भारत में वन्यजीव संरक्षण: राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व तथा हाथी रिजर्व
⌄भारत में वन्यजीव संरक्षण: राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व तथा हाथी रिजर्व - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
भारत के राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों, टाइगर रिजर्व तथा हाथी रिजर्व का विस्तृत विवरण, जो यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
लोडिंग...
💡 व्याख्या
भारत में वन्यजीव संरक्षण: राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व तथा हाथी रिजर्व
भारत में वन्यजीव संरक्षण की परंपरा अत्यंत प्राचीन तथा समृद्ध रही है। देश में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अनेक प्रकार के संरक्षित क्षेत्र घोषित किए गए हैं जिनमें राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, टाइगर रिजर्व तथा हाथी रिजर्व प्रमुख हैं। यूपीएससी तथा राज्य पीसीएस परीक्षाओं की दृष्टि से इन संरक्षित क्षेत्रों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
राष्ट्रीय उद्यान तथा अभयारण्य
राष्ट्रीय उद्यान ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ वन्यजीवों तथा उनके आवासों को सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाती है। इन क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियाँ अत्यंत सीमित रहती हैं और यहाँ किसी भी प्रकार का शिकार या वनोत्पाद का संग्रह प्रतिबंधित होता है। भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान हैली क्षेत्र के नाम से उत्तराखंड में स्थापित किया गया था जिसे अब जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।
वन्यजीव अभयारण्य राष्ट्रीय उद्यानों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कठोर संरक्षण व्यवस्था वाले क्षेत्र होते हैं। इनमें सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति होती है जैसे लकड़ी संग्रह तथा चराई। भारत में राष्ट्रीय उद्यानों तथा अभयारण्यों की कुल संख्या सौ से अधिक मानी जाती है जो देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
टाइगर रिजर्व तथा प्रोजेक्ट टाइगर
प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ तिहत्तर में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बाघों की घटती संख्या को रोकना तथा उनके आवासों का संरक्षण करना था। इस परियोजना के अंतर्गत देश में कई टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए। भारत का पहला टाइगर रिजर्व जिम कॉर्बेट था जिसे इस परियोजना के प्रारंभ में ही सम्मिलित किया गया।
टाइगर रिजर्व को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है। कोर क्षेत्र वह भाग होता है जहाँ मानवीय गतिविधियाँ पूर्णतः प्रतिबंधित रहती हैं। बफर क्षेत्र वह भाग होता है जहाँ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति दी जाती है। इसी कारण टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका का भी ध्यान रखते हैं।
हाथी रिजर्व
हाथी रिजर्व की स्थापना का उद्देश्य हाथियों के प्राकृतिक आवासों तथा उनके प्रवास मार्गों का संरक्षण करना है। भारत में हाथी रिजर्व की शुरुआत वर्ष दो हजार एक में की गई थी। हाथी रिजर्व के अंतर्गत हाथियों के आवागमन मार्ग तथा उनके भोजन क्षेत्रों को संरक्षित किया जाता है। भारत में कुल तीस हाथी रिजर्व घोषित किए गए हैं जो देश के विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं।
हाथी रिजर्व का प्रबंधन मुख्यतः तीन स्तरों पर किया जाता है। पहले स्तर पर हाथियों की संख्या का आकलन किया जाता है। दूसरे स्तर पर उनके आवासों तथा प्रवास मार्गों का संरक्षण किया जाता है। तीसरे स्तर पर स्थानीय समुदायों तथा हाथियों के बीच संघर्ष को कम करने के प्रयास किए जाते हैं।
यूपीएससी तथ्य बॉक्स
- प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ तिहत्तर में की गई थी।
- भारत का पहला टाइगर रिजर्व जिम कॉर्बेट था।
- हाथी रिजर्व की शुरुआत वर्ष दो हजार एक में की गई थी।
- भारत में कुल तीस हाथी रिजर्व घोषित किए गए हैं।
- राष्ट्रीय उद्यानों में मानवीय गतिविधियाँ अत्यंत सीमित रहती हैं।
संरक्षित क्षेत्रों की तुलनात्मक तालिका
| संरक्षित क्षेत्र | मुख्य उद्देश्य | प्रारंभ वर्ष |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय उद्यान | वन्यजीव तथा आवास संरक्षण | उन्नीस सौ छत्तीस से प्रारंभ |
| वन्यजीव अभयारण्य | वन्यजीव संरक्षण तथा सीमित उपयोग | उन्नीस सौ बहत्तर |
| टाइगर रिजर्व | बाघ संरक्षण तथा आवास प्रबंधन | उन्नीस सौ तिहत्तर |
| हाथी रिजर्व | हाथी संरक्षण तथा प्रवास मार्ग | दो हजार एक |
निष्कर्ष
भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, टाइगर रिजर्व तथा हाथी रिजर्व का विशेष महत्व माना जाता है। ये सभी संरक्षित क्षेत्र मिलकर देश की जैव विविधता तथा पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार तथा स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयास आवश्यक माने जाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन संरक्षित क्षेत्रों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।