ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव, समुद्र स्तर वृद्धि और नियंत्रण उपाय - पूरी जानकारी

⌄
-- Questions Environment

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव, समुद्र स्तर वृद्धि और नियंत्रण उपाय - पूरी जानकारी - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

ग्लोबल वार्मिंग के पर्यावरणीय, जैविक और आर्थिक प्रभाव, समुद्र स्तर वृद्धि के कारण, thermal expansion और भारत के NAPCC सहित नियंत्रण उपायों की जानकारी।

प्रश्न 1 / --
00:00
2%
प्रश्न 1

लोडिंग...

💡 व्याख्या

📚 विस्तृत जानकारी

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव बहुआयामी हैं और इन्हें पर्यावरणीय, जैविक, सामाजिक और आर्थिक चार श्रेणियों में समझा जा सकता है। पिछले चार दशकों में पर्वतीय हिमनदों और ध्रुवीय बर्फ की मात्रा में तेजी से कमी आई है। आर्कटिक समुद्री बर्फ, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की लैंड-बेस्ड आइस शीट तथा हिमालय जैसे पर्वतीय ग्लेशियर लगातार द्रव्यमान खो रहे हैं। इसके कारण नदियों के प्रवाह पैटर्न में बदलाव, मीठे जल की उपलब्धता में कमी और हिम-स्खलन का खतरा बढ़ रहा है।

महासागरों पर ग्लोबल वार्मिंग का दोहरा प्रभाव पड़ रहा है। पहला, महासागर अतिरिक्त गर्मी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अवशोषित कर रहे हैं, जिससे समुद्री जल का तापमान बढ़ रहा है। इससे प्रवाल विरंजन, समुद्री हीटवेव और मत्स्य वितरण में बदलाव हो रहा है। दूसरा, महासागर अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर रहे हैं, जिससे समुद्री अम्लीकरण हो रहा है। औद्योगिक क्रांति के बाद से महासागरों का औसत pH लगभग 0.1 इकाई कम हो गया है, जिससे कैल्शियम कार्बोनेट से बने जीवों जैसे प्रवाल, सीप और प्लवकों के कवच बनना कठिन हो रहा है।

चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग का सबसे स्पष्ट प्रभाव है। गर्म वायुमंडल अधिक नमी धारण करता है, जिससे एक ओर तीव्र वर्षा और बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं, तो दूसरी ओर वाष्पीकरण बढ़ने से सूखा और हीटवेव की तीव्रता भी बढ़ रही है। IPCC AR6 के अनुसार 1950 के बाद से अधिकांश स्थलीय क्षेत्रों में गर्म दिन और गर्म रातों की संख्या बढ़ी है। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में अधिक वर्षा और अधिक वायु गति देखी जा रही है। यह प्रभाव कृषि, जल संसाधन और मानव स्वास्थ्य पर सीधे असर डालता है।

जैव विविधता, कृषि और मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव गंभीर हैं। तापमान वृद्धि के कारण कई प्रजातियों के आवास ध्रुवों की ओर या अधिक ऊंचाई की ओर खिसक रहे हैं। फेनोलॉजी में बदलाव, प्रवाल मृत्यु और परागण में बाधा देखी जा रही है। कृषि में गेहूं और मक्का जैसी फसलों की उत्पादकता में प्रति डिग्री तापमान वृद्धि पर कमी देखी जा रही है, साथ ही कीट और रोगों का प्रसार बढ़ रहा है। जल संसाधनों में हिमनद आधारित नदियों में पहले बाढ़ और बाद में जल कमी का दोहरा संकट है। मानव स्वास्थ्य पर हीट स्ट्रोक, वेक्टर जनित रोगों जैसे डेंगू और मलेरिया का भौगोलिक विस्तार और खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ रहा है। आर्थिक रूप से बुनियादी ढांचे, बीमा और श्रम उत्पादकता पर भारी लागत पड़ रही है।

