में 1000 से अधिक प्रजातियाँ इस रेड लिस्ट में शामिल हैं, जिनमें स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर और पौधों की प्रजातियाँ शामिल हैं।
भारत की कुछ प्रमुख संकटग्रस्त प्रजातियों में बंगाल टाइगर, एशियाई शेर, एक सींग वाला गैंडा, हिम तेंदुआ, गंगा डॉल्फिन, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, नीलगिरि तहर, सिंह-पूंछ वाला मकाक, लाल पांडा, ओलिव रिडले कछुआ, घड़ियाल और जंगली भैंसा शामिल हैं। बंगाल टाइगर भारत का राष्ट्रीय पशु है और यह मुख्य रूप से सुंदरबन, मध्य भारत और पश्चिमी घाट के जंगलों में पाया जाता है। एशियाई शेर अब केवल गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में ही शेष बचा है और इसकी संख्या लगभग 700 के आसपास है। एक सींग वाला गैंडा असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, मानस और पोबितोरा में संरक्षित है और काजीरंगा में इसकी सबसे बड़ी आबादी रहती है। गंगा नदी में पाई जाने वाली गंगा डॉल्फिन को भारत सरकार ने राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया है, यह अंधी होती है और इकोलोकेशन के माध्यम से शिकार करती है। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड राजस्थान और गुजरात के शुष्क घास के मैदानों में पाया जाता है और यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त है, इसकी संख्या 150 से भी कम बची है। हिम तेंदुआ हिमालयी क्षेत्र में 3000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है और इसे भूतिया तेंदुआ भी कहा जाता है।
इन प्रजातियों के संकटग्रस्त होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक आवास का विनाश और विखंडन है। कृषि विस्तार, शहरीकरण, खनन, सड़क, रेल और बांध परियोजनाओं के कारण जंगलों का क्षेत्र लगातार घट रहा है। दूसरा प्रमुख कारण अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी है, जिसमें बाघ की खाल और हड्डियों, गैंडे के सींग, हाथी दांत, पैंगोलिन के शल्क और कछुओं के कवच के लिए शिकार किया जाता है। तीसरा कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष है, जहाँ भोजन और पानी की कमी के कारण जंगली जानवर गाँवों और खेतों में आ जाते हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि और हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना, नदियों में रासायनिक प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा, कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग और लैंटाना जैसी आक्रामक विदेशी प्रजातियों का प्रसार भी जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा है।
भारत सरकार ने संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कानूनी स्तर पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 लागू किया गया है, जिसके तहत शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है और इसे 6 अनुसूचियों में बाँटा गया है। इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों, संरक्षण रिजर्व और सामुदायिक रिजर्व की स्थापना की गई है। वर्तमान में भारत में 106 राष्ट्रीय उद्यान, 573 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य और 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू किया गया था, जो दुनिया की सबसे सफल संरक्षण परियोजनाओं में से एक है और अब भारत में 54 टाइगर रिजर्व हैं। इसी तर्ज पर प्रोजेक्ट एलीफेंट 1992 में, प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड 2009 में, प्रोजेक्ट डॉल्फिन 2020 में और भारतीय मगरमच्छ संरक्षण परियोजना 1975 में शुरू की गई हैं। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए राजस्थान के जैसलमेर में अंडा सेने और कृत्रिम प्रजनन केंद्र बनाए गए हैं।
