महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी - भाग 2

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महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी - भाग 2 - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

महासागरीय तल विस्तार और प्रमुख विवर्तनिक प्लेटों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न

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💡 व्याख्या

महासागरीय तल का विस्तार और प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें

महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत की सबसे बड़ी कमी - महाद्वीपों के खिसकने का तंत्र - को महासागरीय तल के विस्तार (Sea Floor Spreading) सिद्धांत ने पूरा किया। यह सिद्धांत महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी के बीच का सेतु है। अमेरिकी भू-वैज्ञानिक हैरी हेस ने 1960 में बताया कि महासागर स्थिर नहीं हैं, बल्कि मध्य-महासागरीय कटकों पर लगातार नया तल बन रहा है और गर्तों पर नष्ट हो रहा है। इसी प्रक्रिया ने प्लेटों की गति को प्रमाणित किया और UPSC में यह टॉपिक भू-आकृति विज्ञान का सबसे वैज्ञानिक आधार बन गया है।

🔥 UPSC Facts Box - सागर-नितल प्रसरण और प्लेटें
प्रतिपादक: हैरी हैमंड हेस (Princeton University) - 1960 में अवधारणा, 1962 में निबंध History of Ocean Basins प्रकाशित
प्रमुख प्रमाण: वाइन-मैथ्यूज-मोर्ले परिकल्पना (Vine-Matthews-Morley Hypothesis) - 1963 में फ्रेड वाइन, ड्रमंड मैथ्यूज (Cambridge) और लॉरेंस मोर्ले ने स्वतंत्र रूप से प्रतिपादित किया
प्रसरण दर: मध्य-अटलांटिक कटक पर 2.5 सेमी/वर्ष, पूर्वी प्रशांत उत्थान पर 10-16 सेमी/वर्ष (सबसे तेज), औसत 5 सेमी/वर्ष
महासागरीय क्रस्ट की आयु: कटक पर 0-1 Ma (सबसे नवीन), गर्तों के पास अधिकतम 200 Ma (जुरासिक), 200 Ma से पुराना महासागरीय क्रस्ट नहीं - जबकि महाद्वीपीय क्रस्ट 3.8 अरब वर्ष पुराना
चुंबकीय विसंगति: कटक के दोनों ओर सामान्य और उत्क्रमित चुंबकत्व की सममित धारियाँ, कुल 171 चुंबकीय उत्क्रमण की पहचान
कुल प्लेटें: 7 प्रमुख (कुछ वर्गीकरण में 8, भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई को अलग मानते हैं) + 15-20 लघु प्लेटें, लिथोस्फीयर मोटाई 100 किमी (महासागरीय) से 200 किमी (महाद्वीपीय)

1. महासागरीय तल के विस्तार का सिद्धांत - हैरी हेस की परिकल्पना

हेस ने द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिकी नौसेना में रहते हुए प्रशांत महासागर के तल का सोनार से मानचित्रण किया। उन्होंने पाया कि मध्य-महासागरीय कटकें (Mid-Oceanic Ridges) - 75,000 किमी लंबी, 2-3 किमी ऊँची पर्वत श्रृंखला - अत्यधिक भूकंपीय और ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय हैं, जबकि महासागर के सबसे गहरे गर्त (Trenches) 10-11 किमी गहरे हैं।

प्रक्रिया: (i) मेंटल में तापीय संवहन धाराओं से गर्म, कम घनत्व वाला मैग्मा कटक की दरार से ऊपर आता है। (ii) यह मैग्मा ठंडा होकर थोलेइटिक बेसाल्ट (Tholeiitic Basalt) के रूप में नया महासागरीय क्रस्ट (5-10 किमी मोटा) बनाता है। (iii) नया बना क्रस्ट दोनों ओर खिसकता है, जैसे दो कन्वेयर बेल्ट। (iv) महासागरीय गर्तों पर ठंडा, सघन, पुराना क्रस्ट भारी होकर मेंटल में सबडक्ट हो जाता है और पिघल जाता है। इस प्रकार महासागरीय तल का निर्माण और विनाश बराबर होता है, इसलिए पृथ्वी का आकार नहीं बढ़ता। इसे कन्वेयर बेल्ट मॉडल कहते हैं। हेस ने इसे भू-विष विज्ञान (Geopoetry) कहा था।

