भूकंप और ज्वालामुखी - भाग 1

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भूकंप और ज्वालामुखी - भाग 1 - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

भूकंप के प्रकार, भूकंपीय क्षेत्र और ज्वालामुखी के प्रकारों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न

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प्रश्न 1

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💡 व्याख्या

भूकंप और ज्वालामुखी: प्रकार, भारत के भूकंपीय क्षेत्र और ज्वालामुखी वर्गीकरण

भूकंप और ज्वालामुखी प्लेट विवर्तनिकी की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति हैं और UPSC/State PCS में आपदा प्रबंधन तथा भू-आकृति विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक हैं। भूकंप पृथ्वी के अंदर संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा (Elastic Energy) के अचानक मुक्त होने से उत्पन्न होते हैं, जिसका सिद्धांत H.F. Reid ने 1910 में प्रत्यास्थ प्रतिक्षेप सिद्धांत (Elastic Rebound Theory) के रूप में दिया। भारत, भारतीय प्लेट के उत्तर-पूर्व में यूरेशियन प्लेट से टकराव के कारण विश्व के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल है, जिसे BIS ने भूकंपीय क्षेत्रों में विभाजित किया है।

🔥 UPSC Facts Box - भूकंप और ज्वालामुखी महत्वपूर्ण तथ्य
भूकंप उत्पत्ति: फोकस (Hypocenter) - अंदर का बिंदु, अधिकेंद्र (Epicenter) - सतह पर उसके ऊपर का बिंदु, 90% भूकंप विवर्तनिक प्लेट सीमाओं पर
रिएक्टर स्केल: चार्ल्स रिक्टर द्वारा 1935 में Caltech में विकसित, लघुगणकीय (Logarithmic), परिमाण 1 बढ़ने पर आयाम 10 गुना और ऊर्जा 32 गुना बढ़ती है, कोई ऊपरी सीमा नहीं पर अब तक अधिकतम 9.5 (चिली 1960)
मरकेली स्केल: ज्यूसेपे मरकेली 1902, संशोधित मरकेली तीव्रता (MMI) स्केल वुड-न्यूमैन 1931 द्वारा, I से XII तक, क्षति के आधार पर व्यक्तिपरक
भारत के भूकंपीय क्षेत्र (IS 1893:2002): Zone II (0.10g) - निम्न, Zone III (0.16g) - मध्यम, Zone IV (0.24g) - गंभीर, Zone V (0.36g) - अति गंभीर, Zone I को Zone II में विलय कर दिया गया
भारत के सक्रिय ज्वालामुखी: बैरन द्वीप (Barren Island) - भारत का एकमात्र सक्रिय, अंडमान सागर में, अंतिम उद्गार 2022; नारकोंडम द्वीप - प्रसुप्त (Dormant) ज्वालामुखी
विश्व के प्रकार: सक्रिय ∼1500, प्रतिवर्ष 50-60 उद्गार; मृत ज्वालामुखी - दक्कन ट्रैप (66 Ma)

1. भूकंप के प्रकार, कारण और मापन

कारण के आधार पर प्रकार: (i) विवर्तनिक भूकंप (Tectonic Earthquake): सबसे विनाशकारी, कुल भूकंपों का 90%, प्लेटों के टकराने, खिसकने या सबडक्शन से। सभी बड़े भारतीय भूकंप इसी प्रकार के हैं - जैसे 2001 भुज (7.7 Mw), 2005 कश्मीर (7.6 Mw)। (ii) ज्वालामुखीय भूकंप (Volcanic Earthquake): मैग्मा के ऊपर आने से, तीव्रता कम (2-5 परिमाण), ज्वालामुखी उद्गार से पहले संकेत। (iii) नियात / धसान भूकंप (Collapse Earthquake): खदानों, कार्स्ट गुफाओं के धंसने से, तीव्रता <4। (iv) विस्फोटजन्य भूकंप (Explosion Earthquake): मानव निर्मित - परमाणु परीक्षण, बांध विस्फोट से। (v) जलाशय प्रेरित भूकंप (Reservoir Induced Seismicity - RIS): बड़े बांधों के जलभार से भ्रंशों पर दबाव - भारत में कोयना भूकंप 1967 (6.5 Mw, कोयना बांध) इसका प्रमुख उदाहरण है।

