पवन प्रणाली और चक्रवात - भाग 2
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प्रतिचक्रवात और जेट धाराओं पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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💡 व्याख्या
प्रतिचक्रवात और जेट धाराएं: उत्पत्ति, प्रकार और भारतीय मानसून पर प्रभाव
चक्रवात निम्न दाब का केंद्र है तो प्रतिचक्रवात (Anticyclone) उच्च दाब का केंद्र है जहाँ वायु ऊपर से नीचे उतरती है और बाहर की ओर फैलती है - मौसम साफ और शुष्क रहता है। ऊपरी क्षोभमंडल में 9-14 किमी की ऊँचाई पर संकरी पट्टी में चलने वाली अत्यंत तीव्र पवनों को जेट धारा (Jet Stream) कहते हैं, जिनकी गति 200-400 किमी/घंटा तक होती है और जो पृथ्वी की मौसम प्रणाली को नियंत्रित करती हैं। उपोष्ण पछुआ जेट (STJ) और ध्रुवीय वाताग्र जेट (PFJ) सबसे महत्वपूर्ण हैं तथा उष्ण पूर्वी जेट (TEJ) भारतीय मानसून का चालक है। UPSC में प्रतिचक्रवात में पवनों की दिशा, जेट स्ट्रीम की स्थिति और STJ का मानसून से संबंध प्रत्येक वर्ष पूछा जाता है।
प्रतिचक्रवात: उच्च दाब केंद्र (1020-1040 mb), वायु अवतलन (Subsidence), अपसरण (Divergence), बाहर की ओर प्रवाह। NH में दक्षिणावर्त (Clockwise), SH में वामावर्त (Anticlockwise), पवन 10-30 किमी/घंटा, व्यास 2000-4000 किमी, मौसम साफ, शुष्क, स्थिर। प्रकार - (i) उपोष्ण प्रतिचक्रवात (गतिक, 30° पर), (ii) ध्रुवीय प्रतिचक्रवात (तापीय, 90° पर, साइबेरियाई उच्च), (iii) मध्य अक्षांशीय क्षणिक प्रतिचक्रवात
जेट धारा: परिभाषा - ऊपरी क्षोभमंडल/निचले समतापमंडल (9-14 किमी, 200-300 hPa तल) में संकरी (100-200 किमी चौड़ी, 2-3 किमी मोटी), लहरदार (Rossby Waves), तीव्र पवन पट्टी, गति 100-400 किमी/घंटा, कोर में अधिकतम। खोज - द्वितीय विश्व युद्ध में बमवर्षकों द्वारा
प्रमुख जेट: (i) उपोष्ण पछुआ जेट (STJ) - 25-35°N/S, 12-14 किमी, शीतकाल में 200-300 किमी/घंटा, ग्रीष्म में कमजोर, तापीय-गतिक कारण। (ii) ध्रुवीय वाताग्र जेट (PFJ) - 50-65°N/S, 9-10 किमी, 150-250 किमी/घंटा, परिवर्तनशील, ध्रुवीय वाताग्र पर। (iii) उष्ण पूर्वी जेट (TEJ) - 8-15°N, 14-16 किमी, ग्रीष्मकालीन, केवल उत्तरी गोलार्ध में, 150 किमी/घंटा, तिब्बत पठार के तापन से। (iv) ध्रुवीय समतापमंडलीय रात्रि जेट - 60° पर समतापमंडल में शीतकाल में
जेट और मानसून: शीतकाल में STJ हिमालय के दक्षिण 25°N पर, दो शाखाओं में विभाजित - उत्तरी शाखा हिमालय के उत्तर, दक्षिणी शाखा भारत पर। STJ का तिब्बत के उत्तर खिसकना (जून प्रथम सप्ताह) मानसून के आगमन का ट्रिगर। ग्रीष्म में TEJ (8-15°N) का निर्माण - तिब्बत पठार गर्म होने से ऊपर प्रतिचक्रवात और पूर्वी जेट, TEJ भारतीय मानसून को तीव्र करता है। सोमाली जेट (निम्न स्तरीय, 1.5 किमी) अरब सागर से आर्द्रता लाता है
