पवन प्रणाली और चक्रवात - भाग 1
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ग्रहीय पवनें, स्थानीय पवनें और चक्रवातों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
पवन प्रणाली और चक्रवात: ग्रहीय पवनें, स्थानीय पवनें और उष्ण-शीतोष्ण चक्रवात
वायुमंडलीय परिसंचरण का मुख्य चालक वायुदाब में अंतर और पृथ्वी का घूर्णन है। विषुवतीय निम्न और उपोष्ण उच्च जैसी स्थायी दाब पेटियों के बीच स्थायी रूप से चलने वाली पवनों को ग्रहीय पवनें कहते हैं - व्यापारिक, पछुआ और ध्रुवीय। इनके अतिरिक्त स्थानीय तापीय और स्थलाकृतिक कारणों से लू, चिनूक, फॉन जैसी स्थानीय पवनें चलती हैं। जब दाब प्रवणता तीव्र होकर वायु घूर्णन करने लगे तो चक्रवात बनते हैं - उष्णकटिबंध में तापीय और शीतोष्ण में ध्रुवीय वाताग्र से। सभी पवनों की दिशा पर कोरिओलिस बल का नियंत्रण होता है। UPSC में ग्रहीय पवनों की दिशा, स्थानीय पवनों का प्रभाव और दोनों प्रकार के चक्रवातों का अंतर प्रत्येक वर्ष पूछा जाता है।
ग्रहीय पवनें (Planetary Winds): 3 प्रकार - (i) व्यापारिक पवन (Trade Winds) - 30-35° उपोष्ण उच्च से 0-5° विषुवतीय निम्न की ओर, NH में उत्तर-पूर्व से, SH में दक्षिण-पूर्व से, 15-20 किमी/घंटा, स्थिर। (ii) पछुआ पवन (Westerlies) - 30-35° उपोष्ण उच्च से 60-65° उपध्रुवीय निम्न की ओर, NH में दक्षिण-पश्चिम से, SH में उत्तर-पश्चिम से, परिवर्तनशील, 40-60°S में गरजता चालीसा (Roaring Forties)। (iii) ध्रुवीय पवन (Polar Easterlies) - 80-90° ध्रुवीय उच्च से 60-65° उपध्रुवीय निम्न की ओर, NH में उत्तर-पूर्व से, SH में दक्षिण-पूर्व से, ठंडी, शुष्क
कोरिओलिस प्रभाव: Fc = 2mVΩsinφ, विषुवत पर 0, ध्रुव पर अधिकतम, NH में दायें मोड़, SH में बायें - इसलिए व्यापारिक पवनें सीधी उत्तर-दक्षिण नहीं चलतीं
स्थानीय पवनें: लू (Loo) - उत्तर भारत में मई-जून में थार से आने वाली गर्म, शुष्क पवन, 45-50°C, दोपहर में; चिनूक (Chinook) - रॉकी पर्वत के पूर्वी ढाल पर, गर्म, शुष्क, 20°C/15 मिनट में तापमान बढ़ाती है, Snow Eater; फॉन (Foehn) - आल्प्स के उत्तरी ढाल पर, स्विट्जरलैंड में, चिनूक के समान, अंगूर पकाने में सहायक
अन्य स्थानीय: मिस्ट्रल (फ्रांस, ठंडी, रोन घाटी), सिरॉको (सहारा से भूमध्यसागर, गर्म), बोरा (एड्रियाटिक, ठंडी), खमसिन (मिस्र, गर्म)
उष्णकटिबंधीय चक्रवात: 5-20° अक्षांश में, तापीय, समुद्र सतह तापमान >26.5°C, कोरिओलिस >5° आवश्यक, व्यास 100-1000 किमी, पवन 100-300 किमी/घंटा, आँख (Eye) 20-50 किमी शांत, नाम - हरिकेन (अटलांटिक), टाइफून (प्रशांत), साइक्लोन (हिंद महासागर), विली-विली (ऑस्ट्रेलिया)
