सूर्यताप और वायुदाब पेटियां - भाग 1
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सौर विकिरण, ऊष्मा बजट और दाब पेटियों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
सौर विकिरण, ऊष्मा बजट और वायुदाब पेटियां - विषुवतीय न्यून से उपोष्ण उच्च तक
पृथ्वी पर सभी मौसमी और जलवायु घटनाओं का मूल स्रोत सौर विकिरण (Solar Radiation) है। सूर्य से आने वाली लघु तरंग ऊर्जा को सूर्यताप (Insolation) कहते हैं, जो पृथ्वी को गर्म करती है और पृथ्वी फिर दीर्घ तरंग के रूप में पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) छोड़ती है। इन दोनों के संतुलन को ऊष्मा बजट कहते हैं, जो वायुमंडल का तापमान बनाए रखता है। तापमान में अंतर से वायुदाब में अंतर उत्पन्न होता है और विषुवतीय न्यून तथा उपोष्ण उच्च जैसी स्थायी दाब पेटियां बनती हैं। UPSC में सोलर कांस्टेंट, अल्बेडो, ऊष्मा बजट के 100 यूनिट मॉडल और दाब पेटियों के तापीय-गतिक कारण सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
सौर विकिरण और सूर्यताप: सौर स्थिरांक (Solar Constant) = 1361 वाट/मी² (1.94 कैलोरी/सेमी²/मिनट) वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर, औसत अंतर्ग्रहण (Insolation) = 340 वाट/मी², सर्वाधिक विषुवत पर, न्यूनतम ध्रुवों पर
अल्बेडो (Albedo): परावर्तन अनुपात, पृथ्वी का औसत अल्बेडो 30%। ताजा हिम 80-90%, मेघ 60-80%, मरुस्थल 30-40%, वन 10-15%, महासागर 5-10%
सूर्यताप को प्रभावित करने वाले कारक: सौर किरणों का कोण (अक्षांश), दिन की लंबाई, पृथ्वी-सूर्य दूरी (उपसौर 3 जनवरी, अपसौर 4 जुलाई), वायुमंडल की पारदर्शिता, स्थल-जल वितरण
ऊष्मा बजट (100 यूनिट मॉडल - NCERT): 100 यूनिट सौर विकिरण आता है - 35 परावर्तित (मेघों से 27, वायुमंडल से 2, धरातल से 6), 14 वायुमंडल द्वारा अवशोषित, 51 धरातल द्वारा अवशोषित। धरातल 51 यूनिट पार्थिव विकिरण छोड़ता है - 17 सीधे अंतरिक्ष में, 34 वायुमंडल द्वारा अवशोषित (ग्रीनहाउस)। वायुमंडल कुल 48 यूनिट (14+34) अंतरिक्ष में छोड़ता है। कुल बहिर्गमन = 35+17+48 = 100 यूनिट, संतुलन बना रहता है
पार्थिव विकिरण: दीर्घ तरंग (Infrared, 4-100 माइक्रोमीटर), CO₂ और जलवाष्प द्वारा अवशोषित - ग्रीनहाउस प्रभाव से पृथ्वी का औसत तापमान 15°C, न होने पर -18°C होता
दाब पेटियां: विषुवतीय निम्न (0-5°N/S, तापीय, 1008 mb, Doldrums), उपोष्ण उच्च (25-35°N/S, गतिक, 1020-1025 mb, Horse Latitudes, विश्व के मरुस्थल)
1. सौर विकिरण और सूर्यताप - Solar Constant, Insolation और Albedo
सौर विकिरण (Solar Radiation): सूर्य 6000K तापमान वाला कृष्णिका पिंड (Black Body) है जो लघु तरंग (0.2-4 माइक्रोमीटर) में ऊर्जा उत्सर्जित करता है - 7% पराबैंगनी, 43% दृश्य, 50% अवरक्त। वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर प्राप्त ऊर्जा को सौर स्थिरांक कहते हैं - 1361 वाट/मी² (NASA, 2011)। यह स्थिर नहीं - 11 वर्षीय सनस्पॉट चक्र से 0.1% बदलता है, उपसौर (Perihelion - 3 जनवरी, 147 मिलियन किमी) पर 7% अधिक और अपसौर (Aphelion - 4 जुलाई, 152 मिलियन किमी) पर 7% कम।
