ओजोन क्षरण प्रक्रिया, PSC बादल, ओजोन दिवस और वियना कन्वेंशन | किगाली संशोधन और ओजोन अनुकूल विकल्प | Ozone Quiz
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ओजोन क्षरण की प्रक्रिया, ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल, ओजोन दिवस, वियना कन्वेंशन, किगाली संशोधन, भारत में ओजोन संरक्षण और ओजोन अनुकूल विकल्प पर 50 MCQs। हिंदी में Quiz खेलें।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
ओजोन क्षरण की प्रक्रिया एक रासायनिक श्रृंखला अभिक्रिया है जिसे उत्प्रेरक विनाश चक्र कहते हैं। समतापमंडल में ओजोन का निर्माण प्राकृतिक रूप से चैपमैन चक्र द्वारा होता है, जिसमें ऑक्सीजन अणु सूर्य के प्रकाश से टूटकर ओजोन बनाते हैं। लेकिन जब मानव निर्मित क्लोरोफ्लोरोकार्बन CFCs और हैलोन समतापमंडल में पहुंचते हैं तो पराबैंगनी विकिरण से टूटकर क्लोरीन और ब्रोमीन परमाणु छोड़ते हैं। एक क्लोरीन परमाणु की अभिक्रिया Cl + O3 -> ClO + O2 और ClO + O -> Cl + O2 के रूप में होती है। इस प्रकार क्लोरीन बार-बार पुनर्जनित होता है और एक क्लोरीन परमाणु लगभग 1 लाख ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। ब्रोमीन क्लोरीन से 60 गुना अधिक विनाशकारी है। यह प्रक्रिया सजातीय नहीं बल्कि विषमांगी रासायनिक अभिक्रिया द्वारा तेज होती है जो ध्रुवीय समतापमंडलीय बादलों पर होती है। इसी कारण 1974 में शेरवुड रोलैंड और मारियो मोलिना ने चेतावनी दी थी। ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल यानी Polar Stratospheric Clouds को PSCs कहा जाता है और ये ओजोन छिद्र बनने के लिए जिम्मेदार हैं। PSCs सर्दियों में ध्रुवीय क्षेत्रों में -78 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर बनते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं - Type-I बादल जो नाइट्रिक एसिड ट्राईहाइड्रेट NAT से बने होते हैं और -78 डिग्री पर बनते हैं, और Type-II बादल जो जल के बर्फ के कणों से बने होते हैं और -85 डिग्री पर बनते हैं। PSCs की सतह पर निष्क्रिय क्लोरीन रिजर्वायर जैसे HCl और ClONO2 सक्रिय क्लोरीन Cl2 और HOCl में बदल जाते हैं। इसे क्लोरीन सक्रियण कहते हैं। इसके अलावा PSCs नाइट्रोजन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके डिनाइट्रिफिकेशन करते हैं जिससे क्लोरीन को निष्क्रिय करने वाली अभिक्रिया रुक जाती है। अंटार्कटिका में आर्कटिक से अधिक ठंड और स्थिर ध्रुवीय भंवर Polar Vortex होने के कारण PSCs अधिक बनते हैं, इसलिए ओजोन छिद्र वहां बड़ा बनता है। ओजोन दिवस हर साल 16 सितंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1987 में कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर में ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए थे। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1994 में 16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस घोषित किया। पहला ओजोन दिवस 1995 में मनाया गया। हर साल इसका एक विशेष थीम होता है, जैसे 2023 का थीम Montreal Protocol: fixing the ozone layer and reducing climate change था और 2024 का थीम Montreal Protocol: Advancing Climate Action था। इस दिन का उद्देश्य ओजोन परत संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाना और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता को उजागर करना है। भारत में भी पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वियना