ऊष्मा प्रवाह और स्थलाकृति प्रमाण: कटकों पर ऊष्मा प्रवाह 6-7 HFU (Heat Flow Unit) जबकि औसत 1.5 HFU है। कटक के पास तल 2.5 किमी गहरा, जबकि गर्तों के पास 6 किमी गहरा - क्योंकि नया क्रस्ट गर्म और हल्का होने से उभरा रहता है, पुराना ठंडा होकर सिकुड़कर धँस जाता है।

2. सागर-नितल प्रसरण के अकाट्य प्रमाण

(a) पुरा-चुंबकीय प्रमाण - वाइन-मैथ्यूज-मोर्ले परिकल्पना 1963: जब बेसाल्टिक लावा 580°C (क्यूरी तापमान) से नीचे ठंडा होता है तो उसमें मौजूद मैग्नेटाइट खनिज तत्कालीन पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को स्थायी रूप से रिकॉर्ड कर लेता है। पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र हर 0.5 से 1 मिलियन वर्ष में उलटता रहता है। शोध में पाया गया कि मध्य-अटलांटिक कटक के दोनों ओर सामान्य (Normal) और उत्क्रमित (Reverse) चुंबकत्व की धारियाँ बिल्कुल सममित (Mirror Image) हैं। कटक पर वर्तमान सामान्य चुंबकत्व, 1 किमी दूर उत्क्रमित, फिर सामान्य - यह ज़ेबरा पैटर्न केवल तभी संभव है जब कटक से दोनों ओर नया तल बनकर खिसक रहा हो। यह सागर-नितल प्रसरण का सबसे मजबूत प्रमाण है।

(b) जोइड्स/ग्लोमार चैलेंजर अभियान (1968-83): गहरे सागर में ड्रिलिंग से प्राप्त बेसाल्ट के नमूनों की K-Ar डेटिंग से सिद्ध हुआ कि कटक के पास क्रस्ट की आयु <1 Ma है, जबकि हवाई के पास 80 Ma और मेरियाना गर्त के पास 180 Ma है। आयु दूरी के साथ रैखिक रूप से बढ़ती है।

(c) भूकंपीय और ज्वालामुखी प्रमाण: कटकों पर केवल उथले (0-70 किमी) भूकंप और दरारी उद्गार, जबकि गर्तों पर गहरे (300-700 किमी) बेनीऑफ जोन के भूकंप और विस्फोटक ज्वालामुखी - जो सबडक्शन को प्रमाणित करते हैं।

3. विश्व की प्रमुख और लघु विवर्तनिक प्लेटें

लिथोस्फीयर लगभग 15-20 कठोर प्लेटों में बँटा है। प्लेटें महाद्वीपीय और महासागरीय क्रस्ट दोनों को एक साथ लेकर चलती हैं। प्लेट की गति स्लैब पुल (70% बल) और रिज पुश (30% बल) से होती है।

7/8 प्रमुख प्लेटें (क्षेत्रफल और गति दिशा): (i) प्रशांत प्लेट - 103.3 मिलियन किमी², सबसे बड़ी, उत्तर-पश्चिम दिशा में 7-10 सेमी/वर्ष, पूर्णतः महासागरीय। (ii) उत्तर अमेरिकी प्लेट - 75.9 मिलियन किमी², दक्षिण-पश्चिम में 2.3 सेमी/वर्ष, महाद्वीप + पश्चिमी अटलांटिक का आधा। (iii) यूरेशियन प्लेट - 67.8 मिलियन किमी², दक्षिण में 1.5 सेमी/वर्ष। (iv) अफ्रीकी प्लेट - 61.3 मिलियन किमी², उत्तर-पूर्व में 2.5 सेमी/वर्ष। (v) अंटार्कटिक प्लेट - 60.9 मिलियन किमी², अटलांटिक की ओर 1.5 सेमी/वर्ष। (vi) इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट - 58.9 मिलियन किमी², कुछ वैज्ञानिक भारतीय (11.9 मिलियन किमी², उत्तर-पूर्व 5 सेमी/वर्ष) और ऑस्ट्रेलियाई (47 मिलियन किमी², उत्तर 6 सेमी/वर्ष) को अलग मानते हैं। (vii) दक्षिण अमेरिकी प्लेट - 43.6 मिलियन किमी², पश्चिम में 3 सेमी/वर्ष।

