भूकंप और ज्वालामुखी - भाग 2

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भूकंप और ज्वालामुखी - भाग 2 - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

ज्वालामुखी स्थलाकृतियां और सुनामी पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न

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💡 व्याख्या

ज्वालामुखी से बनी स्थलाकृतियां और सुनामी: प्रक्रिया, प्रभाव और प्रबंधन

ज्वालामुखीयता (Volcanism) केवल लावा उद्गार नहीं है, बल्कि यह भू-आकृतियों का निर्माण और विनाश दोनों करती है। मैग्मा जब सतह पर आता है तो बाह्य (Extrusive) स्थलाकृतियां और जब सतह के नीचे ही ठंडा हो जाता है तो आंतरिक (Intrusive) स्थलाकृतियां बनाता है। वहीं समुद्र के भीतर भूकंप या ज्वालामुखी से उत्पन्न सुनामी (जापानी शब्द - सु = बंदरगाह, नामी = लहर) सबसे विनाशकारी समुद्री आपदा है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण 2004 की हिंद महासागर सुनामी है। UPSC में Batholith, Dyke, Sill, Caldera और सुनामी चेतावनी प्रणाली से प्रत्यक्ष प्रश्न पूछे जाते हैं।

🔥 UPSC Facts Box - ज्वालामुखी स्थलाकृतियां और सुनामी
Intrusive vs Extrusive: Intrusive - मैग्मा अंदर ठंडा, बड़े क्रिस्टल (फैनेरिटिक), Extrusive - लावा बाहर ठंडा, छोटे क्रिस्टल (अफैनिटिक) या कांच
प्रमुख Intrusive रूप: Batholith (100 किमी² से बड़ा, अनियमित, ग्रेनाइट), Laccolith (उत्तल लेंस, 5-10 किमी व्यास), Lopolith (तश्तरीनुमा, अवतल), Phacolith (अपनति/अभिनति में), Sill (समानांतर चादर, <50 मी मोटा), Dyke (लंबवत दीवार, 1-20 मी मोटा)
प्रमुख Extrusive रूप: Shield (बेसाल्ट, कम ढाल जैसे मौना लोआ), Composite/Strato (एंडेसाइट, ऊँचा जैसे फुजियामा), Caldera (2-50 किमी व्यास का गर्त)
सुनामी उत्पत्ति शर्तें: परिमाण >7.5 Mw, गहराई <70 किमी, Dip-Slip भ्रंश, समुद्र तल का ऊर्ध्वाधर विस्थापन >1 मीटर
2004 हिंद महासागर सुनामी: 26 दिसंबर 2004, 00:58:53 UTC, परिमाण 9.1-9.3 Mw, अधिकेंद्र - सुमात्रा के पश्चिम में सुंडा गर्त (3.3°N, 95.8°E), भ्रंश लंबाई 1300 किमी, विस्थापन 15-20 मीटर, तरंग ऊँचाई 30 मीटर तक (बांडा आचेह)
क्षति: 14 देशों में 2,27,898 मृत (USGS), भारत में 12,405 मृत (तमिलनाडु 8,009, अंडमान-निकोबार 3,513), इंडोनेशिया में सर्वाधिक 1,67,000
चेतावनी प्रणाली: भारत में INCOIS हैदराबाद में भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र (ITEWC) 15 अक्टूबर 2007 से सक्रिय, 24 DART Buoy प्रशांत में, 4 BPR हिंद महासागर में

1. ज्वालामुखी से बनी आंतरिक (Intrusive) स्थलाकृतियां

जब मैग्मा सतह पर आने से पहले ही क्रस्ट के भीतर विभिन्न गहराइयों पर ठंडा होकर जम जाता है तो Intrusive स्थलाकृतियां बनती हैं। ये अपरदन के बाद सतह पर दिखाई देती हैं और UPSC में इनके आकार के आधार पर प्रश्न बनते हैं।

(i) बैथोलिथ (Batholith): सबसे बड़ा Intrusive रूप, क्षेत्रफल 100 किमी² से अधिक, कई सौ किमी तक विस्तृत, गहराई तक अनियमित। ग्रेनाइटिक संरचना, फेल्सिक मैग्मा से बनता है। ठंडा होने में लाखों वर्ष लगते हैं, इसलिए मोटे क्रिस्टल। उदाहरण - इडाहो बैथोलिथ (USA, 25,000 किमी²), बुंदेलखंड ग्रेनाइट बैथोलिथ (भारत, 26,000 किमी²), राजस्थान का एरिनपुरा ग्रेनाइट। यह पर्वत निर्माण के बाद अपरदन से उजागर होता है।

