वायुमंडल की संरचना - भाग 1
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वायुमंडल की परतें, संघटन और ओजोन परत पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
वायुमंडल की संरचना: परतें, संघटन और ओजोन परत
वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर गैसों का आवरण है जो गुरुत्वाकर्षण द्वारा बंधा है और जीवन के लिए आवश्यक है। यह पृथ्वी को सौर विकिरण, उल्काओं और अत्यधिक ताप से बचाता है तथा मौसम-जलवायु को नियंत्रित करता है। वायुमंडल की ऊँचाई 10,000 किमी तक मानी जाती है पर 99% द्रव्यमान 32 किमी के अंदर है। इसकी परतों में तापमान का वितरण सौर विकिरण के अवशोषण पर निर्भर करता है - क्षोभमंडल में ह्रास दर से घटता है तो समतापमंडल में ओजोन द्वारा अवशोषण से बढ़ता है। UPSC में वायुमंडल का संघटन, प्रत्येक परत की ऊँचाई-तापमान और ओजोन क्षरण का कारण सबसे अधिक पूछा जाता है।
संघटन (शुष्क वायु में आयतन से): नाइट्रोजन 78.08%, ऑक्सीजन 20.95%, आर्गन 0.93%, कार्बन डाइऑक्साइड 0.04% (420 ppm 2024 में), निऑन, हीलियम, मीथेन, हाइड्रोजन अल्पमात्रा में। जलवाष्प 0-4% (परिवर्तनशील), धूलकण 0.01%
परतें और ऊँचाई: क्षोभमंडल 0-18 किमी (विषुवत) / 0-8 किमी (ध्रुव), औसत 12 किमी; समतापमंडल 18-50 किमी; मध्यमंडल 50-80 किमी; तापमंडल 80-400 किमी; बाह्यमंडल 400-10,000 किमी
तापमान प्रवणता: क्षोभमंडल में 6.5°C/किमी की ह्रास दर से -80°C (क्षोभसीमा) तक गिरता है, समतापमंडल में -60°C से 0°C (समतापसीमा) तक बढ़ता है, मध्यमंडल में 0°C से -90°C (मध्यसीमा, वायुमंडल का सबसे ठंडा) तक गिरता है, तापमंडल में -90°C से 1500°C तक बढ़ता है
ओजोन परत: स्थिति - समतापमंडल में 15-35 किमी, अधिकतम सांद्रता 20-25 किमी पर; निर्माण - चैपमैन चक्र (O₂ + UV-C → 2O, O + O₂ → O₃); मोटाई - डॉबसन इकाई (DU), औसत 300 DU, 220 DU से कम = ओजोन छिद्र
ओजोन क्षरण: कारण - CFCs, Halons, CCl₄, CH₃Br द्वारा क्लोरीन-ब्रोमीन मुक्त होना, 1 क्लोरीन परमाणु 1,00,000 ओजोन अणु नष्ट करता है; ओजोन छिद्र - अंटार्कटिका पर 25 मिलियन किमी² तक (2023)
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षरित, 1 जनवरी 1989 से लागू, 198 देशों द्वारा अनुसमर्थित - इतिहास की पहली सार्वभौमिक संधि, 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस, किगाली संशोधन 2016 - HFCs को कम करना
1. वायुमंडल का संघटन - गैसें, जलवाष्प और धूलकण
स्थायी गैसें: नाइट्रोजन (N₂) 78.08% - सबसे अधिक, जीवन के लिए प्रोटीन का आधार, पर सीधे पौधे उपयोग नहीं कर सकते, जीवाणुओं द्वारा स्थिरीकरण। ऑक्सीजन (O₂) 20.95% - श्वसन और दहन के लिए, 120 किमी तक स्थिर फिर घटती है। आर्गन (Ar) 0.93% - अक्रिय गैस। कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) 0.04% - सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनशील गैस, 1750 में 280 ppm से 2024 में 420 ppm, ग्रीनहाउस प्रभाव और प्रकाश संश्लेषण के लिए। अन्य - निऑन 18 ppm, हीलियम 5 ppm, मीथेन 1.9 ppm, हाइड्रोजन, ओजोन 0.02 ppm।
