छंद की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण - संपूर्ण जानकारी

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छंद की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण - संपूर्ण जानकारी - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

छंद किसे कहते हैं, छंद के प्रकार मात्रिक छंद, वर्णिक छंद, दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला, कुंडलिया, छप्पय की परिभाषा, नियम और उदाहरण सहित।

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प्रश्न 1

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💡 व्याख्या

छंद की परिभाषा

वर्णों या मात्राओं की नियमित संख्या, क्रम, गति और यति से व्यवस्थित रचना को छंद कहते हैं। छंद में लय और संगीत होता है। छंदबद्ध रचना में पद्य में नाद सौंदर्य उत्पन्न होता है। छंद कविता का महत्वपूर्ण अंग है। छंद के बिना कविता में लय नहीं आती है। छंद शब्द की उत्पत्ति छद् धातु से हुई है, जिसका अर्थ है प्रसन्न करना। छंद कविता को प्रसन्न करता है और उसे संगीतात्मक बनाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में छंद से प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं, इसलिए इसका ज्ञान आवश्यक माना जाता है।

छंद के अंग

छंद के कई अंग होते हैं, जिनके ज्ञान से छंद की पहचान होती है।

1. वर्ण और मात्रा

वर्ण दो प्रकार के होते हैं, ह्रस्व और दीर्घ। ह्रस्व वर्ण की एक मात्रा होती है और दीर्घ वर्ण की दो मात्राएँ होती हैं। जैसे अ, इ, उ ह्रस्व हैं और आ, ई, ऊ दीर्घ हैं। मात्रा के आधार पर छंद के भेद होते हैं। मात्रा की गणना से छंद की पहचान होती है। मात्रा छंद का मूल आधार है और इसका अभ्यास आवश्यक है।

2. चरण और यति

छंद की प्रत्येक पंक्ति को चरण कहा जाता है। चरण को पद भी कहते हैं। छंद में चार चरण होते हैं। पहले और तीसरे चरण को विषम चरण कहते हैं और दूसरे और चौथे चरण को सम चरण कहते हैं। यति का अर्थ है विराम। छंद पढ़ते समय जहाँ थोड़ा रुकना पड़ता है, उसे यति कहते हैं। यति से छंद में लय आती है और अर्थ स्पष्ट होता है।

3. गति और लय

छंद में गति और लय होती है। गति का अर्थ है प्रवाह और लय का अर्थ है संगीतात्मकता। छंद में गति और लय से कविता में सौंदर्य आता है। गति और लय के बिना छंद फीका लगता है। इसलिए कवि छंद में गति और लय का ध्यान रखते हैं। गति और लय से छंद में नाद सौंदर्य उत्पन्न होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: छंद के दो मुख्य भेद होते हैं, मात्रिक छंद और वर्णिक छंद। मात्रिक छंद में मात्राओं की गणना होती है और वर्णिक छंद में वर्णों की गणना होती है। दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला, कुंडलिया मात्रिक छंद हैं और इंद्रवज्रा, उपेंद्रवज्रा वर्णिक छंद हैं। दोहा में तेरह ग्यारह मात्राएँ होती हैं और चौपाई में सोलह मात्राएँ होती हैं। यह नियम परीक्षा में पूछा जाता है।

छंद के मुख्य भेद

1. मात्रिक छंद

जिस छंद में मात्राओं की गणना की जाती है, उसे मात्रिक छंद कहते हैं। मात्रिक छंद में लघु और गुरु मात्राओं की गिनती होती है। दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला, कुंडलिया, छप्पय मात्रिक छंद के उदाहरण हैं। मात्रिक छंद हिंदी में अधिक प्रयोग होते हैं। मात्रिक छंद में मात्राओं का क्रम निश्चित होता है। दोहा मात्रिक छंद का सबसे प्रसिद्ध छंद है और इसमें तेरह ग्यारह मात्राएँ होती हैं।

2. वर्णिक छंद

जिस छंद में वर्णों की गणना की जाती है, उसे वर्णिक छंद कहते हैं। वर्णिक छंद में वर्णों की संख्या निश्चित होती है। इंद्रवज्रा, उपेंद्रवज्रा, वसंततिलका वर्णिक छंद के उदाहरण हैं। वर्णिक छंद संस्कृत से हिंदी में आए हैं। वर्णिक छंद में वर्णों का क्रम निश्चित होता है और इसमें गणों का प्रयोग होता है। वर्णिक छंद में लघु और गुरु वर्णों का क्रम निश्चित होता है।

