भू-आकृतिक प्रक्रियाएं - भाग 1
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अंतर्जात-बहिर्जात बल, नदी और हिमनद स्थलाकृतियों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
भू-आकृतिक प्रक्रम: अंतर्जात-बहिर्जात बल, नदी और हिमनद निर्मित स्थलाकृतियां
पृथ्वी की सतह पर दिखने वाली सभी स्थलाकृतियाँ दो विरोधी बलों के अंतर्क्रिया का परिणाम हैं - अंदर से कार्य करने वाले अंतर्जात बल (Endogenic Forces) जो विषमता उत्पन्न करते हैं और बाहर से कार्य करने वाले बहिर्जात बल (Exogenic Forces) जो विषमता को दूर कर समतलीकरण करते हैं। अंतर्जात बल पर्वत और घाटी बनाते हैं, बहिर्जात बल नदी, हिमनद, पवन द्वारा उन्हें काट-पीट कर V-घाटी, विसर्प, डेल्टा, सर्क, मोरेन जैसी स्थलाकृतियाँ बनाते हैं। UPSC में इन बलों का वर्गीकरण और नदी-हिमनद स्थलाकृतियों के विकास क्रम से प्रत्येक वर्ष प्रश्न पूछा जाता है।
अंतर्जात बल: पटल विरूपण (Diastrophism) - महाद्वीपीय निर्माण (Epeirogenic, धीमा, ऊर्ध्वाधर) और पर्वत निर्माण (Orogenic, तेज, क्षैतिज - वलन, भ्रंशन), ज्वालामुखीयता और भूकंप
बहिर्जात बल: अनाच्छादन (Denudation) = अपक्षय (Weathering) + वृहद् क्षरण (Mass Wasting) + अपरदन (Erosion) + निक्षेपण (Deposition). कारक - नदी, हिमनद, पवन, भूमिगत जल, समुद्री लहरें
नदी की अवस्थाएँ: युवावस्था - लंबवत अपरदन, V-घाटी, गॉर्ज; प्रौढ़ावस्था - क्षैतिज अपरदन, विसर्प (Meander), गोखुर झील; वृद्धावस्था - निक्षेपण, डेल्टा, बाढ़ मैदान
V-घाटी: युवा नदी द्वारा नीचे की ओर कटाव से, गहराई चौड़ाई से अधिक, उदाहरण - सिंधु गॉर्ज (5200 मी गहरा, विश्व का सबसे गहरा), ब्रह्मपुत्र का नामचा बरवा गॉर्ज
विसर्प और डेल्टा: विसर्प - प्रौढ़ नदी में सर्पाकार मोड़, गंगा का बिहार में विसर्प अनुपात 2.5; डेल्टा - नदी मुहाने पर त्रिकोणाकार निक्षेप, शर्त - मंद ढाल, अधिक अवसाद, ज्वार कम; सुंदरवन डेल्टा (गंगा-ब्रह्मपुत्र) विश्व का सबसे बड़ा (1,00,000 किमी²)
हिमनद स्थलाकृतियाँ: सर्क (Cirque/Corrie) - हिमनद का उद्गम स्थल, अर्धवृत्ताकार गर्त, 500-1000 मी व्यास; मोरेन (Moraine) - हिमनद द्वारा लाया गया असंगठित मलबा, प्रकार - पार्श्विक, मध्यस्थ, अंतस्थ, तलस्थ; उदाहरण - सियाचिन सर्क, गंगोत्री हिमनद के मोरेन
1. अंतर्जात और बहिर्जात बल - भू-आकृतिक प्रक्रमों का वर्गीकरण
अंतर्जात बल (Endogenic Forces): पृथ्वी के आंतरिक ताप और प्लेट विवर्तनिकी से उत्पन्न। दो प्रकार - (a) पटल विरूपण (Diastrophism): (i) महाद्वीप रचनात्मक (Epeirogenic) - धीमी, व्यापक, ऊर्ध्वाधर गति से महाद्वीपों का उत्थान/धंसाव, जैसे भारतीय पठार का उत्थान। (ii) पर्वत निर्माणकारी (Orogenic) - तेज, क्षैतिज गति से संपीडन। वलन (Folding) - अपनति-अभिनति, जैसे हिमालय; भ्रंशन (Faulting) - सामान्य, व्युत्क्रम और ट्रांसफॉर्म भ्रंश, जैसे नर्मदा घाटी भ्रंश घाटी (Rift Valley)। (b) आकस्मिक बल: ज्वालामुखी और भूकंप - कुछ मिनटों में विनाशकारी स्थलाकृति बनाते हैं, जैसे बैरन द्वीप ज्वालामुखी। ये विषमता उत्पन्न करते हैं।
