पेरिस समझौते में भारत की भूमिका: NDC, Net Zero 2070 और क्लाइमेट फाइनेंस

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पेरिस समझौते में भारत की भूमिका: NDC, Net Zero 2070 और क्लाइमेट फाइनेंस - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

India Paris Agreement में भारत की भूमिका, हस्ताक्षर 22 अप्रैल 2016, अनुसमर्थन 2 अक्टूबर 2016, India NDC, updated NDC 2022, net zero 2070, renewable energy, Article 6 और climate finance की पूरी जानकारी।

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💡 व्याख्या

📚 विस्तृत जानकारी

भारत पेरिस समझौते में एक महत्वपूर्ण पक्षकार है। भारत ने Paris Agreement पर 22 अप्रैल 2016 को न्यूयॉर्क में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में हस्ताक्षर किए और 2 अक्टूबर 2016 को गांधी जयंती के अवसर पर इसका अनुसमर्थन किया। भारत का अनुसमर्थन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है और इसके अनुसमर्थन से समझौते के लागू होने के लिए 55 देशों और 55 प्रतिशत उत्सर्जन की शर्त पूरी होने में मदद मिली।

भारत के पहले NDC को 2 अक्टूबर 2015 को INDC के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसके तीन प्रमुख लक्ष्य थे। पहला, 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक GDP की emission intensity में 33 से 35 प्रतिशत की कमी करना। दूसरा, 2030 तक बिजली की स्थापित क्षमता का लगभग 40 प्रतिशत non-fossil fuel sources यानी नवीकरणीय, परमाणु और जल विद्युत से प्राप्त करना। तीसरा, 2030 तक वनीकरण के माध्यम से 2.5 से 3 billion tonnes CO2 equivalent का अतिरिक्त carbon sink बनाना।

भारत ने अपने NDC को 2022 में अपडेट किया, जिसे updated NDC 2022 कहा जाता है और इसे अगस्त 2022 में UNFCCC को सौंपा गया। Updated NDC में दो लक्ष्यों को अधिक महत्वाकांक्षी बनाया गया। Emission intensity में कमी का लक्ष्य 33-35 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत कर दिया गया है, यानी 2005 के स्तर से 2030 तक 45 प्रतिशत कमी। Non-fossil fuel आधारित बिजली क्षमता का लक्ष्य 40 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत कर दिया गया है। Carbon sink का लक्ष्य पहले जैसा ही 2.5 से 3 billion tonnes CO2 equivalent रखा गया है। यह अपडेट Panchamrit के तहत किया गया था जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने COP26 ग्लासगो 2021 में की थी।

भारत ने Long-Term Low-Emission Development Strategy यानी LT-LEDS भी प्रस्तुत की है। COP26 में भारत ने 2070 तक net-zero यानी शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य घोषित किया है। LT-LEDS नवंबर 2022 में COP27 में प्रस्तुत की गई थी, जिसमें कम कार्बन विकास के 7 प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है। Net-zero 2070 का अर्थ है कि 2070 तक भारत जितना कार्बन उत्सर्जित करेगा उतना ही अवशोषित भी करेगा।

भारत की climate action में कई क्षेत्रों की भूमिका है। Renewable energy में भारत ने 2030 तक 500 GW non-fossil capacity का लक्ष्य रखा है, जिसमें solar energy प्रमुख है। International Solar Alliance यानी ISA भारत और फ्रांस की पहल है। Energy efficiency में Perform Achieve and Trade यानी PAT योजना और उजाला योजना महत्वपूर्ण हैं। Electric mobility में FAME योजना और Green Hydrogen Mission 2023 के तहत 2030 तक 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है। Afforestation और carbon sink के लिए CAMPA, Green India Mission और नगर वन योजना चल रही हैं।

भारत के लिए climate finance का महत्व बहुत अधिक है। Paris Agreement के Article 9 के अनुसार विकसित देशों को विकासशील देशों को वित्तीय सहायता देनी है। भारत का मानना है कि CBDR-RC और equity के सिद्धांत के अनुसार विकसित देशों को 100 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष के लक्ष्य से अधिक सहायता देनी चाहिए। भारत को adaptation यानी अनुकूलन के लिए अधिक वित्त की आवश्यकता है क्योंकि कृषि, जल और तटीय क्षेत्रों पर जलवायु का सीधा प्रभाव पड़ता है। Technology transfer यानी स्वच्छ तकनीकों का हस्तांतरण भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

Paris Agreement के Article 6 में international carbon markets और cooperative approaches का प्रावधान है। Article 6.2 में देशों के बीच carbon trading और 6.4 में वैश्विक carbon market तंत्र की बात है। भारत ने इस संदर्भ में Carbon Credit Trading Scheme यानी CCTS 2023 अधिसूचित किया है और Bureau of Energy Efficiency को प्रशासक बनाया है। Energy Conservation Amendment Act 2022 के तहत भारत में carbon market framework विकसित किया जा रहा है।

