पृथ्वी की आंतरिक संरचना - भाग 1
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पृथ्वी की परतें, भूकंपीय तरंगें और असंबद्धताओं पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
पृथ्वी की आंतरिक संरचना: परतें, भूकंपीय तरंगें और असंबद्धताएं
पृथ्वी की आंतरिक संरचना का प्रत्यक्ष अवलोकन संभव नहीं है, सबसे गहरी खदान (कोला सुपरडीप बोरहोल) केवल 12.26 किमी तक ही गई है, जबकि पृथ्वी की त्रिज्या 6371 किमी है। इसलिए आंतरिक संरचना की जानकारी अप्रत्यक्ष स्रोतों, विशेषकर भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves), गुरुत्वाकर्षण, चुंबकत्व और उल्कापिंडों के अध्ययन से प्राप्त होती है। भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के अंदर से गुजरते समय परावर्तित और अपवर्तित होती हैं, जिससे परतों की गहराई, घनत्व और भौतिक अवस्था का सटीक अनुमान लगता है। UPSC में मोहो, गुटेनबर्ग और लेहमैन असंबद्धताओं की गहराई और P, S तरंगों का व्यवहार बार-बार पूछा जाता है।
पृथ्वी की त्रिज्या: 6371 किमी (भूमध्यरेखीय 6378 किमी, ध्रुवीय 6357 किमी), औसत घनत्व 5.51 ग्राम/सेमी³
भूर्पपटल (Crust): महाद्वीपीय 30-70 किमी (औसत 35 किमी, घनत्व 2.67-2.7 ग्राम/सेमी³, ग्रेनाइट - SiAl), महासागरीय 5-10 किमी (औसत 7 किमी, घनत्व 3.0 ग्राम/सेमी³, बेसाल्ट - SiMa)
मेंटल (Mantle): 35 से 2900 किमी तक, आयतन का 83% और द्रव्यमान का 67%, घनत्व 3.3 से 5.7 ग्राम/सेमी³
कोर (Core): बाह्य क्रोड 2900-5150 किमी (तरल, Fe+Ni), आंतरिक क्रोड 5150-6371 किमी (ठोस, घनत्व 12.8-13.5 ग्राम/सेमी³)
मोहो असंबद्धता: 5-70 किमी (औसत 35 किमी), खोज 1909 में एंड्रिजा मोहोरोविसिक द्वारा
गुटेनबर्ग असंबद्धता: 2900 किमी, खोज 1914 में बेनो गुटेनबर्ग द्वारा, मेंटल-कोर सीमा
लेहमैन असंबद्धता: 5150 किमी, खोज 1936 में इंगे लेहमैन द्वारा, बाह्य-आंतरिक कोर सीमा; दूसरी लेहमैन 220 किमी पर ऊपरी मेंटल में
भूकंपीय तरंग वेग: P तरंग 6 किमी/सेकंड (क्रस्ट) से 13.7 किमी/सेकंड (निचला मेंटल), S तरंग 3.5 से 7.3 किमी/सेकंड
1. पृथ्वी की परतें - भूर्पटल, मेंटल और कोर
भूर्पटल (Crust): पृथ्वी की सबसे बाहरी, पतली और ठोस परत। दो प्रकार की है। (i) महाद्वीपीय भूर्पटल - पुराना, 3.8 अरब वर्ष तक पुराना, मोटा, ग्रेनाइट चट्टानों (सिलिका + एल्युमीनियम - SiAl) से बना। हिमालय के नीचे मोटाई 70 किमी तक। (ii) महासागरीय भूर्पटल - नया, 200 मिलियन वर्ष से कम, पतला, बेसाल्ट चट्टानों (सिलिका + मैग्नीशियम - SiMa) से बना। कॉनराड असंबद्धता (15-20 किमी) ऊपरी क्रस्ट (SiAl) और निचले क्रस्ट (SiMa) को अलग करती है।
मेंटल (Mantle): मोहो से गुटेनबर्ग तक विस्तृत। तीन उप-परतें - (a) ऊपरी मेंटल 35-410 किमी, जिसमें 100-200 किमी तक एस्थेनोस्फीयर (दुर्बलता मंडल, आंशिक पिघला हुआ, प्लेट टेक्टोनिक्स का स्रोत) है। P तरंग वेग 8.1 किमी/सेकंड। (b) संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone) 410-660 किमी, जहाँ 410 किमी और 660 किमी पर खनिजों (ओलिविन से वाड्सलेइट और रिंगवुडाइट से ब्रिजमैनाइट) में相 परिवर्तन के कारण वेग अचानक बढ़ता है। इसे रेपेटी असंबद्धता भी कहते हैं। (c) निचला मेंटल 660-2900 किमी, ठोस लेकिन अत्यधिक दाब (1.3 मिलियन atm) के कारण प्लास्टिक अवस्था में। घनत्व 5.5 ग्राम/सेमी³ तक।
