महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी - भाग 1
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वेगनर सिद्धांत, प्लेट विवर्तनिकी और प्लेट सीमाओं पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी: वेगनर से आधुनिक सिद्धांत तक
पृथ्वी के स्थलमंडल के गतिशील स्वरूप को समझने के लिए महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी दो आधारभूत सिद्धांत हैं, जो UPSC/State PCS में भू-आकृति विज्ञान का सबसे अधिक पूछा जाने वाला टॉपिक है। 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने बताया कि महाद्वीप स्थिर नहीं हैं, बल्कि 1960 के दशक में हैरी हेस के सागर-नितल प्रसरण और प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत ने इसे वैज्ञानिक आधार दिया। वेगनर का पैंजिया (Pangea) से लेकर वर्तमान 7 प्रमुख प्लेटों की गति तक की यात्रा ही पर्वत, भूकंप और ज्वालामुखी के वितरण की व्याख्या करती है।
वेगनर का सिद्धांत: 1912 में प्रस्तुत, पुस्तक Die Entstehung der Kontinente und Ozeane (1915), पैंजिया का अस्तित्व 335-175 Ma
पैंजिया विभाजन: पैंजिया (सभी स्थल) चारों ओर पैंथालासा (सभी समुद्र), 200 Ma पर दो भाग - उत्तर में लॉरेशिया (उ. अमेरिका, यूरोप, एशिया) और दक्षिण में गोंडवानालैंड (द. अमेरिका, अफ्रीका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका), बीच में टेथिस सागर
प्लेट विवर्तनिकी का विकास: हैरी हेस - सागर-नितल प्रसरण 1962, वाइन-मैथ्यूज-मोर्ले - चुंबकीय विसंगति 1963, जे. टुजो विल्सन - रूपांतरित भ्रंश 1965, मैकेंजी, मॉर्गन, ले पिचोन - 1967 में प्लेट सिद्धांत का अंतिम रूप
प्रमुख प्लेटें: 7 प्रमुख - प्रशांत, उत्तर अमेरिकी, दक्षिण अमेरिकी, यूरेशियन, अफ्रीकी, इंडो-ऑस्ट्रेलियन, अंटार्कटिक; 8+ लघु प्लेटें - नाजका, कोकोस, अरेबियन, फिलीपीन, कैरेबियन, जुआन डी फूका, स्कोशिया
गति दर: 2-10 सेमी/वर्ष (मानव नाखून जितनी), GPS द्वारा मापित, स्लैब पुल (Slab Pull) मुख्य चालक बल
लिथोस्फीयर: 100-200 किमी मोटी (क्रस्ट + ऊपरी मेंटल का कठोर भाग), एस्थेनोस्फीयर (100-410 किमी) पर तैरती है
1. वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत
परिकल्पना: जर्मन मौसम विज्ञानी अल्फ्रेड वेगनर के अनुसार कार्बोनिफेरस युग (∼335 Ma) में सभी महाद्वीप एक विशाल महाद्वीप पैंजिया के रूप में जुड़े थे, जिसके चारों ओर विशाल महासागर पैंथालासा था। पैंजिया का उत्तरी भाग लॉरेशिया और दक्षिणी भाग गोंडवानालैंड था। जुरासिक युग (∼200 Ma) में पैंजिया टूटा और महाद्वीप विस्थापित हुए। वेगनर ने दो बलों को गति का कारण बताया - ध्रुवीय फ्लीइंग बल (Pole Fleeing Force - पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न) और ज्वारीय बल (Tidal Force - चंद्रमा और सूर्य के आकर्षण से)।
