चट्टानें - भाग 1
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आग्नेय, अवसादी और रूपांतरित चट्टानों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
चट्टानों के प्रकार: आग्नेय, अवसादी और रूपांतरित चट्टानें - निर्माण और विशेषताएं
चट्टानें भू-पर्पटी की मूल इकाई हैं और भू-आकृति विज्ञान का आधार हैं। पृथ्वी की समस्त पर्पटी चट्टानों से बनी है और सभी मृदाएँ, खनिज तथा जीवाश्म इन्हीं में निहित हैं। उत्पत्ति के आधार पर चट्टानों को तीन प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है - आग्नेय, अवसादी और रूपांतरित। UPSC में शैल चक्र (Rock Cycle), बनावट (Texture), मूल चट्टान से रूपांतरित चट्टान का संबंध और भारत में उनके वितरण से प्रत्यक्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। क्रस्ट का 95% भाग आग्नेय और रूपांतरित तथा 5% अवसादी है, परन्तु सतह पर 75% क्षेत्र अवसादी चट्टानों से ढका है।
क्रस्ट में वितरण: आग्नेय + रूपांतरित = 95% आयतन, अवसादी = 5% आयतन; सतही विस्तार - अवसादी 75%, आग्नेय + रूपांतरित 25%
आग्नेय चट्टानें (Igneous): प्राथमिक चट्टानें, मैग्मा से निर्माण। अंतर्भेदी - धीरे ठंडी, मोटे कण (फैनेरिटिक), उदाहरण ग्रेनाइट, गैब्रो, डायोराइट। बहिर्भेदी - तेजी से ठंडी, बारीक कण (एफैनिटिक) या कांच, उदाहरण बेसाल्ट, रायोलाइट, ऑब्सीडियन
अवसादी चट्टानें (Sedimentary): द्वितीयक, अपरदन-निक्षेपण से। क्लास्टिक - बालुकाश्म, शेल, कांग्लोमरेट; रासायनिक - चूना पत्थर, डोलोमाइट, सेंधा नमक; जैविक - कोयला, चॉक। परतदार, जीवाश्म युक्त
रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic): तृतीयक, ताप-दाब से रूपांतरण। पत्रित (Foliated) - स्लेट, फाइलाइट, शिस्ट, नाइस; अपत्रित (Non-foliated) - क्वार्टजाइट, संगमरमर, हॉर्नफेल्स
भारत में वितरण: आग्नेय - दक्कन ट्रैप बेसाल्ट (महाराष्ट्र), बुंदेलखंड ग्रेनाइट, राजस्थान का जालोर ग्रेनाइट। अवसादी - विंध्यन बालुकाश्म, कुडप्पा चूना पत्थर, गोंडवाना कोयला। रूपांतरित - अरावली नाइस, दिल्ली क्वार्टजाइट, राजस्थान संगमरमर (मकराना)
शैल चक्र: जेम्स हटन द्वारा प्रतिपादित, मैग्मा → आग्नेय → अवसादी → रूपांतरित → मैग्मा, चक्रीय प्रक्रिया
1. आग्नेय चट्टानें - अंतर्भेदी और बहिर्भेदी
निर्माण: मैग्मा या लावा के ठंडा होकर जमने से बनती हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिक चट्टानें (Primary Rocks) कहते हैं। जीवाश्म रहित, कठोर, रवेदार। सिलिका की मात्रा के आधार पर - अम्लीय (>65% SiO₂, ग्रेनाइट, रायोलाइट), मध्यवर्ती (55-65% SiO₂, डायोराइट, एंडेसाइट), क्षारीय (45-55% SiO₂, बेसाल्ट, गैब्रो), अतिक्षारीय (<45% SiO₂, पेरिडोटाइट)।