कोर (Core): गुटेनबर्ग से केंद्र तक। (a) बाह्य कोर (Outer Core) 2900-5150 किमी - तरल अवस्था में लोहा (Fe) 85% और निकेल (Ni) 10% + सल्फर, सिलिकॉन। S तरंगें यहाँ से गुजर नहीं पातीं, इसलिए यह तरल सिद्ध होता है। संवहन धाराओं से भू-चुंबकीय क्षेत्र बनता है। तापमान 4400-6000°C, दाब 1.3-3.3 मिलियन atm। (b) आंतरिक कोर (Inner Core) 5150-6371 किमी - अत्यधिक दाब (3.6 मिलियन atm) के कारण ठोस, घनत्व 13.5 ग्राम/सेमी³, तापमान 6000°C के बावजूद ठोस। 70% चंद्रमा के आकार का, पृथ्वी के आयतन का केवल 1% पर द्रव्यमान का 1.7%।
2. भूकंपीय तरंगें - P, S और L तरंगें
P तरंगें (Primary / Compressional Waves): अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें, ध्वनि तरंगों के समान। कणों का कंपन तरंग की दिशा में। सबसे तेज गति - क्रस्ट में 6 किमी/सेकंड, ऊपरी मेंटल में 8.1 किमी/सेकंड, निचले मेंटल में 13.7 किमी/सेकंड, बाह्य कोर में गिरकर 8 किमी/सेकंड, आंतरिक कोर में 11.3 किमी/सेकंड। ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों में चल सकती हैं। भूकंप लेखी (Seismograph) पर सबसे पहले पहुँचती हैं।
S तरंगें (Secondary / Shear / Transverse Waves): अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें, प्रकाश तरंगों के समान। कणों का कंपन तरंग दिशा के लंबवत। गति P का लगभग 60% - क्रस्ट में 3.5 किमी/सेकंड, मेंटल में 7.3 किमी/सेकंड तक। केवल ठोस माध्यम में चलती हैं, तरल में नहीं। इसलिए बाह्य कोर (तरल) में लुप्त हो जाती हैं, जिससे S तरंग छाया क्षेत्र (Shadow Zone) 103° से 180° तक बनता है। P और S को Body Waves कहते हैं।
L तरंगें (Surface / Long Waves): पृथ्वी की सतह के साथ चलती हैं, दो प्रकार - लव तरंगें (Love Waves, क्षैतिज गति) और रेले तरंगें (Rayleigh Waves, लंबवत-गोलाकार गति)। गति सबसे कम - 2-3 किमी/सेकंड, पर सबसे अधिक विनाशकारी क्योंकि आयाम (Amplitude) सबसे बड़ा, कंपन अवधि लंबी और ऊर्जा सतह पर केंद्रित। भूकंप से सबसे अधिक क्षति L तरंगों से होती है। इनका वेग गहराई के साथ घटता है।
3. असंबद्धताएं (Discontinuities) - मोहो, गुटेनबर्ग और लेहमैन
मोहोरोविसिक असंबद्धता (Moho Discontinuity): खोज क्रोएशियाई वैज्ञानिक एंड्रिजा मोहोरोविसिक ने 1909 में कुल्पा घाटी भूकंप के अध्ययन से की। यह क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा है। गहराई महासागरों के नीचे 5-10 किमी, महाद्वीपों पर 20-70 किमी, औसत 35 किमी, हिमालय-तिब्बत के नीचे 70 किमी तक। विशेषता: P तरंग वेग 6.7 किमी/सेकंड से अचानक 8.1 किमी/सेकंड हो जाता है, घनत्व 2.9 से 3.3 ग्राम/सेमी³। रासायनिक और भूकंपीय दोनों असंबद्धता।