1. प्रतिचक्रवात - उत्पत्ति, विशेषताएं, प्रकार और प्रभाव
उत्पत्ति: प्रतिचक्रवात उच्च दाब का केंद्र है जहाँ वायु ऊपर से नीचे अवतलित (Subsiding) होती है। अवतलन से वायु संपीडित होकर एडियाबेटिक रूप से 10°C/किमी गर्म होती है, सापेक्ष आर्द्रता घटकर 10-20% रह जाती है, मेघ वाष्पित हो जाते हैं। दाब प्रवणता बल केंद्र से बाहर की ओर धकेलता है और कोरिओलिस बल उसे मोड़ता है - NH में दक्षिणावर्त (Clockwise, उच्च से बाहर निकलते समय दायें मुड़ना) और SH में वामावर्त (Anticlockwise)। चक्रवात के विपरीत - चक्रवात में वायु अंदर, ऊपर उठती है; प्रतिचक्रवात में वायु बाहर, नीचे उतरती है।
विशेषताएं: (i) आकार - व्यास 2000-4000 किमी, चक्रवात से बड़ा पर पवन कमजोर 10-30 किमी/घंटा। (ii) दाब - केंद्र में 1020-1040 mb, कभी-कभी साइबेरियाई उच्च में 1080 mb तक। (iii) मौसम - साफ, शुष्क, स्थिर, मेघ रहित, इसलिए शीतकाल में पाला और कोहरा, ग्रीष्म में लू और सूखा। (iv) जीवनकाल - 5-10 दिन, मध्य अक्षांशीय प्रतिचक्रवात धीरे-धीरे पूर्व की ओर चलता है। (v) ऊर्ध्वाधर संरचना - ऊँचाई तक विस्तृत, क्षोभमंडल के ऊपरी भाग तक।
प्रकार: (i) उपोष्ण प्रतिचक्रवात (Subtropical Anticyclone): गतिक उत्पत्ति, 30-35° पर हैडली कोशिका के अवतलन से, स्थायी - अजोर्स उच्च (अटलांटिक), हवाई उच्च (प्रशांत), सेंट हेलेना उच्च। विश्व के सभी गर्म मरुस्थल और भूमध्यसागरीय जलवायु के ग्रीष्मकालीन शुष्क मौसम का कारण। (ii) ध्रुवीय प्रतिचक्रवात: तापीय उत्पत्ति, ध्रुव पर ठंडी वायु बैठने से, शीतकाल में साइबेरियाई उच्च (विश्व का सबसे शक्तिशाली, 1080 mb), कनाडाई उच्च। (iii) मध्य अक्षांशीय क्षणिक प्रतिचक्रवात: शीतोष्ण चक्रवातों के पीछे ठंडी वायु से बनता है, 2-3 दिन में गुजर जाता है, उत्तर भारत में शीतकाल में साफ मौसम लाता है।
प्रभाव: सकारात्मक - स्थिर, साफ मौसम, हवाई यातायात के लिए अनुकूल। नकारात्मक - अवतलन से वायु प्रदूषण फंसता है - दिल्ली में शीतकाल में प्रतिचक्रवातीय स्थिति से स्मॉग, ग्रीष्म में हीटवेव और सूखा, पाला से फसल क्षति। भारतीय मानसून पर - अरब सागर पर उपोष्ण प्रतिचक्रवात मानसून को कमजोर करता है।
2. जेट धाराएं - प्रकार, स्थिति, गति और विशेषताएं
जेट धारा की परिभाषा और विशेषताएं: 9-14 किमी (200-300 hPa) पर 100-200 किमी चौड़ी, 2-3 किमी मोटी, हजारों किमी लंबी, लहरदार (Rossby Waves) तीव्र पवन पट्टी। गति कोर में अधिकतम 200-400 किमी/घंटा, किनारों पर कम। ताप प्रवणता अधिक होने पर गति अधिक - शीतकाल में विषुवत-ध्रुव तापमान अंतर 40°C होने से जेट तीव्र, ग्रीष्म में 20°C होने से कमजोर। जेट स्ट्रीम भूविक्षेपी पवन है पर तापीय पवन संतुलन से नियंत्रित।