अंतर्भेदी आग्नेय चट्टानें (Intrusive / Plutonic): मैग्मा भू-गर्भ में गहराई पर धीरे-धीरे (हजारों वर्षों में) ठंडा होता है, इसलिए बड़े-बड़े क्रिस्टल बनते हैं - फैनेरिटिक बनावट (Phaneritic Texture)। दो उप-प्रकार - (i) वितलीय (Plutonic) - बहुत गहराई पर, जैसे ग्रेनाइट (क्वार्ट्ज + फेल्डस्पार + अभ्रक), गैब्रो (पाइरोक्सीन + प्लेजियोक्लेज), डायोराइट। भारत में बुंदेलखंड ग्रेनाइट (2.5 अरब वर्ष पुराना), राजस्थान का जालोर ग्रेनाइट, कर्नाटक का क्लोजपेट ग्रेनाइट। (ii) मध्यवर्ती (Hypabyssal) - कम गहराई पर, डाइक और सिल के रूप में, जैसे डोलेराइट (डायबेस), पोर्फिरी। दक्कन क्षेत्र में नर्मदा-ताप्ती क्षेत्र में सैकड़ों डोलेराइट डाइक। बनावट - पोर्फिरिटिक (बड़े और छोटे क्रिस्टल मिश्रित)।
बहिर्भेदी आग्नेय चट्टानें (Extrusive / Volcanic): लावा सतह पर तेजी से (कुछ घंटों से दिनों में) ठंडा होता है, इसलिए क्रिस्टल बहुत छोटे या कांच जैसे - एफैनिटिक (Aphanitic) या काचाभ बनावट (Glassy)। (i) बेसाल्ट - सबसे अधिक, महासागरीय क्रस्ट और दक्कन ट्रैप (5 लाख किमी², 66 Ma) का निर्माण, गहरा काला, सघन। (ii) रायोलाइट - ग्रेनाइट के समकक्ष पर बहिर्भेदी, हल्का रंग। (iii) एंडेसाइट - डायोराइट के समकक्ष, अभिसारी सीमा पर। (iv) विशेष बनावट - ऑब्सीडियन (ज्वालामुखीय कांच), प्यूमिस (झांवा, अत्यधिक छिद्रयुक्त, पानी पर तैरता है), स्कोरिया, टफ (राख से बनी)।
2. अवसादी चट्टानें - निर्माण प्रक्रिया और प्रकार
निर्माण प्रक्रिया: चार चरणों में - (i) अपक्षय (Weathering) से टूटना, (ii) अपरदन और परिवहन (Erosion & Transportation) - नदी, पवन, हिमनद द्वारा, (iii) निक्षेपण (Deposition) - सागर, झील, डेल्टा में परतों में जमाव, (iv) शिलीभवन (Diagenesis/Lithification) - संपीडन (Compaction) और सीमेंटेशन से कठोर चट्टान बनना। विशेषताएँ - परतदार (Stratified), जीवाश्म युक्त (Fossiliferous), नरम, पारगम्य।
प्रकार: (a) खंडज / क्लास्टिक (Clastic) - यांत्रिक रूप से बनी: कणों के आकार पर - कांग्लोमरेट (गोल बजरी >2 मिमी), ब्रेशिया (कोणीय टुकड़े), बालुकाश्म (Sandstone, 0.06-2 मिमी, क्वार्ट्ज प्रधान, विंध्यन बालुकाश्म भारत में सबसे विस्तृत), शेल (0.06 मिमी से कम, मृदा खनिज, सबसे अधिक 60% अवसादी चट्टान), सिल्टस्टोन। (b) रासायनिक रूप से बनी: जल में घुले पदार्थों के अवक्षेपण से - चूना पत्थर (Limestone, CaCO₃, कुडप्पा, विंध्यन), डोलोमाइट (CaMg(CO₃)₂), चर्ट (सिलिका), सेंधा नमक (Rock Salt), जिप्सम। (c) जैविक / कार्बनिक रूप से बनी: जीवों के अवशेष से - कोयला (पौधों से, गोंडवाना क्रम - झारखंड, छत्तीसगढ़ में 98% कोयला), चॉक (फोरामिनिफेरा से), कोक्विना (सीपी से)। संरचनाएँ - स्तरीकरण, प्रतिच्छेदी स्तरीकरण (Cross-bedding), लहर चिह्न (Ripple Marks), दरारें (Mud Cracks) - ये प्राचीन पर्यावरण बताती हैं।
3. रूपांतरित चट्टानें - प्रकार और मूल चट्टानों से संबंध
रूपांतरण के कारक: ताप (Temperature >200°C), दाब (Pressure) और रासायनिक रूप से सक्रिय तरल। तीन प्रकार का कायांतरण - (i) संपर्क कायांतरण (Contact) - मैग्मा के संपर्क से उच्च ताप पर, कम दाब, जैसे हॉर्नफेल्स। (ii) प्रादेशिक कायांतरण (Regional) - पर्वत निर्माण के दौरान व्यापक क्षेत्र में उच्च ताप-दाब, जैसे नाइस, शिस्ट। (iii) गतिक कायांतरण (Dynamic) - भ्रंश तल पर दबाव से, जैसे माइलोनाइट।