शीतोष्ण चक्रवात: 35-65° में, गतिक, ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत (Polar Front Theory) से, 2 ठंडी और गर्म वायुराशियों के अभिसरण से, व्यास 1000-4000 किमी, पवन 30-60 किमी/घंटा, वर्षा वाताग्र पर, पश्चिम से पूर्व चलता है
1. ग्रहीय पवनें - व्यापारिक, पछुआ और ध्रुवीय पवनों की दिशा और कारण
ग्रहीय पवनें स्थायी दाब पेटियों के बीच चलने वाली स्थायी पवनें हैं, दिशा पर दो बलों का नियंत्रण - दाब प्रवणता बल (उच्च से निम्न) और कोरिओलिस बल (दिशा मोड़)।
(i) व्यापारिक पवन (Trade Winds - 0-30°): उपोष्ण उच्च (30-35°N/S, 1020 mb) से विषुवतीय निम्न (0-5°, ITCZ, 1008 mb) की ओर। दाब प्रवणता दक्षिण की ओर पर कोरिओलिस से NH में दायें मुड़कर उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम (NE Trades) और SH में बायें मुड़कर दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम (SE Trades) चलती है। गति 15-20 किमी/घंटा, स्थिर, समुद्र से आने पर आर्द्र, इसलिए पूर्वी तटों पर 200 सेमी वर्षा (मुंबई, चेन्नई व्यापारिक पवनों से ही वर्षा पाते हैं)। प्राचीन काल में व्यापारिक जहाजों को मदद करती थीं, इसलिए नाम Trade (जर्मन Trada = Track)। ITCZ पर अभिसरण से Doldrums।
(ii) पछुआ पवन (Westerlies - 30-65°): उपोष्ण उच्च से उपध्रुवीय निम्न (60-65°, 998 mb) की ओर। NH में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व (SW Westerlies) और SH में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व (NW Westerlies)। परिवर्तनशील, तीव्र, 30-60 किमी/घंटा। 40°S पर स्थल कम होने से घर्षण कम, इसलिए 40-50°S में गरजता चालीसा (Roaring Forties), 50-60°S में भयंकर पचासा (Furious Fifties), 60-70°S में चीखता साठा (Shrieking Sixties)। शीतोष्ण चक्रवातों को पश्चिम से पूर्व ले जाती हैं, इसलिए पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी उत्तर अमेरिका में वर्षभर वर्षा।
(iii) ध्रुवीय पवन (Polar Easterlies - 60-90°): ध्रुवीय उच्च (80-90°, 1025 mb, तापीय) से उपध्रुवीय निम्न की ओर। NH में उत्तर-पूर्व से, SH में दक्षिण-पूर्व से, ठंडी, शुष्क, 10-15 किमी/घंटा। 60° पर पछुआ से मिलकर ध्रुवीय वाताग्र (Polar Front) बनाती हैं जहाँ शीतोष्ण चक्रवात बनते हैं।
त्रि-कोशिकीय मॉडल: हैडली कोशिका (0-30°), फेरेल कोशिका (30-60°, अप्रत्यक्ष), ध्रुवीय कोशिका (60-90°) - यही ग्रहीय परिसंचरण है।
2. स्थानीय पवनें - लू, चिनूक, फॉन और अन्य
स्थानीय पवनें तापीय अंतर या स्थलाकृति से उत्पन्न, कुछ घंटे से कुछ दिन चलती हैं, पर प्रभाव विनाशकारी।
(i) लू (Loo): उत्तर भारत-पाकिस्तान में मई-जून में चलने वाली अत्यंत गर्म, शुष्क, धूल भरी पवन। उत्पत्ति - थार मरुस्थल में तीव्र तापन (50°C) से निम्न दाब, संवहन से गर्म वायु उत्तर-पूर्व की ओर गंगा मैदान में चलती है। तापमान 45-50°C, सापेक्ष आर्द्रता 10% से कम, दोपहर 12-5 बजे तीव्र, लू-लगना (Heat Stroke) से मृत्यु। शाम को आंधी में बदल सकती है। UPSC में पूछा जाता है - लू शुष्क है, इसलिए पसीना तुरंत सूखता है, शरीर ठंडा नहीं होता।
