विश्व जलवायु वर्गीकरण - भाग 1
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कोपेन वर्गीकरण, थार्नथवेट और जलवायु प्रकारों पर आधारित 50 महत्वपूर्ण प्रश्न
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विश्व जलवायु वर्गीकरण: कोपेन, थार्नथवेट और प्रमुख जलवायु प्रकार
विश्व की जलवायु में तापमान, वर्षा और वनस्पति के आधार पर इतनी विविधता है कि उसे व्यवस्थित करने के लिए जलवायु वर्गीकरण आवश्यक है। जर्मन जलवायु विज्ञानी व्लादिमीर कोपेन ने 1918 में वनस्पति को आधार बनाकर सबसे मान्य वर्गीकरण दिया, जबकि अमेरिकी भूगोलवेत्ता सी.डब्ल्यू. थार्नथवेट ने 1931 और 1948 में जल बजट को आधार बनाकर अधिक वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया। कोपेन के 5 मुख्य समूह - A उष्णकटिबंधीय, B शुष्क, C शीतोष्ण, D शीत, E ध्रुवीय - तथा उनके कोड आज भी UPSC में सबसे अधिक पूछे जाते हैं। इनमें से उष्णकटिबंधीय, मरुस्थलीय और भूमध्यसागरीय जलवायु भारत सहित विश्व के महत्वपूर्ण कृषि और जनसंख्या क्षेत्र हैं।
कोपेन वर्गीकरण (1918, संशोधित 1936): आधार - तापमान और वर्षा के मासिक औसत तथा वनस्पति। 5 मुख्य समूह - A (उष्णकटिबंधीय, सबसे ठंडा महीना >18°C), B (शुष्क, वाष्पीकरण > वर्षा), C (शीतोष्ण/मध्य तापीय, सबसे ठंडा महीना -3°C से 18°C, सबसे गर्म >10°C), D (शीत/सूक्ष्म तापीय, सबसे ठंडा < -3°C, सबसे गर्म >10°C), E (ध्रुवीय, सबसे गर्म <10°C)। द्वितीय अक्षर - f (आर्द्र, वर्षभर वर्षा), m (मानसूनी), w (शीतकाल शुष्क), s (ग्रीष्मकाल शुष्क), S (स्टेपी), W (मरुस्थल), T (टुंड्रा), F (हिम टोपी)। तृतीय अक्षर - h (गर्म), k (ठंडा), a (ग्रीष्म गर्म), b (ग्रीष्म ठंडा), c (ग्रीष्म छोटा)
मुख्य कोड: Af (उष्णकटिबंधीय वर्षा वन), Am (मानसूनी), Aw (सवाना), BWh (गर्म मरुस्थल), BWk (ठंडा मरुस्थल), BSh (गर्म स्टेपी), BSk (ठंडा स्टेपी), Csa (भूमध्यसागरीय गर्म ग्रीष्म), Cfb (समुद्री पश्चिमी तट), Df (आर्द्र महाद्वीपीय), ET (टुंड्रा), EF (हिम टोपी)
थार्नथवेट वर्गीकरण (1931, 1948): आधार - वर्षा प्रभाविता (P/E Ratio = वर्षा/वाष्पीकरण), तापीय दक्षता (T/E = तापमान/वाष्पीकरण) और जल बजट (वर्षा - वाष्पन = जल अधिशेष/घाटा)। 1948 में संभावित वाष्पोत्सर्जन (Potential Evapotranspiration - PET) को आधार बनाया। जलवायु प्रकार - A (अति आर्द्र), B (आर्द्र), C2/C1 (उप-आर्द्र), D (अर्ध-शुष्क), E (शुष्क)। अधिक वैज्ञानिक पर गणना जटिल
प्रमुख जलवायु: उष्णकटिबंधीय Af - 0-10° अक्षांश, वार्षिक वर्षा >200 सेमी, तापमान 27°C, अमेजन-कांगो। BWh - 20-35° उपोष्ण उच्च में, वर्षा <25 सेमी, तापमान 35-40°C, सहारा-थार। Csa भूमध्यसागरीय - 30-45° पश्चिमी तट, ग्रीष्म शुष्क 28°C, शीतकाल आर्द्र 10°C, वर्षा 40-80 सेमी शीतकाल में, जैतून, अंगूर