परिवर्तनशील घटक: (i) जलवाष्प (Water Vapour): 0% (ध्रुव, मरुस्थल) से 4% (विषुवत) तक, औसत 2%। ऊँचाई के साथ घटता है - 2 किमी तक 90% जलवाष्प। महत्व - सभी मेघ, वर्षा, कोहरा इसी से, ग्रीनहाउस गैस के रूप में ताप को अवशोषित करता है, गुप्त ऊष्मा का परिवहन। (ii) धूलकण (Dust Particles / Aerosols): समुद्री लवण, धूल, ज्वालामुखी राख, उल्का धूल, पराग। आर्द्रताग्राही नाभिक (Hygroscopic Nuclei) के रूप में मेघ निर्माण में। धूलकण सौर विकिरण को प्रकीर्णित (Scattering) करते हैं - आकाश नीला और सूर्योदय लाल इसी कारण। ज्वालामुखी उद्गार से धूलकण बढ़ने पर तापमान घटता है - जैसे 1991 पिनातुबो से 0.5°C कमी।
2. वायुमंडल की परतें - क्षोभमंडल से बाह्यमंडल तक
(i) क्षोभमंडल (Troposphere - 0 से 18 किमी): ग्रीक Tropos = परिवर्तन। सबसे निचली, सबसे घनी - 75% द्रव्यमान और 90% जलवाष्प इसी में। ऊँचाई विषुवत पर 18 किमी (ताप से फैलाव), ध्रुवों पर 8 किमी। तापमान 6.5°C/किमी की सामान्य ह्रास दर से घटता है। शीर्ष सीमा क्षोभसीमा (Tropopause) - विषुवत पर -80°C, ध्रुव पर -45°C, यहाँ जेट स्ट्रीम (100-300 किमी/घंटा) चलती है। सभी मौसमी घटनाएँ - मेघ, वर्षा, तूफान इसी में।
(ii) समतापमंडल (Stratosphere - 18 से 50 किमी): Stratum = परत। 19% द्रव्यमान। तापमान -60°C से 0°C तक बढ़ता है क्योंकि ओजोन परत (15-35 किमी) UV विकिरण को अवशोषित कर गर्म करती है। स्थिर, धूल-जलवाष्प रहित, इसलिए जेट विमान यहाँ उड़ते हैं (20 किमी)। निचले भाग में मुक्ता मेघ (Mother of Pearl Clouds)। शीर्ष समतापसीमा (Stratopause) - 0°C, 50 किमी पर।
(iii) मध्यमंडल (Mesosphere - 50 से 80 किमी): Meso = मध्य। 0.5% द्रव्यमान। तापमान 0°C से -90°C तक घटता है - वायुमंडल का सबसे ठंडा भाग, मध्यसीमा (Mesopause) पर -90°C, 80 किमी पर। उल्काएँ इसी में जलती हैं, निशादीप्त मेघ (Noctilucent Clouds - 75-85 किमी) बनते हैं।
(iv) तापमंडल (Thermosphere - 80 से 400 किमी): तापमान -90°C से 1500°C तक तीव्र वृद्धि क्योंकि ऑक्सीजन परमाणु सौर विकिरण अवशोषित करते हैं। आयनमंडल (Ionosphere - 80-400 किमी) इसी का भाग है - D (60-90 किमी), E (90-150 किमी), F (150-400 किमी) परतें, जो रेडियो तरंगों को परावर्तित करती हैं और ध्रुवीय प्रकाश (Aurora Australis/Borealis) बनाती हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) 400 किमी पर इसी में परिक्रमा करता है।
(v) बाह्यमंडल (Exosphere - 400 से 10,000 किमी): सबसे बाहरी, वायु अत्यंत विरल, हाइड्रोजन और हीलियम प्रधान। कृत्रिम उपग्रह (भूस्थिर 36,000 किमी तक) इसी में, धीरे-धीरे अंतरिक्ष में विलीन।
3. ओजोन परत - निर्माण, महत्व, क्षरण और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
स्थिति और निर्माण: ओजोन (O₃) की अधिकतम सांद्रता समतापमंडल में 20-25 किमी पर, परत 15-35 किमी तक। निर्माण चैपमैन चक्र (1930) से - (i) O₂ + UV-C (<242 nm) → O + O, (ii) O + O₂ + M (तीसरा कण) → O₃। O₃ + UV-B (200-320 nm) → O₂ + O, पुनः O₃ बनता है - यह संतुलन प्राकृतिक रूप से बना रहता है। मोटाई डॉबसन इकाई (DU) में - 1 DU = 0.01 मिमी मोटी परत STP पर, औसत 300 DU (3 मिमी)।
