मृदा की परिभाषा, मृदा निर्माण, मृदा प्रोफाइल, मृदा के प्रकार, जलोढ़ काली लाल लेटराइट मृदा
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मृदा की परिभाषा, मृदा निर्माण, मृदा प्रोफाइल, मृदा के प्रकार, जलोढ़ मृदा, काली मृदा, लाल मृदा और लेटराइट मृदा पर 700+ शब्दों में तथ्यात्मक जानकारी।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
मृदा की परिभाषा मृदा भूपटल की सबसे ऊपरी परत है जो चट्टानों के टूटने और जैविक पदार्थों के सड़ने से बनती है और पौधों को आधार और पोषण देती है। मृदा की परिभाषा में 4 घटक होते हैं - खनिज 45%, जैविक पदार्थ 5%, जल 25% और वायु 25%। मृदा की परिभाषा में मृदा विज्ञान को पेडोलॉजी कहा जाता है और मृदा का अध्ययन 5 कारकों पर होता है - जनक सामग्री, जलवायु, जीव, स्थलाकृति और समय। मृदा की परिभाषा में 1 इंच मृदा बनने में 500 से 1000 साल लगते हैं। मृदा की परिभाषा में भारत में 8 प्रमुख मृदा प्रकार हैं और विश्व में 12 मृदा ऑर्डर हैं। मृदा की परिभाषा में भारत में मृदा सर्वेक्षण 1956 में शुरू हुआ था और NBSS&LUP नागपुर में मुख्यालय है। मृदा में 90% खाद्य उत्पादन होता है। मृदा का pH 6 से 7.5 सबसे अच्छा होता है। मृदा निर्माण मृदा निर्माण में 5 चरण होते हैं - 1. अपक्षय - चट्टान टूटना भौतिक, रासायनिक और जैविक अपक्षय से होता है। 2. ह्यूमस निर्माण - पौधों और जीवों के सड़ने से ह्यूमस बनता है जिसमें नाइट्रोजन 5% होता है। 3. खनिज मिश्रण - रेत 2 से 0.05 मिमी, सिल्ट 0.05 से 0.002 मिमी और क्ले 0.002 मिमी से कम। 4. मृदा प्रोफाइल विकास - O, A, B, C, R होराइजन बनते हैं। 5. परिपक्वता - 1000 साल में परिपक्व मृदा बनती है। मृदा निर्माण में जलवायु सबसे महत्वपूर्ण कारक है - अधिक वर्षा में लेटराइट और कम वर्षा में काली मृदा बनती है। मृदा निर्माण में भारत में हिमालय में नई मृदा और दक्षिण में पुरानी मृदा है। मृदा निर्माण में 1 सेमी मृदा बनने में 100 साल लगते हैं। मृदा निर्माण में केंचुआ 1 साल में 10 किलो मृदा बनाता है। मृदा प्रोफाइल मृदा प्रोफाइल मृदा की ऊर्ध्वाधर परतें हैं जो 5 होराइजन में बंटी हैं। O होराइजन - जैविक परत 0 से 2 सेमी जिसमें पत्तियां सड़ती हैं। A होराइजन - टॉपसॉइल 0 से 25 सेमी जिसमें 5% ह्यूमस, जड़ें, केंचुआ और सबसे उपजाऊ परत होती है। E होराइजन - 25 से 50 सेमी जिसमें क्ले और खनिज पानी से नीचे जाते हैं। B होराइजन - सबसॉइल 50 से 100 सेमी जिसमें क्ले, लोहा और एल्यूमीनियम जमा होता है। C होराइजन - 100 से 150 सेमी जिसमें टूटी चट्टान और जनक सामग्री होती है। R होराइजन - 150 सेमी से नीचे कठोर चट्टान आधार। मृदा प्रोफाइल में परिपक्व मृदा में 5 होराइजन स्पष्ट होते हैं और नई मृदा जलोढ़ में केवल A और C होते हैं। मृदा प्रोफाइल में भारत में जलोढ़ में 20 मीटर तक गहरी प्रोफाइल है। मृदा प्रोफाइल में काली मृदा में 1 मीटर तक गहरी दरारें बनती हैं। मृदा प्रोफाइल में pH ऊपर से नीचे बढ़ता है। मृदा के प्रकार भारत में ICAR ने 8 मृदा प्रकार बताए हैं - 1. जलोढ़ 43% क्षेत्र 15 लाख वर्ग किमी, 2. काली 15% 5.5 लाख वर्ग किमी, 3. लाल और पीली 18% 6 लाख वर्ग किमी, 4. लेटराइट 4% 1.3 लाख वर्ग किमी, 5. शुष्क मरुस्थलीय 4% राजस्थान, 6. पर्वतीय 8% हिमालय, 7. लवणीय क्षारीय 2% और 8. पीट दलदली 1% केरल। मृदा के प्रकार USDA में 12 ऑर्डर हैं - एंटीसोल, इन्सेप्टिसोल, अल्फीसोल, वर्टीसोल, अरीडिसोल, अल्टीसोल, ऑक्सीसोल, मॉलीसोल, स्पोडोसोल, हिस्टोसोल, एंडिसोल और जेलीसोल। मृदा के प्रकार में भारत में जलोढ़ सबसे उपजाऊ और लेटराइट सबसे कम उपजाऊ है। मृदा के प्रकार में जलवायु से तय होते हैं - 100 सेमी से अधिक वर्षा में लाल, 50 से 75 सेमी में काली और 200 सेमी से अधिक में लेटराइट बनती है। जलोढ़ मृदा जलोढ़ मृदा भारत की सबसे महत्वपूर्ण मृदा है जो 43% क्षेत्र 15 लाख वर्ग किमी पर गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु और नदियों द्वारा लाई गई है। जलोढ़ मृदा में 2 प्रकार - खादर नई जलोढ़ जो हर साल बाढ़ में बनती है और बांगर पुरानी जलोढ़ जो 2 मीटर ऊंची है। जलोढ़ मृदा में कण - रेत 40%, सिल्ट 40%, क्ले 20% और सबसे उपजाऊ दोमट है। जलोढ़ मृदा में खनिज - पोटाश 0.5%, फॉस्फोरस 0.1%, चूना 5% और नाइट्रोजन कम 0.05% है। जलोढ़ मृदा में pH 7 से 8 और रंग हल्का भूरा है। जलोढ़ मृदा में फसल - गेहूं, चावल, गन्ना, जूट और दलहन सबसे अधिक होती है और 50% खाद्य उत्पादन इसी में होता है। जलोढ़ मृदा में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में है। जलोढ़ मृदा में 20 मीटर तक गहरी है और 1 इंच में 10 लाख साल पुरानी सामग्री है। जलोढ़ मृदा में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। काली मृदा काली मृदा को रेगुर मृदा और कपास मृदा भी कहा जाता है जो 15% क्षेत्र 5.5 लाख वर्ग किमी पर दक्कन ट्रैप बेसाल्ट से बनी है। काली मृदा में महाराष्ट्र 35%, मध्य प्रदेश 20%, गुजरात 15%, कर्नाटक 10%, आंध्र 10% और तमिलनाडु 10% में है। काली मृदा में कण - क्ले 50%, सिल्ट 25%, रेत 25% और सबसे अधिक नमी धारण 60% है। काली मृदा में खनिज - लोहा 10%, चूना 6%, मैग्नीशियम 2%, एल्युमीनियम 10% और पोटाश 0.5% है। काली मृदा में काला रंग टिटेनिफेरस मैग्नेटाइट से है। काली मृदा में pH 7.5 से 8.5 और गहराई 0.5 से 2 मीटर है। काली मृदा में 1 मीटर तक दरारें गर्मी में बनती हैं जिससे स्वयं जुताई होती है। काली मृदा में फसल - कपास, सोयाबीन, मूंगफली, तुअर और ज्वार सबसे अच्छी होती है। काली मृदा में कपास 90% इसी में होती है। काली मृदा में जल धारण सबसे अधिक है और सूखा सहन करती है। लाल मृदा लाल मृदा भारत में 18% क्षेत्र 6 लाख वर्ग किमी पर है और तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में है। लाल मृदा में लाल रंग लोहा ऑक्साइड फेरिक ऑक्साइड से है और पीली मृदा में हाइड्रेटेड रूप से। लाल मृदा में कण - रेत 60%, क्ले 20%, सिल्ट 20% और रेतीली दोमट है। लाल मृदा में खनिज - लोहा 5%, एल्युमीनियम 10%, चूना कम 2%, नाइट्रोजन कम 0.03%, फॉस्फोरस कम 0.05% और पोटाश मध्यम है। लाल मृदा में pH 6 से 7 और कम उपजाऊ है। लाल मृदा में गहराई 0.5 से 1 मीटर और पठारी क्षेत्र में है। लाल मृदा में फसल - रागी, मूंगफली, बाजरा, तुअर और आम सबसे अच्छी है और सिंचाई से गेहूं चावल भी होती है। लाल मृदा में 100 सेमी वर्षा में बनती है और ग्रेनाइट नीस चट्टान से बनती है। लाल मृदा में जल धारण कम है। लेटराइट मृदा लेटराइट मृदा लैटिन शब्द लेटर यानी ईंट से बना है जो 4% क्षेत्र 1.3 लाख वर्ग किमी पर केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, असम, मेघालय में 200 सेमी से अधिक वर्षा में बनती है। लेटराइट मृदा में कण - क्ले 40%, रेत 40%, बजरी 20% और सबसे कम उपजाऊ है। लेटराइट मृदा में खनिज - लोहा 20%, एल्युमीनियम 25%, सिलिका कम 10% और नाइट्रोजन बहुत कम 0.02% है। लेटराइट मृदा में लाल भूरा रंग और pH 4 से 5.5 अम्लीय है। लेटराइट मृदा में 200 सेमी वर्षा में लीचिंग से सिलिका बह जाती है और लोहा एल्युमीनियम बचता है। लेटराइट मृदा में गहराई 1 से 2 मीटर और ईंट जैसी कठोर सूखने पर बनती है। लेटराइट मृदा में फसल - चाय, कॉफी, काजू, नारियल और रबर सबसे अच्छी है। लेटराइट मृदा में केरल में 60% क्षेत्र में है। लेटराइट मृदा में 1826 में बुकानन ने नाम दिया था। लेटराइट मृदा में भवन निर्माण में ईंट के रूप में उपयोग होती है।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ परिभाषा भूपटल ऊपरी परत चट्टान टूटना जैविक सड़ना 4 घटक खनिज 45% जैविक 5% जल 25% वायु 25% 1 इंच 500-1000 साल 8 प्रकार भारत 12 विश्व सर्वेक्षण 1956 NBSS&LUP नागपुर 90% खाद्य pH 6-7.5।
- ✅ निर्माण 5 चरण अपक्षय ह्यूमस खनिज मिश्रण प्रोफाइल परिपक्वता जलवायु महत्वपूर्ण 1 सेमी 100 साल केंचुआ 10 किलो साल हिमालय नई दक्षिण पुरानी।
- ✅ प्रोफाइल 5 होराइजन O 0-2 जैविक A 0-25 टॉपसॉइल 5% ह्यूमस सबसे उपजाऊ E 25-50 B 50-100 सबसॉइल C 100-150 D 150 से नीचे कठोर जलोढ़ 20 मीटर काली 1 मीटर दरार।
- ✅ प्रकार ICAR 8 जलोढ़ 43% काली 15% लाल पीली 18% लेटराइट 4% शुष्क 4% पर्वतीय 8% लवणीय 2% पीट 1% USDA 12 जलोढ़ सबसे उपजाऊ लेटराइट सबसे कम 100 सेमी लाल 50-75 काली 200 लेटराइट।
- ✅ जलोढ़ 43% 15 लाख गंगा ब्रह्मपुत्र सिंधु खादर नई बांगर पुरानी 2 मीटर रेत 40% सिल्ट 40% क्ले 20% दोमट पोटाश 0.5% pH 7-8 गेहूं चावल गन्ना जूट 50% खाद्य पंजाब UP बिहार WB 20 मीटर 500 घनत्व।
- ✅ काली रेगुर कपास 15% 5.5 लाख दक्कन ट्रैप बेसाल्ट MH 35% क्ले 50% नमी 60% लोहा 10% काला टिटेनिफेरस मैग्नेटाइट pH 7.5-8.5 0.5-2 मीटर 1 मीटर दरार स्वयं जुताई कपास 90% सूखा सहन।
- ✅ लाल 18% 6 लाख TN कर्नाटक आंध्र ओडिशा झारखंड लोहा ऑक्साइड लाल रेत 60% pH 6-7 कम उपजाऊ रागी मूंगफली बाजरा लेटराइट 4% केरल गोवा 200 सेमी वर्षा लोहा 20% एल्युमीनियम 25% pH 4-5.5 अम्लीय चाय कॉफी काजू नारियल 1826 बुकानन ईंट।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| मृदा की परिभाषा | भूपटल ऊपरी परत चट्टान टूटना जैविक सड़ना 4 घटक खनिज 45% जैविक 5% जल 25% वायु 25% पेडोलॉजी 5 कारक जनक जलवायु जीव स्थलाकृति समय 1 इंच 500-1000 साल भारत 8 प्रकार विश्व 12 ऑर्डर सर्वेक्षण 1956 NBSS&LUP नागपुर 90% खाद्य pH 6-7.5। |
| मृदा निर्माण | 5 चरण अपक्षय भौतिक रासायनिक जैविक ह्यूमस 5% नाइट्रोजन खनिज रेत 2-0.05 सिल्ट 0.05-0.002 क्ले 0.002 से कम मिमी प्रोफाइल O A B C R परिपक्वता 1000 साल जलवायु महत्वपूर्ण अधिक वर्षा लेटराइट कम काली हिमालय नई दक्षिण पुरानी 1 सेमी 100 साल केंचुआ 10 किलो साल। |
| मृदा प्रोफाइल | ऊर्ध्वाधर परत 5 होराइजन O 0-2 जैविक पत्तियां A 0-25 टॉपसॉइल 5% ह्यूमस जड़ केंचुआ सबसे उपजाऊ E 25-50 क्ले खनिज नीचे B 50-100 सबसॉइल क्ले लोहा एल्युमीनियम C 100-150 टूटी चट्टान जनक R 150 से नीचे कठोर चट्टान परिपक्व 5 स्पष्ट नई जलोढ़ A C जलोढ़ 20 मीटर काली 1 मीटर दरार pH नीचे बढ़ता। |
| मृदा के प्रकार | ICAR 8 प्रकार जलोढ़ 43% 15 लाख काली 15% 5.5 लाख लाल पीली 18% 6 लाख लेटराइट 4% 1.3 लाख शुष्क 4% राजस्थान पर्वतीय 8% हिमालय लवणीय 2% पीट 1% केरल USDA 12 ऑर्डर जलोढ़ सबसे उपजाऊ लेटराइट सबसे कम 100 सेमी से अधिक लाल 50-75 काली 200 से अधिक लेटराइट। |
| जलोढ़ मृदा | सबसे महत्वपूर्ण 43% 15 लाख गंगा ब्रह्मपुत्र सिंधु 2 प्रकार खादर नई हर साल बाढ़ बांगर पुरानी 2 मीटर ऊंची रेत 40% सिल्ट 40% क्ले 20% दोमट पोटाश 0.5% फॉस्फोरस 0.1% चूना 5% नाइट्रोजन 0.05% कम pH 7-8 हल्का भूरा गेहूं चावल गन्ना जूट दलहन 50% खाद्य पंजाब हरियाणा UP बिहार WB असम 20 मीटर गहरी 500 घनत्व। |
| काली मृदा | रेगुर कपास 15% 5.5 लाख दक्कन ट्रैप बेसाल्ट MH 35% MP 20% गुजरात 15% कर्नाटक 10% आंध्र 10% TN 10% क्ले 50% सिल्ट 25% रेत 25% नमी 60% लोहा 10% चूना 6% मैग्नीशियम 2% एल्युमीनियम 10% काला टिटेनिफेरस मैग्नेटाइट pH 7.5-8.5 गहराई 0.5-2 मीटर 1 मीटर दरार स्वयं जुताई कपास सोयाबीन मूंगफली तुअर ज्वार कपास 90% सूखा सहन। |
| लाल मृदा | 18% 6 लाख TN कर्नाटक आंध्र ओडिशा झारखंड छत्तीसगढ़ MP लाल लोहा ऑक्साइड फेरिक पीली हाइड्रेटेड रेत 60% क्ले 20% सिल्ट 20% रेतीली दोमट लोहा 5% एल्युमीनियम 10% चूना 2% कम नाइट्रोजन 0.03% फॉस्फोरस 0.05% कम pH 6-7 कम उपजाऊ 0.5-1 मीटर पठारी रागी मूंगफली बाजरा तुअर आम 100 सेमी वर्षा ग्रेनाइट नीस जल धारण कम। |
| लेटराइट मृदा | लेटर ईंट 4% 1.3 लाख केरल कर्नाटक गोवा MH असम मेघालय 200 सेमी से अधिक वर्षा क्ले 40% रेत 40% बजरी 20% सबसे कम उपजाऊ लोहा 20% एल्युमीनियम 25% सिलिका 10% कम नाइट्रोजन 0.02% बहुत कम लाल भूरा pH 4-5.5 अम्लीय लीचिंग सिलिका बह लोहा एल्युमीनियम बचा 1-2 मीटर ईंट कठोर चाय कॉफी काजू नारियल रबर केरल 60% 1826 बुकानन नाम भवन ईंट। |
| मृदा pH | pH 6-7.5 सबसे अच्छा जलोढ़ 7-8 काली 7.5-8.5 लाल 6-7 लेटराइट 4-5.5 अम्लीय लवणीय 8.5-10 क्षारीय 6 से कम अम्लीय सुधार चूना 7.5 से अधिक क्षारीय जिप्सम। |
| मृदा सर्वेक्षण | 1956 शुरू NBSS&LUP नागपुर 1976 मुख्यालय 8 प्रकार ICAR USDA 12 ऑर्डर भारत 43% जलोढ़ 15% काली 18% लाल 4% लेटराइट 1956 से मानचित्रण। |