वायुमंडल की संरचना - भाग 2
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आयनमंडल और वायुदाब पेटियों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
आयनमंडल और वायुदाब पेटियां: संचार, औरोरा और वैश्विक पवन प्रणाली
वायुमंडल केवल गैसों का आवरण नहीं, बल्कि संचार और पवन प्रणाली का आधार है। तापमंडल में स्थित आयनमंडल रेडियो तरंगों को परावर्तित कर वैश्विक संचार संभव बनाता है और ध्रुवीय प्रकाश (औरोरा) का निर्माण करता है, जबकि धरातल पर वायुदाब में अंतर से वायुदाब पेटियां बनती हैं जो व्यापारिक पवन, पछुआ और ध्रुवीय पवनों को जन्म देती हैं। आयनमंडल का व्यवहार सौर विकिरण पर और वायुदाब पेटियों का व्यवहार ताप और कोरियोलिस बल पर निर्भर करता है। UPSC में आयनमंडल की D, E, F परतें, ITCZ का खिसकाव और उपोष्ण उच्च दाब का गतिक कारण सबसे अधिक पूछा जाता है।
आयनमंडल (80-600 किमी): तापमंडल का आयनित भाग। परतें - D (60-90 किमी, दिन में ही, निम्न आवृत्ति अवशोषित), E (90-150 किमी, केनेली-हेविसाइड परत, 90-120 किमी मुख्य, मध्यम तरंग परावर्तित), F1 (150-220 किमी) और F2 (220-400 किमी, एपलटन परत, सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन घनत्व, लघु तरंग परावर्तित)
रेडियो संचार: D परत AM रेडियो को दिन में अवशोषित करती है, E परत 1-10 MHz को, F2 परत 10-30 MHz (शॉर्टवेव) को 4000 किमी तक परावर्तित करती है। MUF (Maximum Usable Frequency) और Critical Frequency इसी पर निर्भर
औरोरा: सौर पवन के आवेशित कण (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन) 80-300 किमी पर O और N से टकराते हैं। ऑक्सीजन - हरा (100-200 किमी, 557.7 nm) और लाल (200-300 किमी), नाइट्रोजन - नीला/बैंगनी। अंडाकार क्षेत्र - 65-75° अक्षांश, नाम - औरोरा बोरियालिस (उत्तरी) और ऑस्ट्रेलिस (दक्षिणी)
वायुदाब पेटियां (7 पेटियां): विषुवतीय निम्न (0-5°N/S, तापीय, 1008 mb), 2 उपोष्ण उच्च (30-35°N/S, गतिक, 1020 mb, अश्व अक्षांश), 2 उपध्रुवीय निम्न (60-65°N/S, गतिक, 998 mb), 2 ध्रुवीय उच्च (80-90°N/S, तापीय, 1025 mb)
ITCZ: Inter Tropical Convergence Zone - व्यापारिक पवनों का अभिसरण, 0-5°N/S पर निम्न दाब, सूर्य के साथ 10-20°N (जुलाई) से 10°S (जनवरी) तक खिसकता है, Doldrums (शांत पेटी) भी कहते हैं
बल: दाब प्रवणता बल (Pressure Gradient Force) = -ΔP/Δd, समदाब रेखा के लंबवत, उच्च से निम्न की ओर; कोरियोलिस बल = 2mVΩsinφ, विषुवत पर 0, ध्रुव पर अधिकतम, उत्तरी गोलार्ध में दायें, दक्षिणी में बायें मोड़ता है
1. आयनमंडल - परतें, रेडियो संचार और ध्रुवीय प्रकाश
परतों का निर्माण: सौर X-किरण और UV विकिरण 60 किमी से ऊपर N₂, O₂, O को आयनित करते हैं - परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकलकर आयनमंडल बनता है। इलेक्ट्रॉन घनत्व दिन में अधिक, रात में पुनर्संयोजन से कम।
(i) D परत (60-90 किमी): सबसे निचली, दिन में ही बनती है, रात में समाप्त। इलेक्ट्रॉन घनत्व सबसे कम (10³/सेमी³)। निम्न आवृत्ति (LF, 30-300 kHz) को अवशोषित करती है, इसलिए AM रेडियो दिन में कम दूर जाता है। सौर ज्वाला (Solar Flare) में D परत सघन होकर शॉर्टवेव ब्लैकआउट करती है।
(ii) E परत (90-150 किमी) - केनेली-हेविसाइड परत: 90-120 किमी मुख्य, इलेक्ट्रॉन घनत्व 10⁵/सेमी³। मध्यम आवृत्ति (MF, 300 kHz-3 MHz) को परावर्तित करती है, रात में आंशिक रहती है। छिटपुट E (Sporadic E) - 100 किमी पर घना बादल, VHF को भी परावर्तित कर देता है।