महत्व: ओजोन परत UV-B (280-315 nm) का 90% और UV-C (100-280 nm) का 100% अवशोषित करती है। UV-B से त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, फाइटोप्लांकटन नष्ट, खाद्य श्रृंखला प्रभावित। ओजोन न होने पर पृथ्वी पर जीवन असंभव। समतापमंडल को गर्म रखकर तापमान प्रवणता भी नियंत्रित करती है।
क्षरण: 1974 में मोलिना और रोलैंड ने CFCs (क्लोरोफ्लोरोकार्बन - फ्रिज, AC, स्प्रे में) को कारण बताया। CFCs समतापमंडल में जाकर UV से टूटकर क्लोरीन (Cl) मुक्त करते हैं - Cl + O₃ → ClO + O₂, ClO + O → Cl + O₂, एक Cl 1,00,000 O₃ नष्ट करता है। हेलॉन से ब्रोमीन 60 गुना अधिक खतरनाक। अंटार्कटिका पर ध्रुवीय समतापमंडलीय मेघ (Polar Stratospheric Clouds, -80°C) पर अभिक्रिया तेज, इसलिए सितंबर-अक्टूबर में ओजोन छिद्र - 2023 में 26 मिलियन किमी², 90 DU तक।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: 16 सितंबर 1987 को 46 देशों ने हस्ताक्षर किए, 1 जनवरी 1989 से लागू, अब 198 देश - संयुक्त राष्ट्र इतिहास की एकमात्र सार्वभौमिक संधि। लक्ष्य - CFCs को 1996 तक विकसित देशों में 100% समाप्त, HCFCs को 2030 तक। सफलता - CFCs में 99% कमी, ओजोन परत 2066 तक 1980 स्तर पर लौटने का अनुमान। किगाली संशोधन 2016 - HFCs (जो ओजोन सुरक्षित पर प्रबल ग्रीनहाउस गैस हैं) को 2047 तक 80% कम करना। 16 सितंबर विश्व ओजोन दिवस है। भारत ने 1992 में अनुसमर्थन किया, CFC उत्पादन 2010 में बंद।
| परत | ऊँचाई | तापमान प्रवृत्ति | मुख्य विशेषता | UPSC महत्व |
|---|---|---|---|---|
| क्षोभमंडल | 0-18 किमी | 6.5°C/किमी घटता, -80°C तक | 75% द्रव्यमान, मौसम, जेट स्ट्रीम | सभी मौसमी घटनाएँ |
| समतापमंडल | 18-50 किमी | -60°C से 0°C बढ़ता | ओजोन परत 15-35 किमी, स्थिर | ओजोन, जेट विमान |
| मध्यमंडल | 50-80 किमी | 0°C से -90°C घटता | सबसे ठंडा, उल्का दहन | निशादीप्त मेघ |
| तापमंडल | 80-400 किमी | -90°C से 1500°C बढ़ता | आयनमंडल, औरोरा, ISS | रेडियो संचार |
| बाह्यमंडल | 400-10,000 किमी | अत्यंत विरल | H, He प्रधान, उपग्रह | उपग्रह कक्षा |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- वायुमंडल का 99% द्रव्यमान 32 किमी के अंदर, 75% क्षोभमंडल में - इसलिए मौसम यहीं।
- ह्रास दर 6.5°C/किमी - विषुवत पर क्षोभसीमा 18 किमी, -80°C; ध्रुव पर 8 किमी, -45°C - इसलिए विषुवत पर क्षोभमंडल मोटा।
- ओजोन परत 15-35 किमी, अधिकतम 20-25 किमी, निर्माण UV-C से, विनाश UV-B अवशोषण से - यही समतापमंडल को गर्म रखता है।
- 1 DU = 0.01 मिमी, औसत 300 DU, 220 DU से कम = ओजोन छिद्र, अंटार्कटिका में सितंबर-अक्टूबर में अधिकतम।
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 - सार्वभौमिक संधि, CFCs 99% कम, ओजोन 2066 तक रिकवरी का अनुमान, किगाली संशोधन 2016 HFCs के लिए।
- तापमंडल में तापमान 1500°C पर भी गर्मी नहीं लगती क्योंकि वायु विरल - ऊष्मा का अनुभव घनत्व पर निर्भर।
- UPSC ट्रिक - क्षोभमंडल में तापमान घटता, समतापमंडल में बढ़ता, मध्यमंडल में घटता, तापमंडल में बढ़ता - घट-बढ़-घट-बढ़।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. क्षोभमंडल में तापमान ऊँचाई के साथ घटता है पर समतापमंडल में बढ़ता क्यों है?