कन्वेंशन ओजोन संरक्षण के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे 22 मार्च 1985 को ऑस्ट्रिया के वियना में अपनाया गया और 22 सितंबर 1988 को लागू हुआ। यह एक फ्रेमवर्क कन्वेंशन है जिसमें कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य नहीं थे बल्कि देशों को ओजोन परत की रक्षा के लिए अनुसंधान, निगरानी और सूचना साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी वियना कन्वेंशन के तहत 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल बनाया गया जो इसका प्रोटोकॉल है। वियना कन्वेंशन को 198 देशों ने अनुसमर्थित किया है और यह भी सार्वभौमिक है। इस कन्वेंशन ने वैज्ञानिक मूल्यांकन और नीति निर्माण के बीच की कड़ी बनाई। वियना कन्वेंशन के तहत हर 3 साल में ओजोन परत की वैज्ञानिक समीक्षा होती है। किगाली संशोधन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का सबसे नया और महत्वपूर्ण संशोधन है। इसे 15 अक्टूबर 2016 को रवांडा के किगाली शहर में आयोजित 28वें पक्षकारों के सम्मेलन MOP28 में अपनाया गया और 1 जनवरी 2019 को लागू हुआ। इस संशोधन का उद्देश्य HFCs यानी हाइड्रोफ्लोरोकार्बन को चरणबद्ध तरीके से कम करना है। HFCs ओजोन परत को नष्ट नहीं करते लेकिन इनका ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल GWP हजारों गुना अधिक है। HFC-134a का GWP 1430 है। किगाली संशोधन के तहत विकसित देश 2019 से 2036 तक HFCs में 80 प्रतिशत कटौती करेंगे जबकि भारत सहित विकासशील देश 2024 से 2047 तक 80 प्रतिशत कटौती करेंगे। भारत ने 2021 में किगाली संशोधन की पुष्टि की। वैज्ञानिकों के अनुसार किगाली संशोधन पूरी तरह लागू होने से 2100 तक वैश्विक तापमान वृद्धि में 0.5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आएगी और 105 मिलियन टन CO2 समकक्ष उत्सर्जन रोका जाएगा। भारत में ओजोन संरक्षण के लिए व्यापक कार्य किए गए हैं। भारत ने 1991 में वियना कन्वेंशन और 1992 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में ओजोन सेल की स्थापना 1993 में की गई। भारत ने ओजोन क्षरण पदार्थ नियम 2000 बनाए जिसके तहत ODS के उत्पादन और व्यापार को नियंत्रित किया जाता है। भारत ने CFCs को निर्धारित समय 2010 से पहले 2008 में ही समाप्त कर दिया। भारत ने HCFC फेज-आउट मैनेजमेंट प्लान HPMP के तहत HCFCs को समाप्त करने का कार्य शुरू किया है, स्टेज-I 2017 में पूरा हुआ और स्टेज-II 2023 से चल रहा है जिसका लक्ष्य 2030 तक HCFCs में 97.5 प्रतिशत कटौती है। भारत में 300 से अधिक ODS पुनर्चक्रण केंद्र स्थापित हैं। भारत ने CFC के विकल्प के लिए कई उद्योगों को वित्तीय सहायता दी है। ओजोन अनुकूल विकल्प वे रसायन और तकनीकें हैं जो ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचाते। CFCs के पहले विकल्प के रूप में HCFCs लाए गए जिनका ODP बहुत कम यानी 0.05 है, लेकिन इन्हें भी समाप्त किया जा रहा है। HCFCs के विकल्प के रूप में HFCs लाए गए जैसे HFC-134a जिसका ODP शून्य है लेकिन GWP अधिक है। अब HFCs के विकल्प के रूप में HFOs यानी हाइड्रोफ्लोरोओलेफिन लाए गए हैं जैसे HFO-1234yf जिसका ODP शून्य और GWP 1 से कम है। प्राकृतिक ओजोन अनुकूल विकल्पों में अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे आइसोब्यूटेन और प्रोपेन शामिल हैं। रेफ्रिजरेटर में आइसोब्यूटेन R-600a और AC में R-290 प्रोपेन का उपयोग बढ़ रहा है। भारत में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो BEE द्वारा ओजोन अनुकूल और ऊर्जा दक्ष उपकरणों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ ओजोन क्षरण Cl + O3 -> ClO + O2 चक्र से, एक Cl 1 लाख ओजोन नष्ट करता है, ब्रोमीन 60 गुना अधिक खतरनाक, खोज 1974 में हुई।