सूर्यताप (Insolation - Incoming Solar Radiation): धरातल पर पहुँचने वाली सौर ऊर्जा। औसत 340 वाट/मी² पर सर्वाधिक विषुवत पर 320-400 वाट/मी² (किरणें लंबवत) और ध्रुवों पर 0-100 वाट/मी² (तिरछी किरणें, अधिक परावर्तन, लंबा मार्ग)। प्रभावित करने वाले 5 कारक - (i) किरणों का कोण - विषुवत पर लंबवत = अधिक तीव्रता, ध्रुव पर तिरछी = कम। (ii) दिन की लंबाई - विषुवत पर 12 घंटे स्थिर, ध्रुव पर ग्रीष्म में 24 घंटे दिन पर किरणें तिरछी। (iii) पृथ्वी-सूर्य दूरी - उपसौर में अधिक। (iv) वायुमंडल की पारदर्शिता - मेघ, धूल से अवशोषण। (v) स्थल-जल वितरण - स्थल जल से 2.5 गुना तेजी से गर्म होता है।
अल्बेडो: परावर्तन प्रतिशत, लैटिन Albus = सफेद। पृथ्वी का ग्रहीय अल्बेडो 30% (100 में से 35 परावर्तित - NCERT में 35 मानता है)। ताजा बर्फ 80-90%, पुरानी बर्फ 50%, मेघ 60-80%, मरुस्थल 30-40%, घास 20-25%, वन 10-15%, महासागर 5-10%। हिम-आलबेडो फीडबैक - हिम पिघलने से अल्बेडो घटता है, अधिक अवशोषण, और गर्म होता है - ध्रुवीय प्रवर्धन (Polar Amplification) का कारण।
2. पृथ्वी का ऊष्मा बजट - Insolation और Terrestrial Radiation का संतुलन
ऊष्मा बजट का अर्थ: पृथ्वी जितनी ऊर्जा सूर्य से प्राप्त करती है, उतनी ही अंतरिक्ष में लौटाती है, इसलिए औसत तापमान 15°C स्थिर रहता है। इसे 100 यूनिट मॉडल से समझते हैं - मानो 100 यूनिट सौर विकिरण वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर आता है।
आगमन: 100 यूनिट में से - (i) 35 यूनिट परावर्तित होकर सीधे अंतरिक्ष में - मेघों से 27, वायुमंडल के धूलकणों से 2, धरातल (हिम, मरुस्थल) से 6। (ii) 14 यूनिट वायुमंडल द्वारा अवशोषित - ओजोन द्वारा UV, जलवाष्प और CO₂ द्वारा अवरक्त। (iii) 51 यूनिट धरातल द्वारा अवशोषित - 34 सीधे सौर विकिरण से, 17 विसरित (Diffuse) विकिरण से।
निर्गमन - पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation): धरातल गर्म होकर दीर्घ तरंग (4-100 माइक्रोमीटर, अवरक्त) में विकिरण छोड़ता है। पृथ्वी 15°C पर कृष्णिका विकिरण छोड़ती है, वीन के नियम से अधिकतम तरंगदैर्ध्य 10 माइक्रोमीटर। 51 यूनिट में से 17 सीधे खिड़की विकिरण (Atmospheric Window - 8-14 माइक्रोमीटर) से अंतरिक्ष में चला जाता है, 34 यूनिट CO₂, जलवाष्प, मीथेन द्वारा अवशोषित हो जाता है - यही ग्रीनहाउस प्रभाव है, जिससे वायुमंडल गर्म होता है और पुनः 24 यूनिट धरातल की ओर और 48 यूनिट (14+34) अंतरिक्ष की ओर छोड़ता है। कुल बहिर्गमन = 35 (परावर्तित) + 17 (पार्थिव सीधे) + 48 (वायुमंडल से) = 100 यूनिट। संतुलन। यदि संतुलन बिगड़े तो ग्लोबल वार्मिंग - CO₂ 420 ppm होने से 34 की जगह 35-36 यूनिट अवशोषित हो रहा है, इसलिए वायुमंडल अतिरिक्त गर्म।
अक्षांशीय ऊष्मा संतुलन: 38°N/S तक अधिशेष (Surplus) - प्राप्ति अधिक, निर्गमन कम; 38°N/S से ध्रुव तक घाटा (Deficit) - प्राप्ति कम, निर्गमन अधिक। यह असंतुलन पवनों और धाराओं द्वारा संतुलित होता है - ऊष्मा विषुवत से ध्रुव की ओर ले जाई जाती है।
3. वायुदाब पेटियां - विषुवतीय न्यून और उपोष्ण उच्च की स्थिति और कारण