(i) उपोष्ण पछुआ जेट (Subtropical Westerly Jet - STJ): स्थिति - 25-35°N/S, 12-14 किमी (200 hPa), हैडली और फेरेल कोशिका की सीमा पर। उत्पत्ति - विषुवत से आई गर्म वायु 30° पर ठंडी होकर नीचे उतरते समय कोणीय संवेग संरक्षण से पछुआ गति तीव्र हो जाती है। गति - शीतकाल में 200-300 किमी/घंटा, ग्रीष्म में 100 किमी/घंटा, भारत पर शीतकाल में सबसे तीव्र। स्थिर, लगभग सीधा पर हल्का लहरदार।
(ii) ध्रुवीय वाताग्र जेट (Polar Front Jet - PFJ / Polar Jet): स्थिति - 50-65°N/S, 9-10 किमी (300 hPa), ध्रुवीय वाताग्र पर जहाँ ठंडी ध्रुवीय और गर्म उपोष्ण वायु मिलती हैं। उत्पत्ति - तीव्र ताप प्रवणता से। गति - 150-250 किमी/घंटा, अत्यंत परिवर्तनशील, लहरदार, Rossby तरंगें बनाता है, शीतोष्ण चक्रवातों को निर्देशित करता है। शीतकाल में 2 जेट (STJ और PFJ) अलग, ग्रीष्म में PFJ कमजोर होकर ध्रुव की ओर खिसक जाता है।
(iii) उष्ण पूर्वी जेट (Tropical Easterly Jet - TEJ): स्थिति - 8-15°N, 14-16 किमी (100 hPa), केवल उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्मकालीन (जून-सितंबर)। उत्पत्ति - तिब्बत पठार (5000 मी) ग्रीष्म में अत्यधिक गर्म होकर ऊपर प्रतिचक्रवात बनाता है, वहाँ से वायु दक्षिण की ओर पूर्वी जेट के रूप में बहती है। गति - 100-150 किमी/घंटा, पूर्व से पश्चिम। महत्व - भारतीय मानसून का सबसे महत्वपूर्ण जेट।
(iv) अन्य: ध्रुवीय समतापमंडलीय रात्रि जेट (Polar Night Jet) - 60° पर समतापमंडल (30 किमी) में शीतकाल में पछुआ, ध्रुवीय भंवर का भाग। निम्न स्तरीय जेट - सोमाली जेट (1.5 किमी, 40 किमी/घंटा, अरब सागर से आर्द्रता लाता है), अफ्रीकी पूर्वी जेट।
3. जेट स्ट्रीम और भारतीय मानसून का संबंध
शीतकाल में STJ और मानसून का निवर्तन: शीतकाल में STJ 25°N पर भारत के ऊपर हिमालय के दक्षिण में स्थित होता है, हिमालय से टकराकर 2 शाखाओं में बंट जाता है - उत्तरी शाखा तिब्बत के उत्तर, दक्षिणी शाखा भारत के ऊपर। दक्षिणी शाखा पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbance) को भारत में लाती है - जम्मू-कश्मीर में शीतकालीन वर्षा। STJ की स्थिति से उत्तर भारत में उच्च दाब और शुष्क मौसम रहता है।
ग्रीष्म में STJ का उत्तर खिसकना - मानसून आगमन का ट्रिगर: मई अंत में तिब्बत पठार गर्म होने से STJ कमजोर होकर उत्तर की ओर खिसकने लगता है। 1-5 जून के आसपास जब STJ तिब्बत के उत्तर (35-40°N) चला जाता है, तो भारत के ऊपर से उसका अवतलन प्रभाव हट जाता है, निम्न दाब गहरा होता है और दक्षिण-पश्चिम मानसून को आने का मार्ग मिलता है - यही मानसून के आगमन (Burst of Monsoon) का वायुमंडलीय ट्रिगर है। यदि STJ लंबे समय तक भारत पर टिका रहे तो मानसून देर से आता है - 2014, 2019 में देरी का कारण।
TEJ और मानसून की तीव्रता: तिब्बत पठार के तापन से ऊपरी क्षोभमंडल (14 किमी) में प्रतिचक्रवात बनता है और उसके दक्षिणी किनारे पर TEJ (8-15°N) विकसित होता है। TEJ के नीचे ऊपरी अपसरण (Divergence) होता है जो नीचे से वायु को ऊपर खींचता है, इससे मानसून निम्न दाब और तीव्र होता है। TEJ मजबूत होने पर मानसून सक्रिय, कमजोर होने पर विराम (Break)। 1972, 2002 में TEJ कमजोर होने से सूखा।
सोमाली जेट: निम्न स्तरीय (1.5 किमी) पछुआ जेट जो मेडागास्कर के पास से उत्पन्न होकर सोमालिया तट से अरब सागर होते हुए भारत आता है, 40-50 किमी/घंटा, आर्द्रता का मुख्य वाहक। सोमाली जेट मजबूत होने पर मानसून मजबूत।
| विशेषता | चक्रवात (Cyclone) | प्रतिचक्रवात (Anticyclone) |
|---|---|---|
| दाब / वायु गति | निम्न दाब (900-1000 mb), वायु अंदर, ऊपर उठती है | उच्च दाब (1020-1040 mb), वायु बाहर, नीचे उतरती है |
| पवन दिशा (NH) | वामावर्त (CCW), अंदर की ओर | दक्षिणावर्त (CW), बाहर की ओर |
| मौसम | मेघ, वर्षा, तूफान | साफ, शुष्क, स्थिर, कोहरा/पाला |
| तुलना - जेट | उपोष्ण पछुआ जेट (STJ) | उष्ण पूर्वी जेट (TEJ) |
| स्थिति / दिशा | 25-35°N, पछुआ, 12-14 किमी, शीतकालीन | 8-15°N, पूर्वी, 14-16 किमी, ग्रीष्मकालीन, केवल NH |
| भारतीय मानसून पर प्रभाव | भारत पर रहने से मानसून अवरुद्ध, उत्तर खिसकने से आगमन | तीव्र होने से मानसून तीव्र, कमजोर होने से सूखा |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- प्रतिचक्रवात = उच्च दाब, वायु अवतलन, बाहर की ओर, NH में दक्षिणावर्त, मौसम साफ-शुष्क, आकार चक्रवात से बड़ा पर पवन कमजोर 10-30 किमी/घंटा।
- जेट धारा = 9-14 किमी पर संकरी, तीव्र, लहरदार पवन पट्टी, गति 200-400 किमी/घंटा, कोर में अधिकतम, ताप प्रवणता से बनती है, शीतकाल में तीव्र।
- STJ 25-35°N, 12-14 किमी, पछुआ, शीतकाल में 200-300 किमी/घंटा, हिमालय से 2 शाखाओं में बंटता है; PFJ 50-65°N, 9-10 किमी, परिवर्तनशील, शीतोष्ण चक्रवातों को नियंत्रित करता है।
- TEJ 8-15°N, 14-16 किमी, पूर्वी, केवल ग्रीष्म में NH में, तिब्बत पठार के तापन से बनता है - भारतीय मानसून का चालक, मजबूत TEJ = मजबूत मानसून।
- भारतीय मानसून - STJ का तिब्बत के उत्तर खिसकना (जून प्रथम सप्ताह) आगमन का ट्रिगर, TEJ का बनना तीव्रता का कारण, सोमाली जेट (1.5 किमी) आर्द्रता लाता है।
- UPSC ट्रिक - चक्रवात में वायु अंदर-ऊपर, प्रतिचक्रवात में बाहर-नीचे; NH में चक्रवात वामावर्त, प्रतिचक्रवात दक्षिणावर्त; STJ पछुआ, TEJ पूर्वी।
- साइबेरियाई उच्च विश्व का सबसे शक्तिशाली प्रतिचक्रवात (1080 mb, शीतकाल), अजोर्स उच्च अटलांटिक में स्थायी उपोष्ण प्रतिचक्रवात।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. प्रतिचक्रवात में मौसम साफ क्यों रहता है जबकि चक्रवात में वर्षा होती है?
