नमामि गंगे कार्यक्रम क्या है? इतिहास, उद्देश्य, घटक और NMCG की भूमिका
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नमामि गंगे कार्यक्रम का इतिहास, उद्देश्य, प्रमुख घटक, गंगा प्रदूषण के स्रोत, National Mission for Clean Ganga NMCG की भूमिका और गंगा संरक्षण की पूरी जानकारी।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
नमामि गंगे कार्यक्रम की पृष्ठभूमि गंगा नदी के सांस्कृतिक, आर्थिक और पारिस्थितिक महत्व से जुड़ी है। गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसकी लंबाई लगभग 2525 किलोमीटर है और इसका बेसिन भारत के 11 राज्यों में फैला है। यह लगभग 40 प्रतिशत आबादी को जल, कृषि और आजीविका प्रदान करती है। तेजी से शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण गंगा में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ गया था, इसलिए इसके संरक्षण के लिए एक एकीकृत मिशन की आवश्यकता महसूस हुई।
गंगा संरक्षण के प्रयास पहले भी हुए हैं। गंगा एक्शन प्लान यानी GAP की शुरुआत 1985 में हुई थी, जिसे 1993 में दूसरे चरण में यमुना और गोमती तक बढ़ाया गया था। 2009 में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण यानी NGRBA बनाया गया और 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया था। लेकिन ये कार्यक्रम केवल सीवेज ट्रीटमेंट तक सीमित थे और टुकड़ों में लागू हुए, इसलिए अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इन अनुभवों से सीखते हुए सरकार ने एक समग्र और बेसिन आधारित दृष्टिकोण अपनाया, जो Namami Gange के रूप में सामने आया।
Namami Gange Programme की शुरुआत केंद्र सरकार ने 2014-15 के बजट में की थी। इसे 13 मई 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में मंजूरी दी। इसका पूरा नाम National Mission for Clean Ganga के तहत नमामि गंगे मिशन है। इसे गंगा की अविरलता और निर्मलता को पुनर्जीवित करने के लिए एक एकीकृत संरक्षण मिशन के रूप में डिजाइन किया गया है। यह केवल सफाई कार्यक्रम नहीं बल्कि नदी के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के पुनरुद्धार का कार्यक्रम है।
नमामि गंगे के प्रमुख उद्देश्य गंगा संरक्षण की मूल अवधारणा पर आधारित हैं। पहला उद्देश्य प्रदूषण का प्रभावी उन्मूलन है, ताकि गंगा के जल में किसी भी प्रकार का अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरा न जाए। दूसरा उद्देश्य नदी के पारिस्थितिक प्रवाह यानी e-flow को बनाए रखना और अविरल धारा सुनिश्चित करना है। तीसरा उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण है, विशेष रूप से गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, कछुए और हिलसा जैसी प्रजातियों का। चौथा उद्देश्य घाटों, नदी तटों और आर्द्रभूमि का विकास और सौंदर्यीकरण है ताकि गंगा से लोगों का सांस्कृतिक जुड़ाव बना रहे। पांचवा उद्देश्य जन-जागरूकता और जन-भागीदारी के माध्यम से गंगा को जन-आंदोलन बनाना है।
नमामि गंगे कार्यक्रम के प्रमुख घटक इसकी व्यापकता को दर्शाते हैं। पहला घटक सीवेज प्रबंधन है, जो सबसे महत्वपूर्ण है। इसके तहत गंगा किनारे के शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP का निर्माण, पुराने STP का पुनर्निर्माण और सीवर नेटवर्क बिछाना शामिल है। दूसरा घटक औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण है, जिसमें अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की निगरानी और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज को बढ़ावा देना है। तीसरा घटक नदी सतह की सफाई है, जिसमें ठोस कचरे, प्लास्टिक और शवों को हटाना शामिल है। चौथा घटक घाट एवं नदी तट विकास है, जिसमें घाटों की मरम्मत, श्मशान घाटों का आधुनिकीकरण और रिवर फ्रंट डेवलपमेंट शामिल है।