मापन: रिक्टर परिमाण (Magnitude) भूकंप द्वारा मुक्त ऊर्जा को मापता है, भूकंपलेखी (Seismograph) पर P और S तरंगों के आयाम से। यह वस्तुनिष्ठ है, एक ही मान। सूत्र - M = log10(A/A0)। 5.0 तक हल्का, 5-5.9 मध्यम, 6-6.9 शक्तिशाली, 7+ बड़ा। मरकेली तीव्रता (Intensity) मनुष्य, संरचना और प्रकृति पर प्रभाव को मापती है। I - केवल यंत्रों द्वारा पता चलता है, V - सभी को महसूस होता है, बर्तन गिरते हैं, VIII - इमारतों में दरारें, IX - जमीन में दरारें, XII - पूर्ण विनाश। भारत MMI के स्थान पर MSK (Medvedev-Sponheuer-Karnik) स्केल का भी उपयोग करता है। UPSC में पूछा जाता है - परिमाण एक ही रहता है, तीव्रता अधिकेंद्र से दूरी के साथ घटती है।

2. भारत के भूकंपीय क्षेत्र (Seismic Zones II से V)

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने IS 1893 (Part 1):2002 और 2016 के अद्यतन में भारत को चार क्षेत्रों में बाँटा है। यह विभाजन भूकंपीय इतिहास, भ्रंशों की स्थिति और प्लेट सीमा से दूरी पर आधारित है।

Zone V (अति गंभीर - 0.36g): सबसे अधिक जोखिम, MMI IX या अधिक। क्षेत्र - संपूर्ण पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल), जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, गुजरात का कच्छ क्षेत्र (भुज), उत्तर बिहार का सीमांत, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह। कारण - भारतीय और यूरेशियन प्लेट का टकराव (हिमालय) तथा भारतीय और बर्मा प्लेट का टकराव (म्यांमार सीमा)।

Zone IV (गंभीर - 0.24g): MMI VIII। क्षेत्र - दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब, सिक्किम, उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र, बिहार का अधिकांश भाग, पश्चिम बंगाल का उत्तरी भाग, गुजरात (कच्छ को छोड़कर), महाराष्ट्र का पश्चिमी तट (कोयना), राजस्थान का पश्चिमी भाग, हिमालय का शेष भाग। दिल्ली Zone IV में होने के कारण उच्च जोखिम में है क्योंकि यहाँ भ्रंश रेखाएँ (Delhi-Hardwar Ridge) सक्रिय हैं।

Zone III (मध्यम - 0.16g): MMI VII। क्षेत्र - केरल, गोवा, लक्षद्वीप, उत्तर प्रदेश का शेष भाग, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक का उत्तरी भाग। भारत का लगभग 30% क्षेत्र।

Zone II (निम्न - 0.10g): MMI VI या कम। सबसे सुरक्षित। क्षेत्र - दक्कन पठार का शेष भाग - कर्नाटक का दक्षिणी भाग, तमिलनाडु, राजस्थान का पूर्वी भाग, मध्य प्रदेश का हिस्सा। भारत का लगभग 41% क्षेत्र। पहले Zone I (सबसे कम) भी था जिसे 2002 में Zone II में मिला दिया गया क्योंकि कोई भी क्षेत्र भूकंप से पूर्णतः मुक्त नहीं माना जा सकता।

3. ज्वालामुखी के प्रकार - सक्रिय, प्रसुप्त और मृत

उद्गार की आवृत्ति के आधार पर वर्गीकरण UPSC Prelims का पसंदीदा टॉपिक है।

(a) सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano): जो वर्तमान में उद्गार कर रहे हैं या ऐतिहासिक काल में (पिछले 10,000 वर्षों में होलोसीन में) उद्गार कर चुके हैं और पुनः उद्गार की संभावना है। विश्व में लगभग 1500 सक्रिय ज्वालामुखी। प्रकार - सतत उद्गारी जैसे स्ट्राम्बोली (इटली - भूमध्य सागर का प्रकाशस्तंभ), किलाउया (हवाई - सबसे सक्रिय), बैरन द्वीप (भारत)। बैरन द्वीप 1787 से 2022 तक 15 बार फटा है। विशेषताएँ - मैग्मा कक्ष में लगातार मैग्मा आपूर्ति, SO₂ गैस उत्सर्जन, भूकंपीय हलचल।