(ii) चिनूक (Chinook - Snow Eater): रॉकी पर्वत (USA-कनाडा) के पूर्वी ढाल (लीवार्ड) पर चलने वाली गर्म, शुष्क पवन। उत्पत्ति - प्रशांत से आर्द्र पवन रॉकी पर चढ़कर वर्षा करती है, शुष्क होकर पूर्वी ढाल पर एडियाबेटिक रूप से 10°C/किमी गर्म होकर नीचे उतरती है। प्रभाव - 15 मिनट में 20°C तापमान वृद्धि (मोंटाना में 24 घंटे में -48°C से 9°C), बर्फ पिघला देती है, इसलिए Snow Eater, शीतकाल में मवेशियों को राहत।
(iii) फॉन (Foehn): आल्प्स पर्वत (स्विट्जरलैंड-ऑस्ट्रिया) के उत्तरी ढाल पर चिनूक के समान। दक्षिण से आर्द्र पवन आल्प्स पर वर्षा कर उत्तरी घाटी में गर्म, शुष्क होकर उतरती है। प्रभाव - शीतकाल में तापमान बढ़ाकर बर्फ पिघलाती है, अंगूर और फसल पकने में मदद, सिरदर्द और बेचैनी (Foehn Sickness) लाती है।
अन्य महत्वपूर्ण: मिस्ट्रल (फ्रांस, रोन घाटी में ठंडी, शुष्क, 60 किमी/घंटा, अंगूर को नुकसान), सिरॉको (सहारा से भूमध्यसागर, गर्म, धूल भरी, इटली में रक्त वर्षा), खमसिन (मिस्र में 50 दिन चलने वाली गर्म पवन), बोरा (एड्रियाटिक तट पर ठंडी, शुष्क), सांताअना (कैलिफोर्निया, गर्म, जंगल आग फैलाती), नार्वेस्टर (बंगाल में कालबैसाखी, शाम को तेज आंधी-वर्षा)।
3. चक्रवात - उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवातों की उत्पत्ति और अंतर
चक्रवात निम्न दाब का केंद्र है जहाँ पवनें बाहर से अंदर घूर्णन करती हैं - NH में वामावर्त (CCW), SH में दक्षिणावर्त (CW), कोरिओलिस से।
(i) उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone - 5-20°): तापीय उत्पत्ति। 6 शर्तें - (a) समुद्र सतह तापमान >26.5°C, 60 मीटर गहराई तक, (b) कोरिओलिस बल >5° अक्षांश (इसलिए विषुवत पर नहीं), (c) कम ऊर्ध्वाधर पवन कतरन (Vertical Wind Shear <10 मी/से), (d) पहले से मौजूद निम्न दाब विक्षोभ, (e) उच्च आर्द्रता, (f) ऊपरी अपसरण। संरचना - केंद्र में आँख (Eye, 20-50 किमी, शांत, 10°C गर्म, निम्नतम दाब 900 mb तक), आँख के चारों ओर आँख की दीवार (Eye Wall, सबसे तीव्र पवन 100-300 किमी/घंटा, मूसलाधार वर्षा), बाहर सर्पिल बैंड। ऊर्जा स्रोत - समुद्र से वाष्पन की गुप्त ऊष्मा। नामकरण - अटलांटिक में हरिकेन, प्रशांत में टाइफून, हिंद महासागर में साइक्लोन, ऑस्ट्रेलिया में विली-विली। भारतीय उदाहरण - ओडिशा सुपर साइक्लोन 1999 (260 किमी/घंटा), अम्फान 2020। क्षति - तूफानी लहर (Storm Surge) 5-10 मीटर ऊँची सबसे घातक।
