खनिज नीति, राष्ट्रीय खनिज नीति 2019, MMDR अधिनियम 1957, सतत खनन, खनिज संरक्षण

⌄
-- Questions Environment

खनिज नीति, राष्ट्रीय खनिज नीति 2019, MMDR अधिनियम 1957, सतत खनन, खनिज संरक्षण - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

खनिज नीति, राष्ट्रीय खनिज नीति 2019, खनन के पर्यावरणीय प्रभाव, सतत खनन, खनिज संरक्षण, खनन कानून, MMDR अधिनियम 1957 और खनिजों के पुनर्चक्रण पर 600+ शब्दों में जानकारी।

प्रश्न 1 / --
00:00
2%
प्रश्न 1

लोडिंग...

💡 व्याख्या

📚 विस्तृत जानकारी

खनिज नीति Mineral Policy खनिज संसाधनों के उपयोग, संरक्षण और प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीति है। भारत में खनिज नीति का मुख्य उद्देश्य खनिजों का वैज्ञानिक, सतत और पर्यावरण अनुकूल दोहन करना है। भारत की पहली खनिज नीति 1961 में बनी थी, दूसरी 1990 में और तीसरी राष्ट्रीय खनिज नीति 2008 में बनी थी। खनिज नीति में खनन, अन्वेषण, लाइसेंस, पर्यावरण संरक्षण, आदिवासियों के अधिकार और राजस्व के बारे में प्रावधान होते हैं। खनिज नीति में निजी क्षेत्र की भागीदारी, विदेशी निवेश और तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया जाता है। खनिज नीति का उद्देश्य आत्मनिर्भरता और Make in India को बढ़ावा देना भी है। खनिज नीति खान मंत्रालय द्वारा बनाई जाती है। राष्ट्रीय खनिज नीति 2019 वर्तमान में लागू नीति है। यह नीति 28 फरवरी 2019 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित की गई थी और यह 2008 की नीति की जगह लाई गई है। इस नीति को के. राजेश्वर राव समिति की सिफारिश पर बनाया गया था। राष्ट्रीय खनिज नीति 2019 के मुख्य उद्देश्य हैं - पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त नीलामी, निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन, अन्वेषण को बढ़ावा, सतत खनन और पर्यावरण संरक्षण। इस नीति में प्राइवेट सेक्टर को अन्वेषण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए OAMPP यानी Open Acreage Mining Policy लाई गई है। इस नीति में खनन को उद्योग का दर्जा देने की बात कही गई है। इस नीति में 2022-23 तक खनिज उत्पादन को 200% बढ़ाने का लक्ष्य था। इस नीति में समुद्र से खनिज निकालने और गहरे खनन को भी बढ़ावा दिया गया है। इस नीति में MMDR अधिनियम को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। इस नीति में इंटर जेनरेशनल इक्विटी यानी भावी पीढ़ियों के लिए खनिज बचाने पर भी जोर दिया गया है। खनन के पर्यावरणीय प्रभाव बहुत गंभीर होते हैं। खनन से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा अपरदन, जैव विविधता का विनाश, वनों की कटाई और भूजल स्तर में गिरावट होती है। खुले खदानों Open Cast Mining से सबसे अधिक पर्यावरणीय नुकसान होता है। खनन से धूल, शोर और कंपन होता है। खनन के कारण कई गांवों का विस्थापन होता है और आदिवासियों की आजीविका खत्म होती है। उदाहरण के लिए गोवा में लौह अयस्क खनन से वायु और जल प्रदूषण, झारखंड में कोयला खनन से भूमि धंसना और ओडिशा में बॉक्साइट खनन से आदिवासी विरोध देखने को मिला है। खनन से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी होता है। खनन के कारण एसिड माइन ड्रेनेज होता है जो जल को जहरीला बना देता है। इसलिए खनन के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन EIA अनिवार्य है और पर्यावरण मंजूरी लेनी पड़ती है। सतत खनन Sustainable Mining खनन का ऐसा तरीका है जिसमें पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था