A. क्षोभमंडल पृथ्वी की सतह से गर्म होता है - सतह सौर विकिरण अवशोषित कर IR विकिरण छोड़ती है, इसलिए सतह के पास गर्म, ऊपर ठंडा - ह्रास दर 6.5°C/किमी। समतापमंडल में ओजोन परत UV विकिरण अवशोषित कर सीधे गर्म होती है, इसलिए 20 किमी पर -60°C से 50 किमी पर 0°C तक तापमान बढ़ता है। यही कारण है कि समतापमंडल स्थिर है - गर्म हवा ऊपर, ठंडी नीचे - संवहन नहीं।
Q2. ओजोन छिद्र अंटार्कटिका पर ही सबसे बड़ा क्यों बनता है?
A. अंटार्कटिका में शीतकाल में -80°C पर ध्रुवीय समतापमंडलीय मेघ (PSCs) बनते हैं, जिनकी सतह पर क्लोरीन रिजर्व (ClONO₂, HCl) सक्रिय क्लोरीन में बदलता है। ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) क्लोरीन को बाहर नहीं जाने देता। वसंत (सितंबर-अक्टूबर) में सूर्य प्रकाश आने पर Cl₂ + UV → 2Cl और O₃ विनाश तेजी से होता है। आर्कटिक में तापमान अपेक्षाकृत अधिक और भंवर कमजोर होने से छिद्र छोटा बनता है।
Q3. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को सबसे सफल पर्यावरण संधि क्यों कहा जाता है?
A. यह इतिहास की एकमात्र सार्वभौमिक संधि है - 198 देशों ने अनुसमर्थन किया। CFCs उत्पादन 1986 के 1.1 मिलियन टन से 99% घटकर 2023 में 0.01 मिलियन टन रह गया। ओजोन क्षरण रुका और 2000 के बाद धीरे-धीरे सुधार - 2066 तक 1980 स्तर पर लौटने का अनुमान। जलवायु लाभ भी - CFCs प्रबल ग्रीनहाउस गैसें थीं, उनके हटने से 0.5°C वार्मिंग रुकी। किगाली संशोधन से HFCs कम कर 2100 तक 0.4°C अतिरिक्त वार्मिंग रोकने का लक्ष्य। इसलिए UPSC में इसे जलवायु और ओजोन दोनों के लिए मॉडल कहा जाता है।
Q4. आयनमंडल क्या है और यह रेडियो संचार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
A. आयनमंडल तापमंडल का आयनित भाग है - 80-400 किमी में सौर विकिरण से N₂, O₂ आयनित होकर इलेक्ट्रॉन मुक्त करते हैं। परतें - D (60-90 किमी, दिन में ही), E (90-150 किमी, केनली-हेविसाइड), F1/F2 (150-400 किमी, एपलटन)। ये परतें 3-30 MHz की शॉर्टवेव रेडियो तरंगों को परावर्तित कर लंबी दूरी तक संचार संभव बनाती हैं। सौर ज्वाला (Solar Flare) से आयनमंडल में गड़बड़ी से रेडियो ब्लैकआउट और GPS त्रुटि होती है। औरोरा भी इसी में बनता है - सौर पवन के कणों का आयनों से टकराव।