बहिर्जात बल (Exogenic Forces): सूर्य की ऊष्मा और गुरुत्वाकर्षण से चालित, समतलीकरण करते हैं। क्रम - (i) अपक्षय: भौतिक (ताप, तुषार), रासायनिक (जलयोजन, ऑक्सीकरण), जैविक। (ii) वृहद् क्षरण: मलबा का गुरुत्व से नीचे खिसकना - भूस्खलन, पंक प्रवाह। (iii) अपरदन, परिवहन, निक्षेपण: नदी (आर्द्र क्षेत्र), हिमनद (ध्रुवीय/उच्च पर्वतीय), पवन (शुष्क), भूमिगत जल (कार्स्ट), लहरें (तटीय) - ये 5 प्रमुख कारक हैं। नदी सबसे महत्वपूर्ण बहिर्जात कारक है क्योंकि यह 75% स्थलाकृतियाँ बनाती है।
2. नदी निर्मित स्थलाकृतियां - V-घाटी, विसर्प और डेल्टा
V-घाटी: नदी की युवावस्था में लंबवत अपरदन (Vertical Erosion) क्षैतिज अपरदन से अधिक होता है। नदी तली को गहरा काटती है, पार्श्व ढाल खड़े रहते हैं, अनुप्रस्थ काट अंग्रेजी अक्षर V जैसा। विकास - V-आकार → गॉर्ज (Gorge, अत्यंत गहरा, संकरा, कठोर चट्टान में) → कैनियन (Canyon, गॉर्ज का विशाल रूप, शुष्क क्षेत्र में)। भारतीय उदाहरण - सिंधु नदी का बुंजी के पास गॉर्ज 5200 मीटर गहरा, सतलुज का शिपकी-ला गॉर्ज, चंबल का गॉर्ज, नर्मदा का जबलपुर में भेड़ाघाट गॉर्ज (संगमरमर)। जब नदी कठोर और मुलायम चट्टानों को बारी-बारी काटती है तो जलप्रपात और क्षिप्रिका (Rapids) बनते हैं - जैसे जोग जलप्रपात (शरावती)।
विसर्प (Meander) और गोखुर झील: प्रौढ़ावस्था में ढाल कम होने से क्षैतिज अपरदन और पार्श्व कटाव बढ़ता है। नदी सर्पाकार मोड़ बनाती है जिसे विसर्प कहते हैं, नाम तुर्की की मियांडर नदी से। बनने की प्रक्रिया - अवतल किनारे (Concave) पर तेज प्रवाह से कटाव, उत्तल किनारे (Convex) पर मंद प्रवाह से निक्षेपण। विसर्प का विस्तार → विसर्प ग्रीवा (Neck) संकरी → बाढ़ में नदी ग्रीवा को काटकर सीधी बहने लगती है → पुराना मोड़ कटकर गोखुर झील (Ox-bow Lake) बनता है। भारतीय उदाहरण - गंगा का बिहार में (कटिहार-भागलपुर), यमुना का मथुरा-आगरा में, गोमती का लखनऊ में विसर्प। उत्तर बिहार में काबर ताल गोखुर झील का उदाहरण है। बाढ़ मैदान और प्राकृतिक तटबंध भी इसी अवस्था में बनते हैं।
डेल्टा: वृद्धावस्था में मुहाने पर नदी की वहन क्षमता घटने से अवसाद त्रिकोणाकार (ग्रीक अक्षर Δ) रूप में जमा होता है। डेल्टा निर्माण की 5 शर्तें - (i) नदी में अधिक अवसाद, (ii) मुहाने पर मंद ढाल, (iii) ज्वार-भाटा कमजोर, (iv) समुद्र उथला, (v) मुहाने पर अवरोध नहीं। प्रकार - (i) चापाकार (Arcuate) - पंखा जैसा, जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र, नील, सिंधु, (ii) पंजाकार (Bird's Foot) - पक्षी के पंजे जैसा, जैसे मिसीसिपी, (iii) ज्वारनदमुखी (Estuarine) - ज्वार से डेल्टा न बनकर एश्चुअरी, जैसे नर्मदा-ताप्ती। भारतीय उदाहरण - सुंदरवन डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा सक्रिय डेल्टा (1,00,000 किमी², रॉयल बंगाल टाइगर), महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी डेल्टा चापाकार; नर्मदा-ताप्ती एश्चुअरी बनाती हैं, डेल्टा नहीं, क्योंकि भ्रंश घाटी में बहती हैं।
3. हिमनद निर्मित स्थलाकृतियां - सर्क और मोरेन
सर्क (Cirque/Corrie/Cwm): हिमनद घाटी का उद्गम स्थल, हिमनद अपरदन की सबसे विशिष्ट स्थलाकृति। बर्फ के तुषार अपक्षय (Frost Wedging) और प्लकिंग (Plucking) से पहाड़ के ढाल पर अर्धवृत्ताकार, कुर्सी जैसा गहरा गर्त बनता है, तीन ओर खड़ी दीवारें और एक ओर खुला मुंह। आकार - 500-1000 मीटर व्यास, 200-400 मीटर गहरा। बर्फ पिघलने पर सर्क में टार्न झील (Tarn Lake) बनती है। विकास - एक सर्क → दो सर्क के बीच नुकीली दीवार एरेट (Arete) → तीन या अधिक सर्क मिलने पर पिरामिडनुमा हॉर्न (Horn), जैसे स्विट्जरलैंड का मैटरहॉर्न। भारतीय उदाहरण - सियाचिन, गंगोत्री, पिंडारी हिमनदों के शीर्ष पर सर्क, कश्मीर का विशनसार-किशनसार टार्न झीलें सर्क झीलें हैं।
