समास की परिभाषा, भेद और उदाहरण

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समास की परिभाषा, भेद और उदाहरण - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

समास किसे कहते हैं, समास के प्रकार तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि और अव्ययीभाव समास की संपूर्ण जानकारी उदाहरण सहित।

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💡 व्याख्या

समास की परिभाषा

दो या दो से अधिक शब्दों के परस्पर मेल से जो नया सार्थक शब्द बनता है, उसे समास कहते हैं। समास शब्द का अर्थ है संक्षेप। भाषा में संक्षिप्तता लाने और कम शब्दों में अधिक अर्थ व्यक्त करने के लिए समास का प्रयोग किया जाता है। जैसे राजा का पुत्र मिलकर राजपुत्र बन जाता है। यहाँ दो शब्दों को जोड़कर एक नया शब्द बनाया गया है। समास में बने हुए शब्द को समस्त पद कहा जाता है और उसे तोड़ने की प्रक्रिया को विग्रह कहा जाता है। समास का ज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

समास विग्रह क्या है

समस्त पद को पुनः उसके मूल शब्दों में अलग-अलग करना समास विग्रह कहलाता है। जैसे राजपुत्र का विग्रह राजा का पुत्र होगा। विग्रह से समास के अर्थ को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। परीक्षा में समस्त पद देकर समास का नाम पूछा जाता है और कभी विग्रह देकर समस्त पद बनवाया जाता है। इसलिए समास और विग्रह दोनों का अभ्यास आवश्यक है। विग्रह में कारक चिह्नों का प्रयोग होता है, जिससे समास के भेद को पहचानना सरल हो जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: संधि वर्णों में होती है, जबकि समास शब्दों में होता है। संधि को तोड़ना विच्छेद कहलाता है और समास को तोड़ना विग्रह कहलाता है। समास में प्रथम पद को पूर्वपद और द्वितीय पद को उत्तरपद कहा जाता है। जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो उसे तत्पुरुष और जहाँ दोनों पद प्रधान हों उसे द्वंद्व कहते हैं।

समास के मुख्य भेद

हिंदी व्याकरण में समास के छह मुख्य भेद माने गए हैं। प्रत्येक भेद की अपनी अलग पहचान और नियम है।

1. तत्पुरुष समास

जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद गौण होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें कारक चिह्नों का लोप हो जाता है। जैसे राजपुत्र का अर्थ है राजा का पुत्र, यहाँ पुत्र प्रधान है। तत्पुरुष समास के कई उपभेद होते हैं, जैसे कर्म तत्पुरुष, करण तत्पुरुष, संप्रदान तत्पुरुष, अपादान तत्पुरुष, संबंध तत्पुरुष और अधिकरण तत्पुरुष। कारक के आधार पर इसका नामकरण होता है और यह सबसे अधिक प्रयोग होने वाला समास है।

2. कर्मधारय समास

जिस समास में दोनों पदों में विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है या उपमान और उपमेय का संबंध होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। जैसे नीलकमल का अर्थ है नीला है जो कमल, यहाँ नील विशेषण है और कमल विशेष्य है। महापुरुष, चरणकमल जैसे शब्द कर्मधारय के उदाहरण हैं। कर्मधारय में एक पद विशेषण होता है और दूसरा विशेष्य होता है और दोनों का संबंध स्पष्ट होता है।

3. द्विगु समास

जिस समास में पूर्वपद संख्या हो और समस्त पद समूह या समाहार का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे चौराहा का अर्थ है चार राहों का समूह। त्रिभुवन, पंचवटी, नवरात्र जैसे शब्द द्विगु समास के उदाहरण हैं। द्विगु कर्मधारय का ही एक उपभेद है, परंतु संख्या की प्रधानता होने से इसे अलग भेद माना जाता है। इसका विग्रह करते समय समूह या समाहार शब्द का प्रयोग होता है।

4. द्वंद्व समास

जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर और या अथवा शब्द लगते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। जैसे माता पिता का विग्रह माता और पिता होगा। राम लक्ष्मण, सुख दुख, पाप पुण्य इसके उदाहरण हैं। द्वंद्व में दोनों पदों का महत्व समान होता है और कोई भी गौण नहीं होता। इसलिए इसे उभयपद प्रधान समास भी कहा जाता है और इसमें दोनों पदों को समान महत्व दिया जाता है।

5. बहुव्रीहि समास

जिस समास में कोई भी पद प्रधान न हो और समस्त पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करे, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे दशानन का अर्थ है दश हैं आनन जिसके, अर्थात रावण। पीतांबर का अर्थ है पीत है अंबर जिसका, अर्थात कृष्ण। बहुव्रीहि में समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का विशेषण बन जाता है। इसलिए इसे अन्यपद प्रधान समास भी कहा जाता है और इसका अर्थ प्रतीकात्मक होता है।

6. अव्ययीभाव समास

जिस समास में पूर्वपद अव्यय हो और समस्त पद अव्यय के रूप में प्रयोग हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। जैसे यथाशक्ति का अर्थ है शक्ति के अनुसार। आजीवन, प्रतिदिन, भरपेट इसके उदाहरण हैं। अव्ययीभाव में समस्त पद क्रिया विशेषण के रूप में कार्य करता है और इसमें पहला पद उपसर्ग या अव्यय होता है। यह समास क्रिया की विशेषता बताता है।

समास के भेद और उदाहरण तालिका

समास का नामपहचानउदाहरणविग्रह
तत्पुरुष समासउत्तरपद प्रधान, कारक चिह्न का लोपराजपुत्र, जलधाराराजा का पुत्र, जल की धारा
कर्मधारय समासविशेषण विशेष्य संबंधनीलकमल, महापुरुषनीला है जो कमल, महान है जो पुरुष
द्विगु समासपूर्वपद संख्या, समूह का बोधचौराहा, त्रिभुवनचार राहों का समूह, तीन भुवनों का समूह
द्वंद्व समासदोनों पद प्रधान, और का प्रयोगमाता पिता, सुख दुखमाता और पिता, सुख और दुख
बहुव्रीहि समासअन्यपद प्रधान, तीसरे का बोधदशानन, पीतांबरदश हैं आनन जिसके, पीत है अंबर जिसका
अव्ययीभाव समासपूर्वपद अव्यय, अव्यय के रूप में प्रयोगयथाशक्ति, प्रतिदिनशक्ति के अनुसार, दिन दिन

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

समास की पहचान के लिए विग्रह करना सीखना आवश्यक है। यदि विग्रह में का, की, के आए तो तत्पुरुष, यदि विशेषण विशेष्य आए तो कर्मधारय, यदि संख्या और समूह आए तो द्विगु, यदि और आए तो द्वंद्व, यदि जिसका अर्थ आए तो बहुव्रीहि और यदि अनुसार, भर, प्रति जैसे अव्यय आए तो अव्ययीभाव समझना चाहिए। प्रतिदिन दस समस्त पदों का विग्रह करने से समास में दक्षता आती है।