1. कोपेन का जलवायु वर्गीकरण - 5 मुख्य समूह और कोड प्रणाली
आधार और सिद्धांत: कोपेन ने वनस्पति को जलवायु का सर्वोत्तम सूचक माना क्योंकि वनस्पति तापमान और वर्षा का एकीकृत परिणाम है। वर्गीकरण 5 मुख्य समूहों में - प्रत्येक समूह को बड़े अक्षर से, द्वितीय अक्षर वर्षा वितरण और तृतीय अक्षर तापमान विशेषता को दर्शाता है।
(i) A - उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु: सबसे ठंडे महीने का औसत तापमान >18°C, वार्षिक वर्षा अधिक। उप-प्रकार - Af (Tropical Rainforest, f=Feucht=आर्द्र, वर्षभर वर्षा, सबसे शुष्क महीना >6 सेमी, अमेजन, कांगो, पश्चिमी घाट), Am (Tropical Monsoon, m=Monsoon, छोटा शुष्क मौसम पर वार्षिक वर्षा अधिक कि वन बना रहे, भारत का पश्चिमी घाट, असम, कोंगो तट), Aw (Tropical Savanna, w=Winter dry, शीतकाल शुष्क, ग्रीष्म में वर्षा, अफ्रीकी सवाना, मध्य भारत)।
(ii) B - शुष्क जलवायु: वाष्पीकरण > वर्षा। सूत्र - यदि वर्षा 70% ग्रीष्म में तो B की सीमा = 2T+28, यदि 70% शीत में तो 2T, अन्यथा 2T+14 (T=वार्षिक औसत तापमान °C, सीमा सेमी में)। उप-प्रकार - BW (W=Wuste=मरुस्थल, वर्षा < सीमा का आधा), BS (S=Steppe=स्टेपी, वर्षा सीमा के आधे से अधिक पर सीमा से कम)। h=heiss=गर्म (वार्षिक औसत >18°C) और k=kalt=ठंडा (<18°C)। इसलिए BWh (गर्म मरुस्थल - सहारा, थार, अरब, वर्षा <25 सेमी, तापमान 40°C), BWk (ठंडा मरुस्थल - गोबी, लद्दाख), BSh (गर्म स्टेपी - थार का पूर्वी भाग), BSk (ठंडा स्टेपी - मध्य एशिया)।
(iii) C - शीतोष्ण आर्द्र/मध्य तापीय: सबसे ठंडे महीने का औसत -3°C से 18°C, सबसे गर्म >10°C। s=ग्रीष्म शुष्क, w=शीत शुष्क, f=वर्षभर वर्षा। a=गर्म ग्रीष्म (सबसे गर्म >22°C), b=ठंडा ग्रीष्म (<22°C)। Csa (भूमध्यसागरीय गर्म ग्रीष्म - भूमध्यसागर, कैलिफोर्निया, दक्षिण-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया, ग्रीष्म शुष्क), Cfb (समुद्री पश्चिमी तट - पश्चिमी यूरोप, वर्षभर वर्षा)।
(iv) D - शीत/सूक्ष्म तापीय महाद्वीपीय: सबसे ठंडे महीने का औसत <-3°C, सबसे गर्म >10°C। Df (वर्षभर वर्षा - साइबेरिया), Dw (शीत शुष्क - उत्तर-पूर्व एशिया)।
(v) E - ध्रुवीय: सबसे गर्म महीने का औसत <10°C। ET (T=Tundra, 0-10°C), EF (F=Frost=हिम टोपी, <0°C, अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड)। भारत में कोपेन के अनुसार - पश्चिमी घाट और असम में Am, अधिकांश भारत में Aw (सवाना/मानसूनी), थार में BWh, जम्मू-कश्मीर में Dfc और ET।
2. थार्नथवेट का वर्गीकरण - जल बजट पर आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण
1931 का वर्गीकरण: आधार - वर्षा प्रभाविता (Precipitation Effectiveness) = P/E अनुपात, जहाँ P=मासिक वर्षा, E=मासिक वाष्पीकरण। P/E के आधार पर 5 आर्द्रता प्रदेश - A (अति आर्द्र, P/E >128), B (आर्द्र, 64-127), C (उप-आर्द्र, 32-63), D (अर्ध-शुष्क, 16-31), E (शुष्क, <16)। दूसरा आधार - तापीय दक्षता T/E = (T-32)/4, जहाँ T=तापमान °F।
1948 का संशोधित वर्गीकरण - जल बजट: अधिक वैज्ञानिक, संभावित वाष्पोत्सर्जन (PET - Potential Evapotranspiration) को आधार बनाया - वह वाष्पीकरण जो पर्याप्त जल मिलने पर होता। PET तापमान और दिन की लंबाई से निकाला जाता है। आर्द्रता सूचकांक Im = (100×S - 60×D)/PET, जहाँ S=जल अधिशेष (Surplus), D=जल घाटा (Deficit)। Im के आधार पर - A (अति आर्द्र, Im>100), B4/B3/B2/B1 (आर्द्र), C2/C1 (उप-आर्द्र), D (अर्ध-शुष्क), E (शुष्क)। तापीय आधार पर PET से - A' (मेगाथर्मल, PET>114 सेमी), B'4-B'1 (मेसोथर्मल), C'2/C'1 (माइक्रोथर्मल), D' (टुंड्रा), E' (हिम)। तीसरा अक्षर - वर्षा का मौसमी वितरण (r=वर्षभर, s=ग्रीष्म में कमी, w=शीत में कमी, d=कमी)।
कोपेन और थार्नथवेट में अंतर: कोपेन सरल, वनस्पति आधारित, मानचित्रण आसान, इसलिए अधिक प्रचलित। थार्नथवेट वैज्ञानिक, जल बजट और कृषि के लिए उपयोगी, पर गणना जटिल। UPSC में थार्नथवेट का PET सिद्धांत और कोपेन का BWh, Csa कोड पूछा जाता है।
3. प्रमुख जलवायु प्रकार - उष्णकटिबंधीय, मरुस्थलीय और भूमध्यसागरीय
(i) उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु (A - Af, Am, Aw): 0-25° अक्षांश में, सूर्य सीधा। Af (वर्षा वन) - 0-10° में, वर्षा >200 सेमी, 80% आर्द्रता, तापमान 27°C स्थिर, दैनिक तापांतर वार्षिक से अधिक, मिट्टी लैटेराइट, वन - महोगनी, रोजवुड, जैव विविधता सर्वाधिक। Am (मानसूनी) - 10-25° में, वर्षा 150-250 सेमी, 3 ऋतुएँ, सागौन, साल। Aw (सवाना) - 10-25° में, वर्षा 50-150 सेमी, 6-8 महीने शुष्क, घास-वृक्ष मिश्रित, अफ्रीकी सवाना, भारत का अधिकांश भाग Aw ही है।
(ii) मरुस्थलीय जलवायु (B - BWh, BWk): 20-35° में उपोष्ण उच्च दाब (Horse Latitudes) में अवतलन से। BWh गर्म मरुस्थल - वर्षा <25 सेमी, तापमान ग्रीष्म में 40-50°C (अल अजीजिया में 58°C), शीत में 10°C, दैनिक तापांतर 30°C, मिट्टी सिएरोजम, वनस्पति कैक्टस, खजूर। विश्व - सहारा (9 मिलियन किमी², सबसे बड़ा), अरब, थार (2,38,000 किमी²)। BWk ठंडा मरुस्थल - गोबी, तिब्बत, लद्दाख, शीतकाल -20°C।