मोरेन (Moraine): हिमनद द्वारा परिवहित असंगठित, असमांग (Till) मलबा - बजरी, रेत, क्ले मिश्रित। अपरदन नहीं, निक्षेपण से बनता है। प्रकार - (i) पार्श्विक मोरेन (Lateral Moraine): हिमनद के दोनों किनारों पर, 100-200 मीटर ऊँची दीवार जैसी। (ii) मध्यस्थ मोरेन (Medial Moraine): दो हिमनद मिलने पर दो पार्श्विक मोरेन मिलकर बीच में काली पट्टी बनाते हैं, जैसे सियाचिन में। (iii) अंतस्थ / टर्मिनल मोरेन (Terminal Moraine): हिमनद के अंतिम छोर पर अर्धचंद्राकार ढेर, हिमनद की अधिकतम सीमा बताता है। (iv) तलस्थ मोरेन (Ground Moraine): तली पर बिछा पतला मलबा। (v) प्रतिसारी मोरेन (Recessional Moraine): हिमनद पीछे हटते समय बीच-बीच में बनाता है, जलवायु परिवर्तन का प्रमाण। भारतीय उदाहरण - गंगोत्री हिमनद 25 किमी लंबा, 2 किमी चौड़ा, अंतस्थ मोरेन गोमुख से 2 किमी आगे तक, मिलाम, केदारनाथ, अमरनाथ हिमनदों के मोरेन। हिमनद घाटी का आकार U-आकार (U-Valley) होता है, जो V-घाटी से भिन्न है - U-घाटी चौड़ी, खड़ी दीवार वाली।
| तुलना बिंदु | नदी निर्मित (V-घाटी, विसर्प, डेल्टा) | हिमनद निर्मित (सर्क, मोरेन, U-घाटी) |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | जल द्वारा रैखिक अपरदन और निक्षेपण | बर्फ द्वारा प्लकिंग, अपघर्षण और निक्षेपण |
| घाटी आकार | V-आकार, संकरी तली, युवावस्था में गहरी | U-आकार, चौड़ी तली, खड़ी दीवार |
| मुख्य अपरदनात्मक | V-घाटी, गॉर्ज, जलप्रपात | सर्क, एरेट, हॉर्न |
| मुख्य निक्षेपात्मक | विसर्प, गोखुर झील, डेल्टा, बाढ़ मैदान | मोरेन (पार्श्विक, मध्यस्थ, अंतस्थ), ड्रमलिन, एस्कर |
| भारतीय उदाहरण | सिंधु गॉर्ज, गंगा विसर्प (बिहार), सुंदरवन डेल्टा | सियाचिन सर्क, गंगोत्री मोरेन, कश्मीर U-घाटी |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- अंतर्जात = विषमता बनाता है (पर्वत), बहिर्जात = समतलीकरण करता है (मैदान) - दोनों का संतुलन ही भू-दृश्य है।
- V-घाटी = नदी युवा, U-घाटी = हिमनद युवा। UPSC में पूछा जाता है - हिमनद घाटी U-आकार क्यों? क्योंकि हिमनद पूरी घाटी को घिसता है, नदी केवल तली को।
- विसर्प प्रौढ़ावस्था में, गोखुर झील बाढ़ में ग्रीवा कटने से, डेल्टा वृद्धावस्था में - क्रम याद रखें।
- डेल्टा तभी जब - अधिक अवसाद + मंद ढाल + कम ज्वार। नर्मदा-ताप्ती भ्रंश घाटी में तीव्र ढाल और तेज ज्वार से डेल्टा नहीं, एश्चुअरी बनाती हैं।
- सर्क = हिमनद का उद्गम, मोरेन = हिमनद का कचरा। सर्क में टार्न झील, मोरेन से हिमनद की सीमा पता चलती है।
- मोरेन के प्रकार - L-M-T-G (Lateral, Medial, Terminal, Ground) - पार्श्विक किनारे पर, मध्यस्थ बीच में, अंतस्थ अंत में।
- भारतीय नदियों में - हिमालयी नदियाँ तीनों अवस्थाएँ दिखाती हैं (सिंधु V-घाटी, गंगा विसर्प, सुंदरवन डेल्टा), प्रायद्वीपीय नदियाँ प्रौढ़-वृद्ध (विसर्प कम, डेल्टा छोटा)।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. V-घाटी और U-घाटी में क्या अंतर है और भारत में दोनों कहाँ मिलती हैं?