तीनों का संतुलन रखा जाता है। सतत खनन का अर्थ है खनिजों का इस तरह से दोहन करना कि वर्तमान जरूरतें पूरी हों लेकिन भावी पीढ़ियों के लिए भी खनिज बचे रहें और पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। सतत खनन के लिए कई उपाय हैं - वैज्ञानिक खनन, बैकफिलिंग यानी खदान को फिर से भरना, वृक्षारोपण, जल प्रबंधन, कम अपशिष्ट तकनीक और समुदाय की भागीदारी। भारत में सतत खनन के लिए Sustainable Development Framework SDF 2011 में लाया गया था। इसमें 5 स्टार रेटिंग प्रणाली है जिसमें खानों को पर्यावरण संरक्षण के लिए रेटिंग दी जाती है। सतत खनन में जीरो वेस्ट माइनिंग पर जोर दिया जाता है। सतत खनन SDG 12 जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन से जुड़ा है। खनिज संरक्षण Mineral Conservation बहुत जरूरी है क्योंकि खनिज अनवीकरणीय संसाधन हैं। एक बार खत्म होने पर करोड़ों साल लगते हैं। खनिज संरक्षण के उपाय हैं - खनिजों का कुशल उपयोग, निम्न श्रेणी के अयस्क का उपयोग, प्रतिस्थापन यानी विकल्प खोजना, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग। भारत में खनिज संरक्षण के लिए Indian Bureau of Mines IBM नागपुर में 1948 में स्थापित किया गया है जो खनिज संरक्षण पर काम करता है। खनिज संरक्षण के लिए राष्ट्रीय खनिज नीति 2019 में जीरो वेस्ट माइनिंग पर जोर दिया गया है। खनिज संरक्षण में 3R - Reduce, Reuse, Recycle का सिद्धांत अपनाया जाता है। खनन कानून भारत में खनन को नियंत्रित करने के लिए कई कानून हैं। सबसे महत्वपूर्ण MMDR अधिनियम 1957 है। इसके अलावा खान अधिनियम 1952 जो खदानों में सुरक्षा के लिए है, कोयला खान अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वन संरक्षण अधिनियम 1980 और आदिवासियों के लिए PESA 1996 और FRA 2006 हैं। खनन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी EIA अधिसूचना 2006 के तहत लेनी पड़ती है। MMDR अधिनियम 1957 Mines and Minerals Development and Regulation Act भारत में खनन का मुख्य कानून है। यह अधिनियम 1957 में बना था और इसमें कई बार संशोधन हुए हैं - 2015, 2016, 2020, 2021 और 2023 में। इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार खनिजों के विकास और विनियमन के लिए नियम बनाती है। 2015 के संशोधन में नीलामी प्रणाली लाई गई जिससे पारदर्शिता आई और 2021 के संशोधन में कैप्टिव और गैर-कैप्टिव का अंतर खत्म किया गया और निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया। इस अधिनियम के तहत DMF यानी District Mineral Foundation बनाया गया है जो खनन प्रभावित लोगों के कल्याण के लिए है और इसमें खनन कंपनियां रॉयल्टी का 10-30% देती हैं। NMET यानी National Mineral Exploration Trust भी बनाया गया है। खनिजों का पुनर्चक्रण Recycling खनिज संरक्षण का सबसे प्रभावी उपाय है। पुनर्चक्रण का अर्थ है पुराने धातुओं को पिघला कर फिर से उपयोग करना। उदाहरण के लिए लोहे, एल्युमीनियम, तांबा और सोने का पुनर्चक्रण किया जाता है। एल्युमीनियम के पुनर्चक्रण से 95% ऊर्जा बचती है और 97% प्रदूषण कम होता है। भारत में ई-कचरे से सोना, चांदी और तांबा निकाला जाता है। शहरी खनन Urban Mining भी पुनर्चक्रण का रूप है जिसमें कचरे से खनिज निकाले जाते हैं। पुनर्चक्रण से खनन पर दबाव कम होता है, ऊर्जा बचती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। भारत में धातु पुनर्चक्रण नीति 2019 और Vehicle Scrappage Policy 2021 पुनर्चक्रण को बढ़ावा दे रही हैं।

⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु

  • ✅ खनिज नीति पहली 1961 दूसरी 1990 तीसरी 2008, राष्ट्रीय खनिज नीति 2019 28 फरवरी को राजेश्वर राव समिति, OAMPP निजी अन्वेषण उद्योग का दर्जा।
  • ✅ खनन के पर्यावरणीय प्रभाव वायु जल मृदा प्रदूषण जैव विविधता विनाश एसिड माइन ड्रेनेज विस्थापन, EIA अनिवार्य, गोवा झारखंड उदाहरण।
  • ✅ सतत खनन पर्यावरण समाज अर्थव्यवस्था संतुलन, बैकफिलिंग जीरो वेस्ट 5 स्टार रेटिंग SDF 2011, भावी पीढ़ी के लिए संरक्षण SDG 12।
  • ✅ खनिज संरक्षण अनवीकरणीय 3R Reduce Reuse Recycle, IBM नागपुर 1948, निम्न श्रेणी अयस्क उपयोग प्रतिस्थापन पुनर्चक्रण।
  • ✅ MMDR 1957 मुख्य कानून संशोधन 2015 नीलामी 2021 कैप्टिव अंतर खत्म, DMF 10-30% रॉयल्टी PMKKKY, NMET अन्वेषण ट्रस्ट।
  • ✅ खनन कानून - खान अधिनियम 1952 सुरक्षा, पर्यावरण 1986 वन 1980, PESA 1996 FRA 2006 आदिवासी अधिकार, EIA 2006 मंजूरी।
  • ✅ पुनर्चक्रण एल्युमीनियम 95% ऊर्जा बचत, ई-कचरे से सोना Urban Mining, धातु पुनर्चक्रण नीति 2019 स्क्रैपेज नीति 2021, खनन दबाव कम।

📊 Important Facts Table

TopicFact
खनिज नीतिपहली 1961 दूसरी 1990 तीसरी 2008 में, उद्देश्य वैज्ञानिक सतत पर्यावरण अनुकूल दोहन, खान मंत्रालय बनाता है, निजी निवेश और Make in India को बढ़ावा।
राष्ट्रीय खनिज नीति 201928 फरवरी 2019 को अनुमोदित, के. राजेश्वर राव समिति की सिफारिश, लक्ष्य खनिज उत्पादन 200% बढ़ाना, OAMPP निजी अन्वेषण, खनन को उद्योग का दर्जा, इंटर जेनरेशनल इक्विटी।
खनन के पर्यावरणीय प्रभाववायु जल मृदा प्रदूषण, जैव विविधता विनाश, वन कटाई, भूजल गिरावट, एसिड माइन ड्रेनेज, विस्थापन, गोवा लौह अयस्क झारखंड कोयला उदाहरण, EIA अनिवार्य।
सतत खननपर्यावरण समाज अर्थव्यवस्था संतुलन, उपाय बैकफिलिंग वृक्षारोपण जीरो वेस्ट, SDF 2011 और 5 स्टार रेटिंग, SDG 12 से जुड़ा, भावी पीढ़ी के लिए संरक्षण।
खनिज संरक्षणखनिज अनवीकरणीय करोड़ों साल में बनते हैं, उपाय कुशल उपयोग निम्न श्रेणी अयस्क प्रतिस्थापन पुनर्चक्रण, IBM नागपुर 1948, 3R सिद्धांत Reduce Reuse Recycle।
खनन कानूनमुख्य MMDR 1957, खान अधिनियम 1952 सुरक्षा के लिए, पर्यावरण संरक्षण 1986, वन संरक्षण 1980, PESA 1996 FRA 2006 आदिवासियों के लिए, EIA 2006 मंजूरी अनिवार्य।
MMDR अधिनियम 19571957 में बना मुख्य कानून, संशोधन 2015 2020 2021 2023, 2015 में नीलामी प्रणाली, 2021 में कैप्टिव गैर-कैप्टिव अंतर खत्म, DMF 10-30% रॉयल्टी, NMET अन्वेषण ट्रस्ट।
खनिजों का पुनर्चक्रणपुरानी धातु पिघला कर पुन: उपयोग, एल्युमीनियम में 95% ऊर्जा बचत, ई-कचरे से सोना चांदी तांबा, शहरी खनन Urban Mining, धातु पुनर्चक्रण नीति 2019 स्क्रैपेज नीति 2021।
DMFDistrict Mineral Foundation 2015 संशोधन से बना, खनन प्रभावित क्षेत्र के लिए, रॉयल्टी का 10% नीलामी खदान पर 30% पुरानी खदान पर, PMKKKY से जुड़ा।
IBMIndian Bureau of Mines नागपुर में 1 मार्च 1948 को स्थापित, खनिज संरक्षण और वैज्ञानिक खनन के लिए, खान मंत्रालय के अधीन, खानों का निरीक्षण करता है।