(ii) लैकोलिथ (Laccolith): ग्रीक शब्द Laccos = गर्त। जब चिपचिपा, फेल्सिक मैग्मा परतों के बीच घुसकर ऊपर की परत को गुंबदनुमा उठा देता है। ऊपर उत्तल (Convex) और नीचे समतल, लेंस जैसा। व्यास 5-10 किमी, मोटाई 500-1000 मीटर। उदाहरण - यूटा के हेनरी पर्वत (अमेरिका), हिमाचल में कुछ ग्रेनाइट गुंबद।

(iii) लोपोलिथ (Lopolith) और फैकोलिथ (Phacolith): लोपोलिथ तश्तरीनुमा, अवतल, केंद्र में धँसा हुआ, मैफिक मैग्मा से। उदाहरण - दक्षिण अफ्रीका का बुशवेल्ड लोपोलिथ (पृथ्वी का सबसे बड़ा प्लैटिनम भंडार)। फैकोलिथ मोड़दार पर्वतों की अपनति (Anticline) के शीर्ष या अभिनति (Syncline) के तल में बनता है, लेंस आकार।

(iv) सिल (Sill) और डाइक (Dyke): सबसे अधिक पूछे जाने वाले। सिल - परतों के समानांतर (Concordant) क्षैतिज चादर, मोटाई 1-50 मीटर, सैकड़ों किमी लंबी हो सकती है। उदाहरण - इंग्लैंड का ग्रेट व्हिन सिल (130 किमी लंबा), दक्कन में मुंबई के पास कई सिल। डाइक - परतों को काटती हुई (Discordant) लंबवत दीवार, 1-20 मीटर मोटी, 10-15 किमी लंबी। उदाहरण - दक्कन ट्रैप में नर्मदा-ताप्ती क्षेत्र में 1000 से अधिक डाइक, स्कॉटलैंड की क्लीवेज डाइक। सिल और डाइक दोनों बेसाल्टिक होते हैं और सबसे कठोर होने से अपरदन के बाद दीवार जैसे खड़े रहते हैं।

2. ज्वालामुखी से बनी बाह्य (Extrusive) स्थलाकृतियां

लावा के सतह पर आने से बनती हैं।

(i) शील्ड ज्वालामुखी: तरल बेसाल्टिक लावा (कम सिलिका) से कम ढाल (5-10°) वाला विशाल गुंबद, जैसे हवाई का मौना लोआ (समुद्र तल से 9 किमी, विश्व का सबसे बड़ा ज्वालामुखी)। कंपोजिट / स्ट्रैटो ज्वालामुखी: चिपचिपे एंडेसाइट लावा और राख की परतों से ऊँचा, तीव्र ढाल (30°), जैसे फुजियामा (जापान), विसुवियस (इटली), बैरन द्वीप (भारत)।

(ii) क्रेटर और काल्डेरा (Caldera): क्रेटर छोटे, 1 किमी से कम व्यास का, ज्वालामुखी के मुख पर। काल्डेरा विशाल, 2 से 50 किमी व्यास। जब मैग्मा कक्ष खाली होने पर ज्वालामुखी अंदर धँस जाता है तो काल्डेरा बनता है। तीन प्रकार - विस्फोटक काल्डेरा, धसान काल्डेरा, अपरदन काल्डेरा। उदाहरण - येलोस्टोन काल्डेरा (USA, 60 किमी), टोबा काल्डेरा (इंडोनेशिया, 100 किमी, 74,000 वर्ष पूर्व सुपर-विस्फोट), क्रेटर लेक (USA, काल्डेरा में झील)। भारत में धनबाद के पास काल्डेरा जैसे गर्त माने जाते हैं।

(iii) लावा पठार, लावा गुम्बद, सिंडर शंकु: दक्कन ट्रैप (5 लाख किमी²), कोलंबिया पठार लावा पठार के उदाहरण। लावा गुम्बद - चिपचिपे लावा का गुंबद, जैसे माउंट सेंट हेलेंस। सिंडर शंकु - छोटे, 300 मीटर ऊँचे, राख से बने, जैसे मेक्सिको का पैरिकुटिन।

