जल संसाधन प्रबंधन, राष्ट्रीय जल नीति 2012, अटल भूजल योजना, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे
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जल संसाधन प्रबंधन, राष्ट्रीय जल नीति 2012, जल संरक्षण, जल छाजन, अटल भूजल योजना, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे और अंतर्राज्यीय जल विवाद पर 600+ शब्दों में जानकारी।
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💡 व्याख्या
📚 विस्तृत जानकारी
जल संसाधन प्रबंधन Water Resource Management जल का वैज्ञानिक, सतत और न्यायसंगत उपयोग करने की प्रक्रिया है। भारत में कुल जल संसाधन 1869 BCM है जिसमें उपयोग योग्य 1123 BCM है। जल संसाधन प्रबंधन में सतही जल, भूजल, वर्षा जल और अपशिष्ट जल सभी का प्रबंधन शामिल है। जल संसाधन प्रबंधन के तीन सिद्धांत हैं - समता Equity, दक्षता Efficiency और स्थिरता Sustainability। भारत में जल प्रबंधन के लिए एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन IWRM अपनाया गया है जिसमें बेसिन को इकाई मानकर योजना बनाई जाती है। जल संसाधन प्रबंधन में जल की उपलब्धता, मांग, गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन सभी को देखा जाता है। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1951 में 5177 घन मीटर थी जो 2021 में 1486 घन मीटर हो गई है और 2050 तक 1140 घन मीटर होने का अनुमान है जो जल संकट को दर्शाता है। राष्ट्रीय जल नीति 2012 भारत की वर्तमान जल नीति है। भारत में पहली जल नीति 1987 में और दूसरी 2002 में बनी थी। तीसरी राष्ट्रीय जल नीति 2012 को 2012 में अपनाया गया था। इस नीति में जल को आर्थिक वस्तु के बजाय प्राकृतिक संसाधन माना गया है और जल को मानव अधिकार माना गया है। इस नीति में पानी के लिए प्राथमिकता तय की गई है - पहला पेयजल, दूसरा सिंचाई, तीसरा बिजली, चौथा पारिस्थितिकी और पांचवां उद्योग। इस नीति में IWRM, जल उपयोग दक्षता 20% बढ़ाने, जल संचयन और पुनर्चक्रण पर जोर दिया गया है। इस नीति में जल नियामक प्राधिकरण बनाने और जल का उचित मूल्य तय करने की बात कही गई है। इस नीति में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और अंतर्राज्यीय सहयोग पर भी जोर दिया गया है। मसौदा राष्ट्रीय जल नीति 2020 भी जारी हुई है। जल संरक्षण Water Conservation जल को बचाने और बर्बाद होने से रोकने की प्रक्रिया है। जल संरक्षण के उपाय हैं - वर्षा जल संचयन Rainwater Harvesting, जल का पुन: उपयोग, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, कम पानी वाली फसलें और जागरूकता। भारत में पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकें हैं - राजस्थान में जोहड़, बावड़ी, टांका, तमिलनाडु में एरी, हिमाचल में नौला, मेघालय में बांस ड्रिप और महाराष्ट्र में बंधारा। आधुनिक तकनीकें हैं - चेक डैम, फार्म पॉन्ड, वाटरशेड प्रबंधन और रूफटॉप हार्वेस्टिंग। सरकार ने जल शक्ति अभियान 2019 में शुरू किया था जो देश का सबसे बड़ा जल संरक्षण अभियान है। जल संरक्षण से भूजल स्तर बढ़ता है और सूखे से बचाव होता है। जल छाजन Watershed Management भूमि और जल का एक साथ प्रबंधन है। जल छाजन का अर्थ है