(iii) F परत (150-400 किमी) - एपलटन परत: दिन में F1 (150-220 किमी) और F2 (220-400 किमी) में विभाजित, रात में केवल F (250-400 किमी) रहती है। इलेक्ट्रॉन घनत्व सबसे अधिक - 10⁶/सेमी³, F2 पर अधिकतम। 10-30 MHz शॉर्टवेव को एक छलांग में 4000 किमी तक परावर्तित करती है, बहु-छलांग से विश्वव्यापी संचार। GPS सिग्नल (1.5 GHz) इसी में देरी (Ionospheric Delay) से प्रभावित होता है, इसलिए द्वि-आवृत्ति सुधार आवश्यक।
औरोरा का निर्माण: सूर्य से आने वाली सौर पवन (400-800 किमी/सेकंड) के इलेक्ट्रॉन पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से ध्रुवों की ओर निर्देशित होते हैं। 80-300 किमी पर O परमाणु से टकराकर 557.7 nm हरा प्रकाश (100-200 किमी पर सबसे सामान्य), 630 nm लाल (200 किमी से ऊपर), N₂ से नीला-बैंगनी प्रकाश बनता है। औरोरल अंडाकार (Auroral Oval) 65-75° चुंबकीय अक्षांश पर। सौर तूफान में औरोरा 50° तक दिखता है। UPSC में पूछा जाता है - औरोरा तापमंडल/आयनमंडल में बनता है, क्षोभमंडल में नहीं।
2. वायुदाब पेटियों की उत्पत्ति - तापीय और गतिक कारण, बल
वायुदाब पेटियों के दो कारण: (a) तापीय कारण: अधिक ताप से वायु गर्म, हल्की होकर ऊपर उठती है - निम्न दाब (विषुवतीय निम्न, ध्रुवीय उच्च का आंशिक)। कम ताप से वायु ठंडी, भारी होकर नीचे बैठती है - उच्च दाब। (b) गतिक कारण: पृथ्वी के घूर्णन और वायु के अवतलन/अभिसरण से। उपोष्ण उच्च (30°) पर हैडली कोशिका की वायु ऊपर से नीचे उतरती है - गतिक उच्च। उपध्रुवीय निम्न (60°) पर पछुआ और ध्रुवीय पवनों का अभिसरण - गतिक निम्न। इसलिए 7 पेटियां - 1 तापीय विषुवतीय निम्न + 2 गतिक उपोष्ण उच्च + 2 गतिक उपध्रुवीय निम्न + 2 तापीय ध्रुवीय उच्च।
दाब प्रवणता बल (PGF): वायु को गति देने वाला प्राथमिक बल। PGF = -ΔP/Δd। समदाब रेखाएँ पास-पास = तीव्र PGF = तेज पवन। दिशा - उच्च से निम्न, समदाब रेखा के लंबवत।
कोरियोलिस बल: पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न आभासी बल, 1844 में गुस्टाव कोरियोलिस द्वारा। सूत्र - F = 2mVΩsinφ, जहाँ φ = अक्षांश, Ω = 7.29×10⁻⁵ rad/s। विशेषताएँ - विषुवत पर 0 (sin0°=0), ध्रुव पर अधिकतम, पवन वेग के समानुपाती, उत्तरी गोलार्ध में गति की दिशा के दायें, दक्षिणी में बायें मोड़ता है, पर गति नहीं बढ़ाता। फेरेल का नियम इसी पर आधारित। इसी कारण व्यापारिक पवन उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व से चलती हैं, सीधी उत्तर-दक्षिण नहीं।
3. प्रमुख वायुदाब पेटियां - ITCZ, उपोष्ण उच्च, उपध्रुवीय निम्न और ध्रुवीय उच्च
(i) विषुवतीय निम्न दाब पेटी / ITCZ (0-5°N/S): Inter Tropical Convergence Zone। वर्षभर सूर्य सीधा रहने से तापीय निम्न, वायु गर्म होकर ऊपर उठती है, इसलिए शांत - Doldrums (शांत पेटी)। दाब 1008 mb से कम, प्रतिदिन मेघ और संवहनीय वर्षा। उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवनों का अभिसरण यहीं होता है। सूर्य के उत्तरायण (21 जून) में ITCZ 10-20°N तक (भारत में हिमालय तराई तक) और दक्षिणायण (22 दिसंबर) में 10°S तक खिसकती है - यही भारतीय मानसून का आधार है। ITCZ के उत्तर खिसकने से भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून आता है।