A. V-घाटी नदी द्वारा लंबवत कटाव से बनती है, संकरी, V-आकार, युवावस्था की स्थलाकृति है। U-घाटी हिमनद द्वारा प्लकिंग और अपघर्षण से पूरी घाटी को चौड़ा-गहरा करने से बनती है, चौड़ी तली, खड़ी दीवारें। भारत में V-घाटी - सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र के हिमालयी गॉर्ज; U-घाटी - कश्मीर की लिद्दर घाटी, हिमाचल की सोलंग घाटी, सिक्किम की युमथांग घाटी जो प्राचीन हिमनद घाटियाँ हैं।
Q2. गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा क्यों है जबकि नर्मदा-ताप्ती डेल्टा क्यों नहीं बनातीं?
A. गंगा-ब्रह्मपुत्र हिमालय से प्रतिवर्ष 1 अरब टन अवसाद लाती हैं, मुहाने पर ढाल 1:10,000 से कम, बंगाल की खाड़ी उथली और ज्वार कमजोर (2-3 मीटर), इसलिए विशाल चापाकार डेल्टा बनता है। नर्मदा-ताप्ती भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती हैं, ढाल तीव्र, अवसाद कम (कठोर बेसाल्ट क्षेत्र), अरब सागर में ज्वार 8-10 मीटर तीव्र जो अवसाद बहा ले जाता है, इसलिए मुहाने पर एश्चुअरी (ज्वारनदमुख) बनता है, डेल्टा नहीं।
Q3. सर्क और मोरेन से हिमनद के बारे में क्या जानकारी मिलती है?
A. सर्क हिमनद का उद्गम बताता है - सर्क की तली की ऊँचाई हिमरेखा (Snow Line) बताती है। भारत में हिमरेखा 4500 मीटर (पश्चिम) से 5500 मीटर (पूर्व) पर है। मोरेन हिमनद की गति और सीमा बताता है - अंतस्थ मोरेन हिमनद की अधिकतम पहुँच, प्रतिसारी मोरेन पीछे हटने के चरण, मध्यस्थ मोरेन दो हिमनदों के मिलने का प्रमाण। गंगोत्री हिमनद का अंतस्थ मोरेन 2 किमी आगे होने से पता चलता है कि हिमनद सिकुड़ रहा है - जलवायु परिवर्तन का प्रमाण।
Q4. विसर्प और गोखुर झील कैसे बनती हैं और उत्तर बिहार में बाढ़ से इनका क्या संबंध है?
A. प्रौढ़ावस्था में नदी का वेग घटने से क्षैतिज अपरदन बढ़ता है। अवतल किनारे पर कटाव और उत्तल पर निक्षेपण से सर्पाकार मोड़ (विसर्प) बनता है। बाढ़ में जल सीधा बहकर ग्रीवा काट देता है और पुराना मोड़ गोखुर झील बन जाता है। उत्तर बिहार में कोसी, गंडक, बागमती अत्यधिक विसर्पित हैं क्योंकि ढाल 1:10,000 से कम और अवसाद अधिक। बाढ़ में विसर्प ग्रीवा कटने से नदी अपना मार्ग बदल लेती है - कोसी को बिहार का शोक इसी कारण कहते हैं, 2008 में कुसहा में तटबंध टूटकर 120 किमी पूर्व खिसक गई थी।