भारत का अपवाह तंत्र - भाग 2

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भारत का अपवाह तंत्र - भाग 2 - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

भारत के प्रमुख नदी बेसिन, महत्वपूर्ण सहायक नदियों, झीलों और आर्द्रभूमियों पर आधारित पचास अति महत्वपूर्ण प्रश्न।

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💡 व्याख्या

भारत के नदी बेसिन, सहायक नदियां, झीलें और आर्द्रभूमि का विस्तृत अध्ययन

भारत का भौगोलिक स्वरूप केवल विशाल पर्वतों और उपजाऊ मैदानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ का अपवाह तंत्र, जिसमें विशाल नदी बेसिन, उनकी सहायक नदियां, विभिन्न प्रकार की झीलें और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील आर्द्रभूमियां शामिल हैं, अत्यधिक समृद्ध और विविधतापूर्ण है। किसी एक बड़ी मुख्य नदी और उसकी सभी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित संपूर्ण जल क्षेत्र को नदी बेसिन या जलग्रहण क्षेत्र कहा जाता है। भारत में गंगा नदी का बेसिन क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा है, जो देश के एक चौथाई से अधिक भौगोलिक भूभाग को अपने अंतर्गत समेटे हुए है। गंगा के बाद प्रायद्वीपीय भारत में गोदावरी, कृष्णा और महानदी के विशाल बेसिन का स्थान आता है। किसी भी नदी बेसिन का आकार, ढलान और उसकी जल क्षमता उस विशिष्ट क्षेत्र की कृषि व्यवस्था, औद्योगिक विकास और मानव बसावट को सीधे तौर पर निर्धारित करती है। सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए इन बेसिनों का गहराई से तुलनात्मक अध्ययन नितांत आवश्यक है।

सहायक नदियों का महत्व और जल तंत्र का विस्तार

सहायक नदियां किसी भी मुख्य नदी के विस्तृत अपवाह तंत्र की जीवनरेखा मानी जाती हैं। वे विभिन्न पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से जल एकत्र करके मुख्य धारा तक पहुंचाती हैं। उदाहरण के लिए, यमुना, कोसी, गंडक, घाघरा और सोन जैसी विशाल सहायक नदियां गंगा नदी तंत्र को जल से परिपूर्ण करती हैं। प्रायद्वीपीय भारत में देखें तो तुंगभद्रा, भीमा और मूसी नदियां कृष्णा नदी तंत्र की अत्यंत महत्वपूर्ण सहायक जलधाराएं हैं, जबकि अमरावती और भवानी कावेरी नदी को समृद्ध करती हैं। इन सहायक नदियों का उद्गम स्थल, उनका प्रवाह मार्ग, उनके किनारे बसे प्रमुख औद्योगिक शहर और मुख्य नदी में उनके मिलने का स्थान भूगोल के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। जल बंटवारे और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के निर्माण में इन सहायक नदियों की भूमिका बहुत ही केंद्रीय होती है।

भारत की प्रमुख झीलें: विवर्तनिक से लेकर लैगून तक

नदी तंत्र के अतिरिक्त, झीलें भारत के सतही जल संसाधनों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सुंदर हिस्सा हैं। भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों प्रकार की झीलें बहुतायत में पाई जाती हैं। जम्मू और कश्मीर की वुलर झील भारत में मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से विवर्तनिक गतिविधियों के परिणामस्वरूप हुआ है। इसके विपरीत, राजस्थान की प्रसिद्ध सांभर झील खारे पानी की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय झील है, जो नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। ज्वालामुखी गतिविधियों से निर्मित झीलों में महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की लोनार झील सबसे अद्भुत है, जिसे उल्कापिंड के गिरने से बनी क्रेटर झील माना जाता है। भारत के तटीय क्षेत्रों में समुद्री जल से बनी विशाल लैगून झीलें पाई जाती हैं, जिनमें ओडिशा की चिल्का झील, आंध्र प्रदेश की पुलिकट झील और केरल की वेंबनाड झील समुद्री जैव विविधता और पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं। मणिपुर की लोकटक झील पूर्वोत्तर भारत की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है, जो अपने तैरते हुए प्राकृतिक द्वीपों के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।

आर्द्रभूमि और उनका पारिस्थितिक महत्व

आर्द्रभूमि या दलदली क्षेत्र जल और शुष्क स्थल के बीच का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संक्रमणकालीन पारिस्थितिक हिस्सा होते हैं। ये जलीय क्षेत्र प्रकृति में एक स्पंज की तरह काम करते हैं, जो भारी वर्षा और बाढ़ के पानी को सोखकर तबाही से बचाते हैं, जल को शुद्ध करते हैं और भूजल स्तर को पुनर्भरण करने में सहायता करते हैं। पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के उद्देश्य से ईरान में हुए रामसर समझौते के तहत भारत में कई प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतर्राष्ट्रीय महत्व का दर्जा प्रदान किया गया है। ओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान रामसर सूची में शामिल होने वाले भारत के पहले स्थल थे। वर्तमान में भारत के विभिन्न राज्यों में कई रामसर स्थल मौजूद हैं जो दुर्लभ प्रवासी पक्षियों और संकटग्रस्त जलीय जीवों को सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं। इन आर्द्रभूमियों का संरक्षण सतत विकास के लिए पूर्णतः अनिवार्य है।

प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

भौगोलिक जल निकायसंबंधित राज्य एवं विशिष्ट विशेषताएं
वुलर झीलजम्मू और कश्मीर (मीठे पानी की सबसे बड़ी विवर्तनिक झील)
चिल्का झीलओडिशा (भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील)
लोकटक झीलमणिपुर (विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान)
लोनार झीलमहाराष्ट्र (उल्कापिंड के प्रहार से निर्मित प्राकृतिक क्रेटर झील)
यमुना नदीउत्तराखंड से उद्गम (गंगा की सबसे लंबी और प्रमुख सहायक नदी)
तुंगभद्रा नदीकर्नाटक (कृष्णा नदी की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सहायक जलधारा)