पृथ्वी की रासायनिक संरचना - भाग 2
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सियाल, सीमा, निफे और पृथ्वी के आंतरिक तापमान-दाब पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
पृथ्वी की रासायनिक संरचना: सियाल, सीमा, निफे और आंतरिक तापमान-दाब
पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने के दो प्रमुख मॉडल हैं - भूकंपीय तरंगों पर आधारित भौतिक मॉडल (क्रस्ट, मेंटल, कोर) और रासायनिक संरचना पर आधारित मॉडल (सियाल, सीमा, निफे)। सियाल, सीमा, निफे शब्दावली का प्रतिपादन ऑस्ट्रियाई भूवैज्ञानिक एडवर्ड सुएस (Eduard Suess) ने अपनी पुस्तक Das Antlitz der Erde (1885) में किया था। यह वर्गीकरण UPSC/PCS के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रारंभिक प्रश्नों में सुएस का मॉडल और आधुनिक मॉडल के बीच संबंध पूछा जाता है। सियाल महाद्वीपीय क्रस्ट, सीमा मुख्यतः महासागरीय क्रस्ट और मेंटल, तथा निफे कोर का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके साथ ही तापमान और दबाव का वितरण पृथ्वी की परतों की भौतिक अवस्था को नियंत्रित करता है।
सियाल (SIAL = Silica + Aluminium): घनत्व 2.67-2.9 ग्राम/सेमी³, मोटाई 10-70 किमी (औसत 35 किमी), ग्रेनाइट चट्टान, SiO₂ 60-70%
सीमा (SIMA = Silica + Magnesium): घनत्व 3.0-4.7 ग्राम/सेमी³, गहराई 35 से 2900 किमी तक, बेसाल्ट व पेरिडोटाइट, SiO₂ 45-55%, MgO 10-25%
निफे (NIFE = Nickel + Ferrum): बाह्य निफे 2900-5150 किमी घनत्व 9.9-12.3, आंतरिक निफे 5150-6371 किमी घनत्व 12.8-13.5 ग्राम/सेमी³, Fe 85% + Ni 10%
भूतापीय प्रवणता (Geothermal Gradient): ऊपरी क्रस्ट में 25-30°C/किमी, औसत 3°C/100 मीटर, 100 किमी पर लगभग 1000°C, मेंटल में 10°C/किमी से घटकर 0.5°C/किमी
तापमान वितरण: मोहो पर 500-900°C, 410 किमी पर 1400-1600°C, गुटेनबर्ग (CMB) पर 3700-4200°C, केंद्र पर 6000-6200°C
दाब वितरण: मोहो पर ∼1 GPa (10 किलोबार), 410 किमी पर ∼14 GPa, CMB (2900 किमी) पर ∼135 GPa (1.35 मिलियन atm), केंद्र पर ∼360 GPa (3.6 मिलियन atm)
पृथ्वी का ऊष्मा बजट: कुल सतही ऊष्मा प्रवाह 47±2 टेरावाट (TW), जिसमें रेडियोधर्मी क्षय (U-238, Th-232, K-40) से ∼20 TW और आद्य ऊष्मा (Primordial Heat) से ∼27 TW
1. सियाल, सीमा और निफे - एडवर्ड सुएस की त्रिस्तरीय रासायनिक संरचना
सियाल (SIAL): सबसे ऊपरी परत, नाम सिलिका (Si) और एल्युमिनियम (Al) की प्रधानता के कारण। यह महाद्वीपीय भूर्पपटल का मुख्य भाग है। संरचना फेल्सिक (Felsic), ग्रेनाइट और ग्रेनोडायोराइट चट्टानें। सिलिका 60-70%, एल्युमिनियम ऑक्साइड 15% तक। घनत्व कम (2.67-2.9 ग्राम/सेमी³) होने से यह सीमा पर तैरता है - इसोस्टेसी (Isostasy) का सिद्धांत। P तरंग वेग 5.6-6.3 किमी/सेकंड। मोटाई मैदानों में 30 किमी, पठारों में 35-40 किमी, हिमालय में 70 किमी तक। कॉनराड असंबद्धता (15-20 किमी) सियाल को नीचे की सीमा के ऊपरी भाग से अलग करती है।