एक क्षेत्र में गिरने वाले वर्षा जल को एकत्रित करना और उसका प्रबंधन करना। जल छाजन में पहाड़ों से मैदान तक जल के बहाव को रोकना, मिट्टी संरक्षण, वृक्षारोपण और चेक डैम बनाना शामिल है। भारत में जल छाजन कार्यक्रम 1983 में शुरू हुआ था और वर्तमान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वाटरशेड घटक WDC-PMKSY चल रहा है जिसका नाम अब WDC 2.0 है। जल छाजन से मिट्टी का कटाव 50% तक कम होता है और भूजल 30% तक बढ़ता है। महाराष्ट्र में रालेगण सिद्धि जल छाजन का सबसे सफल उदाहरण है जिसे अन्ना हजारे ने विकसित किया। अटल भूजल योजना Atal Bhujal Yojana भूजल प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी योजना है। यह योजना 25 दिसंबर 2019 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर शुरू हुई थी। यह योजना 7 राज्यों - गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 80 जिलों में लागू है। इस योजना का बजट 6000 करोड़ रुपये है जिसमें 50% विश्व बैंक का ऋण है। इस योजना का उद्देश्य भूजल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है और यह Demand Side योजना है Supply Side नहीं। इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर जल सुरक्षा योजना बनाई जाती है। इस योजना में भूजल स्तर मापने के लिए पीजोमीटर लगाए गए हैं। जल जीवन मिशन Jal Jeevan Mission हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना है। यह मिशन 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। इसका लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण घर में 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन नल से जल पहुंचाना है। 2019 में केवल 17% घरों में नल था जो 2024 में 78% से अधिक हो गया है। इस मिशन का बजट 3.6 लाख करोड़ रुपये है। इस मिशन में महिलाओं की भागीदारी और जल समितियां बनाई गई हैं। यह मिशन SDG 6 स्वच्छ जल से जुड़ा है। नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा नदी को साफ करने का राष्ट्रीय मिशन है। यह कार्यक्रम 10 मई 2015 को शुरू हुआ था और इसका बजट 20,000 करोड़ रुपये है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन NMCG द्वारा चलाया जाता है। नमामि गंगे के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, घाटों की सफाई, जैव विविधता संरक्षण और जन जागरूकता शामिल है। गंगा में प्रदूषण 2015 की तुलना में 40% कम हुआ है। इस कार्यक्रम में 5 देशों जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया आदि के साथ सहयोग है। अंतर्राज्यीय जल विवाद भारत में जल विवाद बहुत आम हैं। भारत में 9 प्रमुख अंतर्राज्यीय जल विवाद हैं। सबसे प्रसिद्ध कावेरी विवाद तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच, कृष्णा विवाद महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच और सतलुज-यमुना लिंक SYL विवाद पंजाब और हरियाणा के बीच। संविधान के अनुच्छेद 262 में अंतर्राज्यीय जल विवाद के लिए संसद को कानून बनाने का अधिकार दिया गया है और इसके तहत अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम 1956 बना है। इस अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल बनाए जाते हैं जिनका निर्णय सुप्रीम कोर्ट के बराबर होता है। 2019 में संशोधन करके एक स्थायी ट्रिब्यूनल और DRC यानी विवाद समाधान समिति बनाने का प्रावधान किया गया है।