गुटेनबर्ग असंबद्धता (Gutenberg Discontinuity): जर्मन-अमेरिकी भूकंप वैज्ञानिक बेनो गुटेनबर्ग ने 1914 में खोजी। गहराई 2900 किमी, मेंटल और कोर की सीमा। सबसे महत्वपूर्ण असंबद्धता। विशेषता: P वेग 13.7 से घटकर 8.0 किमी/सेकंड, S तरंगें पूर्णतः लुप्त, घनत्व 5.7 से बढ़कर 10.0 ग्राम/सेमी³, तापमान 3700°C। इसे D'' लेयर (D Double Prime) भी कहते हैं। यहाँ P तरंग छाया क्षेत्र 103°-142° बनता है।
लेहमैन असंबद्धता (Lehmann Discontinuity): डेनिश वैज्ञानिक इंगे लेहमैन ने 1936 में आंतरिक कोर की खोज के साथ प्रतिपादित की। मुख्य लेहमैन 5150 किमी पर बाह्य तरल कोर और आंतरिक ठोस कोर के बीच। विशेषता: P वेग 8.0 से बढ़कर 11.3 किमी/सेकंड, घनत्व 12.3 से 13.5 ग्राम/सेमी³। दूसरी लेहमैन असंबद्धता 220 किमी गहराई पर ऊपरी मेंटल में है, जहाँ S वेग में वृद्धि होती है, इसे LVL (Lehmann Velocity Discontinuity) कहते हैं। UPSC में 5150 किमी वाली ही अधिक पूछी जाती है।
| परत / सीमा | गहराई | घनत्व / वेग परिवर्तन | भौतिक अवस्था और संरचना |
|---|---|---|---|
| भूर्पपटल (Crust) | 0-35 किमी (5-70 किमी परिवर्तनशील) | 2.67 (महाद्वीपीय) - 3.0 ग्राम/सेमी³ (महासागरीय) | ठोस, SiAl (ग्रेनाइट) और SiMa (बेसाल्ट) |
| मोहो असंबद्धता | औसत 35 किमी | P: 6.7 से 8.1 किमी/सेकंड | क्रस्ट-मेंटल रासायनिक सीमा |
| मेंटल | 35-2900 किमी | 3.3 से 5.7 ग्राम/सेमी³ | ठोस प्लास्टिक, एस्थेनोस्फीयर आंशिक पिघला, ओलिविन प्रधान |
| गुटेनबर्ग असंबद्धता | 2900 किमी | P: 13.7 से 8.0 किमी/सेकंड, S लुप्त | मेंटल-कोर सीमा, D'' परत |
| बाह्य कोर | 2900-5150 किमी | 9.9-12.3 ग्राम/सेमी³ | तरल Fe-Ni, संवहन से भू-चुंबकत्व |
| लेहमैन असंबद्धता | 5150 किमी | P: 8.0 से 11.3 किमी/सेकंड | बाह्य-आंतरिक कोर सीमा |
| आंतरिक कोर | 5150-6371 किमी | 12.8-13.5 ग्राम/सेमी³ | ठोस Fe-Ni, अत्यधिक दाब के कारण ठोस |
Quick Revision - UPSC Prelims के लिए
- कॉनराड असंबद्धता (15-20 किमी) - ऊपरी क्रस्ट और निचले क्रस्ट के बीच, SiAl और SiMa को अलग करती है।
- रेपेटी असंबद्धता - ऊपरी और निचले मेंटल के बीच 660 किमी पर, 410 किमी और 660 किमी दोनों को मिलाकर संक्रमण क्षेत्र कहते हैं।
- P तरंग छाया क्षेत्र 103° से 142° तक, S तरंग छाया क्षेत्र 103° से 180° तक - दोनों मिलकर भूकंप के 40% क्षेत्र में तरंगें नहीं पहुँचतीं।
- S तरंगों का बाह्य कोर में प्रवेश न करना ही तरल कोर का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
- पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत बाह्य कोर में तरल लोहे का संवहन है, न कि आंतरिक ठोस कोर।
- एस्थेनोस्फीयर 100-200 किमी पर स्थित, घनत्व 3.4 ग्राम/सेमी³, यहीं से मैग्मा निकलता है और लिथोस्फीयर प्लेटें इसी पर तैरती हैं।
- UPSC ट्रिक: मोहो = क्रस्ट-मेंटल, गुटेनबर्ग = मेंटल-कोर, लेहमैन = बाह्य कोर-आंतरिक कोर।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. S तरंगें बाह्य कोर से क्यों नहीं गुजर पातीं और इसका क्या महत्व है?