सीमा (SIMA): सियाल के नीचे स्थित, सिलिका (Si) और मैग्नीशियम (Mg) प्रधान। दो भागों में विभाजित - ऊपरी सीमा (Upper Sima) जो महासागरीय क्रस्ट (5-10 किमी, बेसाल्ट - SiMa) बनाती है, घनत्व 3.0-3.2 ग्राम/सेमी³, और निचली सीमा (Lower Sima) जो पूरा मेंटल (35-2900 किमी) बनाती है, पेरिडोटाइट और एक्लोगाइट चट्टानें, घनत्व 3.3 से 5.7 ग्राम/सेमी³ तक। SiO₂ घटकर 45-52%, MgO बढ़कर 12-25% हो जाता है। S तरंगें इसी में सर्वाधिक सुचारू रूप से चलती हैं। औसत मोटाई लगभग 2865 किमी।
निफे (NIFE): सबसे आंतरिक परत, निकेल (Ni) और फेरम (Fe) प्रधान, इसलिए अत्यधिक घनत्व और चुंबकीय गुण। बाह्य निफे (2900-5150 किमी) तरल अवस्था में, घनत्व 9.9-12.3 ग्राम/सेमी³, संवहन धाराओं से पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। आंतरिक निफे (5150-6371 किमी) ठोस, घनत्व 12.8-13.5 ग्राम/सेमी³, P तरंग वेग 11.3 किमी/सेकंड। लोहे के साथ 5-10% निकेल और हल्के तत्व - सल्फर, सिलिकॉन, ऑक्सीजन। यह पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का 32% है।
2. पृथ्वी के आंतरिक भाग में तापमान - स्रोत, वृद्धि दर और वितरण
तापमान के स्रोत: (i) आद्य ऊष्मा (Primordial Heat) - पृथ्वी निर्माण के समय ग्रहाणुओं (Planetesimals) के अभिवृद्धि और टकराव से उत्पन्न, लगभग 27 TW। (ii) रेडियोधर्मी क्षय - यूरेनियम-238 (अर्धायु 4.47 अरब वर्ष), थोरियम-232 (14 अरब वर्ष), पोटैशियम-40 (1.25 अरब वर्ष) के क्षय से ∼20 TW ऊष्मा, मुख्यतः क्रस्ट और ऊपरी मेंटल में केंद्रित। (iii) गुरुत्वीय विभेदन (Gravitational Differentiation) - भारी पदार्थों का केंद्र की ओर डूबना। (iv) ज्वारीय घर्षण - नगण्य।
भूतापीय प्रवणता (Geothermal Gradient) और जियोथर्म: तापमान वृद्धि दर हर जगह समान नहीं है। ऊपरी क्रस्ट में 25-30°C/किमी, भारतीय शील्ड में 20°C/किमी, मध्य महासागरीय कटक पर 60°C/किमी तक। औसत भू-तापीय सोपान (Geothermal Step) - 33 मीटर पर 1°C। 100 किमी गहराई पर 1000-1200°C, 410 किमी पर 1400-1600°C, 660 किमी पर 1800°C, गुटेनबर्ग असंबद्धता पर 3700-4200°C, बाह्य कोर में 4400-6000°C, आंतरिक कोर सीमा पर 6000°C। जियोथर्म (Geotherm) वक्र का ढाल गहराई के साथ घटता है क्योंकि चट्टानों की तापीय चालकता बढ़ती है और संवहन (Convection) ऊष्मा स्थानांतरण को प्रभावी बनाता है। निचले मेंटल में प्रवणता केवल 0.3-0.5°C/किमी रह जाती है।
3. पृथ्वी के आंतरिक भाग में दबाव - वितरण और प्रभाव
दाब का वितरण: दाब का मुख्य कारण ऊपर स्थित चट्टानों का भार (Lithostatic Pressure) है, जिसका सूत्र P = ρgh है। क्रस्ट में वृद्धि दर लगभग 30 MPa/किमी (1 किलोबार / 3.3 किमी)। मोहो पर 0.8-1.0 GPa (8000-10000 atm), 100 किमी पर 3 GPa, 410 किमी पर 14 GPa, 660 किमी पर 24 GPa, गुटेनबर्ग पर 135 GPa, केंद्र पर 360 GPa। यानी केंद्र पर दाब समुद्र तल के दाब से 36 लाख गुना अधिक है।
