वाच्य की परिभाषा, भेद और उदाहरण - संपूर्ण व्याकरण

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वाच्य की परिभाषा, भेद और उदाहरण - संपूर्ण व्याकरण - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

वाच्य किसे कहते हैं, वाच्य के कितने भेद होते हैं, वाच्य के प्रकार, नियम और उदाहरण सहित विस्तृत जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए।

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💡 व्याख्या

वाच्य किसे कहते हैं: परिभाषा, भेद और हिंदी व्याकरण में नियम

हिंदी व्याकरण में क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि वाक्य में कर्ता, कर्म और क्रिया के बीच क्या संबंध है और किसकी प्रधानता है, उसे वाच्य कहते हैं। वाच्य का शाब्दिक अर्थ बोलने का विषय है। वाच्य का सीधा संबंध क्रिया से होता है क्योंकि क्रिया के रूप परिवर्तन से ही पता चलता है कि क्रिया कर्ता के अनुसार चल रही है, कर्म के अनुसार या भाव के अनुसार। वाच्य बताता है कि वाक्य में मुख्य बल किस पर दिया जा रहा है - कर्ता पर, कर्म पर या भाव पर।

हिंदी में वाच्य के मुख्य रूप से तीन भेद माने गए हैं - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य। कर्तृवाच्य में क्रिया का संबंध कर्ता से होता है और क्रिया कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार चलती है, इसमें कर्ता की प्रधानता होती है जैसे राम पत्र लिखता है, मोहन पत्र लिखता है, वह पुस्तक पढ़ता है, सीता गाना गाती है। कर्मवाच्य में क्रिया का संबंध कर्म से होता है और क्रिया कर्म के लिंग, वचन के अनुसार चलती है, इसमें कर्म की प्रधानता होती है जैसे राम के द्वारा पत्र लिखा जाता है, उसके द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है, कर्मचारियों द्वारा फाइलें जमा की गईं। भाववाच्य में क्रिया का संबंध न कर्ता से और न कर्म से बल्कि भाव से होता है, इसमें क्रिया सदैव पुल्लिंग एकवचन में रहती है जैसे मुझसे अब चला नहीं जाता, छात्रों से पढ़ा नहीं जाता, मोहन से दौड़ा नहीं जाता।

वाच्य के भेद: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य का प्रयोग

कर्तृवाच्य में कर्ता प्रत्यक्ष होता है और क्रिया कर्ता के अनुसार बदलती है। जैसे मोहन पत्र लिखता है का कर्मवाच्य मोहन के द्वारा पत्र लिखा जाता है होगा। माँ ने बच्चे को खाना खिलाया कर्तृवाच्य है, माँ के द्वारा बच्चे को खाना खिलाया गया कर्मवाच्य है। राम ने मिठाई खाई का कर्मवाच्य राम के द्वारा मिठाई खाई गई, राम के द्वारा पुस्तक पढ़ी गई में पढ़ी गई क्रिया का स्त्रीलिंग रूप कर्म पुस्तक के कारण है। कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाते समय कर्ता के साथ से या के द्वारा लगाया जाता है और क्रिया में जाता है, गई, गया, किए गए जैसे शब्द आते हैं।

कर्मवाच्य का प्रयोग तब होता है जब कर्म को प्रधानता देनी हो या कर्ता अज्ञात हो। जैसे मजदूरों द्वारा सड़क बनाई जा रही है, छात्रों द्वारा उत्तर-पुस्तिकाएँ जमा की गईं, वैज्ञानिकों द्वारा नई औषधि विकसित की गई में कर्म औषधि को प्रधानता मिलती है, दरवाजा बंद करो का कर्मवाच्य दरवाजा बंद किया जाए, कर्मचारियों ने फाइलें जमा कीं का कर्मवाच्य कर्मचारियों द्वारा फाइलें जमा की गईं। डाकिए ने पत्र पहुँचाया का कर्मवाच्य बनाते समय कर्ता में द्वारा लगाना और क्रिया को कर्म पत्र के अनुसार बदलना अनिवार्य है। जिस वाक्य में अकर्मक क्रिया हो और कर्म न हो, उसका सामान्य कर्मवाच्य नहीं बनाया जा सकता, उसका भाववाच्य बनता है।