प्रमाण (UPSC Prelims के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण): (i) जिग-सॉ फिट (Jigsaw Fit): बुलार्ड (1964) ने 1000 फैदम (लगभग 2000 मीटर) की गहराई पर दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के तटों का लगभग पूर्ण मिलान दिखाया। (ii) भूवैज्ञानिक प्रमाण: ब्राजील और पश्चिम अफ्रीका में 550 Ma पुरानी ब्रासीलियानो-अटलांटिक पर्वत श्रृंखला का निरंतर मिलना, अफ्रीका का घाना तट और ब्राजील का सोना-युक्त क्षेत्र समान। (iii) जीवाश्म प्रमाण: मेसोसॉरस (Mesosaurus) - मीठे पानी का सरीसृप केवल ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में, लिस्ट्रोसॉरस (Lystrosaurus) - भारत, अफ्रीका, अंटार्कटिका में, ग्लोसोप्टेरिस (Glossopteris) वनस्पति - गोंडवाना कोयला क्षेत्रों (भारत, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, द. अमेरिका) में। (iv) पुरा-जलवायु प्रमाण: भारत (तलचर), ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, ब्राजील में पर्मो-कार्बोनिफेरस टिलाइट (Tillite - हिमानी गोलाश्म) और हिमानी धारियाँ, जबकि ये वर्तमान में उष्ण कटिबंध में हैं।
आलोचनाएं: वेगनर ने जिन दो बलों का उल्लेख किया, वे महाद्वीपों को हिलाने के लिए 10⁹ गुना कमजोर हैं। उन्होंने महाद्वीपों की गति की दिशा और समय का सही आकलन नहीं किया। वेगनर ने सियाल (महाद्वीप) के सीमा (महासागर) पर तैरने की बात कही, जबकि मेंटल ठोस है। इन कारणों से 1920-1950 तक सिद्धांत अस्वीकृत रहा, जब तक सागर-नितल प्रसरण ने तंत्र (Mechanism) नहीं दिया।
2. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत
प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत महाद्वीपीय विस्थापन का आधुनिक और वैज्ञानिक रूप है। इसके अनुसार पृथ्वी का बाहरी कठोर भाग लिथोस्फीयर (100-200 किमी) छोटे-बड़े टुकड़ों में बँटा है, जिन्हें प्लेट कहा जाता है। ये प्लेटें दुर्बल, आंशिक पिघले एस्थेनोस्फीयर पर गति करती हैं। लिथोस्फीयर में महाद्वीपीय और महासागरीय दोनों क्रस्ट शामिल हैं।
मुख्य तत्व और चालक बल: प्लेटों की गति का मुख्य कारण मेंटल संवहन नहीं, बल्कि (i) स्लैब पुल (Slab Pull) - 70-80% बल: ठंडी, सघन महासागरीय प्लेट का सबडक्शन जोन में अपने भार से मेंटल में खिंच जाना, (ii) रिज पुश (Ridge Push): मध्य-महासागरीय कटक पर नई, गर्म, ऊँची प्लेट का गुरुत्वाकर्षण से फिसलना। गति GPS द्वारा मापी जाती है - प्रशांत प्लेट सबसे तेज ∼10 सेमी/वर्ष पश्चिम की ओर, यूरेशियन प्लेट ∼2 सेमी/वर्ष। प्लेटों का निर्माण अपसारी सीमा पर होता है और विनाश अभिसारी सीमा (सबडक्शन जोन) पर।
प्रमाण: (i) मध्य-अटलांटिक कटक पर पेलियोमैग्नेटिक विसंगतियाँ - सामान्य और उत्क्रमित चुंबकत्व की सममित पट्टियाँ, जो सागर-नितल प्रसरण का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। (ii) महासागरीय क्रस्ट की आयु - कटक पर सबसे नई (<1 Ma) और महाद्वीपों के पास सबसे पुरानी (200 Ma)। (iii) भूकंप और ज्वालामुखी का प्लेट सीमाओं पर ही केंद्रित होना - रिंग ऑफ फायर।
3. प्लेट सीमाओं के प्रकार - अभिसारी, अपसारी, रूपांतरित
(a) अपसारी / रचनात्मक सीमा (Divergent / Constructive Boundary): दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं। एस्थेनोस्फीयर से मैग्मा ऊपर आकर नया महासागरीय क्रस्ट बनाता है। विशेषताएँ - उथले भूकंप, बेसाल्टिक ज्वालामुखी, मध्य-महासागरीय कटक, दरार घाटी। उदाहरण - मध्य-अटलांटिक कटक (अमेरिकी और यूरेशियन/अफ्रीकी प्लेट), पूर्वी अफ्रीकी दरार घाटी (अफ्रीकी प्लेट का टूटना, भविष्य में नया महासागर), आइसलैंड (कटक समुद्र तल से ऊपर)।