दाब का प्रभाव: (i) घनत्व में वृद्धि - दाब से चट्टानें संपीड़ित होती हैं, क्रस्ट में 2.7 से केंद्र में 13.5 ग्राम/सेमी³। (ii) गलनांक में वृद्धि - क्लॉसियस-क्लैपेरॉन समीकरण के अनुसार दाब बढ़ने पर गलनांक बढ़ता है, इसलिए आंतरिक कोर 6000°C पर भी ठोस है। (iii) खनिजों में相 परिवर्तन - 410 किमी पर ओलिविन (Mg₂SiO₄) से वाड्सलेइट, 660 किमी पर रिंगवुडाइट से ब्रिजमैनाइट + फेरो-पेरिक्लेज। ये ही 410 और 660 किमी असंबद्धताओं का कारण हैं। (iv) भूकंपीय वेग में वृद्धि - दाब से प्रत्यास्थता (Elasticity) बढ़ती है, इसलिए P और S वेग गहराई के साथ बढ़ते हैं, केवल बाह्य कोर में P वेग घटता है क्योंकि वह तरल है।
| विशेषता | सियाल (SIAL) | सीमा (SIMA) | निफे (NIFE) |
|---|---|---|---|
| रासायनिक संघटन | Si 60-70%, Al 15%, K, Na अधिक | Si 45-55%, Mg 12-25%, Fe, Ca अधिक | Fe 85-90%, Ni 5-10%, S, Si अल्प |
| घनत्व | 2.67-2.9 ग्राम/सेमी³ | 3.0-5.7 ग्राम/सेमी³ | 9.9-13.5 ग्राम/सेमी³ |
| मोटाई / गहराई | 10-70 किमी (औसत 35 किमी) | 35-2900 किमी (मोटाई ∼2865 किमी) | 2900-6371 किमी (मोटाई ∼3471 किमी) |
| आधुनिक समकक्ष | महाद्वीपीय क्रस्ट (ऊपरी क्रस्ट) | महासागरीय क्रस्ट + संपूर्ण मेंटल | बाह्य कोर + आंतरिक कोर |
| चट्टान प्रकार | ग्रेनाइट, ग्रेनोडायोराइट (फेल्सिक) | बेसाल्ट, गैब्रो, पेरिडोटाइट (मैफिक-अल्ट्रामैफिक) | धात्विक Fe-Ni मिश्रधातु |
| भौतिक अवस्था | ठोस, भंगुर | ठोस प्लास्टिक, एस्थेनोस्फीयर आंशिक पिघला | बाह्य तरल, आंतरिक ठोस |
Quick Revision - UPSC Prelims के लिए
- सुएस का SIAL = महाद्वीपीय क्रस्ट, SIMA = महासागरीय क्रस्ट + मेंटल, NIFE = कोर। यह रासायनिक विभाजन है, जबकि क्रस्ट-मेंटल-कोर भूकंपीय विभाजन है।
- कॉनराड असंबद्धता (15-20 किमी) सियाल और सीमा (ऊपरी और निचले क्रस्ट) को अलग करती है - P वेग 6.0 से 6.7 किमी/सेकंड।
- भूतापीय प्रवणता महाद्वीपों पर कम (20°C/किमी) और महासागरीय कटकों पर अधिक (60°C/किमी) होती है क्योंकि महासागरीय क्रस्ट पतली और नई है।
- पृथ्वी का कुल ऊष्मा प्रवाह 47 TW में से लगभग 50% रेडियोधर्मी क्षय से, शेष आद्य ऊष्मा से। महाद्वीपीय क्रस्ट में रेडियोधर्मी तत्वों की सांद्रता सबसे अधिक है।
- दाब के कारण 410 किमी पर घनत्व 3.5 से 3.9 और 660 किमी पर 3.9 से 4.4 ग्राम/सेमी³ हो जाता है - यही भूकंपीय असंबद्धताओं का कारण है।
- आंतरिक कोर के ठोस होने का प्रमाण - PKIKP तरंगें (आंतरिक कोर से गुजरने वाली P तरंगें) और पृथ्वी के ज्वारीय विरूपण का अध्ययन।
- UPSC ट्रिक: SIAL में Al, SIMA में Mg, NIFE में Ni+Fe। घनत्व क्रम SIAL < SIMA < NIFE।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. सियाल, सीमा, निफे और क्रस्ट, मेंटल, कोर में क्या अंतर है?