पांचवा घटक जैव विविधता संरक्षण और वनीकरण है। इसके तहत गंगा बेसिन में 1.34 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में वनीकरण, गंगा डॉल्फिन संरक्षण, कछुआ और घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। छठा घटक जन-जागरूकता है, जिसमें गंगा मित्र, गंगा प्रहरी, स्कूल कार्यक्रम और नमामि गंगे थीम पर जागरूकता अभियान शामिल हैं। सातवां घटक संस्थागत क्षमता निर्माण और अनुसंधान है, जिसमें cGanga सेंटर और विभिन्न IITs के साथ सहयोग शामिल है। यह कार्यक्रम केवल मुख्य धारा गंगा तक सीमित नहीं है, बल्कि यमुना, रामगंगा, काली, कोसी और अन्य सहायक नदियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
National Mission for Clean Ganga यानी NMCG इस कार्यक्रम की कार्यान्वयन एजेंसी है। NMCG की स्थापना 12 अगस्त 2011 को सोसाइटी के रूप में हुई थी और 7 अक्टूबर 2016 को इसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत प्राधिकरण का दर्जा दिया गया। NMCG जल शक्ति मंत्रालय के तहत कार्य करता है और यह नमामि गंगे का शीर्ष निकाय है। राज्य स्तर पर State Programme Management Groups यानी SPMGs और जिला स्तर पर District Ganga Committees बनाई गई हैं। केंद्र सरकार नीति और वित्त प्रदान करती है, राज्य सरकारें परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में भूमिका निभाती हैं, और स्थानीय निकाय यानी नगर पालिकाएं सीवेज और घाट प्रबंधन में सहयोग करती हैं। गंगा में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत लगभग 75 प्रतिशत घरेलू सीवेज, 10 से 12 प्रतिशत औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह, खुले में शौच और ठोस कचरा हैं, जिन्हें नमामि गंगे के विभिन्न घटकों के माध्यम से लक्षित किया जा रहा है।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ नमामि गंगे को 13 मई 2015 को 20,000 करोड़ रुपये के साथ गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए फ्लैगशिप मिशन के रूप में मंजूरी मिली।
- ✅ NMCG यानी National Mission for Clean Ganga 2011 में बनी और 2016 में प्राधिकरण बनी, यह जल शक्ति मंत्रालय के तहत शीर्ष एजेंसी है।
- ✅ मुख्य उद्देश्य प्रदूषण उन्मूलन, e-flow बनाए रखना, जैव विविधता संरक्षण और गंगा को जन-आंदोलन बनाना है।
- ✅ गंगा में प्रदूषण का लगभग 75 प्रतिशत घरेलू सीवेज से आता है, बाकी औद्योगिक और ठोस कचरे से है।
- ✅ प्रमुख घटकों में STP निर्माण, औद्योगिक निगरानी, घाट विकास, वनीकरण और गंगा डॉल्फिन संरक्षण शामिल हैं।
- ✅ यह कार्यक्रम केवल मुख्य गंगा नहीं बल्कि यमुना, रामगंगा, काली सहित सहायक नदियों और 11 राज्यों के बेसिन को कवर करता है।
- ✅ केंद्र नीति और वित्त देता है, राज्य SPMGs के माध्यम से क्रियान्वयन करते हैं और स्थानीय निकाय सीवेज प्रबंधन में सहयोग करते हैं।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| कार्यक्रम की मंजूरी | नमामि गंगे कार्यक्रम को 13 मई 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी। |
| शुरुआत | इसकी घोषणा 2014-15 के केंद्रीय बजट में फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में की गई थी। |
| NMCG की स्थापना | National Mission for Clean Ganga यानी NMCG की स्थापना 12 अगस्त 2011 को हुई और 7 अक्टूबर 2016 को इसे प्राधिकरण का दर्जा मिला। |
| मंत्रालय | NMCG जल शक्ति मंत्रालय के तहत कार्य करता है और नमामि गंगे की शीर्ष कार्यान्वयन एजेंसी है। |
| राष्ट्रीय नदी का दर्जा | गंगा को 4 नवंबर 2008 को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया था। |
| गंगा की लंबाई और बेसिन | गंगा की लंबाई लगभग 2525 किलोमीटर है और इसका बेसिन 11 राज्यों में फैला है, मुख्य धारा 5 राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से गुजरती है। |
| मुख्य उद्देश्य | मुख्य उद्देश्य अविरल और निर्मल गंगा यानी प्रदूषण मुक्त और निरंतर प्रवाह वाली गंगा को पुनर्जीवित करना है। |
| प्रदूषण के स्रोत | गंगा प्रदूषण का लगभग 75 प्रतिशत घरेलू सीवेज से आता है, बाकी औद्योगिक अपशिष्ट, ठोस कचरा और कृषि अपवाह से है। |
| पहले के प्रयास | गंगा एक्शन प्लान 1985 में शुरू हुआ था और NGRBA 2009 में बना था, लेकिन ये केवल सीवेज ट्रीटमेंट तक सीमित थे। |
| प्रमुख घटक | प्रमुख घटक हैं - सीवेज प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, नदी सतह सफाई, घाट विकास, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और जन-जागरूकता। |