National Green Tribunal क्या है? NGT स्थापना, संरचना और अधिकार क्षेत्र
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National Green Tribunal यानी NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010, NGT Act 2010, संरचना Chairperson, Judicial और Expert Members, Benches, अधिकार क्षेत्र और environmental justice की पूरी जानकारी।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
National Green Tribunal यानी NGT की स्थापना की पृष्ठभूमि भारत में पर्यावरणीय न्याय की विशेष आवश्यकता से जुड़ी है। 1980 और 1990 के दशक में पर्यावरणीय मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी और सामान्य अदालतों में तकनीकी विशेषज्ञता की कमी महसूस हुई। उच्चतम न्यायालय ने M.C. Mehta और अन्य मामलों में पर्यावरणीय विवादों के लिए विशेष न्यायाधिकरण की आवश्यकता पर बल दिया। विधि आयोग ने अपनी 186वीं रिपोर्ट में भी पर्यावरण न्यायालयों की स्थापना की सिफारिश की थी। राष्ट्रीय पर्यावरण नीति 2006 में भी specialized environmental tribunal की बात कही गई थी। इन सब कारणों से पर्यावरणीय मामलों के त्वरित और विशेषज्ञता आधारित निपटारे के लिए NGT की आवश्यकता महसूस हुई।
National Green Tribunal Act, 2010 और NGT की स्थापना के बीच सीधा संबंध है। संसद ने National Green Tribunal Act, 2010 को 2 जून 2010 को पारित किया और यह अधिनियम 18 अक्टूबर 2010 को लागू हुआ। इसी तिथि को National Green Tribunal की औपचारिक स्थापना हुई। यह अधिनियम NGT को वैधानिक दर्जा, संरचना, अधिकार क्षेत्र और प्रक्रिया प्रदान करता है। NGT एक statutory body है, संवैधानिक निकाय नहीं है।
NGT का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और त्वरित निपटारा करना है। इसका उद्देश्य पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार के प्रवर्तन, पर्यावरणीय क्षति के लिए राहत और मुआवजा देना और पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों का समाधान करना है। NGT का उद्देश्य 6 महीने के भीतर मामलों का निपटारा करना है ताकि speedy environmental justice सुनिश्चित हो सके।
NGT की संरचना इसकी सबसे बड़ी विशेषता है, क्योंकि इसमें न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञता का संयोजन है। NGT में एक Chairperson होता है, जो भारत के उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रह चुका हो। इसके अलावा Judicial Members होते हैं जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके होते हैं और Expert Members होते हैं जिनके पास पर्यावरण, वन, प्रदूषण नियंत्रण या संबंधित विज्ञान में कम से कम 15 वर्ष का अनुभव और विशेषज्ञता होती है। Judicial Member कानूनी पहलू देखते हैं और Expert Member तकनीकी पहलू देखते हैं। Chairperson की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से की जाती है।
NGT की Benches की जानकारी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। NGT का Principal Bench नई दिल्ली में स्थित है। इसके अलावा चार क्षेत्रीय Benches हैं - Eastern Bench कोलकाता में, Central Bench भोपाल में, Southern Bench चेन्नई में और Western Bench पुणे में। Principal Bench में कम से कम 10 और अधिकतम 20 पूर्णकालिक Judicial और Expert Members होते हैं। आवश्यकता पड़ने पर Circuit Benches भी लगाई जाती हैं।
NGT के अधिकार क्षेत्र यानी jurisdiction को दो भागों में समझा जा सकता है। पहला original jurisdiction है, जिसके तहत NGT पर्यावरण से संबंधित substantial question और उन मामलों की सुनवाई कर सकता है जो Schedule I में शामिल कानूनों के कार्यान्वयन से उत्पन्न होते हैं। Substantial question relating to environment का अर्थ है ऐसा प्रश्न जो पर्यावरण की गुणवत्ता, प्रदूषण, वन और जैव विविधता को सीधे प्रभावित करता है और जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य या पर्यावरणीय क्षति का बड़ा मुद्दा हो। दूसरा appellate jurisdiction है, जिसके तहत NGT विभिन्न पर्यावरणीय कानूनों के तहत दी गई मंजूरियों, आदेशों और निर्णयों के खिलाफ अपील सुनता है।
NGT Act की Schedule I में 7 प्रमुख पर्यावरणीय कानून शामिल हैं, जिनके संदर्भ में NGT को अधिकार है। इनमें जल अधिनियम 1974, जल उपकर अधिनियम 1977, वन संरक्षण अधिनियम 1980, वायु अधिनियम 1981, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, लोक दायित्व बीमा अधिनियम 1991 और जैव विविधता अधिनियम 2002 शामिल हैं। NGT केवल इन्हीं कानूनों से संबंधित civil cases की सुनवाई कर सकता है।
