कारक की परिभाषा, भेद और उदाहरण

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कारक की परिभाषा, भेद और उदाहरण - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

कारक किसे कहते हैं, कारक के 8 भेद, विभक्ति चिह्न और उदाहरणों की संपूर्ण व्याख्या। यूपीपीएससी आरओ एआरओ, यूपी पुलिस, एसएससी जीडी और सीटेट परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

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प्रश्न 1

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💡 व्याख्या

कारक की परिभाषा

वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं। कारक के द्वारा ही यह पता चलता है कि क्रिया को करने वाला कौन है, क्रिया का प्रभाव किस पर पड़ रहा है, क्रिया किस साधन से पूरी हो रही है और क्रिया किसके लिए हो रही है। हिंदी में इस संबंध को प्रकट करने के लिए विभक्ति चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। कारक के सही ज्ञान के बिना शुद्ध और सार्थक वाक्य की रचना संभव नहीं है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कारक और विभक्ति में अंतर

सामान्यतः विद्यार्थी कारक और विभक्ति को एक ही मान लेते हैं, परंतु दोनों में स्पष्ट अंतर है। कारक का अर्थ है संबंध, जबकि विभक्ति उस संबंध को व्यक्त करने वाला चिह्न है। जैसे- राम ने पुस्तक पढ़ी। यहाँ राम का पढ़ना क्रिया के साथ कर्ता के रूप में संबंध है, यह कारक है और ने शब्द विभक्ति चिह्न है। इसी प्रकार को, से, के लिए, में, पर आदि विभक्ति चिह्न हैं जो विभिन्न कारकों का बोध कराते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: संस्कृत व्याकरण में छह कारक ही माने गए हैं, क्योंकि संबंध और संबोधन को कारक नहीं माना जाता। हिंदी में आठ कारक माने जाते हैं। कर्ता कारक के चिह्न ने का प्रयोग केवल भूतकाल की सकर्मक क्रिया में होता है, वर्तमान और भविष्य में नहीं। संबंध कारक का क्रिया से सीधा संबंध नहीं होता, बल्कि उसका संबंध संज्ञा से होता है।

कारक के भेद

हिंदी व्याकरण में कारक के आठ भेद निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक भेद की पहचान उसके विभक्ति चिह्न और वाक्य में उसकी भूमिका से होती है।

1. कर्ता कारक

जो क्रिया को करता है, उसे कर्ता कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न ने है, जो केवल भूतकाल में आता है। जैसे- मोहन ने खाना खाया।

2. कर्म कारक

जिस पर क्रिया का फल या प्रभाव पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं। इसका चिह्न को है। जैसे- सीता ने पुस्तक को पढ़ा।

3. करण कारक

जिस साधन से क्रिया पूरी होती है, उसे करण कहते हैं। इसके चिह्न से और के द्वारा हैं। जैसे- वह कलम से लिखता है।

4. संप्रदान कारक

जिसके लिए क्रिया की जाती है या जिसे कुछ दिया जाता है, उसे संप्रदान कहते हैं। इसके चिह्न के लिए, को, के हेतु हैं। जैसे- गरीबों के लिए वस्त्र लाओ।

5. अपादान कारक

जहाँ अलग होने का भाव हो, उसे अपादान कहते हैं। इसका चिह्न से है। जैसे- पेड़ से पत्ता गिरा।

6. संबंध कारक

जहाँ एक संज्ञा का दूसरी संज्ञा से संबंध बताया जाए। इसके चिह्न का, के, की, रा, रे, री हैं। जैसे- यह राम की पुस्तक है।

7. अधिकरण कारक

जो क्रिया के आधार या स्थान का बोध कराए, उसे अधिकरण कहते हैं। इसके चिह्न में, पर, ऊपर हैं। जैसे- मेज पर पुस्तक रखी है।

8. संबोधन कारक

जिस संज्ञा को पुकारा या संबोधित किया जाए। इसके चिह्न हे, अरे, ओ हैं। जैसे- हे ईश्वर, हमारी रक्षा करो।

कारक विभक्ति चिह्नों की तालिका

कारक का नामविभक्तिचिह्नउदाहरण
कर्ताप्रथमानेराम ने कार्य किया
कर्मद्वितीयाकोमाता ने पुत्र को बुलाया
करणतृतीयासे, द्वारावह बस से आया
संप्रदानचतुर्थीके लिए, कोभूखे को भोजन दो
अपादानपंचमीसेगंगा हिमालय से निकलती है
संबंधषष्ठीका, की, केयह मेरी कलम है
अधिकरणसप्तमीमें, परघर में सभी हैं
संबोधनसंबोधनहे, अरेअरे मित्र, इधर आओ

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष ध्यान देने योग्य बातें

परीक्षा में अक्सर करण और अपादान दोनों में से चिह्न से आने से भ्रम होता है। यदि साधन का अर्थ है तो करण होगा और यदि अलगाव का अर्थ है तो अपादान होगा। इसी प्रकार कर्म और संप्रदान दोनों में को चिह्न आता है, परंतु कर्म में क्रिया का फल पड़ता है जबकि संप्रदान में देने का भाव होता है। इन सूक्ष्म अंतरों को उदाहरणों के साथ समझना आवश्यक है।