(ii) शीतोष्ण / मध्य अक्षांशीय चक्रवात (Temperate Cyclone - 35-65°): गतिक उत्पत्ति, ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत (Polar Front Theory - बर्कनीज द्वारा)। 2 भिन्न वायुराशियों - ठंडी ध्रुवीय और गर्म उपोष्ण - के अभिसरण पर वाताग्र बनता है, तरंग बनती है, निम्न दाब बनता है। संरचना - व्यास 1000-4000 किमी, पवन 30-60 किमी/घंटा, 2 वाताग्र - गर्म वाताग्र (आगे, धीमी वर्षा) और शीत वाताग्र (पीछे, तेज वर्षा), जीवनचक्र 5-7 दिन, पश्चिम से पूर्व चलता है पछुआ पवन से। ऊर्जा स्रोत - वायुराशियों का तापमान अंतर। वर्षा - वाताग्रीय, हल्की से मध्यम पर व्यापक क्षेत्र में। यूरोप-अमेरिका में शीतकाल में वर्षा इसी से।
| तुलना बिंदु | उष्णकटिबंधीय चक्रवात | शीतोष्ण चक्रवात |
|---|---|---|
| अक्षांश / कारण | 5-20°, तापीय - गर्म समुद्र (>26.5°C) | 35-65°, गतिक - ध्रुवीय वाताग्र पर 2 वायुराशियों का मिलना |
| व्यास / पवन | 100-1000 किमी, 100-300 किमी/घंटा, आँख शांत | 1000-4000 किमी, 30-60 किमी/घंटा, कोई आँख नहीं |
| ऊर्जा स्रोत | गुप्त ऊष्मा (समुद्र वाष्पन) | वायुराशियों का तापमान अंतर |
| दिशा / जीवन | पूर्व से पश्चिम, 5-10 दिन, एक स्थान पर भारी विनाश | पश्चिम से पूर्व, 5-7 दिन, व्यापक क्षेत्र में हल्की वर्षा |
| भारतीय उदाहरण | अम्फान, फानी, ओडिशा सुपर साइक्लोन - अक्टूबर-नवंबर और मई में अधिक | पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) - जम्मू-कश्मीर में शीतकालीन वर्षा/हिमपात |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- ग्रहीय पवनें 3 - व्यापारिक 0-30° (NE/SE), पछुआ 30-65° (SW/NW, गरजता चालीसा 40°S), ध्रुवीय 60-90° (NE/SE) - दिशा कोरिओलिस से दायें (NH) / बायें (SH)।
- कोरिओलिस = 2mVΩsinφ, विषुवत पर 0 इसलिए चक्रवात नहीं, ध्रुव पर अधिकतम - फेरेल का नियम 1856 में - NH में दायें, SH में बायें।
- स्थानीय पवनें - लू गर्म-शुष्क (थार से, 45-50°C, मई-जून), चिनूक गर्म-शुष्क (रॉकी पूर्वी ढाल, Snow Eater, 20°C/15 मिनट), फॉन गर्म-शुष्क (आल्प्स उत्तरी ढाल, अंगूर पकाने में सहायक)।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात तापीय, 26.5°C SST, आँख शांत, पवन 100-300 किमी/घंटा, ऊर्जा गुप्त ऊष्मा से; शीतोष्ण गतिक, वाताग्र पर, पवन 30-60 किमी/घंटा, ऊर्जा तापमान अंतर से।
- व्यापारिक पवन स्थिर, पछुआ परिवर्तनशील, ध्रुवीय ठंडी-शुष्क - यही त्रि-कोशिकीय मॉडल (हैडली, फेरेल, ध्रुवीय कोशिका)।
- भारत में - व्यापारिक पवन से तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा, पछुआ से पश्चिमी विक्षोभ, लू से हीटवेव। उष्णकटिबंधीय चक्रवात बंगाल की खाड़ी में अरब सागर से 5 गुना अधिक।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. व्यापारिक पवन उत्तर-पूर्व से और पछुआ दक्षिण-पश्चिम से क्यों चलती हैं, सीधी उत्तर-दक्षिण क्यों नहीं?