A. S तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें हैं जिनमें कणों में अपरूपण (Shear) होता है, जो केवल ठोस में संभव है। तरल और गैस में अपरूपण प्रतिरोध नहीं होता, इसलिए S तरंगें तरल बाह्य कोर में अवशोषित हो जाती हैं। इसका महत्व यह है कि इससे वैज्ञानिकों ने 1906 में ओल्डहैम और 1914 में गुटेनबर्ग ने सिद्ध किया कि बाह्य कोर तरल है। यह भूकंप विज्ञान की सबसे बड़ी खोजों में से एक है।
Q2. भूकंपीय छाया क्षेत्र (Shadow Zone) क्या है और P तरंगों का छाया क्षेत्र S से अलग क्यों है?
A. भूकंप के अधिकेंद्र से 103° के बाद S तरंगें नहीं मिलतीं क्योंकि तरल कोर उन्हें रोक देता है। P तरंगें तरल कोर से अपवर्तित होकर 103°-142° के बीच नहीं पहुँचतीं, लेकिन 142° के बाद PKP के रूप में पुनः प्रकट होती हैं। इसलिए P का छाया क्षेत्र वलयाकार (103°-142°) है जबकि S का छाया क्षेत्र 103° से 180° तक पूरा क्षेत्र है। यह कोर की उपस्थिति और उसके तरल होने दोनों को प्रमाणित करता है।
Q3. मोहो, गुटेनबर्ग और लेहमैन असंबद्धताओं में क्या अंतर है?
A. तीनों भूकंपीय वेग में अचानक परिवर्तन की सीमाएँ हैं। मोहो (35 किमी) रासायनिक असंबद्धता है - ग्रेनाइट/बेसाल्ट से परिडोटाइट में परिवर्तन। गुटेनबर्ग (2900 किमी) भौतिक और रासायनिक दोनों - सिलिकेट मेंटल से धात्विक कोर में परिवर्तन, यहाँ घनत्व दोगुना हो जाता है। लेहमैन (5150 किमी) भौतिक अवस्था परिवर्तन - तरल बाह्य कोर से ठोस आंतरिक कोर में। मोहो की खोज मोहोरोविसिक (1909), गुटेनबर्ग की गुटेनबर्ग (1914) और लेहमैन की लेहमैन (1936) ने की थी।
Q4. यदि आंतरिक कोर का तापमान 6000°C है तो वह ठोस कैसे है?
A. आंतरिक कोर में दाब 3.6 मिलियन वायुमंडलीय दाब के बराबर है, जो हिमालय के दाब से लाखों गुना अधिक है। अत्यधिक दाब से लोहे का गलनांक (Melting Point) बढ़ जाता है। 5150 किमी पर तापमान 6000°C होने पर भी दाब इतना अधिक है कि लोहा पिघल नहीं पाता और ठोस बना रहता है। यह क्रिस्टल संरचना HCP (Hexagonal Close Packed) मानी जाती है। बाह्य कोर में दाब कम होने से लोहा तरल रहता है।