प्रमुख लघु प्लेटें (UPSC में अक्सर पूछी जाती हैं): (i) नाजका प्लेट - 15.6 मिलियन किमी², दक्षिण अमेरिका के पश्चिम में, पूर्व में 10 सेमी/वर्ष (सबसे तेज) सबडक्ट हो रही है, एंडीज का कारण। (ii) कोकोस प्लेट - 2.9 मिलियन किमी², मध्य अमेरिका के पश्चिम में। (iii) कैरेबियन प्लेट - 3.3 मिलियन किमी²। (iv) स्कोशिया प्लेट - दक्षिण अटलांटिक में। (v) अरेबियन प्लेट - 5 मिलियन किमी², उत्तर में 2.5 सेमी/वर्ष, लाल सागर का निर्माण। (vi) फिलीपीन सागर प्लेट - 5.5 मिलियन किमी², पश्चिम में 7 सेमी/वर्ष। (vii) जुआन डी फूका प्लेट - 0.25 मिलियन किमी², वाशिंगटन तट पर, कैस्केड ज्वालामुखी का कारण। (viii) सोमाली प्लेट - अफ्रीका से अलग हो रही, पूर्वी अफ्रीकी दरार का कारण।

प्लेट का नाम प्रकार क्षेत्रफल (मिलियन किमी²) गति और दिशा सीमा का प्रकार और उदाहरण
प्रशांत प्लेट प्रमुख, महासागरीय 103.3 NW, 7-10 सेमी/वर्ष अपसारी - पूर्वी प्रशांत उत्थान, अभिसारी - जापान गर्त
भारतीय प्लेट प्रमुख का भाग 11.9 NE, 5 सेमी/वर्ष अभिसारी - हिमालय, अपसारी - मध्य हिंद महासागर कटक
नाजका प्लेट लघु, महासागरीय 15.6 E, 10 सेमी/वर्ष अभिसारी - पेरू-चिली गर्त, एंडीज पर्वत
अरेबियन प्लेट लघु, मिश्रित 5.0 N, 2.5 सेमी/वर्ष अपसारी - लाल सागर, अभिसारी - जैग्रोस पर्वत
जुआन डी फूका लघु, महासागरीय 0.25 E, 4 सेमी/वर्ष अभिसारी - कैस्केड ज्वालामुखी श्रृंखला

Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए

  • हैरी हेस का सिद्धांत 1962 में, वाइन-मैथ्यूज-मोर्ले 1963 में - दोनों के बिना प्लेट विवर्तनिकी अधूरी है।
  • सागर-नितल प्रसरण का दर नापने की इकाई - सेमी/वर्ष, GPS और VLBI से वर्तमान गति मापन होता है।
  • महासागरीय क्रस्ट 200 Ma से अधिक पुराना नहीं, क्योंकि सबडक्शन से नष्ट हो जाता है, जबकि महाद्वीपीय क्रस्ट स्थायी है।
  • प्रशांत महासागर सिकुड़ रहा है (चारों ओर सबडक्शन), अटलांटिक फैल रहा है (अपसारी सीमा) - इसलिए प्रशांत में गर्त अधिक।
  • भारतीय प्लेट का उत्तर-पूर्व संचलन 140 Ma पर गोंडवानालैंड से टूटने के बाद शुरू, 50 Ma पर यूरेशिया से टक्कर, हिमालय का उत्थान अभी भी जारी (5 मिमी/वर्ष)।
  • लघु प्लेटों में नाजका सबसे तेज (10 सेमी/वर्ष) और जुआन डी फूका सबसे छोटी महत्वपूर्ण प्लेट है।
  • UPSC ट्रिक: प्रमुख प्लेटें - याद रखें PANAEIS (Pacific, North American, Eurasian, African, Antarctic, Indo-Australian, South American)।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. हैरी हेस ने सागर-नितल प्रसरण का विचार कैसे दिया और वाइन-मैथ्यूज-मोर्ले ने इसे कैसे प्रमाणित किया?
A. हेस ने द्वितीय विश्व युद्ध के सोनार मानचित्रों से देखा कि मध्य-महासागरीय कटकें गर्म और उथली हैं और गर्त ठंडे और गहरे हैं, इसलिए उन्होंने कन्वेयर बेल्ट मॉडल दिया। प्रमाण 1963 में वाइन-मैथ्यूज-मोर्ले ने दिया - उन्होंने दिखाया कि कटक के दोनों ओर चुंबकीय धारियाँ सममित हैं, क्योंकि जब नया लावा ठंडा होता है तो वह तत्कालीन चुंबकीय क्षेत्र को रिकॉर्ड कर लेता है और फिर दोनों ओर खिसक जाता है। यह सममिति प्रसरण के बिना असंभव है।

Q2. महासागरीय क्रस्ट 200 मिलियन वर्ष से अधिक पुराना क्यों नहीं मिलता?
A. महासागरीय क्रस्ट बेसाल्टिक, सघन (3.0 ग्राम/सेमी³) और पतला (7 किमी) होता है, इसलिए ठंडा होकर भारी हो जाता है और गर्तों पर मेंटल में सबडक्ट हो जाता है। इसका जीवन-चक्र निर्माण से विनाश तक लगभग 180-200 Ma है। सबसे पुराना क्रस्ट पूर्वी भूमध्य सागर और पश्चिम प्रशांत में 200 Ma (जुरासिक) का है। इसके विपरीत महाद्वीपीय क्रस्ट ग्रेनाइटिक, हल्का (2.7 ग्राम/सेमी³) है, इसलिए सबडक्ट नहीं होता और 3.8 अरब वर्ष तक पुराना मिलता है।

Q3. भारतीय प्लेट को कभी-कभी लघु प्लेट क्यों कहा जाता है?
A. पारंपरिक 7 प्लेट मॉडल में इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट एक प्रमुख प्लेट है (58.9 मिलियन किमी²)। लेकिन GPS मापन से पता चला कि भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई भाग अलग-अलग गति (भारतीय 5 सेमी/वर्ष NE, ऑस्ट्रेलियाई 6 सेमी/वर्ष N) और दिशा में चल रहे हैं, और बीच में मकरान-व्हार्टन बेसिन में विरूपण क्षेत्र है। इसलिए आधुनिक 8 प्लेट मॉडल में भारतीय प्लेट (11.9 मिलियन किमी²) को अलग प्रमुख/बड़ी लघु प्लेट माना जाता है। UPSC में दोनों वर्गीकरण स्वीकार्य हैं, पर नवीनतम में 8 प्रमुख प्लेटें पूछी जा सकती हैं।

Q4. पूर्वी अफ्रीकी दरार घाटी का महासागरीय तल के विस्तार से क्या संबंध है?
A. पूर्वी अफ्रीकी दरार घाटी महाद्वीपीय दरार (Continental Rifting) का उदाहरण है, जो महासागरीय प्रसरण की प्रारंभिक अवस्था है। यहाँ सोमाली प्लेट अफ्रीकी (न्यूबियन) प्लेट से 6 मिमी/वर्ष दूर जा रही है। मेंटल प्लूम से अफार त्रिकोण (Afar Triangle) पर क्रस्ट पतला और गर्म हो रहा है। यदि यह प्रक्रिया जारी रही तो 10 मिलियन वर्ष में यहाँ नया महासागर बनेगा, जैसे 25 Ma पहले अरेबियन प्लेट के अलग होने से लाल सागर बना था। यह अपसारी सीमा का महाद्वीप पर प्रत्यक्ष प्रमाण है।