A. दाब प्रवणता बल उच्च (30°) से निम्न (0° या 60°) की ओर सीधा धकेलता है, पर कोरिओलिस बल Fc=2mVΩsinφ गति को मोड़ देता है। उत्तरी गोलार्ध में दायें मोड़ - उत्तर से दक्षिण जाने वाली पवन दायें मुड़कर उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम (NE Trades) बन जाती है। 30° से 60° जाने वाली पवन दायें मुड़कर दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व (SW Westerlies) बनती है। विषुवत पर sin0°=0 होने से पवन सीधी होती, पर 30° पर sin30°=0.5 होने से 45° तक मोड़ देती है। दक्षिणी गोलार्ध में बायें मोड़ से SE Trades और NW Westerlies।
Q2. लू, चिनूक और फॉन तीनों गर्म-शुष्क हैं, फिर अंतर क्या है?
A. तीनों अवरोही (Descending) पवनें हैं जो एडियाबेटिक रूप से 10°C/किमी गर्म होती हैं। लू - थार मरुस्थल में संवहन से गर्म होकर सीधे मैदान में चलती है, तापमान 45-50°C, आर्द्रता 10%, मई-जून में, स्वास्थ्य के लिए घातक। चिनूक - रॉकी के पश्चिमी ढाल पर आर्द्र पवन चढ़कर वर्षा कर पूर्वी ढाल पर शुष्क होकर उतरती है, 20°C/15 मिनट वृद्धि, बर्फ पिघलाती है - Snow Eater, मवेशियों के लिए लाभदायक। फॉन - आल्प्स में चिनूक के समान, दक्षिण से उत्तर की ओर, अंगूर पकाने में सहायक, पर सिरदर्द लाती है। लू मैदानी, चिनूक-फॉन पर्वतीय अवरोही पवनें हैं।
Q3. उष्णकटिबंधीय चक्रवात में आँख शांत क्यों होती है जबकि आसपास 200 किमी/घंटा पवन?
A. आँख (Eye) 20-50 किमी व्यास का निम्नतम दाब (900 mb) क्षेत्र है जहाँ वायु अवतलित (Subsiding) होती है - ऊपर से नीचे उतरने से गर्म होकर मेघ वाष्पित हो जाते हैं, इसलिए शांत, स्वच्छ आकाश, पवन 10 किमी/घंटा। आँख की दीवार (Eye Wall) में वायु तीव्र गति से ऊपर उठती है, कोणीय संवेग संरक्षण से पवन 100-300 किमी/घंटा, सबसे भारी वर्षा। आँख में अवतलन और दीवार में उत्तलन - यही चक्रवात का इंजन है। आँख गुजरने पर आधे घंटे शांति फिर विपरीत दिशा से तूफान - सबसे खतरनाक।
Q4. शीतोष्ण चक्रवात पश्चिमी विक्षोभ के रूप में भारत में शीतकाल में ही क्यों आते हैं?
A. शीतोष्ण चक्रवात ध्रुवीय वाताग्र (Polar Front) पर 60°N पर बनते हैं जहाँ ठंडी ध्रुवीय और गर्म उपोष्ण वायुराशियाँ मिलती हैं। शीतकाल में ध्रुवीय वाताग्र दक्षिण खिसककर 30-40°N तक आ जाता है, पछुआ पवन तीव्र होकर भूमध्यसागर से आर्द्रता लेकर ईरान-अफगानिस्तान होते हुए भारत (जम्मू-कश्मीर, पंजाब) तक पहुँचती है - इसे पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। यह 1000-4000 किमी व्यास का शीतोष्ण चक्रवात है, 5-7 दिन में पश्चिम से पूर्व चलता है, हल्की वर्षा और हिमपात लाता है - रबी फसल (गेहूँ) के लिए जीवनदायक। ग्रीष्म में वाताग्र उत्तर खिसक जाने से भारत में नहीं आता।