भारत में मैंग्रोव वन तथा वन आवरण
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भारत के मैंग्रोव वनों, विशेषकर सुंदरबन तथा देश के वन आवरण के आंकड़ों का विस्तृत विवरण, जो यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
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💡 व्याख्या
भारत में मैंग्रोव वन तथा वन आवरण
भारत की प्राकृतिक वनस्पति में मैंग्रोव वनों का विशेष स्थान है। ये वन तटीय तथा खारे जल वाले क्षेत्रों में उगते हैं और पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में वन आवरण के आंकड़े देश की पर्यावरणीय स्थिति तथा वन संरक्षण प्रयासों को दर्शाते हैं। यूपीएससी तथा राज्य पीसीएस की दृष्टि से मैंग्रोव वन तथा वन आवरण का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मैंग्रोव वनों की विशेषताएँ
मैंग्रोव वन ऐसी विशेष वनस्पति हैं जो खारे जल तथा ज्वारीय क्षेत्रों में उग सकती हैं। इन वनों के वृक्षों की जड़ें हवा में तथा जल में दोनों जगह फैली रहती हैं जिन्हें श्वसन मूल कहा जाता है। इन वृक्षों में विविपैरिटी की विशेषता पाई जाती है जिसमें बीज वृक्ष पर ही अंकुरित हो जाते हैं। मैंग्रोव वन तटीय क्षरण रोकने, चक्रवातों से सुरक्षा प्रदान करने तथा समुद्री जीवों को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुंदरबन मैंग्रोव वन
सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र माना जाता है। यह गंगा, ब्रह्मपुत्र तथा मेघना नदियों के डेल्टा क्षेत्र में फैला हुआ है। सुंदरबन मुख्यतः पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है तथा इसका कुछ भाग बांग्लादेश में भी फैला हुआ है। यह वन क्षेत्र रॉयल बंगाल टाइगर के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। सुंदरबन को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल तथा बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा भी प्राप्त है।
सुंदरबन में सुंदरी, गोरान, गेवा तथा केवड़ा जैसे मैंग्रोव वृक्ष प्रमुखता से पाए जाते हैं। यह क्षेत्र अनेक संकटग्रस्त प्रजातियों जैसे मीठे पानी के मगर तथा गंगा डॉल्फिन को भी आश्रय प्रदान करता है। सुंदरबन डेल्टा की जैव विविधता विश्व में अद्वितीय मानी जाती है।
भारत के अन्य मैंग्रोव क्षेत्र
सुंदरबन के अतिरिक्त भारत में ओडिशा का भितरकनिका, आंध्र प्रदेश का गोदावरी-कृष्णा डेल्टा, तमिलनाडु का पिचवरम तथा गुजरात का कच्छ क्षेत्र भी महत्वपूर्ण मैंग्रोव क्षेत्र माने जाते हैं। भितरकनिका को रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त है तथा यह दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी विस्तृत मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।
भारत का वन आवरण
भारत वन रिपोर्ट के अनुसार देश का कुल वन आवरण लगभग सात लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक माना जाता है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग इक्कीस से चौबीस प्रतिशत के बीच है। इसमें वन क्षेत्र तथा वृक्ष आवरण दोनों सम्मिलित होते हैं। भारत की राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का तैंतीस प्रतिशत भाग वनों के अंतर्गत होना चाहिए।
वन आवरण के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा महाराष्ट्र वन क्षेत्र की दृष्टि से अग्रणी राज्यों में सम्मिलित हैं। प्रतिशत के आधार पर मिजोरम, लक्षद्वीप तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह सर्वाधिक वन आवरण वाले क्षेत्रों में आते हैं।
यूपीएससी तथ्य बॉक्स
- सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र माना जाता है।
- सुंदरबन को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल तथा बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा प्राप्त है।
- भितरकनिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र है तथा रामसर स्थल है।
- भारत की राष्ट्रीय वन नीति का लक्ष्य तैंतीस प्रतिशत वन क्षेत्र है।
- मैंग्रोव वृक्षों में श्वसन मूल तथा विविपैरिटी की विशेषता पाई जाती है।
प्रमुख मैंग्रोव क्षेत्रों की तुलनात्मक तालिका
| मैंग्रोव क्षेत्र | स्थिति | महत्व |
|---|---|---|
| सुंदरबन | पश्चिम बंगाल | विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र |
| भितरकनिका | ओडिशा | रामसर स्थल तथा दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र |
| गोदावरी-कृष्णा डेल्टा | आंध्र प्रदेश | महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिक तंत्र |
| पिचवरम | तमिलनाडु | जैव विविधता तथा संरक्षण क्षेत्र |
| कच्छ का क्षेत्र | गुजरात | शुष्क तटीय मैंग्रोव वन |
निष्कर्ष
भारत में मैंग्रोव वन तथा वन आवरण देश की पर्यावरणीय स्थिति तथा जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सुंदरबन जैसे मैंग्रोव क्षेत्र विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं तथा इनका संरक्षण वैश्विक पर्यावरण के लिए आवश्यक है। वन आवरण के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत में वन संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन विषयों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।