पत्रितता के आधार पर वर्गीकरण: (a) पत्रित (Foliated) - खनिजों का समानांतर विन्यास। शेल → स्लेट (न्यून कायांतरण, मकान की छत), स्लेट → फाइलाइट (चमकदार), फाइलाइट → शिस्ट (मध्यम, अभ्रक प्रधान, बायोटाइट शिस्ट), शिस्ट → नाइस (उच्च, बैंडेड, क्वार्ट्ज-फेल्डस्पार बैंड)। अरावली नाइस भारत की सबसे प्राचीन (3.2 अरब वर्ष)। (b) अपत्रित (Non-foliated) - पत्रण नहीं। क्वार्ट्ज बालुकाश्म → क्वार्टजाइट (सबसे कठोर, दिल्ली क्वार्टजाइट, अरावली), चूना पत्थर → संगमरमर (Marble, मकराना, राजस्थान - ताजमहल, कैल्साइट), बेसाल्ट → एम्फिबोलाइट, कोयला → ग्रेफाइट/हीरा, ग्रेनाइट → नाइस। सूचक खनिज - क्लोराइट (न्यून ताप), गार्नेट, स्टॉरोलाइट (मध्यम), सिलिमेनाइट, क्यानाइट (उच्च ताप-दाब)।
शैल चक्र (Rock Cycle): जेम्स हटन (1726-1797) द्वारा प्रतिपादित - मैग्मा ठंडा होकर आग्नेय, अपक्षय से अवसाद, शिलीभवन से अवसादी, ताप-दाब से रूपांतरित, और पुनः पिघलकर मैग्मा। यह चक्र लाखों वर्षों में चलता है और पृथ्वी की गतिशीलता का प्रमाण है। भारत में शैल चक्र का आदर्श उदाहरण - दक्कन बेसाल्ट (आग्नेय) → गोदावरी द्वारा अपरदन → बंगाल डेल्टा में बालुकाश्म (अवसादी) → हिमालय में दबकर क्वार्टजाइट (रूपांतरित)।
| विशेषता | आग्नेय चट्टान | अवसादी चट्टान | रूपांतरित चट्टान |
|---|---|---|---|
| निर्माण | मैग्मा/लावा के ठंडा होने से | अवसादों के निक्षेपण और शिलीभवन से | पूर्ववर्ती चट्टानों के ताप-दाब से रूपांतरण |
| बनावट | रवेदार - फैनेरिटिक/एफैनिटिक | परतदार, दानेदार | पत्रित/अपत्रित, कठोर |
| जीवाश्म | अनुपस्थित | उपस्थित (तेल, कोयला, जीवाश्म ईंधन) | विरूपित या नष्ट |
| भारतीय उदाहरण | दक्कन बेसाल्ट, बुंदेलखंड ग्रेनाइट | विंध्यन बालुकाश्म, गोंडवाना कोयला, कुडप्पा चूना | अरावली नाइस, मकराना संगमरमर, दिल्ली क्वार्टजाइट |
| आर्थिक महत्व | धात्विक खनिज - लोहा, सोना | कोयला, पेट्रोलियम, चूना, सीमेंट | इमारती पत्थर, स्लेट, संगमरमर |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- आग्नेय = प्राथमिक, अवसादी = द्वितीयक, रूपांतरित = तृतीयक - याद रखें। क्रस्ट का 95% आयतन आग्नेय+रूपांतरित पर सतह पर 75% अवसादी।
- बनावट से पहचान - बड़े क्रिस्टल = अंतर्भेदी (ग्रेनाइट), छोटे/कांच = बहिर्भेदी (बेसाल्ट), परतदार + जीवाश्म = अवसादी, पत्रित बैंड = रूपांतरित।
- मूल से रूपांतरित: ग्रेनाइट→नाइस, बेसाल्ट→एम्फिबोलाइट/शिस्ट, बालुकाश्म→क्वार्टजाइट, चूना→संगमरमर, शेल→स्लेट→फाइलाइट→शिस्ट→नाइस, कोयला→ग्रेफाइट→हीरा।
- भारत में - सबसे प्राचीन चट्टान: धारवाड़ क्रम (कर्नाटक, 3.2 अरब वर्ष, आग्नेय+रूपांतरित), सबसे नवीन: थार के बालू के टीले।
- दक्कन ट्रैप बहिर्भेदी बेसाल्ट (66 Ma) है, जो K-Pg विलुप्ति से संबंधित है और काली मिट्टी का जनक है।
- जीवाश्म केवल अवसादी में, धात्विक खनिज अधिकतर आग्नेय में, इमारती पत्थर रूपांतरित में - आर्थिक भूगोल का आधार।
- शैल चक्र कभी नहीं रुकता - अपरदन हर चट्टान को अवसादी में बदल सकता है, ताप-दाब हर चट्टान को रूपांतरित में।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. ग्रेनाइट और बेसाल्ट दोनों आग्नेय हैं, फिर इतने अलग क्यों हैं?