(b) प्रसुप्त ज्वालामुखी (Dormant / Sleeping Volcano): जो ऐतिहासिक काल में फटे हैं पर वर्तमान में शांत हैं, पर भविष्य में फट सकते हैं। इन्हें सुषुप्त भी कहते हैं। उदाहरण - विसुवियस (इटली, 79 AD में पोम्पेई को नष्ट किया, अंतिम 1944), फुजियामा (जापान, अंतिम 1707), क्राकाटोआ (इंडोनेशिया, 1883 में विस्फोट), भारत में नारकोंडम द्वीप (अंडमान, अंतिम उद्गार 2000 वर्ष पूर्व माना जाता है, Dacite प्रकार)। ये सबसे खतरनाक होते हैं क्योंकि लोग इनके पास बस जाते हैं।

(c) मृत / विलुप्त ज्वालामुखी (Extinct Volcano): जिनमें हजारों वर्षों से कोई उद्गार नहीं हुआ और मैग्मा कक्ष पूरी तरह समाप्त हो चुका है, पुनः उद्गार की कोई संभावना नहीं। उदाहरण - पोपा (म्यांमार), किलिमंजारो (तंजानिया - यद्यपि कुछ वैज्ञानिक इसे प्रसुप्त मानते हैं), प्यू-डी-डोम (फ्रांस), भारत में दक्कन ट्रैप (66 Ma पर बना, क्रिटेशियस के अंत में), धनबाद का पर्वत नहीं बल्कि दक्कन का पूरा पठार ही एक प्राचीन मृत ज्वालामुखी क्षेत्र है। इनके क्रेटर अपरदित हो चुके होते हैं।

विशेषता सक्रिय (Active) प्रसुप्त (Dormant) मृत (Extinct)
उद्गार स्थिति वर्तमान में सक्रिय या लगातार गैस/लावा ऐतिहासिक काल में फटा, वर्तमान में शांत हजारों वर्षों से शांत, कोई रिकॉर्ड नहीं
मैग्मा आपूर्ति सक्रिय मैग्मा कक्ष मौजूद मैग्मा कक्ष में आंशिक मैग्मा शेष मैग्मा कक्ष नष्ट, ठंडा
उदाहरण (विश्व + भारत) एटना, स्ट्राम्बोली, किलाउया, बैरन द्वीप (भारत) विसुवियस, फुजियामा, नारकोंडम (भारत) दक्कन ट्रैप, पोपा, प्यू-डी-डोम
खतरा स्तर ज्ञात, निगरानी में सबसे अधिक - अचानक फट सकता है नगण्य

Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए

  • रिक्टर परिमाण लघुगणकीय है - 6.0 का भूकंप 5.0 से 10 गुना बड़ा आयाम और 32 गुना अधिक ऊर्जा वाला होता है, 7.0 का 1000 गुना आयाम।
  • भारत का कोई भी क्षेत्र Zone I में नहीं - सबसे कम Zone II है, अर्थात भारत में हर जगह भूकंप का न्यूनतम जोखिम मौजूद है।
  • भुज भूकंप 2001 (7.7 Mw) Zone V में, जबकि लातूर 1993 (6.2 Mw) Zone III में था - इसलिए Zone III में भी विनाशकारी भूकंप संभव है, क्योंकि वहाँ भवन भूकंप-रोधी नहीं होते।
  • बैरन द्वीप - अंडमान के उत्तर-पूर्व में, भारत और बर्मा प्लेट की अभिसारी सीमा पर, स्ट्रैटो-ज्वालामुखी। नारकोंडम - बैरन से 150 किमी उत्तर में, प्रसुप्त।
  • जलाशय प्रेरित भूकंप का भारत में एकमात्र प्रमाणित उदाहरण - कोयना बांध, महाराष्ट्र (1967)।
  • UPSC ट्रिक - सक्रिय = वर्तमान में सक्रिय, प्रसुप्त = सोया हुआ पर जाग सकता है, मृत = समाप्त। दक्कन ट्रैप मृत ज्वालामुखी क्षेत्र है, पर लावा पठार का उदाहरण भी है।
  • सीस्मोग्राफ पर P तरंग पहले, S बाद में, L सबसे अंत में - P और S के बीच समय अंतराल (S-P Interval) से अधिकेंद्र की दूरी निकाली जाती है।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. रिक्टर स्केल और मरकेली स्केल में क्या अंतर है और UPSC में कौन सा अधिक पूछा जाता है?
A. रिक्टर परिमाण (Magnitude) - भूकंप द्वारा मुक्त ऊर्जा की मात्रा, यंत्र (Seismograph) द्वारा मापा जाता है, एक भूकंप का एक ही परिमाण। मरकेली तीव्रता (Intensity) - भूकंप का मनुष्य और संरचनाओं पर प्रभाव, अवलोकन द्वारा, एक ही भूकंप की तीव्रता अधिकेंद्र से दूरी के साथ XII से I तक घटती है। UPSC में रिक्टर लघुगणकीय प्रकृति और मरकेली का क्षति आधारित होना अधिक पूछा जाता है। भारत में अब मोमेंट मैग्नीट्यूड (Mw) अधिक उपयोग होता है, जो रिक्टर से अधिक सटीक है।

Q2. दिल्ली Zone IV में क्यों है जबकि वह हिमालय से दूर है?
A. दिल्ली-हरियाणा क्षेत्र में दिल्ली-हरिद्वार रिज (Delhi-Hardwar Ridge), महेंद्रगढ़-देहरादून भ्रंश और सोहना भ्रंश जैसे कई सक्रिय भ्रंश (Active Faults) हैं, जो भारतीय प्लेट के अंदर (Intraplate) स्थित हैं। 1720, 1956, 1960 में दिल्ली में 6.0 से अधिक के भूकंप आ चुके हैं। IS 1893:2002 में भूकंपीय इतिहास और भ्रंशों की सक्रियता के कारण दिल्ली को Zone III से बढ़ाकर Zone IV में रखा गया। इसलिए यहाँ भवन निर्माण में भूकंप-रोधी कोड (IS 4326) अनिवार्य है।

Q3. बैरन और नारकोंडम द्वीप दोनों अंडमान में हैं, फिर एक सक्रिय और दूसरा प्रसुप्त क्यों है?
A. दोनों भारतीय और बर्मा (म्यांमार) प्लेट की अभिसारी सीमा पर स्थित हैं, जहाँ भारतीय प्लेट बर्मा प्लेट के नीचे सबडक्ट हो रही है। बैरन द्वीप सबडक्शन जोन के ठीक ऊपर (Volcanic Arc) है, जहाँ 100 किमी गहराई पर पिघला मैग्मा लगातार ऊपर आ रहा है, इसलिए सक्रिय। नारकोंडम द्वीप सबडक्शन जोन से थोड़ा दूर और पुराना है (लगभग 3 मिलियन वर्ष पुराना), इसका मैग्मा कक्ष ठंडा हो चुका है और वर्तमान में कोई ऊष्मा आपूर्ति नहीं, इसलिए प्रसुप्त माना जाता है। बैरन स्ट्रॉम्बोलियन प्रकार का, नारकोंडम डेसाइट प्रकार का ज्वालामुखी है।

Q4. क्या मृत ज्वालामुखी पुनः सक्रिय हो सकता है?
A. परिभाषा के अनुसार मृत ज्वालामुखी का मैग्मा स्रोत पूरी तरह समाप्त हो चुका है और उसकी नली (Vent) ठोस चट्टानों से बंद हो चुकी है, इसलिए पुनः सक्रिय होने की संभावना नगण्य है। हालांकि भूवैज्ञानिक समय में प्लेट गति बदलने से कभी-कभी प्रसुप्त को मृत समझ लिया जाता है। उदाहरण - अमेरिकी येलोस्टोन को पहले मृत माना जाता था, पर अब प्रसुप्त सुपर-ज्वालामुखी माना जाता है। भारत का दक्कन ट्रैप 66 Ma से मृत है और प्लेट अब हॉटस्पॉट से दूर जा चुकी है, इसलिए पुनः सक्रिय नहीं होगा।