A. प्रतिचक्रवात में वायु ऊपर से नीचे अवतलित होती है, नीचे उतरने से 10°C/किमी एडियाबेटिक रूप से गर्म होती है, सापेक्ष आर्द्रता 10-20% रह जाती है, मेघ वाष्पित हो जाते हैं, इसलिए साफ, शुष्क मौसम, स्थिरता। चक्रवात में वायु नीचे से ऊपर उठती है, ऊपर जाने से ठंडी होकर संघनन, मेघ और वर्षा। इसलिए प्रतिचक्रवात में पाला, कोहरा, स्मॉग (दिल्ली में शीतकालीन स्मॉग प्रतिचक्रवातीय अवतलन से) और चक्रवात में तूफान-वर्षा।
Q2. उपोष्ण पछुआ जेट (STJ) हिमालय से टकराकर दो शाखाओं में क्यों बंट जाता है?
A. STJ 12-14 किमी पर 25-35°N पर चलता है, हिमालय की औसत ऊँचाई 6 किमी पर है पर तिब्बत पठार 5 किमी और वायुमंडलीय अवरोध के कारण STJ का प्रवाह बाधित होता है। शीतकाल में STJ हिमालय के दक्षिण 25°N पर आता है और तिब्बत के उच्च स्थलाकृति से टकराकर यांत्रिक रूप से 2 शाखाओं में विभाजित - उत्तरी शाखा तिब्बत के उत्तर 35-40°N पर, दक्षिणी शाखा भारत-म्यांमार पर 25°N पर। ग्रीष्म में तिब्बत गर्म होने से उत्तरी शाखा मजबूत हो जाती है और दक्षिणी गायब हो जाती है - यही STJ के उत्तर खिसकने का कारण।
Q3. उष्ण पूर्वी जेट (TEJ) केवल उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म में ही क्यों बनता है?
A. TEJ का कारण तिब्बत पठार (5 किमी ऊँचा, 2.5 मिलियन किमी²) का ग्रीष्म में अत्यधिक तापन है - जून में सतह 30°C, ऊपर वायु गर्म होकर प्रतिचक्रवात बनाती है। इस प्रतिचक्रवात के दक्षिणी किनारे पर ताप प्रवणता से पूर्वी जेट बनता है। दक्षिणी गोलार्ध में इतना ऊँचा और विशाल पठार नहीं, इसलिए TEJ नहीं बनता। शीतकाल में तिब्बत ठंडा होकर उच्च दाब बनाता है, प्रतिचक्रवात समाप्त, TEJ गायब। TEJ 8-15°N पर 14-16 किमी पर 150 किमी/घंटा से चलता है और उसके नीचे अपसरण से मानसून निम्न दाब तीव्र होता है - इसलिए भारतीय मानसून से सीधा संबंध।
Q4. जेट धाराएं हवाई जहाजों और मौसम पूर्वानुमान के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
A. जेट में पवन 200-400 किमी/घंटा है, इसलिए पश्चिम से पूर्व जाने वाले विमान (जैसे दिल्ली-लंदन) जेट में उड़कर 2 घंटे समय और ईंधन बचाते हैं, पूर्व से पश्चिम में जेट से बचते हैं। मौसम में - जेट की Rossby तरंगें (लहरें) शीतोष्ण चक्रवातों का मार्ग निर्धारित करती हैं, जेट के बायें निकास (Left Exit) और दायें प्रवेश (Right Entrance) क्षेत्र में ऊपरी अपसरण से नीचे निम्न दाब गहरा होता है - चक्रवात तीव्र होता है। STJ का उत्तर खिसकना मानसून आगमन, TEJ का मजबूत होना मानसून सक्रियता, PFJ का दक्षिण आना शीत लहर का संकेत - इसलिए IMD जेट की निगरानी करता है।