⚡ Quick Revision - मुख्य बिंदु
- ✅ जल संसाधन कुल 1869 BCM प्रति व्यक्ति 1951 में 5177 से 2021 में 1486, IWRM बेसिन आधारित, सिद्धांत समता दक्षता स्थिरता।
- ✅ राष्ट्रीय जल नीति 2012 तीसरी नीति, जल मानव अधिकार, प्राथमिकता पेयजल सिंचाई बिजली, लक्ष्य दक्षता 20% बढ़ाना, जल नियामक।
- ✅ जल संरक्षण उपाय वर्षा जल संचयन ड्रिप स्प्रिंकलर, पारंपरिक जोहड़ एरी बांस ड्रिप, जल शक्ति अभियान 2019 सबसे बड़ा।
- ✅ जल छाजन भूमि जल एक साथ प्रबंधन 1983 से WDC-PMKSY 2.0, रालेगण सिद्धि सफल उदाहरण, मिट्टी कटाव 50% कम।
- ✅ अटल भूजल 25 दिसंबर 2019 7 राज्य 80 जिले 6000 करोड़, Demand Side समुदाय भागीदारी, जल जीवन मिशन 15 अगस्त 2019 55 LPCD लक्ष्य 17% से 78%।
- ✅ नमामि गंगे 10 मई 2015 20000 करोड़ NMCG, प्रदूषण 40% कम, अंतर्राज्यीय जल विवाद 9 प्रमुख अनुच्छेद 262 अधिनियम 1956 ट्रिब्यूनल।
- ✅ कावेरी 150 साल पुराना विवाद 2018 SC फैसला 404 TMC तमिलनाडु, जल शक्ति मंत्रालय 2019, कैच द रेन अभियान।
📊 Important Facts Table
| Topic | Fact |
|---|---|
| जल संसाधन प्रबंधन | कुल जल 1869 BCM उपयोग योग्य 1123 BCM, प्रति व्यक्ति उपलब्धता 1951 में 5177 से घटकर 2021 में 1486 घन मीटर, सिद्धांत समता दक्षता स्थिरता, IWRM बेसिन इकाई। |
| राष्ट्रीय जल नीति 2012 | तीसरी नीति पहली 1987 दूसरी 2002, जल को मानव अधिकार माना, प्राथमिकता पेयजल सिंचाई बिजली पारिस्थितिकी उद्योग, लक्ष्य जल दक्षता 20% बढ़ाना, IWRM और जल नियामक। |
| जल संरक्षण | उपाय वर्षा जल संचयन पुन: उपयोग ड्रिप स्प्रिंकलर, पारंपरिक जोहड़ बावड़ी टांका एरी नौला बांस ड्रिप, जल शक्ति अभियान 2019 सबसे बड़ा अभियान। |
| जल छाजन | भूमि और जल का एक साथ प्रबंधन, कार्यक्रम 1983 से, WDC-PMKSY 2.0 वर्तमान, मिट्टी कटाव 50% कम भूजल 30% बढ़ता, रालेगण सिद्धि अन्ना हजारे सफल उदाहरण। |
| अटल भूजल योजना | 25 दिसंबर 2019 को शुरू, 7 राज्य 80 जिले, बजट 6000 करोड़ 50% विश्व बैंक, Demand Side समुदाय भागीदारी, ग्राम जल सुरक्षा योजना पीजोमीटर। |
| जल जीवन मिशन | 15 अगस्त 2019 को शुरू, लक्ष्य हर घर 55 LPCD नल जल, 2019 में 17% से 2024 में 78% घर, बजट 3.6 लाख करोड़, SDG 6 से जुड़ा। |
| नमामि गंगे | 10 मई 2015 को शुरू बजट 20000 करोड़, NMCG द्वारा संचालित, STP घाट सफाई जैव विविधता, प्रदूषण 40% कम, 5 देशों के साथ सहयोग। |
| अंतर्राज्यीय जल विवाद | 9 प्रमुख विवाद, कावेरी कृष्णा SYL सबसे प्रसिद्ध, अनुच्छेद 262 और अधिनियम 1956, ट्रिब्यूनल निर्णय सुप्रीम कोर्ट बराबर, 2019 संशोधन स्थायी ट्रिब्यूनल और DRC। |
| जल शक्ति अभियान | 1 जुलाई 2019 को शुरू, जल शक्ति मंत्रालय 2019 में बना, दो चरण JSA और JSA कैच द रेन, 256 जल संकट जिलों में लागू। |
| कावेरी जल विवाद | तमिलनाडु कर्नाटक केरल पुडुचेरी के बीच 150 साल पुराना, ट्रिब्यूनल 1990 में अंतिम आदेश 2007 में, सुप्रीम कोर्ट 2018 में फैसला कर्नाटक को 284 TMC तमिलनाडु को 404 TMC। |