A. सियाल-सीमा-निफे रासायनिक संरचना (Chemical Composition) पर आधारित पुराना वर्गीकरण है, जबकि क्रस्ट-मेंटल-कोर भूकंपीय तरंग वेग (Seismic Velocity) पर आधारित आधुनिक भौतिक वर्गीकरण है। सियाल लगभग महाद्वीपीय क्रस्ट के बराबर है, ऊपरी सीमा महासागरीय क्रस्ट और निचली सीमा पूरे मेंटल के बराबर है, निफे पूरे कोर के बराबर है। UPSC में पूछा जाता है कि सियाल Si+Al और सीमा Si+Mg है।
Q2. भूतापीय प्रवणता हर जगह समान क्यों नहीं होती?
A. भूतापीय प्रवणता चट्टानों की तापीय चालकता, रेडियोधर्मी तत्वों की मात्रा और टेक्टोनिक स्थिति पर निर्भर करती है। ग्रेनाइट (सियाल) में U, Th, K अधिक होने से ऊष्मा उत्पादन अधिक पर चालकता कम, इसलिए प्रवणता अधिक। महासागरीय कटकों पर तप्त मेंटल ऊपर होने से प्रवणता 60°C/किमी, जबकि प्राचीन शील्ड (जैसे धारवाड़ क्रेटॉन) पर 15-20°C/किमी ही रहती है। भूजल संचरण भी प्रवणता को घटाता है।
Q3. आंतरिक कोर 6000°C पर ठोस कैसे है जबकि बाह्य कोर तरल है?
A. गलनांक (Melting Point) पर दाब का प्रभाव पड़ता है। क्लॉसियस-क्लैपेरॉन नियम के अनुसार दाब बढ़ने से लोहे का गलनांक बढ़ता है। 5150 किमी (लेहमैन असंबद्धता) पर दाब 330 GPa है, जिससे लोहे का गलनांक 6000°C से अधिक हो जाता है, इसलिए वह ठोस रहता है। बाह्य कोर में दाब 135-330 GPa है और तापमान गलनांक से ऊपर है, साथ ही सल्फर जैसे हल्के तत्व गलनांक घटाते हैं, इसलिए वह तरल है।
Q4. यदि पृथ्वी के केंद्र पर 360 GPa दाब है तो चट्टानें कैसे व्यवहार करती हैं?
A. अत्यधिक दाब पर चट्टानों का व्यवहार बदल जाता है। (i) वे संपीड़ित होकर सघन हो जाती हैं - ओलिविन से पेरोव्स्काइट संरचना। (ii) भंगुरता के बजाय प्लास्टिक विरूपण होता है - मेंटल में संवहन (Convection) इसी कारण संभव है। (iii) विद्युत चालकता बढ़ जाती है - बाह्य कोर में धात्विक तरल विद्युत धारा से भू-चुंबकीय क्षेत्र बनता है। (iv) 135 GPa के बाद सिलिकेट भी धात्विक गुण दिखाने लगते हैं। यही कारण है कि P तरंग वेग मेंटल में 13.7 किमी/सेकंड तक बढ़ जाता है।