Global Stocktake और Enhanced Transparency Framework यानी ETF के संदर्भ में भारत की reporting महत्वपूर्ण है। पहला Global Stocktake 2023 में COP28 में पूरा हुआ। भारत ने अपनी Biennial Update Reports और अब Biennial Transparency Report यानी BTR प्रस्तुत की हैं। भारत ETF के तहत अपनी प्रगति की जानकारी देता है।

भारत की भूमिका का balanced analysis आवश्यक है। उपलब्धियों में भारत ने non-fossil capacity में तेजी से वृद्धि की है और सौर ऊर्जा में विश्व में अग्रणी बन रहा है। चुनौतियों में विकास की आवश्यकता, ऊर्जा सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और कोयले पर निर्भरता शामिल है। भारत की प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अभी भी विश्व औसत से बहुत कम है, लगभग 1.9 टन जबकि विश्व औसत 4.7 टन है। Adaptation needs बहुत अधिक हैं क्योंकि भारत जलवायु के प्रति संवेदनशील है। Climate finance constraints भी हैं क्योंकि अभी तक विकसित देशों से पर्याप्त वित्त नहीं मिला है।

कार्यान्वयन में केंद्र सरकार नीति और मिशन बनाती है, जैसे National Solar Mission, राज्य सरकारें State Action Plan on Climate Change यानी SAPCC लागू करती हैं, उद्योग PAT और carbon market में भाग लेते हैं और स्थानीय निकाय Climate Smart Cities के तहत कार्य करते हैं। निष्कर्ष में भारत Paris Agreement के implementation में NDC और net-zero 2070 के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन इसके लिए climate finance और technology transfer महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बिना पर्याप्त वित्त और तकनीक के विकासशील देशों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करना कठिन है।

⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु

  • ✅ भारत ने Paris Agreement पर 22 अप्रैल 2016 को हस्ताक्षर और 2 अक्टूबर 2016 को अनुसमर्थन किया।
  • ✅ पहले NDC में 33-35 प्रतिशत emission intensity कमी और 40 प्रतिशत non-fossil लक्ष्य था, updated NDC 2022 में 45 प्रतिशत और 50 प्रतिशत कर दिया गया।
  • ✅ 2030 तक 2.5 से 3 billion tonnes CO2 equivalent अतिरिक्त carbon sink और 2070 तक net-zero लक्ष्य घोषित।
  • ✅ 500 GW non-fossil capacity, ISA, Green Hydrogen Mission 2023 और PAT योजना climate action के प्रमुख साधन हैं।
  • ✅ Article 6 के तहत भारत ने Carbon Credit Trading Scheme 2023 अधिसूचित किया है।
  • ✅ भारत equity और CBDR-RC के आधार पर विकसित देशों से climate finance और technology transfer की मांग करता है।
  • ✅ भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन विश्व औसत से कम है लेकिन adaptation needs और ऊर्जा सुरक्षा बड़ी चुनौतियां हैं।

📊 Important Facts Table

TopicFact
हस्ताक्षर और अनुसमर्थनभारत ने Paris Agreement पर 22 अप्रैल 2016 को हस्ताक्षर किए और 2 अक्टूबर 2016 को इसका अनुसमर्थन किया।
पहला NDC 2015पहले NDC में 2005 से 2030 तक emission intensity में 33-35 प्रतिशत कमी और 40 प्रतिशत non-fossil बिजली क्षमता का लक्ष्य था।
Updated NDC 2022Updated NDC 2022 में emission intensity में 45 प्रतिशत कमी और 50 प्रतिशत non-fossil बिजली क्षमता का लक्ष्य किया गया, अगस्त 2022 में UNFCCC को सौंपा गया।
Carbon Sink लक्ष्य2030 तक वनीकरण से 2.5 से 3 billion tonnes CO2 equivalent अतिरिक्त carbon sink बनाने का लक्ष्य पहले और updated दोनों NDC में है।
Net Zero लक्ष्यभारत ने COP26 ग्लासगो 2021 में 2070 तक net-zero और LT-LEDS COP27 2022 में प्रस्तुत की।
नवीकरणीय ऊर्जाभारत ने 2030 तक 500 GW non-fossil capacity का लक्ष्य रखा है, ISA यानी International Solar Alliance भारत-फ्रांस की पहल है।
Green HydrogenNational Green Hydrogen Mission 2023 के तहत 2030 तक 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है।
Article 6 और भारतParis Agreement Article 6 carbon markets से संबंधित है, भारत ने Carbon Credit Trading Scheme CCTS 2023 अधिसूचित किया है।
Climate FinanceParis Agreement Article 9 के तहत विकसित देशों को 100 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष की सहायता देनी है, भारत equity और CBDR-RC के आधार पर अधिक वित्त की मांग करता है।
प्रति व्यक्ति उत्सर्जनभारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन लगभग 1.9 टन है जो विश्व औसत 4.7 टन से बहुत कम है, यह equity का आधार है।