वायुदाब पेटियों की उत्पत्ति: दो कारण - तापीय और गतिक। तापीय - ताप से वायु हल्की होकर उठती है = निम्न दाब, ठंडी होकर बैठती है = उच्च दाब। गतिक - पृथ्वी घूर्णन और वायु अवतलन/अभिसरण से।
(i) विषुवतीय न्यून दाब पेटी (Equatorial Low - 0-5°N/S, ITCZ): तापीय कारण - वर्षभर सूर्य लंबवत, औसत तापमान 27°C, वायु गर्म होकर संवहन धाराओं से ऊपर उठती है, इसलिए निम्न दाब - 1008 mb से कम, कई जगह 1006 mb। वायु ऊपर उठने से क्षैतिज पवन नहीं, इसलिए शांत पेटी - Doldrums (उदासीनता)। उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवनों का अभिसरण - Inter Tropical Convergence Zone (ITCZ)। विशेषताएँ - प्रतिदिन दोपहर में संवहनीय मेघ, गरज-चमक के साथ 200 सेमी से अधिक वर्षा, भूमध्यरेखीय जलवायु (अमेजन, कांगो)। सूर्य के साथ ITCZ खिसकता है - जुलाई में 10-20°N तक (भारत में मानसून गर्त), जनवरी में 10°S तक, इसलिए मानसून का आगमन।
(ii) उपोष्ण उच्च दाब पेटी (Sub-Tropical High - 25-35°N/S): गतिक कारण - विषुवत से उठी वायु हैडली कोशिका (Hadley Cell) द्वारा 30° अक्षांश पर ठंडी होकर नीचे उतरती है। नीचे उतरने से वायु संपीडित होकर 10°C/किमी गर्म होती है, सापेक्ष आर्द्रता 10-20% तक घट जाती है, इसलिए उच्च दाब - 1020-1025 mb, प्रतिचक्रवात, शांत। नाम - अश्व अक्षांश (Horse Latitudes) - पुराने समय में जहाज शांत में फंसने पर घोड़े फेंकने पड़ते थे। विशेषताएँ - वायु अवतलन से मेघ नहीं, वर्षा 25 सेमी से कम, विश्व के सभी गर्म मरुस्थल यहीं - उत्तरी गोलार्ध में सहारा (विश्व का सबसे बड़ा), थार, अरब, दक्षिण में कालाहारी, ऑस्ट्रेलियाई, अटाकामा। व्यापारिक पवनों और पछुआ पवनों का उद्गम - इस उच्च से विषुवतीय निम्न की ओर व्यापारिक पवन और उपध्रुवीय निम्न की ओर पछुआ पवन चलती है। 30° पर वायु फटती (Divergence) है, इसलिए उच्च।
संबंध: विषुवतीय निम्न में वायु ऊपर उठती है → 30° पर नीचे उतरती है → उपोष्ण उच्च बनता है → वहाँ से वायु विषुवत की ओर व्यापारिक पवन के रूप में लौटती है - हैडली कोशिका पूर्ण। यही पृथ्वी का ताप इंजन है।
| तुलना बिंदु | सौर विकिरण (Insolation) | पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) |
|---|---|---|
| तरंगदैर्ध्य | लघु तरंग (0.2-4 माइक्रोमीटर) | दीर्घ तरंग (4-100 माइक्रोमीटर, अवरक्त) |
| स्रोत तापमान | सूर्य 6000K | पृथ्वी 15°C (288K) |
| वायुमंडल द्वारा अवशोषण | ओजोन द्वारा UV, 14% ही | CO₂, जलवाष्प द्वारा 90%, ग्रीनहाउस |
| समय | केवल दिन में | दिन-रात, 24 घंटे |
| तुलना - दाब पेटी | विषुवतीय निम्न (0-5°) | उपोष्ण उच्च (25-35°) |
| कारण | तापीय - अधिक ताप से वायु उठना | गतिक - हैडली कोशिका का अवतलन |
| दाब / पवन | 1008 mb से कम, शांत, Doldrums | 1020-1025 mb, शांत, Horse Latitudes |
| जलवायु | अत्यधिक वर्षा, भूमध्यरेखीय वन | शुष्क, विश्व के सभी गर्म मरुस्थल |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- सोलर कांस्टेंट 1361 वाट/मी², औसत Insolation 340 वाट/मी², पर 30% अल्बेडो से 100 में से 35 वापस - इसलिए धरातल को 51 यूनिट ही मिलता है।
