भारत में वनों का वर्गीकरण, वन नीति 1988, वन संरक्षण अधिनियम 1980, चिपको आंदोलन, ISFR

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भारत में वनों का वर्गीकरण, वन नीति 1988, वन संरक्षण अधिनियम 1980, चिपको आंदोलन, ISFR - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

भारत में वनों का वर्गीकरण, राष्ट्रीय वन नीति 1988, वन संरक्षण अधिनियम 1980, सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी, वन महोत्सव, चिपको आंदोलन और वन आवरण रिपोर्ट ISFR 2023 पर 600+ शब्दों में विस्तृत जानकारी।

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📚 विस्तृत जानकारी

भारत में वनों का वर्गीकरण कई आधारों पर किया जाता है जो पर्यावरण अध्ययन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक आधार पर वनों को तीन भागों में बांटा गया है। पहला आरक्षित वन Reserved Forest जो सबसे अधिक संरक्षित होते हैं और इसमें बिना अनुमति कोई भी गतिविधि जैसे लकड़ी काटना, पशु चराना प्रतिबंधित है। भारत के कुल वन क्षेत्र का लगभग 53% आरक्षित वन है। दूसरा सुरक्षित वन Protected Forest जो कुल का 29% है जिसमें सीमित मात्रा में लोगों को अधिकार दिए जाते हैं। तीसरा अवर्गीकृत वन Unclassified Forest जो 18% है और यह मुख्यतः पूर्वोत्तर राज्यों में है। दूसरा वर्गीकरण वैज्ञानिक चैंपियन और सेठ वर्गीकरण 1968 है जिसमें भारत के वनों को जलवायु के आधार पर 16 प्रमुख प्रकारों और 200 उप-प्रकारों में बांटा गया है। इसमें उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, शीतोष्ण वन, अल्पाइन वन और कंटीले वन शामिल हैं। भारत में सबसे अधिक उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन हैं जो 38% हैं। तीसरा वर्गीकरण घनत्व के आधार पर भारतीय वन सर्वेक्षण करता है। अति सघन वन VDF जिसमें छत्र घनत्व 70% से अधिक, मध्यम सघन वन MDF 40-70% और खुले वन OF 10-40%। चौथा वर्गीकरण स्वामित्व के आधार पर सरकारी वन, सामुदायिक वन और निजी वन। वन नीति 1988 भारत की वर्तमान राष्ट्रीय वन नीति है। भारत में अब तक तीन वन नीतियां बनी हैं। पहली 1894 में ब्रिटिश सरकार ने, दूसरी 1952 में स्वतंत्र भारत की पहली नीति और तीसरी 1988 में। वन नीति 1988 को 7 दिसंबर 1988 को अपनाया गया था। इस नीति का मुख्य उद्देश्य वनों से राजस्व कमाने के बजाय पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है। इस नीति के मुख्य लक्ष्य हैं - देश के 33% भौगोलिक क्षेत्र पर वन आवरण लाना, पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में 66% वन आवरण, प्राकृतिक वनों का संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण, मृदा अपरदन रोकना, बाढ़ नियंत्रण, आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा और लोगों की भागीदारी। इस नीति में पहली बार संयुक्त वन प्रबंधन JFM की अवधारणा लाई गई जिसमें वन विभाग और स्थानीय ग्रामीण मिलकर वनों का प्रबंधन करते हैं। इस नीति के बाद वन भूमि को कृषि के लिए देने पर रोक लगी। 2018 में नई वन नीति का मसौदा जारी हुआ था लेकिन अभी तक 1988 की नीति ही लागू है। वन संरक्षण अधिनियम 1980 भारत में वनों के विनाश को रोकने के लिए सबसे कठोर और महत्वपूर्ण कानून है। यह अधिनियम 25 अक्टूबर 1980 को लागू हुआ था। इस अधिनियम से पहले 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा वन को राज्य सूची से समवर्ती सूची में लाया गया था ताकि केंद्र सरकार भी कानून बना सके। इस अधिनियम की धारा 2 के अनुसार किसी भी वन भूमि को गैर-वानिकी कार्य जैसे खनन, उद्योग, बांध, सड़क और रेलवे के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना डायवर्ट नहीं किया जा सकता। यदि वन भूमि डायवर्ट करनी है तो उसके बदले में बराबर भूमि पर क्षतिपूरक वनीकरण Compensatory Afforestation करना अनिवार्य है और Net Present Value NPV देना पड़ता है। इसके लिए CAMPA कोष बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत वन सलाहकार समिति FAC सभी प्रस्तावों की जांच करती है। 