संधि की परिभाषा, भेद और उदाहरण
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संधि किसे कहते हैं, संधि के प्रकार स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि के नियम और उदाहरणों की संपूर्ण जानकारी।
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💡 व्याख्या
संधि की परिभाषा
दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार या परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं। संधि शब्द का अर्थ है जोड़। जब दो शब्द या पद एक दूसरे के निकट आते हैं तो पहले शब्द के अंतिम वर्ण और दूसरे शब्द के प्रथम वर्ण में मेल होता है और एक नया रूप बन जाता है। इसी मेल को संधि कहा जाता है। संधि के ज्ञान से शब्दों की शुद्ध रचना और उच्चारण को समझना सरल हो जाता है और प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं।
संधि विच्छेद क्या है
संधि से बने हुए शब्द को पुनः उसके मूल रूप में अलग-अलग करना संधि विच्छेद कहलाता है। जैसे विद्यालय शब्द का विच्छेद विद्या + आलय होगा। संधि जोड़ने की प्रक्रिया है और विच्छेद तोड़ने की प्रक्रिया है। परीक्षा में संधि से शब्द बनाना और शब्द का विच्छेद करना दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए दोनों का अभ्यास आवश्यक है।
संधि के प्रकार
हिंदी व्याकरण में संधि के तीन मुख्य भेद माने गए हैं।
1. स्वर संधि
स्वर के साथ स्वर के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं। जैसे विद्या + आलय मिलकर विद्यालय बनता है। स्वर संधि के पाँच उपभेद होते हैं। दीर्घ संधि में एक ही स्वर के दो रूप मिलकर दीर्घ हो जाते हैं, जैसे अ + अ मिलकर आ। गुण संधि में अ या आ के बाद इ या उ आने पर ए या ओ हो जाता है। वृद्धि संधि में अ के बाद ए या ऐ आने पर ऐ और ओ या औ आने पर औ हो जाता है। यण संधि में इ के बाद भिन्न स्वर आने पर य और उ के बाद भिन्न स्वर आने पर व हो जाता है। अयादि संधि में ए, ऐ, ओ, औ के बाद भिन्न स्वर आने पर अय, आय, अव, आव हो जाता है।
2. व्यंजन संधि
व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। जैसे सत् + जन मिलकर सज्जन बनता है। व्यंजन संधि में पहला वर्ण व्यंजन होता है और उसमें परिवर्तन होता है। नियमों के अनुसार पहले वर्ण का तीसरे वर्ण में बदलना, न का ण में बदलना और त का च या ल में बदलना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। व्यंजन संधि के नियमों को समझने से शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखना सरल हो जाता है।
3. विसर्ग संधि
विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। जैसे मनः + रथ मिलकर मनोरथ बनता है। विसर्ग संधि में विसर्ग का ओ, र, श, स में परिवर्तन होता है। यदि विसर्ग से पहले अ हो और बाद में अ, घोष व्यंजन या अंतस्थ व्यंजन हो तो विसर्ग का ओ हो जाता है। यदि विसर्ग से पहले इ या उ हो और बाद में घोष वर्ण हो तो विसर्ग का र हो जाता है।
संधि के प्रमुख नियमों की तालिका
| संधि का प्रकार | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ स्वर संधि | अ + अ = आ, इ + इ = ई | धर्म + अर्थ = धर्मार्थ, मुनि + इंद्र = मुनींद्र |
| गुण स्वर संधि | अ + इ = ए, अ + उ = ओ | नर + इंद्र = नरेंद्र, महा + उत्सव = महोत्सव |
| वृद्धि स्वर संधि | अ + ए = ऐ, अ + ओ = औ | एक + एक = एकैक, महा + औषध = महौषध |
| यण स्वर संधि | इ + अ = य, उ + अ = व | यदि + अपि = यद्यपि, सु + आगत = स्वागत |
| व्यंजन संधि | त् + ज = ज्ज, सत् + चित् = सच्चित् | जगत् + नाथ = जगन्नाथ, उत् + चारण = उच्चारण |
| विसर्ग संधि | अः + अ = ओ, इः + घोष = र् | मनः + अनुकूल = मनोनुकूल, निः + धन = निर्धन |
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष सुझाव
परीक्षा में संधि से संबंधित प्रश्नों में प्रायः शब्द देकर संधि का नाम पूछा जाता है या विच्छेद पूछा जाता है। स्वर संधि में दीर्घ और गुण में भ्रम होता है। यदि एक ही स्वर मिले तो दीर्घ और यदि अ के साथ इ या उ मिले तो गुण समझना चाहिए। विसर्ग संधि में मनः और निः वाले शब्दों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। प्रतिदिन दस संधि और उनके विच्छेद का अभ्यास करने से इस विषय में दक्षता प्राप्त होती है।