संरक्षण उपायों को दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है। स्व-स्थाने संरक्षण यानी इन-सीटू कंजर्वेशन में प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में ही संरक्षित किया जाता है, जैसे राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व। पर-स्थाने संरक्षण यानी एक्स-सीटू कंजर्वेशन में प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर चिड़ियाघरों, बॉटनिकल गार्डन, जीन बैंक, सीड बैंक और क्रायोप्रिजर्वेशन के माध्यम से बचाया जाता है। इसके अलावा जैव विविधता अधिनियम 2002, वेटलैंड संरक्षण नियम 2017, और CITES यानी वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने मैंग्रोव संरक्षण के लिए MISHTI योजना, आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए अमृत धरोहर योजना और वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास योजना को भी शुरू किया है। आधुनिक तकनीकों जैसे कैमरा ट्रैप, ड्रोन निगरानी, eDNA तकनीक और सैटेलाइट रेडियो कॉलरिंग का उपयोग भी संरक्षण में तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी, इको-डेवलपमेंट बोर्ड, जन जागरूकता अभियान और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की स्थापना भी संरक्षण रणनीति का अहम हिस्सा हैं।
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, State PSC, वन परीक्षा और पर्यावरण क्विज के लिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस टॉपिक से अक्सर IUCN रेड लिस्ट की श्रेणियाँ, भारत की स्थानिक और संकटग्रस्त प्रजातियाँ, टाइगर रिजर्व, संरक्षण परियोजनाओं के शुरू होने के वर्ष और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूचियों से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस क्विज के माध्यम से आप इन सभी तथ्यों का व्यवस्थित अभ्यास कर सकते हैं।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ भारत विश्व के 17 मेगाडायवर्स देशों में से एक है और यहाँ 1000+ प्रजातियाँ IUCN रेड लिस्ट में हैं।
- ✅ प्रमुख संकटग्रस्त प्रजातियाँ - बाघ, एशियाई शेर, गैंडा, गंगा डॉल्फिन, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुआ और घड़ियाल।
- ✅ संकट के मुख्य कारण - आवास विनाश, अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन।
- ✅ कानूनी संरक्षण - वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, जैव विविधता अधिनियम 2002 और CITES समझौता।
- ✅ प्रमुख संरक्षण परियोजनाएँ - प्रोजेक्ट टाइगर 1973, प्रोजेक्ट एलीफेंट 1992, प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड 2009, प्रोजेक्ट डॉल्फिन 2020।
- ✅ इन-सीटू संरक्षण में 106 राष्ट्रीय उद्यान, 573+ अभयारण्य और 18 बायोस्फीयर रिजर्व शामिल हैं।
- ✅ एक्स-सीटू संरक्षण में चिड़ियाघर, बॉटनिकल गार्डन, जीन बैंक और कृत्रिम प्रजनन केंद्र आते हैं।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| बंगाल टाइगर | भारत में विश्व के लगभग 75% बाघ पाए जाते हैं, 2022 की गणना के अनुसार भारत में बाघों की संख्या 3167 है। |
| एशियाई शेर | एशियाई शेर अब केवल गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में ही पाया जाता है और IUCN में यह संकटग्रस्त श्रेणी में है। |
| एक सींग वाला गैंडा | एक सींग वाले गैंडे की सबसे बड़ी आबादी असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में है, यह असुरक्षित श्रेणी में शामिल है। |
| गंगा डॉल्फिन | गंगा डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है, यह अंधी होती है और केवल मीठे पानी में पाई जाती है, यह संकटग्रस्त है। |
| ग्रेट इंडियन बस्टर्ड | ग्रेट इंडियन बस्टर्ड राजस्थान का राज्य पक्षी है और गंभीर रूप से संकटग्रस्त है, इसकी संख्या 150 से भी कम बची है। |
| हिम तेंदुआ | हिम तेंदुआ हिमालय में 3000-4500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है और हेमिस राष्ट्रीय उद्यान इसका प्रमुख आवास है। |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 | यह अधिनियम भारत में वन्यजीव संरक्षण का मुख्य कानून है, इसमें 6 अनुसूचियां हैं और शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है। |
| प्रोजेक्ट टाइगर | प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत 1 अप्रैल 1973 को हुई थी, वर्तमान में भारत में 54 टाइगर रिजर्व हैं। |
| IUCN रेड लिस्ट | IUCN रेड लिस्ट में 9 श्रेणियां हैं - विलुप्त, जंगली में विलुप्त, गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त, असुरक्षित, संकट-निकट, कम चिंताजनक, आंकड़ों का अभाव और मूल्यांकन नहीं। |
| ओलिव रिडले कछुआ | ओलिव रिडले कछुए ओडिशा के गहिरमाथा तट पर सामूहिक घोंसला बनाने यानी अरिबाडा के लिए प्रसिद्ध हैं और यह असुरक्षित श्रेणी में है। |