ओजोन परत की परिभाषा, महत्व और ओजोन छिद्र | CFC और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल | Ozone Depletion Quiz

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ओजोन परत की परिभाषा, महत्व, ओजोन छिद्र, ओजोन क्षरण पदार्थ, CFC, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और ओजोन क्षरण के प्रभाव पर 50 MCQs। हिंदी में Quiz खेलें।

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💡 व्याख्या

📚 विस्तृत जानकारी

ओजोन परत की परिभाषा ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बने अणु O3 की एक परत के रूप में दी जाती है जो पृथ्वी के समतापमंडल यानी स्ट्रेटोस्फीयर में स्थित है। यह परत मुख्य रूप से 15 से 35 किलोमीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है, जिसे ओजोन मंडल कहते हैं। ओजोन का निर्माण ऑक्सीजन अणु O2 पर सूर्य की पराबैंगनी किरणों की क्रिया से होता है। जब UV किरणें O2 को तोड़ती हैं तो मुक्त ऑक्सीजन परमाणु O2 से मिलकर O3 बनाते हैं। इस परत की मोटाई को डॉबसन यूनिट में मापा जाता है। औसतन वैश्विक ओजोन परत की मोटाई 300 डॉबसन यूनिट है। ओजोन परत की खोज 1913 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक चार्ल्स फैब्री और हेनरी ब्यूसन ने की थी। ओजोन परत का महत्व पृथ्वी पर जीवन के लिए सुरक्षा कवच के रूप में है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के 97 से 99 प्रतिशत भाग को अवशोषित कर लेती है। विशेष रूप से यह UV-C जो 100-280 नैनोमीटर और UV-B जो 280-315 नैनोमीटर तरंगदैर्ध्य की हैं, को रोकती है। UV-C पूरी तरह से ओजोन द्वारा रोक ली जाती है जबकि UV-B का अधिकांश भाग अवशोषित होता है। यदि ओजोन परत न होती तो UV विकिरण सीधे पृथ्वी पर आती और सभी जीवों का DNA नष्ट हो जाता। यह परत समतापमंडल के तापमान को भी नियंत्रित करती है क्योंकि UV को अवशोषित करने से समतापमंडल गर्म रहता है। इसीलिए ओजोन परत को पृथ्वी का सनस्क्रीन कहा जाता है। ओजोन छिद्र का अर्थ ओजोन परत में ओजोन की सांद्रता में अत्यधिक कमी से है। तकनीकी रूप से जब ओजोन की मोटाई 220 डॉबसन यूनिट से कम हो जाती है तो उसे ओजोन छिद्र कहा जाता है। ओजोन छिद्र की खोज सबसे पहले ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण के वैज्ञानिक जो फार्मन, ब्रायन गार्डिनर और जोनाथन शैंकलिन ने 1985 में अंटार्कटिका के ऊपर की थी। नासा के सैटेलाइट ने भी इसकी पुष्टि की। अंटार्कटिका में हर साल अगस्त से अक्टूबर यानी दक्षिणी गोलार्ध की बसंत में ओजोन छिद्र बनता है। सबसे बड़ा ओजोन छिद्र 2000 में 28.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर का दर्ज किया गया था। 2023 में इसका आकार लगभग 26 मिलियन वर्ग किलोमीटर था। आर्कटिक में भी छोटा ओजोन छिद्र बनता है लेकिन अंटार्कटिका जितना बड़ा नहीं होता क्योंकि वहां ध्रुवीय भंवर पोलर वोर्टेक्स अधिक स्थिर होता है। ओजोन क्षरण पदार्थ यानी ODS वे रसायन हैं जो ओजोन परत को नष्ट करते हैं। इनमें क्लोरीन और ब्रोमीन परमाणु होते हैं। मुख्य ODS हैं - क्लोरोफ्लोरोकार्बन CFCs, हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन HCFCs, हैलोन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म और मिथाइल ब्रोमाइड। इनमें सबसे खतरनाक हैलोन है जिसमें ब्रोमीन होता है जो क्लोरीन से 60 गुना अधिक ओजोन नष्ट करता है। इन पदार्थों