प्रमुख मात्रिक छंदों की जानकारी

1. दोहा छंद

दोहा मात्रिक छंद है। दोहा में चार चरण होते हैं। पहले और तीसरे चरण में तेरह तेरह मात्राएँ होती हैं और दूसरे और चौथे चरण में ग्यारह ग्यारह मात्राएँ होती हैं। दोहा में कुल अड़तालीस मात्राएँ होती हैं। जैसे रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय, टूटे से फिर ना जुड़े जुड़े गाँठ पड़ जाय। दोहा में तेरह ग्यारह का क्रम होता है और यह अर्ध सम मात्रिक छंद है। दोहा बहुत प्रसिद्ध छंद है।

2. सोरठा छंद

सोरठा दोहा का उल्टा होता है। सोरठा में पहले और तीसरे चरण में ग्यारह ग्यारह मात्राएँ होती हैं और दूसरे और चौथे चरण में तेरह तेरह मात्राएँ होती हैं। सोरठा में भी कुल अड़तालीस मात्राएँ होती हैं। जैसे सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे, बिहँसे करुना ऐन चितइ जानकी लखन तन। सोरठा दोहा का विलोम है और यह भी अर्ध सम मात्रिक छंद है।

3. चौपाई छंद

चौपाई मात्रिक छंद है। चौपाई में चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में सोलह सोलह मात्राएँ होती हैं। चौपाई में कुल चौंसठ मात्राएँ होती हैं। जैसे बंदउँ गुरु पद पदुम परागा, सुरुचि सुबास सरस अनुरागा। चौपाई में सोलह मात्राएँ होती हैं और यह सम मात्रिक छंद है। रामचरितमानस में चौपाई छंद का प्रयोग हुआ है और यह बहुत प्रसिद्ध छंद है।

4. रोला छंद

रोला मात्रिक छंद है। रोला में चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में चौबीस चौबीस मात्राएँ होती हैं। रोला में ग्यारह और तेरह पर यति होती है। रोला में कुल छियानबे मात्राएँ होती हैं। जैसे नीलाम्बर परिधान हरित पट पर सुंदर है, सूर्य चंद्र युग मणि तुल्य प्रभा। रोला सम मात्रिक छंद है और इसमें चौबीस मात्राएँ होती हैं। रोला भी प्रसिद्ध छंद है।

5. कुंडलिया छंद

कुंडलिया दोहा और रोला का मिश्रण है। कुंडलिया में छह चरण होते हैं। पहले दो चरण दोहा के होते हैं और बाद के चार चरण रोला के होते हैं। कुंडलिया में दोहा का पहला शब्द रोला के अंत में आता है। जैसे दोहा रोला का मिश्रण कुंडलिया कहलाता है। कुंडलिया विषम मात्रिक छंद है और यह बहुत चमत्कारी छंद माना जाता है।

छंदों के प्रकार और नियम तालिका

छंद का नाममात्राएँयति और नियमउदाहरण
दोहा13, 11, 13, 11कुल 48 मात्राएँ, अर्ध समरहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय
सोरठा11, 13, 11, 13कुल 48 मात्राएँ, दोहा का उल्टासुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे
चौपाई16, 16, 16, 16कुल 64 मात्राएँ, सम मात्रिकबंदउँ गुरु पद पदुम परागा
रोला24, 24, 24, 24कुल 96 मात्राएँ, 11, 13 पर यतिनीलाम्बर परिधान हरित पट पर सुंदर है
कुंडलियादोहा + रोला6 चरण, दोहा रोला मिश्रणदोहा रोला मिश्रण से बनता है
छप्पयरोला + उल्लाला6 चरण, 4 रोला 2 उल्लालारोला और उल्लाला का मिश्रण

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

छंद की पहचान के लिए मात्राओं की गणना करना सीखना आवश्यक है। लघु की एक मात्रा और गुरु की दो मात्राएँ होती हैं। दोहा में तेरह ग्यारह, सोरठा में ग्यारह तेरह, चौपाई में सोलह और रोला में चौबीस मात्राएँ होती हैं। कुंडलिया में दोहा रोला का मिश्रण होता है। प्रतिदिन पाँच छंदों की मात्राओं की गणना करने से छंद में दक्षता प्राप्त होती है और परीक्षा में प्रश्न आसानी से हल होते हैं।