(ii) उपोष्ण उच्च दाब पेटी (30-35°N/S): Horse Latitudes (अश्व अक्षांश) - पुराने समय में घोड़े फेंकने पड़ते थे क्योंकि जहाज शांत में फंस जाते थे। गतिक उच्च - विषुवत से उठी हैडली कोशिका 30° पर ठंडी होकर नीचे उतरती है, इसलिए उच्च दाब (1020-1025 mb)। वायु नीचे उतरने से गर्म और शुष्क हो जाती है, इसलिए विश्व के सभी गर्म मरुस्थल यहीं - सहारा, थार, कालाहारी, ऑस्ट्रेलियाई, अटाकामा। प्रतिचक्रवात और व्यापारिक पवनों का उद्गम।
(iii) उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी (60-65°N/S): गतिक निम्न - 30° से आने वाली पछुआ पवन और ध्रुव से आने वाली ध्रुवीय पवन का अभिसरण, वायु ऊपर उठती है। दाब 998 mb तक कम, वर्षभर चक्रवात और तूफान - शीतोष्ण चक्रवातों की उत्पत्ति। उत्तरी गोलार्ध में महाद्वीपों के कारण शीतकाल में यह पेटी खंडित हो जाती है, दक्षिणी में निरंतर।
(iv) ध्रुवीय उच्च दाब पेटी (80-90°N/S): तापीय उच्च - अत्यधिक ठंड (-40°C) से वायु सघन, भारी होकर बैठती है, दाब 1025 mb। ध्रुवीय पवनों का उद्गम - ध्रुवीय पूर्वी पवनें (Polar Easterlies) 60° की ओर चलती हैं। अंटार्कटिका पर स्थायी प्रतिचक्रवात।
पवनों का संबंध: उच्च से निम्न की ओर - उपोष्ण उच्च से विषुवतीय निम्न की ओर व्यापारिक पवन (Trade Winds, स्थिर, 15-20 किमी/घंटा), उपोष्ण उच्च से उपध्रुवीय निम्न की ओर पछुआ पवन (Westerlies, परिवर्तनशील, 40-60° में गरजता चालीसा), ध्रुवीय उच्च से उपध्रुवीय निम्न की ओर ध्रुवीय पवन। यही त्रि-कोशिकीय मॉडल (Hadley, Ferrel, Polar Cell) है।
| वायुदाब पेटी | अक्षांश | प्रकार / कारण | दाब (mb) / विशेषता | संबंधित पवन / जलवायु |
|---|---|---|---|---|
| विषुवतीय निम्न (ITCZ) | 0-5°N/S | तापीय निम्न | 1008 mb, शांत, Doldrums | संवहनीय वर्षा, भूमध्यरेखीय जलवायु |
| उपोष्ण उच्च | 30-35°N/S | गतिक उच्च | 1020-1025 mb, Horse Latitudes | व्यापारिक पवन उद्गम, मरुस्थल |
| उपध्रुवीय निम्न | 60-65°N/S | गतिक निम्न | 998 mb, चक्रवातीय | पछुआ-ध्रुवीय अभिसरण, शीतोष्ण चक्रवात |
| ध्रुवीय उच्च | 80-90°N/S | तापीय उच्च | 1025 mb, अत्यंत ठंडा | ध्रुवीय पवन उद्गम, टुंड्रा |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- आयनमंडल 80-400 किमी, D=60-90 किमी (दिन में ही, LF अवशोषण), E=90-150 किमी (MF परावर्तन), F1/F2=150-400 किमी (HF परावर्तन, सबसे महत्वपूर्ण)।
- औरोरा 80-300 किमी पर O (हरा-लाल) और N (नीला) से, 65-75° चुंबकीय अक्षांश पर, सौर तूफान में निचले अक्षांश पर भी।
- वायुदाब पेटियां 7 - विषुवतीय निम्न तापीय, उपोष्ण उच्च गतिक, उपध्रुवीय निम्न गतिक, ध्रुवीय उच्च तापीय - तापीय-गतिक-गतिक-तापीय क्रम।
- ITCZ सूर्य के साथ खिसकता है - जुलाई में 20°N तक (भारत में मानसून), जनवरी में 10°S तक - इसलिए मानसून का आगमन।
- कोरियोलिस विषुवत पर 0, ध्रुव पर अधिकतम, उत्तर में दायें, दक्षिण में बायें - फेरेल का नियम। दाब प्रवणता बल उच्च से निम्न, समदाब रेखा के लंबवत।
- उपोष्ण उच्च में वायु नीचे उतरती है = गर्म-शुष्क = मरुस्थल 30° पर। उपध्रुवीय निम्न में वायु ऊपर उठती है = चक्रवात।
- UPSC ट्रिक - व्यापारिक पवन उपोष्ण उच्च से ITCZ की ओर, पछुआ उपोष्ण उच्च से उपध्रुवीय निम्न की ओर, ध्रुवीय पवन ध्रुवीय उच्च से उपध्रुवीय निम्न की ओर।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. आयनमंडल की D, E, F परतों में अंतर क्या है और रेडियो संचार में कौन सबसे महत्वपूर्ण है?