(b) अभिसारी / विनाशात्मक सीमा (Convergent / Destructive Boundary): दो प्लेटें टकराती हैं, एक प्लेट दूसरी के नीचे सबडक्ट (Subduct) होती है। तीन उप-प्रकार - (i) महासागर-महासागर - ज्वालामुखी द्वीप चाप (Island Arc) जैसे जापान (प्रशांत + यूरेशियन), मारियाना गर्त (11 किमी गहरा)। (ii) महासागर-महाद्वीप - महाद्वीपीय ज्वालामुखी पर्वत जैसे एंडीज (नाजका + द. अमेरिकी), रॉकीज। (iii) महाद्वीप-महाद्वीप - सबडक्शन नहीं, टकराव से विशाल मोड़दार पर्वत - हिमालय (भारतीय + यूरेशियन, 50 Ma से जारी), आल्प्स। विशेषताएँ - गहरे भूकंप (बेनीऑफ जोन 700 किमी तक), विस्फोटक ज्वालामुखी (एंडेसाइट), गर्त (Trench) और उच्च पर्वत।
(c) रूपांतरित / संरक्षी सीमा (Transform / Conservative Boundary): दो प्लेटें एक-दूसरे के बगल से क्षैतिज फिसलती हैं, न निर्माण न विनाश। विशेषताएँ - अत्यधिक उथले, विनाशकारी भूकंप, ज्वालामुखी का अभाव, रूपांतरित भ्रंश। उदाहरण - सैन एंड्रियास भ्रंश (प्रशांत + उत्तर अमेरिकी, कैलिफोर्निया), उत्तरी अनातोलियन भ्रंश (तुर्की), ओवेन फ्रैक्चर जोन (भारतीय प्लेट की पश्चिमी सीमा)।
| विशेषता | अपसारी सीमा (Divergent) | अभिसारी सीमा (Convergent) | रूपांतरित सीमा (Transform) |
|---|---|---|---|
| गति दिशा | दूर जाना | टकराना | बगल से फिसलना |
| प्रकृति | रचनात्मक - नया क्रस्ट बनता है | विनाशात्मक - क्रस्ट नष्ट होता है | संरक्षी - न बनता न नष्ट होता |
| भू-आकृति | मध्य-महासागरीय कटक, दरार घाटी | गर्त, द्वीप चाप, मोड़दार पर्वत | रूपांतरित भ्रंश, रैखिक घाटी |
| भूकंप / ज्वालामुखी | उथले भूकंप, शांत बेसाल्ट ज्वालामुखी | गहरे-उथले सभी, विस्फोटक ज्वालामुखी | उथले पर तीव्र भूकंप, ज्वालामुखी नहीं |
| उदाहरण | मध्य-अटलांटिक कटक, पूर्वी अफ्रीकी दरार | हिमालय (महा-महा), एंडीज (महासा-महा), जापान (महासा-महासा) | सैन एंड्रियास, अनातोलियन भ्रंश |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- वेगनर ने गोंडवानालैंड नाम ऑस्ट्रिया के गोंडवाना क्षेत्र (जहाँ ग्लोसोप्टेरिस कोयला मिलता है) के आधार पर दिया।
- पैंजिया का विभाजन 200 Ma (जुरासिक) में शुरू, टेथिस सागर सिकुड़कर भूमध्य सागर, हिमालय, आल्प्स बना।
- सागर-नितल प्रसरण का दर अटलांटिक में 2.5 सेमी/वर्ष, प्रशांत में 10 सेमी/वर्ष - प्रशांत सिकुड़ रहा है, अटलांटिक फैल रहा है।
- भारतीय प्लेट 140 Ma पर गोंडवानालैंड से अलग, 90 Ma पर मेडागास्कर से, 50 Ma पर यूरेशिया से टकराई, गति 15 सेमी/वर्ष से घटकर 5 सेमी/वर्ष।
- अभिसारी सीमा के तीनों प्रकार UPSC में पूछे जाते हैं - महा-महा सबसे प्राचीन और घना सबडक्ट होता है।
- रूपांतरित सीमा पर स्यूडो-फॉल्ट नहीं बनते, केवल संरक्षी गति - इसलिए ज्वालामुखी अनुपस्थित।
- प्लेट विवर्तनिकी महाद्वीपीय विस्थापन + सागर-नितल प्रसरण + भूकंपीय प्रमाणों का समन्वित सिद्धांत है।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. वेगनर के सिद्धांत और प्लेट विवर्तनिकी में मुख्य अंतर क्या है?
