प्रमुख राष्ट्रीय समितियाँ एवं आयोग: सामान्य ज्ञान अध्ययन सामग्री

⌄
-- Questions Miscellaneous GK

प्रमुख राष्ट्रीय समितियाँ एवं आयोग: सामान्य ज्ञान अध्ययन सामग्री - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत की प्रमुख राष्ट्रीय समितियों, आयोगों, उनके अध्यक्षों, गठन वर्ष और महत्वपूर्ण सिफारिशों की विस्तृत अध्ययन सामग्री।

प्रश्न 1 / --
00:00
2%
प्रश्न 1

लोडिंग...

💡 व्याख्या

प्रमुख समितियाँ एवं आयोग: प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्व

कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग, रक्षा तथा राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं में भारत की प्रमुख समितियों और आयोगों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। विविध सामान्य ज्ञान के इस महत्वपूर्ण खंड में वित्तीय सुधारों, चुनावी प्रक्रियाओं, बैंकिंग क्षेत्र, कर संरचना, शिक्षा नीतियों, प्रशासनिक सुधारों तथा गरीबी आकलन हेतु गठित ऐतिहासिक समितियों के नाम, उनके अध्यक्ष, गठन वर्ष और उनकी प्रमुख सिफारिशें शामिल होती हैं। इन तथ्यों का प्रामाणिक और व्यवस्थित अध्ययन अभ्यर्थियों को वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में निर्णायक सफलता दिलाने में सहायक सिद्ध होता है।

बैंकिंग, वित्त एवं कर सुधार संबंधी प्रमुख समितियाँ

भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली को आधुनिक रूप देने में कई महत्वपूर्ण समितियों की सिफारिशों ने आधारशिला रखी है। बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों हेतु एम. नरसिंहम की अध्यक्षता में गठित समिति ने दो चरणों में महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें पूंजी पर्याप्तता अनुपात और बैंकिंग संरचना का पुनर्गठन शामिल था। कर सुधारों के लिए राजा चेलैया समिति की अनुशंसाएं अत्यधिक प्रभावशाली सिद्ध हुईं, जिन्होंने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के सरलीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। इसी प्रकार विजय केलकर समिति ने भारत में वस्तु एवं सेवा कर की रूपरेखा तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। वित्तीय समावेशन और मौद्रिक नीति ढांचे के आधुनिकीकरण के संदर्भ में रघुराम राजन समिति और उर्जित पटेल समिति की संस्तुतियां अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

प्रशासनिक, चुनावी एवं सामाजिक सुधार आयोग

लोकतांत्रिक संस्थाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से समय-समय पर अनेक उच्चस्तरीय आयोग गठित किए गए। केंद्र और राज्यों के संबंधों की समीक्षा हेतु न्यायमूर्ति आर. एस. सरकारिया की अध्यक्षता में सरकारिया आयोग का गठन वर्ष 1983 में हुआ था, जिसके पश्चात एम. एम. पुंछी आयोग ने नए परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किए। चुनावी सुधारों के क्षेत्र में दिनेश गोस्वामी समिति और तारकुंडे समिति की सिफारिशों ने मतदान आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने तथा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के उपयोग को बढ़ावा दिया। प्रशासनिक दक्षता के लिए वर्ष 1966 में मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग तथा वर्ष 2005 में वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग गठित किया गया था।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण बिंदु: भारत में पंचायती राज व्यवस्था के त्रि-स्तरीय ढांचे की ऐतिहासिक सिफारिश वर्ष 1957 में बलवंत राय मेहता समिति द्वारा की गई थी। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रारूप वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार किया गया था। गरीबी आकलन के लिए सुरेश तेंदुलकर समिति और सी. रंगराजन समिति की पद्धतियां परीक्षा की दृष्टि से सर्वाधिक चर्चित रहती हैं।
समिति / आयोग का नामअध्यक्षगठन वर्षकार्यक्षेत्र / मुख्य उद्देश्यप्रमुख सिफारिश / योगदान
बलवंत राय मेहता समितिबलवंत राय मेहता1957पंचायती राज व्यवस्थात्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली की स्थापना
सरकारिया आयोगन्यायमूर्ति आर. एस. सरकारिया1983केंद्र-राज्य संबंधराज्यपाल पद की गरिमा एवं अंतर-राज्य परिषद
नरसिंहम समितिएम. नरसिंहम1991वित्तीय एवं बैंकिंग प्रणालीपूंजी पर्याप्तता एवं बैंकिंग सुधार ढांचा
राजा चेलैया समितिडॉ. राजा चेलैया1991कर प्रणाली सुधारप्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष करों का युक्तिकरण
दिनेश गोस्वामी समितिदिनेश गोस्वामी1990चुनावी सुधार प्रक्रियाईवीएम का प्रयोग एवं चुनावी नियमों में सुधार
कस्तूरीरंगन समितिडॉ. के. कस्तूरीरंगन2017राष्ट्रीय शिक्षा नीतिनवीन शिक्षा नीति 2020 का आधिकारिक प्रारूप

पर्यावरण, पुलिस एवं कल्याणकारी समितियाँ

विशिष्ट सामाजिक और पारिस्थितिकीय विषयों पर भी भारत सरकार द्वारा महत्वपूर्ण अध्ययन दल गठित किए गए। पश्चिमी घाट के पर्यावरण संरक्षण हेतु माधव गाडगिल समिति तथा कस्तूरीरंगन समिति ने विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। पुलिस तंत्र में सुधार और पुलिस को अधिक पेशेवर बनाने के लिए प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के उपरांत सोली सोराबजी समिति ने आदर्श पुलिस अधिनियम का प्रारूप बनाया। महिलाओं की सुरक्षा और आपराधिक कानूनों में संशोधन हेतु न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा समिति की सिफारिशों ने भारतीय दंड विधान को अधिक कठोर और प्रभावी बनाने में युगांतरकारी योगदान दिया। इन सभी समितियों और उनके प्रमुख निष्कर्षों का अध्ययन प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।