- ऊष्मा बजट 100 यूनिट मॉडल - आगमन 100 = परावर्तित 35 (मेघ 27, वायु 2, धरातल 6) + अवशोषित 65 (वायु 14, धरातल 51)। निर्गमन 100 = 35 परावर्तित + 17 पार्थिव सीधे + 48 वायुमंडलीय - संतुलन।
- अल्बेडो सबसे अधिक ताजा हिम 90%, सबसे कम महासागर 5% - इसलिए ध्रुव ठंडे, विषुवत गर्म।
- विषुवतीय निम्न तापीय, 0-5° पर, Doldrums, ITCZ यहीं, सूर्य के साथ 20°N तक खिसकता है - भारतीय मानसून का आधार।
- उपोष्ण उच्च गतिक, 30° पर हैडली कोशिका के अवतलन से, Horse Latitudes, सभी गर्म मरुस्थल यहीं - सहारा, थार, कालाहारी।
- पार्थिव विकिरण दीर्घ तरंग में, CO₂ और जलवाष्प द्वारा अवशोषित - ग्रीनहाउस न होने पर पृथ्वी -18°C होती, वर्तमान 15°C है - 33°C का अंतर ग्रीनहाउस से।
- UPSC ट्रिक - Insolation दिन में ही, Terrestrial रात-दिन दोनों; Insolation लघु तरंग, Terrestrial दीर्घ तरंग; विषुवतीय निम्न में वायु उठती है, उपोष्ण उच्च में बैठती है - हैडली कोशिका।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. सोलर कांस्टेंट 1361 वाट/मी² है पर धरातल पर 340 वाट/मी² ही क्यों माना जाता है?
A. 1361 वाट/मी² वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर सूर्य के लंबवत तल पर है। पृथ्वी गोलाकार है, इसलिए औसत 1/4 हो जाता है - 1361/4 = 340 वाट/मी²। फिर 35% अल्बेडो से परावर्तित होकर 221 वाट/मी² ही शेष रहता है, जिसमें 14% वायुमंडल और 51% धरातल अवशोषित करता है। इसलिए धरातल को औसत 168 वाट/मी² (51% का) मिलता है। विषुवत पर यह 400 वाट/मी² और ध्रुव पर 0 वाट/मी² होता है।
Q2. विषुवतीय निम्न दाब तापीय और उपोष्ण उच्च दाब गतिक क्यों है?
A. विषुवतीय निम्न सूर्य के सीधे रहने से धरातल अत्यधिक गर्म (27°C) होने से वायु गर्म होकर संवहन से ऊपर उठती है - तापीय कारण, दाब 1008 mb से कम। उपोष्ण उच्च पर वायु धरातल से गर्म नहीं होती बल्कि ऊपर से हैडली कोशिका की वायु 30° पर ठंडी होकर नीचे उतरती है - गतिक कारण, अवतलन से संपीडन और गर्म होना, इसलिए उच्च दाब 1025 mb। तापीय में वायु उठती है, गतिक में बैठती है।
Q3. अल्बेडो बढ़ने से पृथ्वी ठंडी होगी या गर्म और हिम-आलबेडो फीडबैक क्या है?
A. अल्बेडो बढ़ने से परावर्तन अधिक, अवशोषण कम, पृथ्वी ठंडी होगी। हिम-आलबेडो फीडबैक सकारात्मक फीडबैक है - तापमान बढ़ने से हिम पिघलती है, अल्बेडो 80% से 10% (महासागर) हो जाता है, अधिक अवशोषण से और गर्मी, और हिम पिघलना। यही कारण है कि आर्कटिक वैश्विक औसत से 4 गुना तेजी से गर्म हो रहा है - Polar Amplification। ज्वालामुखी राख से अल्बेडो बढ़ने पर अस्थायी ठंडक आती है, जैसे 1991 पिनातुबो से 0.5°C कमी।
Q4. ऊष्मा बजट असंतुलित होने से क्या होता है और वर्तमान में क्या स्थिति है?
A. ऊष्मा बजट में आगमन = निर्गमन होना चाहिए। CO₂ 1750 में 280 ppm से 2024 में 420 ppm होने से वायुमंडल पार्थिव विकिरण का 34 की जगह 35-36 यूनिट अवशोषित कर रहा है, इसलिए 100 में से 99 ही अंतरिक्ष में जा रहा है, 1 यूनिट अतिरिक्त वायुमंडल में - प्रति दशक 0.2°C वार्मिंग। इसी से ग्लोबल वार्मिंग, समुद्र स्तर वृद्धि। यदि बजट में 1% भी असंतुलन 10 वर्ष रहे तो 0.5°C वृद्धि। इसलिए IPCC का लक्ष्य नेट-जीरो - आगमन और निर्गमन पुनः संतुलित करना।