2023 में इस अधिनियम में बड़ा संशोधन हुआ और इसका नाम वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम 2023 कर दिया गया है। नए संशोधन में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 100 किमी के भीतर सुरक्षा परियोजनाओं, चिड़ियाघर और इको-टूरिज्म को छूट दी गई है। सामाजिक वानिकी Social Forestry की अवधारणा 1976 में राष्ट्रीय कृषि आयोग ने दी थी। सामाजिक वानिकी का अर्थ है समाज के लिए, समाज द्वारा वानिकी। इसका मुख्य उद्देश्य बंजर, परती और सामुदायिक भूमि पर पेड़ लगाना, ग्रामीणों को जलाऊ लकड़ी, चारा, इमारती लकड़ी और फल उपलब्ध कराना और पर्यावरण सुधारना है। सामाजिक वानिकी के तीन प्रकार हैं - शहरी वानिकी Urban Forestry जो शहरों में सड़कों और पार्कों में पेड़ लगाना, ग्रामीण वानिकी Rural Forestry जो गांव की पंचायत भूमि पर पेड़ लगाना और कृषि वानिकी Agroforestry जो खेतों पर पेड़ लगाना। सामाजिक वानिकी में यूकेलिप्टस, बबूल, आंवला, नीम और शीशम जैसे तेजी से बढ़ने वाले पेड़ लगाए जाते हैं। छठी पंचवर्षीय योजना 1980-85 में सामाजिक वानिकी को सबसे अधिक महत्व दिया गया था। कृषि वानिकी Agroforestry सामाजिक वानिकी का ही एक उन्नत रूप है जिसमें किसान एक ही खेत में फसल और पेड़ दोनों उगाता है। इसमें खेत की मेड़ पर पॉपलर, यूकेलिप्टस, बांस, सागौन और आंवला लगाए जाते हैं। कृषि वानिकी के लाभ हैं - किसान की आय दोगुनी, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता में वृद्धि, कार्बन अवशोषण और जलवायु लचीलापन। भारत 2014 में दुनिया की पहली राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति लाने वाला देश बना। सरकार 2016-17 से Sub-Mission on Agroforestry SMAF चला रही है। हरियाणा और पंजाब में पॉपलर आधारित कृषि वानिकी बहुत सफल है। वन महोत्सव भारत में वृक्षारोपण का राष्ट्रीय त्योहार है। इसकी शुरुआत 1950 में तत्कालीन कृषि मंत्री डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने की थी। यह हर साल 1 जुलाई से 7 जुलाई तक मनाया जाता है क्योंकि यह मानसून का प्रारंभ काल होता है और पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। वन महोत्सव का उद्देश्य लोगों में वनों के प्रति जागरूकता पैदा करना और अधिक से अधिक पौधे लगाना है। इस दौरान स्कूलों और कॉलेजों में करोड़ों पौधे लगाए जाते हैं। चिपको आंदोलन भारत और दुनिया का सबसे प्रसिद्ध पर्यावरण आंदोलन है। चिपको आंदोलन 1973 में उत्तराखंड के चमोली जिले के मंडल गांव में शुरू हुआ था जब ठेकेदार पेड़ काटने आए तो ग्रामीण महिलाओं ने पेड़ों से चिपक कर उन्हें बचाया। चिपको का अर्थ है चिपक जाना। इस आंदोलन का नेतृत्व सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट और गौरा देवी ने किया था। 26 मार्च 1974 को रैणी गांव में गौरा देवी के नेतृत्व में 27 महिलाओं ने पेड़ों से चिपक कर ठेकेदारों को भगाया था। चिपको आंदोलन का नारा था - क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी पानी और बयार। इस आंदोलन के कारण 1980 में उत्तर प्रदेश में 1000 मीटर से ऊपर पेड़ काटने पर 15 साल के लिए रोक लगा दी गई थी। इसी से प्रेरित होकर कर्नाटक में अप्पिको आंदोलन 1983 में शुरू हुआ था। वन आवरण रिपोर्ट India State of Forest Report ISFR भारतीय वन सर्वेक्षण FSI देहरादून द्वारा हर दो साल में जारी की जाती है। FSI की स्थापना 1 जून 1981 को हुई थी। पहली ISFR 1987 में जारी हुई थी और नवीनतम 17वीं ISFR 2023 21 दिसंबर 2023 को जारी हुई थी। ISFR 2023 के अनुसार भारत में कुल वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किमी है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है। इसमें वन आवरण 7,15,343 वर्ग किमी 21.76% और वृक्ष आवरण 1,12,014 वर्ग किमी 3.41% है। पिछले दो साल में 1445 वर्ग किमी वन आवरण बढ़ा है। सबसे अधिक वन क्षेत्र मध्य प्रदेश में 77,073 वर्ग किमी और सबसे अधिक प्रतिशत मिजोरम में 84.53% है। मैंग्रोव 4,975 वर्ग किमी है। कार्बन स्टॉक 7,285 मिलियन टन है।

⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु

  • ✅ वनों का वर्गीकरण - प्रशासनिक आरक्षित 53% सुरक्षित 29% अवर्गीकृत 18%, घनत्व VDF 70%+ MDF 40-70% OF 10-40%, चैंपियन सेठ 16 प्रकार शुष्क पर्णपाती 38%।
  • ✅ वन नीति 1988 7 दिसंबर तीसरी नीति, लक्ष्य 33% और पहाड़ों में 66% वन, JFM अवधारणा, राजस्व के बजाय संरक्षण को महत्व, पहली 1894 दूसरी 1952।
  • ✅ वन संरक्षण अधिनियम 25 अक्टूबर 1980, समवर्ती सूची 1976, डायवर्जन के लिए केंद्र अनुमति, क्षतिपूरक वनीकरण CAMPA FAC, 2023 में संवर्धन नाम और 100 किमी छूट।
  • ✅ सामाजिक वानिकी 1976 समाज के लिए समाज द्वारा, तीन प्रकार शहरी ग्रामीण कृषि वानिकी, छठी योजना में प्राथमिकता, कृषि वानिकी नीति 2014 दुनिया की पहली SMAF 2016-17।
  • ✅ वन महोत्सव 1950 में डॉ. के.एम. मुंशी 1-7 जुलाई, चिपको आंदोलन 1973 चमोली मंडल गांव, गौरा देवी बहुगुणा भट्ट नेतृत्व, नारा मिट्टी पानी बयार, 1980 में 15 साल प्रतिबंध।
  • ✅ ISFR 2023 17वीं रिपोर्ट FSI देहरादून, कुल आवरण 25.17% वन 21.76%, वृद्धि 1445 वर्ग किमी, मप्र 77073 वर्ग किमी क्षेत्र में प्रथम, मिजोरम 84.53% प्रतिशत में प्रथम।
  • ✅ CAMPA 2006 कोष 54000 करोड़, कृषि वानिकी में पॉपलर बांस, आय दोगुनी कार्बन अवशोषण, JFM में समुदाय भागीदारी।

📊 Important Facts Table

TopicFact
भारत में वनों का वर्गीकरणप्रशासनिक - आरक्षित 53%, सुरक्षित 29%, अवर्गीकृत 18%, घनत्व - VDF 70%+, MDF 40-70%, OF 10-40%, चैंपियन सेठ 1968 में 16 प्रकार, शुष्क पर्णपाती सबसे अधिक 38%।
वन नीति 19887 दिसंबर 1988 को अपनाई गई, तीसरी नीति पहली 1894 दूसरी 1952, लक्ष्य 33% क्षेत्र पर वन पहाड़ों में 66%, JFM अवधारणा, पर्यावरण को राजस्व से अधिक महत्व।
वन संरक्षण अधिनियम 198025 अक्टूबर 1980 को लागू, 42वें संशोधन 1976 से वन समवर्ती सूची में, वन डायवर्जन के लिए केंद्र की अनुमति अनिवार्य, क्षतिपूरक वनीकरण और CAMPA, FAC समिति, 2023 में संशोधन।
सामाजिक वानिकी1976 में राष्ट्रीय कृषि आयोग की अवधारणा, समाज के लिए समाज द्वारा, तीन प्रकार शहरी ग्रामीण कृषि वानिकी, छठी पंचवर्षीय योजना 1980-85 में प्राथमिकता।
कृषि वानिकीखेत पर फसल के साथ पेड़, भारत की नीति 2014 दुनिया की पहली, SMAF 2016-17 से, पॉपलर यूकेलिप्टस बांस सागौन, आय दोगुनी और कार्बन अवशोषण।
वन महोत्सव1950 में डॉ. के.एम. मुंशी ने शुरू किया, हर साल 1-7 जुलाई मानसून में, उद्देश्य जागरूकता और पौधारोपण, स्कूलों में करोड़ों पौधे लगते हैं।
चिपको आंदोलन1973 में चमोली के मंडल गांव में, नेतृत्व सुंदरलाल बहुगुणा चंडी प्रसाद भट्ट गौरा देवी, 26 मार्च 1974 रैणी में 27 महिलाओं ने पेड़ बचाए, 1980 में 1000 मीटर ऊपर 15 साल प्रतिबंध।
वन आवरण रिपोर्ट ISFR 202317वीं रिपोर्ट FSI देहरादून द्वारा 21 दिसंबर 2023 को, कुल वन और वृक्ष आवरण 25.17% 8,27,357 वर्ग किमी, वन आवरण 21.76%, वृद्धि 1445 वर्ग किमी, मप्र क्षेत्र में प्रथम मिजोरम प्रतिशत में 84.53%।
FSI देहरादूनभारतीय वन सर्वेक्षण 1 जून 1981 को स्थापित, पर्यावरण मंत्रालय के अधीन, सैटेलाइट डेटा से वन आवरण मापता है, ISFR और राष्ट्रीय वन सूची बनाता है।
CAMPACompensatory Afforestation Fund Authority 2006 में सुप्रीम कोर्ट आदेश पर, वन डायवर्जन का पैसा जमा 54000 करोड़, राज्यों को वनीकरण के लिए देता है।