भारत के प्रसिद्ध नारे, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आदर्श वाक्य
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प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नारों, राष्ट्रीय संस्थाओं, सशस्त्र बलों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रसिद्ध आदर्श वाक्यों की संपूर्ण अध्ययन सामग्री।
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💡 व्याख्या
प्रसिद्ध नारे एवं राष्ट्रीय आदर्श वाक्य: ऐतिहासिक परिचय
कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, रक्षा सेवाओं, राज्य प्रशासनिक परीक्षाओं तथा पुलिस भर्ती परीक्षाओं के विविध सामान्य ज्ञान खंड में ऐतिहासिक नारों और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आदर्श वाक्यों से जुड़े प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिए गए नारों ने न केवल जनमानस में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई बल्कि आंदोलन को एक निर्णायक दिशा भी प्रदान की। इसी प्रकार विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं, सैन्य बलों, शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के आदर्श वाक्य उनके मूल दर्शन, कर्तव्य और कार्यप्रणाली का सार प्रस्तुत करते हैं। इन सभी नारों और आदर्श वाक्यों का प्रामाणिक ज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नारे एवं उनके प्रणेता
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों में प्रमुख नेताओं ने ऊर्जावान नारे दिए जो आज भी राष्ट्र की चेतना में जीवित हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सैनिकों का आह्वान करते हुए तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा और दिल्ली चलो का अमर उद्घोष किया था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा का नारा देकर स्वाधीनता चेतना को जनआंदोलन में बदल दिया। इसी तरह भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी का करो या मरो का संदेश पूरे देश में गूंज उठा था। लाल बहादुर शास्त्री द्वारा 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय दिया गया जय जवान जय किसान का नारा भारतीय किसानों और सैनिकों के स्वाभिमान का प्रतीक बन गया, जिसमें बाद में अटल बिहारी वाजपेयी ने जय विज्ञान जोड़कर इसे और अधिक व्यापक बना दिया।
राष्ट्रीय संस्थाओं और सशस्त्र बलों के प्रमुख आदर्श वाक्य
भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे अंकित सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया है जो सत्य की सर्वोच्चता को रेखांकित करता है। भारतीय सशस्त्र बलों और रक्षा संगठनों के आदर्श वाक्य भी उनके अदम्य साहस और समर्पण को दर्शाते हैं। भारतीय थल सेना का आदर्श वाक्य सेवा परमो धर्मः है जो निस्वार्थ सेवा भाव को प्रदर्शित करता है। भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य शं नो वरुणः समुद्र के देवता वरुण से कल्याण की प्रार्थना करता है, जबकि भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य नभः स्पृशं दीप्तम् गीता से उद्धृत है जिसका अर्थ गर्व के साथ आकाश को छूना है। इसी प्रकार सर्वोच्च न्यायालय का ध्येय वाक्य यतो धर्मस्ततो जयः है जिसका अर्थ है जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है।
| संस्था / व्यक्तित्व | प्रसिद्ध नारा / आदर्श वाक्य | स्रोत / संदर्भ |
|---|---|---|
| नेताजी सुभाष चंद्र बोस | जय हिंद और दिल्ली चलो | आजाद हिंद फौज उद्घोष |
| लाल बहादुर शास्त्री | जय जवान जय किसान | वर्ष 1965 भारत-पाक युद्ध |
| भारतीय थल सेना | सेवा परमो धर्मः | कर्तव्यनिष्ठा और सेवा |
| भारतीय नौसेना | शं नो वरुणः | ऋग्वेद संहिता मंत्र |
| भारतीय वायु सेना | नभः स्पृशं दीप्तम् | श्रीमद्भगवद्गीता ग्यारहवां अध्याय |
| भारत का सर्वोच्च न्यायालय | यतो धर्मस्ततो जयः | महाभारत महाकाव्य श्लोक |
अंतरराष्ट्रीय संगठनों एवं विश्वविद्यालयों के प्रसिद्ध ध्येय वाक्य
वैश्विक मंच पर शांति, सहयोग और मानव कल्याण के लिए स्थापित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के भी विशिष्ट आदर्श वाक्य निर्धारित हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ का मूल उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। इसी तरह भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का आदर्श वाक्य विद्यया अमृतमश्नुते तथा दिल्ली विश्वविद्यालय का निष्ठा धृतिः सत्यम् ज्ञान और चरित्र निर्माण के संकल्प को प्रकट करते हैं। इन सभी ऐतिहासिक नारों, संस्थागत आदर्श वाक्यों और उनके शास्त्रीय स्रोतों का व्यवस्थित अध्ययन विविध सामान्य ज्ञान के पाठ्यक्रम को सुदृढ़ बनाता है और प्रतियोगी परीक्षाओं में शत-प्रतिशत अंक दिलाना सुनिश्चित करता है।