CAG - Comptroller and Auditor General - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

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CAG - Comptroller and Auditor General - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

Comptroller and Auditor General of India - 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams

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प्रश्न 1

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💡 व्याख्या

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) - संपूर्ण अध्ययन गाइड

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India - CAG) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकारी है। यह भारत की लोक लेखा परीक्षा प्रणाली का सर्वोच्च पद है। CAG को भारतीय लोकतंत्र का प्रहरी (Watchdog of Indian Democracy) कहा जाता है क्योंकि यह सरकार के प्रत्येक रुपये के खर्च की जांच करता है और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करता है।

CAG की नियुक्ति और शपथ

CAG की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुहर लगे वारंट के द्वारा की जाती है। नियुक्ति के बाद CAG को राष्ट्रपति के समक्ष संविधान की तीसरी अनुसूची के अनुसार पद की गोपनीयता और संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी होती है। वर्तमान में कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक चयन प्रक्रिया के बाद नाम राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।

CAG का कार्यकाल और सेवा शर्तें

CAG का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक निर्धारित है। इसका प्रावधान CAG (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 में किया गया है। उसका वेतन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर 2.5 लाख रुपये प्रति माह है। उसका वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं, जिसका अर्थ है कि कार्यकाल के दौरान इसमें कटौती नहीं की जा सकती।

CAG को हटाने की प्रक्रिया

CAG को उसके पद से केवल उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जिस प्रक्रिया से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसे महाभियोग कहा जाता है। इसके लिए सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना चाहिए, उसके बाद राष्ट्रपति के आदेश से उसे हटाया जाता है। यह प्रक्रिया जानबूझकर बहुत कठिन रखी गई है ताकि कोई भी सरकार आसानी से CAG को न हटा सके।

CAG के मुख्य कार्य और शक्तियां

CAG का मुख्य कार्य भारत सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सार्वजनिक धन का ऑडिट करना है। वह तीन प्रकार का ऑडिट करता है - अनुपालन ऑडिट (Compliance Audit), वित्तीय ऑडिट (Financial Audit) और निष्पादन ऑडिट (Performance Audit)। वह देखता है कि सरकार ने जो पैसा खर्च किया है वह संसद द्वारा स्वीकृत बजट के अनुसार, वैध तरीके से और उचित उद्देश्य के लिए हुआ है या नहीं।

CAG का ऑडिट क्षेत्र

CAG का ऑडिट क्षेत्र बहुत व्यापक है। वह केंद्र और राज्य के सभी विभागों, 51% से अधिक सरकारी हिस्सेदारी वाली सभी सरकारी कंपनियों, सार्वजनिक निगमों और केंद्र या राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त करने वाले लगभग 4000 से अधिक स्वायत्त निकायों जैसे आईआईटी, एम्स, विश्वविद्यालयों का ऑडिट करता है। उसके अधीन 27,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं।

CAG और लोक लेखा समिति (PAC)

CAG को लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक कहा जाता है। लोक लेखा समिति में 22 सदस्य होते हैं - 15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से। CAG इस समिति की बैठकों में उपस्थित रहता है, ऑडिट के तकनीकी पहलुओं को समझाता है, सरकारी विभागों से पूछताछ में मदद करता है और अनियमितताओं पर साक्ष्य जुटाने में सहायता करता है।

CAG की रिपोर्ट की प्रक्रिया

CAG अपनी ऑडिट रिपोर्ट सीधे संसद को नहीं सौंपता। संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार वह केंद्र सरकार से संबंधित रिपोर्ट राष्ट्रपति को और राज्य सरकार से संबंधित रिपोर्ट संबंधित राज्यपाल को सौंपता है। अनुच्छेद 151 के तहत राष्ट्रपति का कर्तव्य है कि वह इस रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में रखवाएं, जबकि राज्यपाल उसे विधानसभा में रखवाते हैं। रिपोर्ट सदन में रखे जाने के बाद ही वह सार्वजनिक दस्तावेज बनती है।

CAG की स्वतंत्रता के संवैधानिक स्तंभ

CAG की स्वतंत्रता निष्पक्ष लेखा परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उसकी स्वतंत्रता के तीन मुख्य स्तंभ हैं - कार्यकाल की सुरक्षा, वेतन की सुरक्षा और हटाने की कठिन प्रक्रिया। इसी स्वतंत्रता के कारण वह सत्ताधारी दल के खिलाफ भी कठोर टिप्पणी करने वाली रिपोर्ट दे सकता है। वह कार्यपालिका के नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त रहता है।

CAG का ऐतिहासिक महत्व

भारत में CAG का पद ब्रिटेन के संविधान से प्रेरित है। ब्रिटेन में 1866 के एक्सचेकर एंड ऑडिट डिपार्टमेंट एक्ट के तहत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का पद बनाया गया था। भारत में इसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में 1919 के भारत शासन अधिनियम के तहत महालेखा परीक्षक के रूप में हुई थी। स्वतंत्र भारत के पहले CAG वी. नरहरि राव थे, जिन्होंने 1948 से 1954 तक इस पद को संभाला।

CAG द्वारा उजागर किए गए प्रमुख घोटाले

CAG की रिपोर्टों ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला जैसे बड़े मामलों को उजागर किया है, जिससे सरकार को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान और अनियमितताओं का पता चला। इसलिए इसे लोकतंत्र का प्रहरी कहा जाता है।

CAG का भविष्य - डिजिटल ऑडिट की दिशा

CAG का भविष्य अधिक पारदर्शिता और तकनीकी सुधार की दिशा में है। अब CAG डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फोरेंसिक ऑडिट जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। इससे बड़े-बड़े डेटाबेस की जांच कुछ घंटों में हो जाती है और छिपी हुई अनियमितताओं का पता लगाना आसान हो गया है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • अनुच्छेद 148 - CAG की नियुक्ति और सेवा शर्तें
  • अनुच्छेद 149 - CAG के कर्तव्य और शक्तियां
  • अनुच्छेद 150 - केंद्र और राज्यों के लेखाओं का प्रारूप
  • अनुच्छेद 151 - ऑडिट रिपोर्ट संसद/विधानमंडल में रखना
  • CAG अधिनियम, 1971 - कार्यकाल, सेवा शर्तें, शक्तियां
  • कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष आयु
  • वेतन: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर (2.5 लाख/माह)
  • पहले CAG: वी. नरहरि राव (1948-1954)
  • लोक लेखा समिति का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक