जल प्रदूषण नियंत्रण उपाय, अधिनियम 1974 और अपशिष्ट जल उपचार | नमामि गंगे, स्वच्छ भारत मिशन और थर्मल प्रदूषण | Water Pollution Quiz
⌄जल प्रदूषण नियंत्रण उपाय, अधिनियम 1974 और अपशिष्ट जल उपचार | नमामि गंगे, स्वच्छ भारत मिशन और थर्मल प्रदूषण | Water Pollution Quiz - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
जल प्रदूषण नियंत्रण उपाय, अधिनियम 1974, अपशिष्ट जल उपचार, नमामि गंगे कार्यक्रम, स्वच्छ भारत मिशन, जल गुणवत्ता मानक और थर्मल प्रदूषण पर 50 MCQs। हिंदी में Quiz खेलें।
लोडिंग...
💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
जल प्रदूषण नियंत्रण वर्तमान समय की सबसे बड़ी पर्यावरणीय आवश्यकता है क्योंकि जल जीवन का आधार है। जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय अपनाए जाते हैं। सबसे पहला उपाय स्रोत पर नियंत्रण है जिसमें उद्योगों को अपने अपशिष्ट को बिना उपचार के नदियों में छोड़ने से रोकना शामिल है। दूसरा उपाय 3R सिद्धांत यानी Reduce, Reuse, Recycle को अपनाना है। तीसरा उपाय जन जागरूकता और कानूनों का सख्ती से पालन है। कृषि में जैविक खेती और कम रासायनिक उर्वरकों का उपयोग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, प्लास्टिक पर प्रतिबंध और वाटरशेड प्रबंधन जल प्रदूषण को कम करने के प्रभावी उपाय हैं। व्यक्तिगत स्तर पर जल का विवेकपूर्ण उपयोग और कचरे का सही निपटान भी महत्वपूर्ण है। भारत में जल प्रदूषण को रोकने के लिए जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम 1974 लागू किया गया है। यह भारत का पहला प्रमुख जल प्रदूषण नियंत्रण कानून है जो 23 मार्च 1974 को पारित हुआ। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य जल प्रदूषण को रोकना और जल की गुणवत्ता को बनाए रखना है। इस अधिनियम के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी SPCB का गठन किया गया। यह अधिनियम राज्य बोर्डों को किसी भी उद्योग को स्थापित करने के लिए सहमति देने, जल के नमूने लेने, परीक्षण करने और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बंद करने का अधिकार देता है। 1988 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया और इसे और अधिक कठोर बनाया गया। इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर 1.5 साल से 6 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। यह अधिनियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का आधार भी बना। अपशिष्ट जल उपचार जल प्रदूषण नियंत्रण का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी उपाय है। उपचार प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा जाता है। प्राथमिक उपचार में छानना, तलछट जमाना और स्क्रीनिंग द्वारा बड़े ठोस कणों को हटाया जाता है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत ठोस पदार्थ हट जाते हैं। द्वितीयक उपचार में जैविक विधियों जैसे एक्टिवेटेड स्लज प्रक्रिया, ट्रिकलिंग फिल्टर और ऑक्सीडेशन पॉन्ड द्वारा जैविक पदार्थों को सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित किया जाता है। इसमें BOD 90 प्रतिशत तक कम हो जाता है। तृतीयक उपचार में रासायनिक विधियों द्वारा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, भारी धातुओं और रोगाणुओं को हटाया जाता है। इसमें क्लोरीनेशन, UV उपचार और रिवर्स ऑस्मोसिस शामिल हैं। उद्योगों के लिए ETP यानी Effluent Treatment Plant, शहरों के लिए STP यानी Sewage Treatment Plant और छोटे उद्योगों के समूह के लिए CETP यानी Common Effluent Treatment Plant लगाए जाते हैं। भारत में कुल सीवेज उपचार क्षमता केवल 30 प्रतिशत है जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए भारत सरकार का सबसे बड़ा अभियान है। इसे जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा लॉन्च किया गया था और इसे राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन यानी NMCG द्वारा चलाया जा रहा है। इसका बजट 20,000 करोड़ रुपये रखा गया है जो 2026 तक बढ़ाकर 22,500 करोड़ कर दिया गया है। इसके मुख्य स्तंभ हैं - सीवेज उपचार, नदी तट विकास, नदी सतह की सफाई, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और जन जागरूकता। इसके तहत 349 से अधिक परियोजनाएं शुरू की गई हैं जिनमें 157 सीवेज परियोजनाएं शामिल हैं। गंगा में 11,000 किलोमीटर से अधिक सीवर लाइन बिछाई गई है और 6000 MLD से अधिक उपचार क्षमता विकसित की गई है। इस कार्यक्रम के तहत गंगा ग्राम योजना, जैविक खेती और डॉल्फिन संरक्षण भी शामिल है। गंगा एक्शन प्लान 1986 और 1993 में पहले भी शुरू किया गया था लेकिन नमामि गंगे अधिक व्यापक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला है। स्वच्छ भारत मिशन का जल प्रदूषण नियंत्रण से सीधा संबंध है। स्वच्छ भारत मिशन 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य खुले में शौच को खत्म करना और ठोस कचरा प्रबंधन करना है। जब शौचालय नहीं होते हैं तो मल सीधे जल स्रोतों में मिल जाता है जिससे जल जनित रोग फैलते हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं और 5 लाख से अधिक गांव ODF घोषित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण और शहरी दो भागों में है। इसका दूसरा चरण 2020 से 2025 तक ODF प्लस पर केंद्रित है जिसमें ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, गोबरधन योजना और प्लास्टिक मुक्त गांव शामिल हैं। स्वच्छता से जल गुणवत्ता में सुधार होता है और जल जनित रोगों में कमी आती है। जल गुणवत्ता मानक यह तय करते हैं कि जल पीने योग्य है या नहीं। भारत में पीने के पानी के लिए BIS मानक IS 10500:2012 लागू है। इसके अनुसार pH 6.5 से 8.5, TDS 500 mg/L से कम, कठोरता 200 mg/L से कम, फ्लोराइड 1.0 mg/L से कम, नाइट्रेट 45 mg/L से कम और आर्सेनिक 0.01 mg/L से कम होना चाहिए। CPCB ने सतही जल को 5 श्रेणियों A, B, C, D, E में बांटा है। WHO के अनुसार भी जल में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया नहीं होना चाहिए। जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए CPCB 4000 से अधिक स्थानों पर जल गुणवत्ता की जांच करता है। थर्मल प्रदूषण जल प्रदूषण का एक विशेष प्रकार है। जब उद्योगों, विशेषकर ताप विद्युत संयंत्रों और परमाणु संयंत्रों से गर्म जल को सीधे नदी या झील में छोड़ दिया जाता है तो जल का तापमान बढ़ जाता है। तापमान बढ़ने से जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है क्योंकि गर्म जल में ऑक्सीजन कम घुलती है। इससे जलीय जीवों विशेषकर मछलियों की मृत्यु हो जाती है। थर्मल प्रदूषण से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है और संवेदनशील प्रजातियां समाप्त हो जाती हैं। इसके नियंत्रण के लिए कूलिंग टावर, कूलिंग पॉन्ड और कृत्रिम झीलों का उपयोग किया जाता है ताकि गर्म जल को ठंडा करके ही नदी में छोड़ा जाए। पर्यावरण मंत्रालय ने ताप विद्युत संयंत्रों के लिए तापमान मानक तय किए हैं। निष्कर्षतः जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए कानून, तकनीक, जन भागीदारी और सरकारी कार्यक्रमों का समन्वय आवश्यक है। प्रतियोगी परीक्षाओं में जल अधिनियम 1974, नमामि गंगे, स्वच्छ भारत मिशन, STP, ETP और थर्मल प्रदूषण से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ जल प्रदूषण अधिनियम 1974 भारत का पहला जल कानून, CPCB और SPCB का गठन, उल्लंघन पर 6 साल तक कैद।
- ✅ अपशिष्ट जल उपचार 3 चरण - प्राथमिक, द्वितीयक जैविक और तृतीयक रासायनिक, STP, ETP, CETP का उपयोग।
- ✅ नमामि गंगे जून 2014 में शुरू, 20,000 करोड़ बजट, 349 परियोजनाएं, 6000 MLD उपचार क्षमता।
- ✅ स्वच्छ भारत मिशन 2 अक्टूबर 2014, 10 करोड़ शौचालय, ODF से जल जनित रोगों में कमी।
- ✅ जल गुणवत्ता मानक BIS IS 10500:2012 - pH 6.5-8.5, TDS 500 से कम, फ्लोराइड 1.0 से कम।
- ✅ थर्मल प्रदूषण ताप विद्युत संयंत्रों से गर्म जल छोड़ने से होता है, DO घटता है, कूलिंग टावर से नियंत्रण।
- ✅ नियंत्रण उपाय - 3R सिद्धांत, जैविक खेती, जन जागरूकता और कानूनों का सख्त पालन।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| जल प्रदूषण निवारण अधिनियम 1974 | यह अधिनियम 23 मार्च 1974 को पारित हुआ, यह भारत का पहला जल प्रदूषण कानून है और इसके तहत CPCB और SPCB का गठन हुआ। |
| CPCB और SPCB के अधिकार | राज्य बोर्ड उद्योगों को सहमति देने, नमूने लेने और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बंद करने का अधिकार रखते हैं, उल्लंघन पर 6 साल तक कैद। |
| अपशिष्ट जल उपचार के चरण | उपचार 3 चरणों में होता है - प्राथमिक में छानना, द्वितीयक में जैविक उपचार से BOD 90% कम, तृतीयक में रासायनिक शुद्धिकरण। |
| STP, ETP और CETP | STP शहरी सीवेज के लिए, ETP औद्योगिक अपशिष्ट के लिए, CETP छोटे उद्योगों के समूह के लिए, भारत में उपचार क्षमता केवल 30% है। |
| नमामि गंगे कार्यक्रम | जून 2014 में लॉन्च, बजट 20,000 करोड़, NMCG द्वारा संचालित, 349 परियोजनाएं और 6000 MLD उपचार क्षमता विकसित। |
| गंगा एक्शन प्लान | गंगा एक्शन प्लान पहला चरण 1986 और दूसरा 1993 में लॉन्च हुआ था, नमामि गंगे इसका अधिक व्यापक रूप है। |
| स्वच्छ भारत मिशन | 2 अक्टूबर 2014 को लॉन्च, 10 करोड़ शौचालय बने, 5 लाख गांव ODF घोषित, जल जनित रोगों में कमी आई। |
| जल गुणवत्ता मानक BIS | BIS IS 10500:2012 के अनुसार pH 6.5-8.5, TDS 500 mg/L से कम, फ्लोराइड 1.0 और आर्सेनिक 0.01 mg/L से कम होना चाहिए। |
| थर्मल प्रदूषण | ताप विद्युत संयंत्रों से गर्म जल छोड़ने से जल का तापमान बढ़ता है, DO घटता है, मछलियां मरती हैं, नियंत्रण के लिए कूलिंग टावर लगते हैं। |
| स्वच्छ भारत मिशन चरण 2 | दूसरा चरण 2020-2025 तक ODF प्लस पर केंद्रित है जिसमें ठोस और तरल कचरा प्रबंधन और गोबरधन योजना शामिल है। |