की ओजोन क्षरण क्षमता ODP से मापी जाती है। CFC-11 का ODP 1 माना जाता है। CFCs बहुत स्थिर होते हैं और समतापमंडल में 50 से 100 वर्ष तक बने रहते हैं। ये पदार्थ मुख्यतः मानव निर्मित हैं और रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और स्प्रे में उपयोग होते थे। CFC यानी क्लोरोफ्लोरोकार्बन ओजोन क्षरण का मुख्य कारण है। CFC का आविष्कार 1928 में थॉमस मिडग्ले जूनियर ने किया था। यह गैर-विषाक्त, गैर-ज्वलनशील और बहुत स्थिर रसायन है, इसलिए इसे रेफ्रिजरेटर, AC, फोम, स्प्रे और सफाई में उपयोग किया जाने लगा। CFC के सामान्य नाम हैं - CFC-11 जिसे R-11 कहते हैं, CFC-12 जिसे R-12, CFC-113 आदि। CFC समतापमंडल में पहुंचकर UV किरणों से टूट जाते हैं और क्लोरीन परमाणु छोड़ते हैं। एक क्लोरीन परमाणु 1 लाख ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। इसकी क्रियाविधि 1974 में मारियो मोलिना और शेरवुड रोलैंड ने बताई थी, जिसके लिए उन्हें 1995 में नोबेल पुरस्कार मिला। अभिक्रिया Cl + O3 -> ClO + O2 और ClO + O -> Cl + O2 के रूप में चलती है। CFC-12 का जीवनकाल 100 वर्ष है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत की रक्षा के लिए सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय संधि है। इस पर 16 सितंबर 1987 को 46 देशों ने हस्ताक्षर किए और 1 जनवरी 1989 को लागू हुआ। इस प्रोटोकॉल का उद्देश्य ODS के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है। यह संयुक्त राष्ट्र इतिहास की सबसे सफल संधि है क्योंकि 198 देशों ने इसकी पुष्टि की है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत CFCs को 2010 तक विकसित देशों में और 2015 तक विकासशील देशों में समाप्त कर दिया गया। इसके बाद HCFCs को भी समाप्त किया जा रहा है, विकसित देशों में 2020 तक और विकासशील में 2030 तक। 2016 में किगाली संशोधन जोड़ा गया जिसके तहत HFCs जो ग्रीनहाउस गैस हैं, उन्हें भी 80 प्रतिशत तक कम करना है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के कारण 98 प्रतिशत ODS समाप्त हो चुके हैं और अनुमान है कि ओजोन परत 2066 तक अंटार्कटिका में और 2045 तक आर्कटिक में ठीक हो जाएगी। 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है। ओजोन क्षरण के प्रभाव मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और जलवायु पर बहुत गंभीर होते हैं। मानव स्वास्थ्य पर UV-B बढ़ने से त्वचा कैंसर, विशेषकर मेलेनोमा, मोतियाबिंद और प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होना होता है। WHO के अनुसार 1 प्रतिशत ओजोन कमी से 2 प्रतिशत UV-B बढ़ती है और त्वचा कैंसर में 3 से 6 प्रतिशत वृद्धि होती है। आंखों में मोतियाबिंद के मामले बढ़ जाते हैं। पर्यावरण पर प्रभाव में फसलों की पैदावार में कमी आती है, सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलें प्रभावित होती हैं। जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में फाइटोप्लांकटन नष्ट होते हैं जिससे पूरी खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। जलवायु पर भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि ओजोन खुद एक ग्रीनहाउस गैस है और CFCs भी 1000 गुना अधिक ग्रीनहाउस प्रभाव वाली गैसें हैं। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने ग्लोबल वार्मिंग को भी 0.5 डिग्री तक कम करने में मदद की है।

⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु

  • ✅ ओजोन परत O3 की परत है जो 15 से 35 किमी समतापमंडल में है, मोटाई 300 डॉबसन यूनिट, 97 से 99 प्रतिशत UV रोकती है।
  • ✅ ओजोन छिद्र 220 डॉबसन यूनिट से कम होने पर बनता है, खोज 1985 में जो फार्मन ने अंटार्कटिका में की, सबसे बड़ा 28.4 मिलियन वर्ग किमी।
  • ✅ मुख्य ODS - CFCs, HCFCs, हैलोन, एक क्लोरीन परमाणु 1 लाख ओजोन अणुओं को नष्ट करता है, हैलोन 60 गुना अधिक खतरनाक।
  • ✅ CFC का आविष्कार 1928 में थॉमस मिडग्ले ने किया, खोज मोलिना और रोलैंड ने 1974 में की, 1995 में नोबेल पुरस्कार मिला।
  • ✅ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर 1989 में लागू, 198 देशों ने पुष्टि की, CFCs 2010 तक समाप्त।
  • ✅ किगाली संशोधन 2016 में HFCs को 80 प्रतिशत कम करने के लिए, HFCs ग्रीनहाउस गैस हैं, विश्व ओजोन दिवस 16 सितंबर।
  • ✅ प्रभाव - 1 प्रतिशत ओजोन कमी से 2 प्रतिशत UV-B वृद्धि, त्वचा कैंसर 3 से 6 प्रतिशत बढ़ता है, 98 प्रतिशत ODS समाप्त, रिकवरी 2066 तक।

📊 Important Facts Table

TopicFact
ओजोन परत की परिभाषाO3 के तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बनी परत, समतापमंडल में 15 से 35 किमी ऊंचाई पर, मोटाई डॉबसन यूनिट में मापी जाती है, खोज 1913 में फैब्री और ब्यूसन ने की।
ओजोन परत का महत्वसूर्य की 97 से 99 प्रतिशत हानिकारक UV किरणों को रोकती है, UV-C पूरी तरह और UV-B का अधिकांश भाग अवशोषित करती है, पृथ्वी का सनस्क्रीन कहलाती है।
ओजोन छिद्र220 डॉबसन यूनिट से कम होने पर ओजोन छिद्र कहलाता है, खोज 1985 में जो फार्मन ने अंटार्कटिका में की, सबसे बड़ा छिद्र 2000 में 28.4 मिलियन वर्ग किमी था।
ओजोन क्षरण पदार्थमुख्य ODS - CFCs, HCFCs, हैलोन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मिथाइल ब्रोमाइड, हैलोन क्लोरीन से 60 गुना अधिक खतरनाक, ODP से क्षमता मापी जाती है।
CFCआविष्कार 1928 में थॉमस मिडग्ले ने किया, उपयोग रेफ्रिजरेटर और AC में, एक क्लोरीन परमाणु 1 लाख ओजोन अणुओं को नष्ट करता है, जीवनकाल 100 वर्ष।
CFC की क्रियाविधि1974 में मोलिना और रोलैंड ने खोजी, अभिक्रिया Cl + O3 = ClO + O2, इन्हें 1995 में नोबेल पुरस्कार मिला, CFC-11 का ODP 1 माना जाता है।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर, 1 जनवरी 1989 को लागू, 198 देशों ने पुष्टि की, CFCs को 2010 तक विकसित देशों में समाप्त किया, सबसे सफल संधि।
किगाली संशोधन2016 में जोड़ा गया, HFCs जो ग्रीनहाउस गैस हैं उन्हें 80 प्रतिशत तक कम करना है, HFCs का उपयोग AC में CFC के विकल्प के रूप में होता था।
ओजोन क्षरण के प्रभाव1 प्रतिशत ओजोन कमी से 2 प्रतिशत UV-B बढ़ती है, त्वचा कैंसर में 3 से 6 प्रतिशत वृद्धि, मोतियाबिंद, फसल उत्पादन में कमी और फाइटोप्लांकटन नष्ट।
ओजोन रिकवरी98 प्रतिशत ODS समाप्त हो चुके हैं, ओजोन परत 2045 तक आर्कटिक में और 2066 तक अंटार्कटिका में ठीक होने का अनुमान, 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस।