भारतीय जनगणना का इतिहास, महत्वपूर्ण तथ्य और सांख्यिकीय अध्ययन

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भारतीय जनगणना का इतिहास, महत्वपूर्ण तथ्य और सांख्यिकीय अध्ययन - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत की जनगणना के इतिहास, प्रथम जनगणना, स्वतंत्र भारत की जनगणना और महत्वपूर्ण सांख्यिकीय तथ्यों की संपूर्ण अध्ययन सामग्री।

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💡 व्याख्या

भारतीय जनगणना का परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग, रक्षा, पुलिस तथा राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं के विविध सामान्य ज्ञान खंड में भारतीय जनगणना से जुड़े प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। देश की जनसांख्यिकीय संरचना, जनसंख्या वृद्धि, साक्षरता दर, लिंग अनुपात और घनत्व का आकलन करने के लिए जनगणना सबसे बड़ा और आधिकारिक सांख्यिकीय माध्यम है। भारत में जनगणना का इतिहास काफी पुराना है, जिसका व्यवस्थित स्वरूप ब्रिटिश काल में स्थापित हुआ था। जनगणना सांख्यिकी में मुख्य कामगार वह व्यक्ति है जो वर्ष में 183 दिन या अधिक काम करता है, सीमांत कामगार 183 दिन से कम काम करता है और कार्य सहभागिता दर कुल जनसंख्या में कामगारों का अनुपात दर्शाती है।

भारत में जनगणना की शुरुआत औपचारिक रूप से ब्रिटिश काल में हुई थी। देश की पहली जनगणना वर्ष 1872 में लॉर्ड मेयो के कार्यकाल के दौरान कराई गई थी, हालांकि यह असमकालिक थी। इसके पश्चात, प्रथम पूर्ण और नियमित जनगणना की शुरुआत वर्ष 1881 में लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में की गई। वर्ष 1881 में जनगणना आयुक्त डब्ल्यू सी प्लॉडेन थे। तब से प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर नियमित रूप से जनगणना कराने की परंपरा स्थापित हुई। 1921 को महाविभाजन वर्ष कहा जाता है क्योंकि इसके बाद जनसंख्या में निरंतर वृद्धि हुई। स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना वर्ष 1951 में आयोजित की गई थी, उस समय जनगणना आयुक्त आर ए गोपालास्वामी थे जो मद्रास कैडर के अधिकारी थे। भारत में महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त का स्थायी कार्यालय 1949 में स्थापित हुआ और 1961 से यह संगठन स्थायी रूप से कार्यरत है।

भारत की पहली जनगणना एवं नियमित जनगणना का आरंभ और प्रशासनिक तथ्य

जनगणना से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक तथ्य के अनुसार भारत में जनगणना का कार्य गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा संचालित किया जाता है। जनगणना अधिनियम 1948 के कानूनी प्रावधानों के तहत यह सर्वेक्षण पूरा किया जाता है। वर्ष 2011 की जनगणना देश की पंद्रहवीं जनगणना थी और स्वतंत्रता के बाद की सातवीं जनगणना थी, जिसका आदर्श वाक्य हमारी जनगणना हमारा भविष्य था। इस जनगणना के समय जनगणना आयुक्त सी चंद्रमौली थे और 2001 में जे के बंठिया थे। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या लगभग 121 करोड़ थी, पुरुष लगभग 51.47 प्रतिशत और महिला लगभग 48.53 प्रतिशत थी। भारत की जनगणना 2027 में आयोजित की जा रही है। इसकी प्रथम चरण की हाउस-लिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान और द्वितीय चरण की जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी। 1931 की जनगणना में जाति, जनजाति और नस्ल से संबंधित विस्तृत आंकड़े दर्ज किए गए थे। स्वतंत्र भारत में सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC) 2011 में आयोजित की गई थी।

जनगणना की शब्दावली एवं संवैधानिक प्रावधान

संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार जनगणना संघ सूची का विषय है, जिस पर कानून बनाने और संचालन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। जनगणना शब्दावली में दशकीय वृद्धि दर का अर्थ दस वर्षों में जनसंख्या में प्रतिशत वृद्धि से है। शिशु लिंगानुपात 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के अनुपात को दर्शाता है। साक्षर मानने के लिए न्यूनतम आयु 7 वर्ष है। विश्व जनसंख्या दिवस प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है। राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन 2000 में और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 में घोषित की गई थी। 2011 की जनगणना के अनुसार औसत जनसंख्या घनत्व 382 प्रति वर्ग किलोमीटर था, कुल साक्षरता दर लगभग 73 प्रतिशत थी, समग्र लिंग अनुपात 943 था। ग्रामीण जनसंख्या लगभग 68.8 प्रतिशत, शहरी लगभग 31.2 प्रतिशत थी। 0 से 6 वर्ष के बच्चों का प्रतिशत लगभग 13.6 था। प्रति परिवार औसत आकार लगभग 4.8 था। कार्य सहभागिता दर लगभग 39.8 प्रतिशत थी।

राज्यवार और सामाजिक वर्गवार जनगणना तथ्य

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश, सबसे कम सिक्किम, सर्वाधिक जनसंख्या वाला केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली, सबसे कम लक्षद्वीप था। जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक बिहार में 1106 और सबसे कम अरुणाचल प्रदेश में 17 था। केंद्र शासित प्रदेश में सर्वाधिक घनत्व दिल्ली में 11320 और सबसे कम अंडमान निकोबार में 46 था। सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य केरल 94 प्रतिशत और सबसे कम बिहार 61.8 प्रतिशत था। सर्वाधिक साक्षरता वाला केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप और सबसे कम दादरा और नगर हवेली था। सबसे अधिक लिंग अनुपात वाला राज्य केरल 1084 और सबसे कम हरियाणा 879 था। शिशु लिंग अनुपात सबसे अधिक मिजोरम और सबसे कम हरियाणा में था। दशकीय वृद्धि सबसे अधिक मेघालय में 27.9 प्रतिशत और सबसे अधिक ऋणात्मक वृद्धि नागालैंड में दर्ज हुई थी। 2001 से 2011 के बीच वास्तविक वृद्धि लगभग 18.19 करोड़ थी। ग्रामीण प्रतिशत सबसे अधिक हिमाचल प्रदेश में 90 प्रतिशत और शहरी प्रतिशत सबसे अधिक गोवा में 62.2 प्रतिशत था। सबसे अधिक ग्रामीण जनसंख्या संख्या में उत्तर प्रदेश में थी। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहर 53 थे और सबसे बड़ा शहरी संकुलन मुंबई था। सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला थाणे और सबसे कम दिबांग घाटी था। सबसे अधिक साक्षर जिला सेरछिप और सबसे कम अलीराजपुर था। सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला माहे और सबसे कम दमन था। अनुसूचित जाति आबादी लगभग 16.6 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति लगभग 8.6 प्रतिशत थी। सबसे अधिक एससी अनुपात पंजाब में 31.9 प्रतिशत और सबसे अधिक एसटी अनुपात मिजोरम में 94.4 प्रतिशत था। नागालैंड और अरुणाचल में एससी नहीं और पंजाब हरियाणा में एसटी नहीं दर्ज है। एससी की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में और एसटी की मध्य प्रदेश में है। सबसे अधिक एससी लिंगानुपात केरल में और एसटी लिंगानुपात गोवा में था। दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य महाराष्ट्र, तीसरा बिहार, दूसरा सबसे कम मिजोरम, सबसे कम साक्षरता में दूसरा अरुणाचल प्रदेश था। धर्म आधारित आंकड़ों में हिंदू लगभग 79.8 प्रतिशत, मुस्लिम 14.2 प्रतिशत, ईसाई 2.3 प्रतिशत, सिख 1.7 प्रतिशत, बौद्ध 0.7 प्रतिशत, जैन 0.4 प्रतिशत, ईसाइयों का सर्वाधिक प्रतिशत नागालैंड में, बौद्धों की सर्वाधिक संख्या महाराष्ट्र में थी और सबसे अधिक साक्षरता जैन समुदाय में थी।

  • ऐतिहासिक - पहली असमकालिक 1872 लॉर्ड मेयो, पहली नियमित समकालिक 1881 लॉर्ड रिपन, स्वतंत्र भारत की पहली 1951 आर ए गोपालास्वामी, 15वीं राष्ट्रीय 2011 आदर्श वाक्य हमारी जनगणना हमारा भविष्य, अधिनियम 1948, गृह मंत्रालय के अधीन महारजिस्ट्रार कार्यालय 1949 स्थायी
  • संवैधानिक और शब्दावली - संघ सूची विषय, दशकीय वृद्धि दर दस वर्ष वृद्धि, शिशु लिंगानुपात 0-6 वर्ष, साक्षरता आयु 7 वर्ष, मुख्य कामगार 183 दिन या अधिक, सीमांत 183 से कम, विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई, जनसंख्या आयोग और नीति 2000
  • 2011 आंकड़े - कुल 121 करोड़ पुरुष 51.47 महिला 48.53, घनत्व 382, साक्षरता 73 प्रतिशत, लिंगानुपात 943, ग्रामीण 68.8 शहरी 31.2, बच्चे 0-6 लगभग 13.6 प्रतिशत, परिवार आकार 4.8, कार्य सहभागिता 39.8 प्रतिशत, वृद्धि 18.19 करोड़
  • राज्य तथ्य - जनसंख्या सबसे अधिक उत्तर प्रदेश सबसे कम सिक्किम, घनत्व सबसे अधिक बिहार सबसे कम अरुणाचल, साक्षरता सबसे अधिक केरल सबसे कम बिहार, लिंगानुपात सबसे अधिक केरल सबसे कम हरियाणा, दशकीय वृद्धि सबसे अधिक मेघालय ऋणात्मक नागालैंड, ग्रामीण प्रतिशत सबसे अधिक हिमाचल शहरी सबसे अधिक गोवा
  • सामाजिक - एससी 16.6 प्रतिशत एसटी 8.6 प्रतिशत, एससी अनुपात सबसे अधिक पंजाब, एसटी अनुपात सबसे अधिक मिजोरम, एससी सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश एसटी मध्य प्रदेश, धर्म हिंदू 79.8 मुस्लिम 14.2 ईसाई 2.3 सिख 1.7 बौद्ध 0.7 जैन 0.4, ईसाई प्रतिशत सबसे अधिक नागालैंड बौद्ध संख्या महाराष्ट्र
जनगणना मील का पत्थरवर्षप्रमुख तथ्य
पहली असमकालिक जनगणना1872लॉर्ड मेयो कार्यकाल, पहली बार
पहली नियमित समकालिक1881लॉर्ड रिपन, आयुक्त डब्ल्यू सी प्लॉडेन, प्रत्येक 10 वर्ष
महाविभाजन वर्ष1921जनसंख्या वृद्धि में निरंतरता शुरू
स्वतंत्र भारत की पहली1951आयुक्त आर ए गोपालास्वामी, मद्रास कैडर
15वीं राष्ट्रीय जनगणना2011स्वतंत्रता के बाद 7वीं, थीम हमारी जनगणना हमारा भविष्य, आयुक्त सी चंद्रमौली
संवैधानिक स्थितिसंघ सूचीगृह मंत्रालय, अधिनियम 1948, महारजिस्ट्रार कार्यालय 1949
2011 मुख्य आंकड़े2011121 करोड़, घनत्व 382, साक्षरता 73 प्रतिशत, लिंगानुपात 943, ग्रामीण 68.8 प्रतिशत
सामाजिक आंकड़े2011एससी 16.6 प्रतिशत, एसटी 8.6 प्रतिशत, हिंदू 79.8 मुस्लिम 14.2, सबसे अधिक एससी उत्तर प्रदेश एसटी मध्य प्रदेश

भारतीय जनगणना का व्यवस्थित अध्ययन करने से जनसंख्या घनत्व, साक्षरता, लिंग अनुपात, दशकीय वृद्धि, कार्य सहभागिता, मुख्य और सीमांत कामगार, अनुसूचित जाति जनजाति और धार्मिक जनसांख्यिकी जैसे सभी सांख्यिकीय आयामों की स्पष्ट समझ विकसित होती है जो विविध सामान्य ज्ञान की तैयारी को पूर्णता प्रदान करती है।