A. दोनों का रासायनिक संघटन और ठंडा होने की दर अलग है। ग्रेनाइट अम्लीय (SiO₂ 70%), फेल्सिक, अंतर्भेदी - गहराई पर धीरे ठंडा, बड़े क्रिस्टल, हल्का रंग, कम घनत्व (2.7), महाद्वीपीय क्रस्ट में। बेसाल्ट क्षारीय (SiO₂ 50%), मैफिक, बहिर्भेदी - सतह पर तेजी से ठंडा, बारीक क्रिस्टल, गहरा काला, अधिक घनत्व (3.0), महासागरीय क्रस्ट और दक्कन ट्रैप में। ग्रेनाइट में क्वार्ट्ज-अभ्रक अधिक, बेसाल्ट में पाइरोक्सीन-प्लेजियोक्लेज अधिक।
Q2. अवसादी चट्टानों में ही जीवाश्म और कोयला-पेट्रोलियम क्यों मिलते हैं?
A. क्योंकि अवसादी चट्टानें निम्न ताप-दाब पर बनती हैं, इसलिए जीवों के अवशेष नष्ट नहीं होते और परतों में दबकर संरक्षित हो जाते हैं। आग्नेय में 800-1200°C ताप से जीवाश्म जल जाते हैं और रूपांतरित में ताप-दाब से विरूपित हो जाते हैं। कोयला दलदली वनों के दबने से, पेट्रोलियम समुद्री जीवों के अवसादों में दबने से बनता है - दोनों के लिए परतदार अवसादी बेसिन (जैसे गोंडवाना, बॉम्बे हाई) आवश्यक हैं। इसलिए तेल अन्वेषण अवसादी बेसिन में ही होता है।
Q3. स्लेट, शिस्ट और नाइस में क्या अंतर है, ये एक ही शेल से कैसे बनते हैं?
A. ये प्रादेशिक कायांतरण की बढ़ती तीव्रता के चरण हैं। शेल (मृदा) → न्यून ताप-दाब (200°C) पर स्लेट (सूक्ष्म पत्रण, छत में उपयोग), → मध्यम ताप (300°C) पर फाइलाइट (चमकदार), → मध्यम-उच्च ताप (500°C) पर शिस्ट (मोटे अभ्रक पत्र, शिस्टोसिटी), → उच्च ताप (700°C) पर नाइस (बैंडेड, क्वार्ट्ज-फेल्डस्पार के हल्के और अभ्रक के गहरे बैंड)। कायांतरण बढ़ने से पत्रण मोटा और क्रिस्टल बड़े होते जाते हैं। यही शैल चक्र की प्रगति है।
Q4. भारत में दक्कन ट्रैप और विंध्यन क्रम का UPSC में क्या महत्व है?
A. दक्कन ट्रैप - 66 Ma पर क्रिटेशियस के अंत में बहिर्भेदी बेसाल्ट से बना 5 लाख किमी² का लावा पठार, K-Pg महाविलुप्ति और काली कपास मिट्टी (रेगुर) का स्रोत, सीढ़ीनुमा स्थलाकृति। विंध्यन क्रम - 1.4 अरब से 550 Ma पुराना अवसादी क्रम, बालुकाश्म-चूना पत्थर-शेल, हीरा (पन्ना), सीमेंट, भवन सामग्री का स्रोत, कैमूर, भांडेर, रीवा श्रृंखलाएँ। दोनों UNESCO भू-विरासत स्थल के उम्मीदवार हैं और भारत के भूवैज्ञानिक इतिहास के दो महत्वपूर्ण कालखंड हैं।