भाववाच्य के नियम और पहचान

भाववाच्य में अकर्मक क्रिया होती है और कर्ता के साथ से लगता है। भाववाच्य में क्रिया सदैव पुल्लिंग एकवचन में रहती है चाहे कर्ता स्त्रीलिंग या बहुवचन हो। जैसे बच्चे खेल रहे हैं का भाववाच्य बच्चों से खेला नहीं जाता, सीता हँसती है का भाववाच्य सीता से हँसा नहीं जाता, बच्चा रो रहा है का भाववाच्य बच्चे से रोया नहीं जाता, मोहन दौड़ रहा है का भाववाच्य मोहन से दौड़ा नहीं जाता। वह पुस्तक पढ़ता है का भाववाच्य नहीं बनता क्योंकि वह सकर्मक है, उसका कर्मवाच्य बनता है। राम ने पत्र लिखा का भाववाच्य नहीं बनता क्योंकि कर्म है, लेकिन अकर्मक वाक्यों में भाववाच्य संभव है।

परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु और वाच्य परिवर्तन

यूपीपीएससी आरओ एआरओ, यूपी पुलिस, एसएससी जीडी, सीटेट में वाच्य की पहचान और परिवर्तन से प्रश्न पूछे जाते हैं। राम पुस्तक पढ़ता है कर्तृवाच्य, राम के द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है कर्मवाच्य। सीता खाना बनाती है कर्तृ, सीता के द्वारा खाना बनाया जाता है कर्मवाच्य। बच्चे दूध पीते हैं का भाववाच्य बच्चों से दूध पिया नहीं जाता जैसा प्रयोग नहीं होता क्योंकि कर्म है, इसलिए कर्मवाच्य ही बनेगा। शिक्षक पाठ पढ़ाते हैं का कर्मवाच्य शिक्षकों द्वारा पाठ पढ़ाया जाता है। सीमा कल रिपोर्ट लिखेगी का कर्मवाच्य सीमा द्वारा कल रिपोर्ट लिखी जाएगी।

  • वाच्य की परिभाषा - क्रिया के रूप से कर्ता कर्म भाव में किसकी प्रधानता, सीधा संबंध क्रिया से
  • तीन भेद - कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान क्रिया कर्ता के अनुसार, कर्मवाच्य में कर्म प्रधान क्रिया कर्म के अनुसार, भाववाच्य में भाव प्रधान क्रिया पुल्लिंग एकवचन
  • कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य - कर्ता के साथ से या के द्वारा, क्रिया में जाता है, गया, गई, किए
  • कर्मवाच्य पहचान - द्वारा, के द्वारा, जाता है, की गई, की गईं
  • भाववाच्य पहचान - अकर्मक क्रिया, से लगा, नहीं जाता, पुल्लिंग एकवचन, असमर्थता का भाव
  • विशेष नियम - भाववाच्य में क्रिया सदैव पुल्लिंग एकवचन, कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के लिंग वचन अनुसार
  • परीक्षा सूत्र - क्या किसे पूछो कर्म मिले तो कर्तृ या कर्म, कर्म न मिले और अकर्मक तो भाववाच्य संभव
वाच्य का प्रकारनियम और पहचानउदाहरण और परिवर्तन
कर्तृवाच्यक्रिया कर्ता के अनुसार, कर्ता प्रधानराम पत्र लिखता है, मोहन पत्र लिखता है, वह पुस्तक पढ़ता है, सीता गाना गाती है
कर्मवाच्यक्रिया कर्म के अनुसार, कर्ता के साथ द्वारा, कर्म प्रधानराम के द्वारा पत्र लिखा जाता है, पुस्तक पढ़ी गई कर्म पुस्तक के कारण स्त्रीलिंग, फाइलें जमा की गईं, सड़क बनाई जा रही है
भाववाच्यअकर्मक, कर्ता के साथ से, क्रिया पुल्लिंग एकवचन, भाव प्रधानमुझसे चला नहीं जाता, छात्रों से पढ़ा नहीं जाता, मोहन से दौड़ा नहीं जाता, बच्चों से खेला नहीं जाता
परिवर्तन नियमकर्तृ से कर्म - से/द्वारा जोड़ो, क्रिया बदलो, भाव में से जोड़ोमोहन पत्र लिखता है से मोहन द्वारा पत्र लिखा जाता है, मोहन दौड़ता है से मोहन से दौड़ा नहीं जाता
विशेषसकर्मक का कर्मवाच्य, अकर्मक का भाववाच्यराम ने मिठाई खाई का कर्मवाच्य राम द्वारा मिठाई खाई गई, बच्चे खेलते हैं का भाववाच्य बच्चों से खेला नहीं जाता

वाच्य का ज्ञान वाक्य शुद्धि, अनुवाद और सरकारी लेखन में अनिवार्य है। कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य और भाववाच्य में परिवर्तन के नियमों को उदाहरण सहित कंठस्थ करना चाहिए।