NGT का स्वरूप criminal court नहीं है, यह एक specialized civil tribunal है। इसे पर्यावरणीय क्षति के लिए मुआवजा, प्रतिपूर्ति और पर्यावरणीय बहाली यानी restoration का आदेश देने का अधिकार है। NGT पर्यावरणीय क्षति के लिए प्रदूषक भुगतान सिद्धांत यानी Polluter Pays Principle, एहतियाती सिद्धांत और सतत विकास के सिद्धांतों को लागू करता है। NGT के आदेश के खिलाफ 90 दिनों के भीतर उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है, जो धारा 22 के तहत प्रावधान है।
NGT और सामान्य civil courts के संबंध में धारा 29 महत्वपूर्ण है। जहां NGT को अधिकार क्षेत्र प्राप्त है, वहां किसी भी civil court को मुकदमा सुनने का अधिकार नहीं होगा। हालांकि उच्च न्यायालयों का रिट अधिकार क्षेत्र अनुच्छेद 226 और उच्चतम न्यायालय का अधिकार क्षेत्र अनुच्छेद 32 के तहत बना रहता है। NGT की कार्यवाही Civil Procedure Code 1908 से बाध्य नहीं है बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है। NGT की भाषा सरल है और यह पर्यावरणीय न्याय को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करता है।
निष्कर्ष में NGT भारत में specialized environmental justice mechanism के रूप में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञता को एक मंच पर लाता है, पर्यावरणीय मामलों में 6 महीने में त्वरित न्याय का लक्ष्य रखता है, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और बहाली का अधिकार रखता है और सामान्य अदालतों की तुलना में अधिक विशेषज्ञ और प्रभावी मंच प्रदान करता है।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को NGT Act 2010 के तहत speedy environmental justice के लिए हुई।
- ✅ संरचना में Chairperson, Judicial Members और Expert Members होते हैं, जो न्यायिक और तकनीकी विशेषज्ञता का संयोजन है।
- ✅ Principal Bench नई दिल्ली में है और 4 क्षेत्रीय Benches कोलकाता, भोपाल, चेन्नई और पुणे में स्थित हैं।
- ✅ Original jurisdiction में substantial question relating to environment और Schedule I के 7 कानूनों से जुड़े civil मामलों की सुनवाई होती है।
- ✅ NGT criminal court नहीं है, यह मुआवजा और पर्यावरणीय बहाली का आदेश देने वाला specialized civil tribunal है।
- ✅ धारा 29 के तहत जहां NGT का अधिकार है वहां civil court का अधिकार नहीं है, लेकिन HC और SC के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं।
- ✅ NGT 6 महीने में मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखता है और भारत में विशेषज्ञता आधारित पर्यावरणीय न्याय तंत्र के रूप में महत्वपूर्ण है।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| अधिनियम और स्थापना | National Green Tribunal Act, 2010 2 जून 2010 को पारित हुआ और NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को हुई। |
| Principal Bench | Principal Bench नई दिल्ली में है, अन्य 4 क्षेत्रीय Benches कोलकाता, भोपाल, चेन्नई और पुणे में हैं। |
| Chairperson की योग्यता | Chairperson उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रह चुका होना चाहिए। |
| सदस्यों की संरचना | NGT में Judicial Members और Expert Members होते हैं, Expert Member को पर्यावरण क्षेत्र में 15 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। |
| Original Jurisdiction | Original jurisdiction के तहत substantial question relating to environment और Schedule I कानूनों से जुड़े civil मामलों की सुनवाई होती है। |
| Appellate Jurisdiction | Appellate jurisdiction के तहत पर्यावरणीय मंजूरियों और आदेशों के खिलाफ अपील सुनी जाती है। |
| Schedule I कानून | Schedule I में 7 कानून हैं - जल अधिनियम 1974, वन संरक्षण 1980, वायु अधिनियम 1981, पर्यावरण संरक्षण 1986, जैव विविधता 2002 सहित। |
| Civil प्रकृति | NGT criminal court नहीं है, यह civil tribunal है जिसे मुआवजा, प्रतिपूर्ति और पर्यावरणीय बहाली का आदेश देने का अधिकार है। |
| Civil Court पर रोक | धारा 29 के अनुसार जहां NGT को अधिकार है वहां civil court को अधिकार नहीं है, लेकिन HC और SC का रिट अधिकार बरकरार है। |
| अपील | NGT के आदेश के खिलाफ 90 दिनों के भीतर धारा 22 के तहत उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है। |