(iii) भूमध्यसागरीय जलवायु (Csa, Csb): 30-45° में महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर, उपोष्ण उच्च का मौसमी खिसकाव कारण। ग्रीष्म शुष्क (उपोष्ण उच्च उत्तर खिसकता है), शीतकाल आर्द्र (पछुआ पवन दक्षिण आती है)। तापमान - ग्रीष्म 25-28°C, शीत 8-10°C, वर्षा 40-80 सेमी, 70% शीत में। मिट्टी - टेरा रोसा, वनस्पति - जैतून, अंगूर, नींबू, कॉर्क ओक - शुष्क ग्रीष्म अनुकूल, पत्तियाँ मोटी, चमकदार। कृषि - विश्व की 80% जैतून और अंगूर यहीं, शराब उद्योग। क्षेत्र - भूमध्यसागर तट, कैलिफोर्निया, मध्य चिली, दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका (केपटाउन), दक्षिण-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया। इसे आदर्श जलवायु कहते हैं। भारत में भूमध्यसागरीय जलवायु नहीं मिलती।
| जलवायु प्रकार | कोपेन कोड | तापमान / वर्षा | वनस्पति / मिट्टी / क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय वर्षा वन | Af | 27°C स्थिर, वर्षा >200 सेमी वर्षभर | महोगनी, लैटेराइट, अमेजन-कांगो-पश्चिमी घाट |
| सवाना / मानसूनी | Aw / Am | 25°C, वर्षा 50-250 सेमी, ग्रीष्म में अधिक | घास + सागौन, लैटेराइट, अफ्रीका-भारत अधिकांश |
| गर्म मरुस्थल | BWh | 40°C ग्रीष्म, वर्षा <25 सेमी, दैनिक तापांतर 30°C | कैक्टस, सिएरोजम, सहारा-थार-अरब |
| भूमध्यसागरीय | Csa | ग्रीष्म 28°C शुष्क, शीत 10°C आर्द्र, वर्षा 40-80 सेमी शीत में | जैतून-अंगूर, टेरा रोसा, भूमध्यसागर-कैलिफोर्निया |
Quick Revision - UPSC Prelims/Mains के लिए
- कोपेन 5 समूह - A (>18°C ठंडा महीना), B (वाष्पीकरण > वर्षा), C (-3°C से 18°C), D (<-3°C), E (<10°C गर्म महीना) - तापमान से याद रखें।
- कोपेन कोड - f=वर्षभर वर्षा, m=मानसूनी, w=शीत शुष्क, s=ग्रीष्म शुष्क, W=मरुस्थल, S=स्टेपी, h=गर्म, k=ठंडा - BWh = गर्म मरुस्थल, Csa = भूमध्यसागरीय गर्म ग्रीष्म शुष्क।
- थार्नथवेट का आधार जल बजट - P/E और PET, अधिक वैज्ञानिक पर जटिल, कोपेन वनस्पति आधारित सरल इसलिए अधिक प्रचलित।
- उष्णकटिबंधीय Af में दैनिक तापांतर वार्षिक से अधिक, BWh में दैनिक 30°C, Csa में ग्रीष्म शुष्क-शीत आर्द्र - यही 3 मुख्य अंतर।
- भारत में - Af/Am पश्चिमी घाट-असम में, Aw अधिकांश भारत में (मानसूनी सवाना), BWh थार में, Cwg (गंगा मैदान - शीत शुष्क) कोपेन में Aw का ही रूप।
- भूमध्यसागरीय Csa 30-45° पश्चिमी तट पर, उपोष्ण उच्च के खिसकाव से - ग्रीष्म शुष्क, शीत आर्द्र, जैतून-अंगूर-शराब के लिए आदर्श, भारत में नहीं मिलता।
- UPSC ट्रिक - कोपेन में B की सीमा = 2T+14/28, BWh गर्म मरुस्थल सहारा-थार, BWk ठंडा मरुस्थल गोबी-लद्दाख, ET टुंड्रा (0-10°C), EF हिम टोपी (<0°C)।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. कोपेन के A, B, C, D, E में B सबसे अलग क्यों है और BWh, BSh में क्या अंतर है?
A. A, C, D, E तापमान पर आधारित हैं (ठंडे महीने का तापमान), जबकि B वर्षा-वाष्पीकरण संतुलन पर - वर्षा < वाष्पीकरण होने पर B, चाहे तापमान कुछ भी हो। BWh (W=Wuste=मरुस्थल, h=heiss=गर्म) - वर्षा सीमा के आधे से भी कम (<25 सेमी), वार्षिक औसत >18°C, जैसे सहारा, थार। BSh (S=Steppe=स्टेपी, h=गर्म) - वर्षा सीमा के आधे से अधिक पर सीमा से कम (25-50 सेमी), स्टेपी घास, जैसे थार का पूर्वी भाग, सौराष्ट्र। BWh में मरुस्थल, BSh में अर्ध-मरुस्थल। k=ठंडा (<18°C) होने पर BWk, BSk - गोबी, मध्य एशिया।
Q2. थार्नथवेट का वर्गीकरण कोपेन से अधिक वैज्ञानिक क्यों कहा जाता है?
A. कोपेन ने वनस्पति और मासिक औसत तापमान-वर्षा से वर्गीकरण किया, जो सरल है पर वाष्पीकरण को सीधे नहीं नापता। थार्नथवेट ने जल बजट - वर्षा (P), वाष्पोत्सर्जन (PET), जल अधिशेष (S) और घाटा (D) को आधार बनाया - Im = (100×S - 60×D)/PET। इससे कृषि के लिए जल की उपलब्धता, सिंचाई आवश्यकता और सूखा का सटीक पता चलता है। इसलिए कृषि जलवायु वर्गीकरण में थार्नथवेट अधिक उपयोगी, पर गणना जटिल होने से कोपेन अधिक प्रचलित है। UPSC में थार्नथवेट का PET सिद्धांत पूछा जाता है।
Q3. भूमध्यसागरीय जलवायु में ग्रीष्म शुष्क और शीत आर्द्र क्यों होता है?
A. 30-45° अक्षांश में उपोष्ण उच्च दाब पेटी ग्रीष्म में उत्तर खिसककर 40°N तक आ जाती है, इसलिए भूमध्यसागरीय क्षेत्र (35°N) उच्च दाब के अधीन - वायु अवतलन, शुष्क, तापमान 28°C। शीतकाल में उपोष्ण उच्च दक्षिण खिसककर 25°N पर चला जाता है और पछुआ पवन (Westerlies) 35°N तक आ जाती है, समुद्र से आर्द्रता लाकर 70% वर्षा शीत में करती है, तापमान 10°C। इसलिए Csa में s=ग्रीष्म शुष्क। यही कारण है कि जैतून, अंगूर ग्रीष्म शुष्क अनुकूल हैं - पत्तियाँ मोटी, जड़ें गहरी, ग्रीष्म में फल पकते हैं, शीत में वर्षा से बढ़ते हैं।
Q4. भारत में कौन-कौन से कोपेन जलवायु प्रकार मिलते हैं और थार मरुस्थल BWh क्यों है?
A. भारत में मुख्यतः 4 प्रकार - Am (उष्णकटिबंधीय मानसूनी - पश्चिमी घाट, असम, वर्षा >200 सेमी), Aw (सवाना/मानसूनी - अधिकांश भारत, वर्षा 50-150 सेमी, शीत शुष्क, Cwg भी Aw का रूप), BWh (गर्म मरुस्थल - थार, वर्षा <25 सेमी, 40°C), Dfc/ET (शीत/टुंड्रा - हिमालय, लद्दाख)। थार BWh है क्योंकि यहाँ वार्षिक वर्षा 15-25 सेमी, वाष्पीकरण 200 सेमी से अधिक, P/E <0.2, वार्षिक औसत तापमान 25°C (>18°C इसलिए h), उपोष्ण उच्च और अरावली के समानांतर होने से आर्द्रता नहीं। इसलिए BWh - गर्म मरुस्थल। BSh थार के पूर्वी किनारे (हरियाणा-राजस्थान सीमा) में जहाँ वर्षा 30-40 सेमी।