A. D (60-90 किमी) दिन में ही, घनत्व कम, AM/LF को अवशोषित करती है इसलिए दिन में AM कमजोर। E (90-150 किमी) मध्यम घनत्व, MF को परावर्तित करती है, रात में आंशिक। F (150-400 किमी) सबसे अधिक घनत्व, F2 (220-400 किमी) में अधिकतम, HF (3-30 MHz) शॉर्टवेव को 4000 किमी तक परावर्तित करती है - इसलिए अंतरराष्ट्रीय प्रसारण और हैम रेडियो के लिए सबसे महत्वपूर्ण। F1 दिन में अलग, रात में F में विलीन। GPS की L-बैंड तरंगें आयनमंडल से गुजरते समय देरी से प्रभावित होती हैं।
Q2. ITCZ क्या है और इसका भारतीय मानसून से क्या संबंध है?
A. ITCZ व्यापारिक पवनों का अभिसरण क्षेत्र है, 0-5°N/S पर निम्न दाब, शांत पेटी (Doldrums)। सूर्य के उत्तरायण में ITCZ उत्तर की ओर खिसकता है - जून में 10-15°N, जुलाई-अगस्त में हिमालय तराई (20-25°N) तक पहुँचता है, इसे मानसून गर्त (Monsoon Trough) कहते हैं। ITCZ के उत्तर खिसकने से दक्षिणी गोलार्ध की दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवन विषुवत पार कर कोरियोलिस से दायें मुड़कर दक्षिण-पश्चिम मानसून बनती है। ITCZ जितना उत्तर में, मानसून उतना सक्रिय। जनवरी में ITCZ दक्षिण में 10°S पर होने से भारत में उत्तर-पूर्व मानसून (शुष्क)।
Q3. उपोष्ण उच्च दाब पर मरुस्थल क्यों बनते हैं और अश्व अक्षांश क्यों कहते हैं?
A. उपोष्ण उच्च (30-35°N/S) गतिक उच्च है - हैडली कोशिका की वायु 30° पर ऊपर से नीचे उतरती है, नीचे उतरने से वायु एडियाबेटिक रूप से 10°C/किमी गर्म होती है और सापेक्ष आर्द्रता 10% तक घट जाती है, इसलिए शुष्क, वर्षा नहीं। विश्व के सभी गर्म मरुस्थल - सहारा, थार, अरब, कालाहारी, ऑस्ट्रेलियाई, अटाकामा, मोजावे यहीं स्थित हैं। पुराने समय में स्पेन से अमेरिका जाते जहाज इस शांत उच्च में फंस जाते थे, घोड़ों के लिए पानी कम पड़ने पर घोड़े (Horse) समुद्र में फेंकने पड़ते थे, इसलिए Horse Latitudes।
Q4. कोरियोलिस बल विषुवत पर शून्य क्यों होता है और इसका पवनों पर क्या प्रभाव है?
A. कोरियोलिस बल = 2mVΩsinφ, sin0°=0 इसलिए विषुवत पर 0, sin90°=1 इसलिए ध्रुव पर अधिकतम। यह बल गति की दिशा को मोड़ता है, गति नहीं बढ़ाता। प्रभाव - उत्तरी गोलार्ध में पवन दायें मुड़ती है, दक्षिणी में बायें। इसलिए उत्तर-पूर्व व्यापारिक पवन सीधी उत्तर से दक्षिण नहीं बल्कि उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम चलती है। ITCZ पर कोरियोलिस 0 होने से पवनें सीधी अभिसरित होती हैं और शांत रहता है। चक्रवात भी कोरियोलिस से ही घूमते हैं - विषुवत पर कोरियोलिस 0 होने से चक्रवात नहीं बनते, 5° से दूर ही बनते हैं।