3. सुनामी - कारण, प्रभाव, 2004 की घटना और चेतावनी प्रणाली

कारण: सुनामी गुरुत्व तरंग (Gravity Wave) है। उत्पत्ति के 4 मुख्य कारण - (i) समुद्री भूकंप (80% सुनामी इसी से) - शर्तें: परिमाण >7.5 Mw, फोकस <70 किमी, थ्रस्ट फॉल्ट से समुद्र तल का ऊर्ध्वाधर विस्थापन। (ii) ज्वालामुखी उद्गार - जैसे 1883 क्राकाटोआ, 2022 टोंगा। (iii) भूस्खलन - पनडुब्बी भूस्खलन, जैसे 1998 पापुआ न्यू गिनी। (iv) उल्का पात - अत्यंत दुर्लभ। सुनामी की गति गहरे समुद्र में √(g*d) से - 700 किमी गहराई पर 800 किमी/घंटा (जेट विमान जितनी), तरंगदैर्ध्य 200 किमी, ऊँचाई 0.5 मीटर। उथले तट पर गति घटकर 30 किमी/घंटा पर ऊँचाई 15-30 मीटर हो जाती है - इसे Shoaling Effect कहते हैं।

2004 हिंद महासागर सुनामी का सटीक विवरण: भारतीय प्लेट बर्मा माइक्रोप्लेट के नीचे सुंडा सबडक्शन जोन में 1300 किमी लंबाई में 20 मीटर तक खिसकी। भूकंप अवधि 8-10 मिनट (अब तक का सबसे लंबा)। ऊर्जा 23,000 हिरोशिमा बमों के बराबर। पहली तरंग सुमात्रा में 15 मिनट में 30 मीटर ऊँची पहुँची, थाईलैंड में 2 घंटे में 10 मीटर, तमिलनाडु (नागपट्टिनम) में 2 घंटे 30 मिनट में 5-10 मीटर, केन्या में 7 घंटे में। भारत में दोहरी क्षति - भूकंप से अंडमान में भूमि 1-2 मीटर धँसी और 1 मीटर ऊपर भी उठी।

प्रभाव: प्राथमिक - डूबना, दूसरी - मलबा, तीसरी - नमक के कारण कृषि भूमि बंजर, मीठे पानी का खारापन, महामारी। प्रवाल भित्ति और मैंग्रोव वाले तटों (जैसे पिचावरम, तमिलनाडु) पर क्षति 70% कम हुई।

चेतावनी प्रणाली: 2004 से पहले हिंद महासागर में कोई प्रणाली नहीं थी। अब - (i) प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) हवाई 1949 से। (ii) भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी प्रणाली (ITEWC) - INCOIS हैदराबाद में ISRO, IMD, NIOT के सहयोग से। 17 भूकंपीय स्टेशन, 4 Bottom Pressure Recorder (BPR), 30 ज्वार गेज। भूकंप के 10 मिनट में परिमाण, 20 मिनट में बुलेटिन, मॉडल से तरंग पहुँच समय का पूर्वानुमान। DART (Deep-ocean Assessment and Reporting of Tsunamis) बॉय - समुद्र तल के दाब परिवर्तन को उपग्रह से भेजता है। भारत 2007 से 24x7 चेतावनी देता है, 2011 जापान सुनामी में भारतीय तट के लिए सटीक चेतावनी दी गई थी।

तुलना बिंदु Intrusive (आंतरिक) स्थलाकृति Extrusive (बाह्य) स्थलाकृति
निर्माण स्थान सतह के नीचे, धीरे-धीरे ठंडा सतह पर, तेजी से ठंडा
क्रिस्टल आकार बड़े (फैनेरिटिक) - ग्रेनाइट छोटे या कांच (अफैनिटिक) - बेसाल्ट
प्रमुख उदाहरण बैथोलिथ, लैकोलिथ, सिल, डाइक शील्ड, कंपोजिट, काल्डेरा, लावा पठार
दृश्यता अपरदन के बाद दिखते हैं तुरंत सतह पर दिखते हैं
UPSC महत्व बुंदेलखंड बैथोलिथ, दक्कन डाइक दक्कन ट्रैप, बैरन द्वीप, येलोस्टोन काल्डेरा

Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए

  • Intrusive में सबसे बड़ा - बैथोलिथ (>100 किमी²), सबसे छोटा - डाइक/सिल। Extrusive में सबसे बड़ा - लावा पठार (दक्कन ट्रैप 5 लाख किमी²)।
  • काल्डेरा और क्रेटर में अंतर - क्रेटर <1 किमी, काल्डेरा >2 किमी, काल्डेरा में झील बनती है जैसे क्रेटर लेक USA।
  • डाइक परतों को काटती है (Discordant), सिल समानांतर (Concordant) - याद करने की ट्रिक: Dyke = काटती है।
  • सुनामी तट पर ऊँची क्यों होती है? गहराई घटने से गति घटती है पर ऊर्जा संरक्षण से ऊँचाई 30 गुना बढ़ जाती है।
  • 2004 सुनामी के बाद भारत ने 2007 में ITEWC स्थापित किया, 2005 में NDMA बना, Coastal Regulation Zone में सख्ती।
  • मैंग्रोव और प्रवाल भित्ति सुनामी के प्राकृतिक अवरोधक - 2004 में पिचावरम मैंग्रोव ने नागपट्टिनम के कई गाँव बचाए।
  • सुनामी चेतावनी के 3 स्तर - Information, Advisory, Warning। भारत 10 मिनट में सूचना जारी करता है।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बैथोलिथ और लैकोलिथ में क्या अंतर है और भारत में कहाँ मिलते हैं?
A. बैथोलिथ अनियमित, विशाल (>100 किमी²), गहराई तक विस्तृत, ग्रेनाइटिक, पर्वत निर्माण के मूल में बनता है। लैकोलिथ लेंस जैसा, ऊपर गुंबदनुमा, छोटा (5-10 किमी), परतों के बीच। भारत में बैथोलिथ - बुंदेलखंड ग्रेनाइट (UP-MP), क्लोजपेट ग्रेनाइट (कर्नाटक), राजस्थान का एरिनपुरा। लैकोलिथ - हिमाचल और कश्मीर में कुछ ग्रेनाइट गुंबद, यद्यपि भारत में स्पष्ट लैकोलिथ कम, हेनरी पर्वत USA क्लासिक उदाहरण है।

Q2. 2004 सुनामी से तमिलनाडु और अंडमान में इतनी क्षति क्यों हुई जबकि गुजरात में कम?
A. 2004 भूकंप का फॉल्ट उत्तर-दक्षिण (1300 किमी) था, इसलिए ऊर्जा का अधिकांश भाग पूर्व-पश्चिम दिशा में गया - पूर्व में सुमात्रा-थाईलैंड-तमिलनाडु-अंडमान सीधी रेखा में थे, पश्चिम में श्रीलंका, भारत का पश्चिमी तट छाया में था। दूसरा, बंगाल की खाड़ी त्रिकोणाकार और उथली होने से Shoaling Effect अधिक हुआ। अंडमान निकट होने से 15 मिनट में 15 मीटर लहर आई। गुजरात अरब सागर में और भ्रंश के समानांतर होने से सुरक्षित रहा।

Q3. सुनामी और सामान्य ज्वारीय लहर में क्या अंतर है?
A. ज्वारीय लहर चंद्रमा-सूर्य के गुरुत्व से 12 घंटे के अंतराल पर आती है, तरंगदैर्ध्य 1000 किमी पर ऊँचाई 1 मीटर, गति कम। सुनामी भूकंप/ज्वालामुखी से, तरंगदैर्ध्य 100-200 किमी पर गहरे समुद्र में ऊँचाई 0.5 मीटर पर गति 800 किमी/घंटा, तट पर 30 मीटर तक। ज्वार पूर्वानुमेय है, सुनामी आकस्मिक। सुनामी की तरंगें 3-4 होती हैं, पहली सबसे बड़ी नहीं होती, 30 मिनट से 2 घंटे अंतराल पर आती हैं।

Q4. काल्डेरा कैसे बनता है और क्रेटर से कैसे अलग है?
A. क्रेटर ज्वालामुखी के शीर्ष पर 1 किमी से छोटा गर्त, विस्फोट से बनता है। काल्डेरा बहुत बड़ा (2-50 किमी) गर्त है, जो तब बनता है जब विशाल विस्फोट से मैग्मा कक्ष खाली हो जाता है और ऊपर का शंकु अपने ही भार से धँस जाता है। जैसे टोबा काल्डेरा 74,000 वर्ष पूर्व सुपर-विस्फोट से 100x30 किमी का बना। क्रेटर में छोटा लावा तालाब, काल्डेरा में बड़ी झील (क्रेटर लेक) बनती है। येलोस्टोन और टोबा सक्रिय काल्डेरा हैं, जो भविष्य में सुपर-विस्फोट कर सकते हैं।