- ✅ PSC बादल -78 डिग्री पर बनते हैं, Type-I NAT और Type-II बर्फ से, क्लोरीन सक्रियण करते हैं, अंटार्कटिका में ध्रुवीय भंवर से अधिक बनते हैं।
- ✅ वियना कन्वेंशन 22 मार्च 1985 को अपनाया गया 1988 में लागू, फ्रेमवर्क संधि, इसी के तहत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल बना।
- ✅ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर 1989 में लागू, 198 देशों ने माना, ओजोन दिवस 16 सितंबर को मनाया जाता है।
- ✅ किगाली संशोधन 15 अक्टूबर 2016 को किगाली में, 2019 में लागू, HFCs में 80% कटौती, 0.5 डिग्री वार्मिंग रोकेगा।
- ✅ भारत ने 1991 में वियना और 1992 में मॉन्ट्रियल पर हस्ताक्षर किए, ODS नियम 2000, CFCs 2008 में समाप्त, HPMP से HCFCs 2030 तक समाप्त।
- ✅ ओजोन अनुकूल विकल्प - HCFCs ODP 0.05, HFCs ODP 0, HFOs GWP 1 से कम, प्राकृतिक विकल्प R-600a आइसोब्यूटेन और R-290 प्रोपेन।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| ओजोन क्षरण की प्रक्रिया | Cl + O3 -> ClO + O2 और ClO + O -> Cl + O2, एक क्लोरीन 1 लाख ओजोन नष्ट करता है, ब्रोमीन 60 गुना अधिक खतरनाक, खोज 1974 में रोलैंड और मोलिना ने की। |
| ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल PSC | PSC -78 डिग्री पर बनते हैं, Type-I NAT से बना और Type-II बर्फ से बना, क्लोरीन सक्रियण और डिनाइट्रिफिकेशन करते हैं, अंटार्कटिका में अधिक बनते हैं। |
| ओजोन दिवस | 16 सितंबर को मनाया जाता है, 1987 में इसी दिन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए, संयुक्त राष्ट्र ने 1994 में घोषित किया, पहला दिवस 1995 में मनाया गया। |
| वियना कन्वेंशन | 22 मार्च 1985 को वियना में अपनाया गया, 22 सितंबर 1988 को लागू, ओजोन संरक्षण की पहली संधि, फ्रेमवर्क कन्वेंशन, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल इसका प्रोटोकॉल है। |
| मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल | 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर, 1 जनवरी 1989 को लागू, 198 देशों ने पुष्टि की, सबसे सफल पर्यावरण संधि, CFCs 2010 तक समाप्त। |
| किगाली संशोधन | 15 अक्टूबर 2016 को किगाली रवांडा में MOP28 में अपनाया गया, 1 जनवरी 2019 को लागू, HFCs में 80 प्रतिशत कटौती लक्ष्य, 2100 तक 0.5 डिग्री वार्मिंग रोकेगा। |
| भारत में ओजोन संरक्षण | भारत ने 1991 में वियना और 1992 में मॉन्ट्रियल पर हस्ताक्षर किए, 1993 में ओजोन सेल स्थापना, ODS नियम 2000, CFCs 2008 में समाप्त, HPMP स्टेज-II चल रहा है। |
| ओजोन अनुकूल विकल्प | CFC के विकल्प HCFCs ODP 0.05, HFCs ODP शून्य लेकिन GWP अधिक, HFO-1234yf GWP 1 से कम, प्राकृतिक विकल्प अमोनिया, CO2, प्रोपेन R-290, आइसोब्यूटेन R-600a। |
| HFCs का GWP | HFC-134a का GWP 1430, HFC-23 का GWP 14800, HFO-1234yf का GWP 1 से कम, प्राकृतिक रेफ्रिजरेंट का GWP 3 से कम होता है। |
| ओजोन रिकवरी | मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल से 98 प्रतिशत ODS समाप्त, ओजोन परत 2040 तक वैश्विक स्तर पर और 2066 तक अंटार्कटिका में 1980 के स्तर पर वापस आएगी। |