भारत के भौतिक विभाजन - भाग 2 (तटीय मैदान एवं द्वीप समूह)
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भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों, तथा अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप समूह पर आधारित पचास अति महत्वपूर्ण प्रश्न।
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💡 व्याख्या
भारत के तटीय मैदान और द्वीप समूह: एक विस्तृत भौगोलिक विश्लेषण
भारत का भौगोलिक स्वरूप केवल विशाल पर्वतों और पठारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी लंबी तटरेखा और समुद्र में स्थित द्वीप समूह भी सामरिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रायद्वीपीय पठार के दोनों किनारों पर पूर्व और पश्चिम में संकरे तटीय मैदानों का विस्तार पाया जाता है। इसके अतिरिक्त, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में स्थित भारत के दो प्रमुख द्वीप समूह देश की समुद्री सीमा और जैव विविधता को समृद्ध करते हैं। सिविल सेवा परीक्षाओं में इन क्षेत्रों की भूवैज्ञानिक उत्पत्ति, जलवायु और विशिष्ट भौगोलिक आकृतियों से जुड़े प्रश्न निरंतर पूछे जाते हैं।
पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों का तुलनात्मक अध्ययन
पश्चिमी तटीय मैदान पश्चिमी घाट और अरब सागर के मध्य स्थित एक संकरी पट्टी है। भौगोलिक विशेषताओं के आधार पर इसे गुजरात के काठियावाड़ तट, महाराष्ट्र और गोवा के कोंकण तट, कर्नाटक के कन्नड़ तट और केरल के मालाबार तट में विभाजित किया जाता है। पश्चिमी तट पर बहने वाली नदियाँ तीव्र ढाल के कारण मुहाने पर ज्वारनदमुख (एश्चुअरी) का निर्माण करती हैं। दूसरी ओर, पूर्वी तटीय मैदान पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के मध्य स्थित है। यह पश्चिमी मैदान की तुलना में अधिक चौड़ा है। इसे उत्तर में उत्तरी सरकार और दक्षिण में कोरोमंडल तट के नाम से जाना जाता है। महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी विशाल नदियाँ यहाँ उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करती हैं, जो कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त माने जाते हैं।
बंगाल की खाड़ी के द्वीप: अंडमान और निकोबार
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित हैं। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, ये द्वीप म्यांमार की अराकान योमा पर्वत श्रृंखला के ही समुद्र में डूबे हुए दक्षिणी विस्तार हैं। दस डिग्री चैनल अंडमान को निकोबार से अलग करने का कार्य करता है। उत्तरी अंडमान में स्थित सैडल पीक इस द्वीप समूह की सर्वोच्च चोटी है। इसी क्षेत्र में भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप भी अवस्थित है। यहाँ की जलवायु विषुवतीय होने के कारण सघन सदाबहार वन पाए जाते हैं।
अरब सागर के प्रवाल द्वीप: लक्षद्वीप
लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है, जो अरब सागर में केरल तट से कुछ दूरी पर स्थित है। अंडमान के विपरीत, लक्षद्वीप का निर्माण सूक्ष्म समुद्री जीवों अर्थात् प्रवाल भित्तियों (कोरल एटोल) के जमाव से हुआ है। नौ डिग्री चैनल मिनिकॉय द्वीप को लक्षद्वीप के अन्य द्वीपों से अलग करता है। यह क्षेत्र अपने नारियल के बागानों और मत्स्य पालन के लिए जाना जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण भौगोलिक तथ्य
| भौगोलिक क्षेत्र एवं जलडमरूमध्य | संबंधित तथ्य एवं विशेषताएं |
|---|---|
| मालाबार तट (केरल) | कयाल (लैगून) झीलों की प्रचुरता, वेंबनाड झील स्थित |
| कोरोमंडल तट (तमिलनाडु) | लौटते हुए मानसून (उत्तर-पूर्वी) से शीत ऋतु में भारी वर्षा |
| दस डिग्री चैनल | अंडमान द्वीप समूह को निकोबार द्वीप समूह से अलग करता है |
| आठ डिग्री चैनल | भारत के मिनिकॉय द्वीप को मालदीव राष्ट्र से पृथक करता है |
| बैरन और नारकोंडम द्वीप | भारत के प्रमुख ज्वालामुखी (सक्रिय और प्रसुप्त) द्वीप |
| लक्षद्वीप की भूवैज्ञानिक उत्पत्ति | विशुद्ध रूप से प्रवाल भित्तियों (मूंगे की चट्टानों) से निर्मित |
इन भौतिक प्रदेशों का समग्र अध्ययन भारत की मानसूनी जलवायु, बंदरगाहों के विकास और समुद्री सुरक्षा रणनीति को समझने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।