A. वेगनर ने केवल महाद्वीपों (सियाल) को महासागरों (सीमा) पर तैरता बताया और बल गलत बताए। प्लेट विवर्तनिकी में पूरा लिथोस्फीयर (क्रस्ट + ऊपरी मेंटल) प्लेट के रूप में एस्थेनोस्फीयर पर चलता है, महाद्वीप और महासागर दोनों प्लेट का हिस्सा हैं। चालक बल स्लैब पुल और रिज पुश हैं, जो भौतिक रूप से प्रमाणित हैं। वेगनर वर्णनात्मक था, प्लेट विवर्तनिकी तंत्र-आधारित है।
Q2. हिमालय का निर्माण किस प्लेट सीमा का उदाहरण है और यह अभी भी क्यों ऊँचा हो रहा है?
A. हिमालय महाद्वीप-महाद्वीप अभिसारी सीमा का उदाहरण है - भारतीय प्लेट (गोंडवाना का भाग) और यूरेशियन प्लेट का टकराव। दोनों महाद्वीपीय होने से कोई सबडक्ट नहीं हुई, बल्कि भारतीय प्लेट का अग्र भाग यूरेशिया के नीचे घुस गया और अवसादी चट्टानें मुड़कर हिमालय बनीं। भारतीय प्लेट अभी भी 5 सेमी/वर्ष उत्तर-पूर्व गति कर रही है, इसलिए हिमालय प्रतिवर्ष 5-10 मिमी ऊँचा हो रहा है और भूकंप आते हैं।
Q3. मध्य-महासागरीय कटक पर ज्वालामुखी शांत और अभिसारी सीमा पर विस्फोटक क्यों होते हैं?
A. अपसारी सीमा पर बेसाल्टिक मैग्मा (कम सिलिका, कम गैस, अधिक तरल) सीधे मेंटल से आता है, इसलिए शांत लावा प्रवाह। अभिसारी सीमा पर महासागरीय क्रस्ट के साथ पानी और अवसाद भी सबडक्ट होते हैं, जिससे सिलिका-धनी एंडेसाइट/रायोलाइट मैग्मा (अधिक गैस, अधिक चिपचिपा) बनता है, जो विस्फोटक होता है। एंडीज और जापान के विस्फोटक ज्वालामुखी इसी कारण हैं।
Q4. पैंथालासा और टेथिस सागर का वर्तमान अवशेष क्या है?
A. पैंथालासा विशाल महासागर था, जिसका अधिकांश भाग सबडक्शन से नष्ट हो गया। इसका सबसे बड़ा अवशेष प्रशांत महासागर है। टेथिस सागर पैंजिया के अंदर लॉरेशिया और गोंडवानालैंड के बीच था। भारतीय प्लेट के उत्तर जाने से टेथिस सिकुड़ गया और इसके अवसादों से हिमालय, आल्प्स, जैग्रोस बने। वर्तमान भूमध्य सागर, काला सागर, कैस्पियन सागर टेथिस के ही अवशेष हैं।