भारत में बायोस्फीयर रिजर्व तथा लुप्तप्राय प्रजातियाँ
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भारत के बायोस्फीयर रिजर्व तथा लुप्तप्राय प्रजातियों का विस्तृत विवरण, जो यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
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💡 व्याख्या
भारत में बायोस्फीयर रिजर्व तथा लुप्तप्राय प्रजातियाँ
भारत में जैव विविधता के संरक्षण के लिए बायोस्फीयर रिजर्व की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये रिजर्व संरक्षण तथा विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही देश में अनेक लुप्तप्राय प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यूपीएससी तथा राज्य पीसीएस परीक्षाओं की दृष्टि से इन दोनों विषयों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बायोस्फीयर रिजर्व की अवधारणा
बायोस्फीयर रिजर्व ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ स्थलीय तथा तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, आर्थिक विकास तथा सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण एक साथ करना होता है। बायोस्फीयर रिजर्व को तीन भागों में विभाजित किया जाता है। पहला कोर क्षेत्र होता है जहाँ मानवीय गतिविधियाँ प्रतिबंधित रहती हैं। दूसरा बफर क्षेत्र होता है जहाँ सीमित मानवीय गतिविधियों की अनुमति होती है। तीसरा संक्रमण क्षेत्र होता है जहाँ स्थायी विकास की गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।
भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व माना जाता है जिसे वर्ष उन्नीस सौ छियासी में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्रदान की गई थी। भारत में वर्तमान में अठारह बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किए गए हैं जिनमें से बारह यूनेस्को की विश्व नेटवर्क में सम्मिलित हैं। इनमें नीलगिरि, नंदा देवी, मन्नार की खाड़ी, सुंदरबन तथा नोकरेक प्रमुख हैं।
भारत के प्रमुख बायोस्फीयर रिजर्व
नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व उत्तराखंड राज्य में स्थित है और यह अपनी उच्च हिमालयी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। मन्नार की खाड़ी बायोस्फीयर रिजर्व तमिलनाडु राज्य में स्थित है और यह समुद्री जैव विविधता के लिए विश्वभर में जाना जाता है। सुंदरबन बायोस्फीयर रिजर्व पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है और यह विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र माना जाता है।
नोकरेक बायोस्फीयर रिजर्व मेघालय राज्य में स्थित है और यह अपनी विशिष्ट जैव विविधता तथा पारंपरिक कृषि पद्धतियों के लिए प्रसिद्ध है। अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व केरल तथा तमिलनाडु राज्यों में फैला हुआ है और यह पश्चिमी घाट का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। इन सभी रिजर्व में संरक्षण तथा स्थायी विकास के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
भारत की लुप्तप्राय प्रजातियाँ
भारत में अनेक प्रजातियाँ लुप्तप्राय श्रेणी में सम्मिलित हैं जिनके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, एक सींग वाला गैंडा, एशियाई शेर तथा हिम तेंदुआ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, मीठे पानी का मगर तथा ओलिव रिडले कछुआ भी लुप्तप्राय श्रेणी में सम्मिलित हैं।
पक्षियों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, साइबेरियन क्रेन तथा बंगाल फ्लोरिकन लुप्तप्राय प्रजातियों में सम्मिलित हैं। इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए देश में कई परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। इनमें प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलिफेंट तथा प्रोजेक्ट गैंडा प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त घड़ियाल परियोजना तथा गंगा डॉल्फिन संरक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं।
यूपीएससी तथ्य बॉक्स
- भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व नीलगिरि था।
- भारत में अठारह बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किए गए हैं।
- यूनेस्को विश्व नेटवर्क में भारत के बारह बायोस्फीयर रिजर्व सम्मिलित हैं।
- गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव माना जाता है।
- हिम तेंदुआ उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है।
प्रमुख बायोस्फीयर रिजर्व की तुलनात्मक तालिका
| बायोस्फीयर रिजर्व | स्थिति | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
| नीलगिरि | तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक | भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व |
| नंदा देवी | उत्तराखंड | उच्च हिमालयी जैव विविधता |
| मन्नार की खाड़ी | तमिलनाडु | समुद्री जैव विविधता |
| सुंदरबन | पश्चिम बंगाल | विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र |
| नोकरेक | मेघालय | पारंपरिक कृषि तथा जैव विविधता |
| अगस्त्यमलाई | केरल, तमिलनाडु | पश्चिमी घाट का महत्वपूर्ण भाग |
निष्कर्ष
भारत में बायोस्फीयर रिजर्व तथा लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण देश की जैव विविधता तथा पारिस्थितिकी संतुलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये रिजर्व संरक्षण तथा विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं जबकि लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष परियोजनाएँ चलाई जाती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन विषयों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं और इसलिए इनका गहन अध्ययन आवश्यक माना जाता है।