समुद्र स्तर वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग का सबसे दीर्घकालिक और अपरिवर्तनीय प्रभाव है। इसके दो प्रमुख कारण हैं और दोनों में अंतर समझना आवश्यक है। पहला कारण थर्मल एक्सपेंशन है, इसमें समुद्री जल गर्म होने पर फैलता है और आयतन बढ़ता है। यह प्रभाव पूरी तरह तापमान से जुड़ा है। दूसरा कारण लैंड-बेस्ड बर्फ का पिघलना है, इसमें ग्रीनलैंड और अंटार्कटिक आइस शीट तथा पर्वतीय ग्लेशियरों की बर्फ पिघलकर महासागरों में जाती है। समुद्री बर्फ के पिघलने से समुद्र स्तर नहीं बढ़ता क्योंकि वह पहले से ही पानी में तैर रही है, लेकिन लैंड-बेस्ड बर्फ के पिघलने से सीधे समुद्र स्तर बढ़ता है। उपग्रह युग 1993 से 2023 के आंकड़ों के अनुसार वैश्विक औसत समुद्र स्तर लगभग 3.4 मिलीमीटर प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है, जिसमें लगभग 40 प्रतिशत योगदान थर्मल एक्सपेंशन और लगभग 50 प्रतिशत योगदान लैंड-बेस्ड बर्फ के पिघलने का है।

समुद्र स्तर वृद्धि के परिणाम तटीय क्षेत्रों के लिए गंभीर हैं। इससे तटीय कटाव, खारे पानी का मीठे जल में घुसपैठ, सुंदरबन जैसे डेल्टा क्षेत्रों का क्षरण, और मुंबई, चेन्नई, कोच्चि जैसे निचले तटीय शहरों में बाढ़ का खतरा बढ़ता है। छोटे द्वीपीय विकासशील देशों का अस्तित्व ही खतरे में है। भारत में लगभग 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और करोड़ों तटीय आबादी होने के कारण यह एक प्रमुख भेद्यता है।

नियंत्रण उपायों को दो रणनीतियों में बांटा जाता है - मिटिगेशन और एडाप्टेशन। मिटिगेशन का अर्थ है ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और कार्बन सिंक को बढ़ाना ताकि ग्लोबल वार्मिंग की गति को रोका जा सके। एडाप्टेशन का अर्थ है जलवायु परिवर्तन के अपरिहार्य प्रभावों के साथ जीने के लिए खुद को अनुकूलित करना, जैसे सूखा सहिष्णु फसलें, बाढ़ प्रबंधन और हीट एक्शन प्लान। दोनों रणनीतियां एक दूसरे की पूरक हैं।

मिटिगेशन के प्रमुख उपायों में पहला नवीकरणीय ऊर्जा है, जैसे सौर, पवन, जल और हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देना और कोयले से बाहर निकलना। दूसरा ऊर्जा दक्षता है, जैसे PAT योजना, LED, इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा कुशल भवन। तीसरा स्वच्छ परिवहन है, जैसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सार्वजनिक परिवहन और रेल माल ढुलाई को बढ़ावा। चौथा वनीकरण और पारिस्थितिकी तंत्र बहाली है, जैसे वन, मैंग्रोव और आर्द्रभूमि का संरक्षण। पांचवां कार्बन अवशोषण तकनीकें हैं, जैसे कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज यानी CCUS और प्रत्यक्ष वायु कैप्चर। छठा सतत कृषि है, जैसे जीरो टिलेज, सटीक उर्वरक प्रबंधन और धान में AWD तकनीक।

भारत के संदर्भ में जलवायु कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना यानी NAPCC 2008 में शुरू की गई थी, जिसमें 8 राष्ट्रीय मिशन हैं - सौर मिशन, ऊर्जा दक्षता मिशन, सतत आवास, जल मिशन, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, ग्रीन इंडिया मिशन, सतत कृषि और जलवायु परिवर्तन के लिए रणनीतिक ज्ञान। भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता, पंचामृत लक्ष्य और 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, LiFE आंदोलन, और राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाएं जैसे हीट एक्शन प्लान भारत के प्रमुख प्रयास हैं।

⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु

  • ✅ हिमनदों, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की लैंड-बेस्ड बर्फ पिघल रही है, जबकि आर्कटिक समुद्री बर्फ प्रति दशक लगभग 13 प्रतिशत घट रही है।
  • ✅ महासागर 90 प्रतिशत अतिरिक्त गर्मी और 30 प्रतिशत अतिरिक्त CO2 अवशोषित कर रहे हैं, जिससे तापन और अम्लीकरण दोनों हो रहा है।
  • ✅ समुद्र स्तर वृद्धि का मुख्य कारण थर्मल एक्सपेंशन लगभग 40 प्रतिशत और लैंड-बेस्ड बर्फ का पिघलना लगभग 50 प्रतिशत है, समुद्री बर्फ पिघलने से स्तर नहीं बढ़ता।
  • ✅ 1993 से 2023 में समुद्र स्तर वृद्धि दर लगभग 3.4 मिमी प्रति वर्ष है, जिससे तटीय कटाव और खारे पानी का घुसपैठ बढ़ रहा है।
  • ✅ कृषि उत्पादकता में कमी, जल संकट, प्रवाल विरंजन और हीटवेव से स्वास्थ्य जोखिम प्रमुख जैविक और सामाजिक प्रभाव हैं।
  • ✅ नियंत्रण में मिटिगेशन के तहत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक परिवहन, वनीकरण और CCUS प्रमुख उपाय हैं।
  • ✅ भारत में NAPCC के 8 मिशन, 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म लक्ष्य, ISA और LiFE मिशन ग्लोबल वार्मिंग नियंत्रण के प्रमुख प्रयास हैं।

📊 Important Facts Table

TopicFact
वैश्विक तापमान वृद्धिIPCC AR6 के अनुसार 1850-1900 की तुलना में 2011-2020 का औसत तापमान लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
आर्कटिक समुद्री बर्फ1979 से 2023 तक आर्कटिक सितंबर समुद्री बर्फ में प्रति दशक लगभग 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
महासागर में गर्मीमानवजनित अतिरिक्त गर्मी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा महासागरों ने अवशोषित किया है, जिससे 0-2000 मीटर तक महासागर गर्म हो रहे हैं।
समुद्र स्तर वृद्धि दरसैटेलाइट अल्टीमेट्री युग 1993 से 2023 में वैश्विक औसत समुद्र स्तर लगभग 3.4 मिलीमीटर प्रति वर्ष की दर से बढ़ा है।
समुद्र स्तर वृद्धि के कारणवर्तमान समुद्र स्तर वृद्धि में लगभग 40 प्रतिशत योगदान थर्मल एक्सपेंशन और लगभग 50 प्रतिशत योगदान लैंड-बेस्ड ग्लेशियर और आइस शीट के पिघलने का है।
महासागरीय अम्लीकरण1750 के बाद से महासागरों का pH लगभग 0.1 इकाई घटा है, जो हाइड्रोजन आयन सांद्रता में लगभग 26 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
चरम मौसमIPCC AR6 के अनुसार 1950 के बाद से अधिकांश भू-भागों में गर्म चरम घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हुई है।
भारत में तटीय भेद्यताभारत की लगभग 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर लगभग 35 प्रतिशत आबादी रहती है, जो समुद्र स्तर वृद्धि के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
NAPCCराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना NAPCC 30 जून 2008 को शुरू हुई, इसमें 8 राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं।
मिटिगेशन बनाम एडाप्टेशनमिटिगेशन उत्सर्जन को कम करता है जबकि एडाप्टेशन प्रभावों के साथ अनुकूलन करता है, दोनों पेरिस समझौते के दो स्तंभ हैं।