CBI - Central Bureau of Investigation - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
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Central Bureau of Investigation - 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams
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💡 व्याख्या
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) - संपूर्ण अध्ययन गाइड
केंद्रीय जांच ब्यूरो भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1963 को गृह मंत्रालय के संकल्प द्वारा हुई। इससे पहले 1941 में विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (SPE) बनाया गया था। CBI दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के तहत कार्य करती है। वर्तमान में यह कार्मिक मंत्रालय DoPT के अधीन है जिसका प्रशासनिक नियंत्रण कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के पास है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। पहला निदेशक डी पी कोहली थे। CBI गैर संवैधानिक निकाय है, कार्यकारी प्रस्ताव से बनी है। इसका आदर्श वाक्य उद्योग निष्ठा निष्पक्षता है।
केंद्रीय सतर्कता आयोग CVC की स्थापना संथानम समिति 1962-64 की सिफारिश पर 1964 में हुई। इसे 2003 में CVC अधिनियम द्वारा वैधानिक दर्जा मिला। CVC का गठन एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्तों से होता है। CVC का कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष आयु तक होता है। CVC का वेतन UPSC अध्यक्ष के समान होता है। हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट जांच के बाद होती है। पहले केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) निट्टूर श्रीनिवास राउ थे। CVC अपना वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है और फिर संसद में रखी जाती है। CVC के पास स्वयं जांच शक्ति नहीं है, यह सलाहकार और अधीक्षण निकाय है। इसका अधिकार क्षेत्र समूह ए और कुछ समूह बी अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों के स्केल 3 से ऊपर के अधिकारी, RBI NABARD LIC के अधिकारी, केंद्र सरकार के मंत्रालयों के अधिकारी तक है।
CBI की मूल जानकारी और प्रशासनिक संरचना
CBI को अपनी मुख्य जांच शक्तियां DSPE अधिनियम 1946 से प्राप्त होती हैं। DSPE अधिनियम की धारा 6 राज्य की सहमति के बिना CBI को जांच से रोकती है। सामान्य सहमति वापस लेने पर राज्य में नए मामलों में CBI को हर मामले में विशिष्ट सहमति लेनी पड़ती है, पुराने मामलों पर प्रभाव नहीं पड़ता। CBI और राज्य पुलिस में टकराव का मुख्य कारण संघीय ढांचे में कानून व्यवस्था राज्य विषय होना है। CBI अकादमी गाजियाबाद में स्थित है जो प्रशिक्षण केंद्र है। CBI में अभियोजन निदेशक की नियुक्ति CVC की सिफारिश पर CVC अधिनियम के तहत होती है। CBI में प्रारंभिक जांच PE तब दर्ज होती है जब शिकायत में पर्याप्त तथ्य न हों, जबकि नियमित मामला RC FIR के समान है।
CBI के प्रभाग और कार्यक्षेत्र
CBI के प्रमुख जांच प्रभाग मुख्यतः 7 माने जाते हैं जिनमें तीन मुख्य हैं। भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति मामलों की जांच करता है। आर्थिक अपराध प्रभाग बैंक धोखाधड़ी, साइबर अपराध, आर्थिक घोटालों की जांच करता है। विशेष अपराध प्रभाग हत्या, आतंकवाद, अपहरण, गंभीर अपराधों की जांच करता है। अन्य प्रभागों में प्रशासन, नीति, इंटरपोल समन्वय प्रभाग भी हैं। आर्थिक अपराध प्रभाग में बैंक फ्रॉड सेल भी शामिल है। विशेष अपराध प्रभाग में राज्य सरकार या उच्च न्यायालय के आदेश पर सौंपे गए सनसनीखेज मामलों की जांच होती है। CBI भारत में इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो है।
महत्वपूर्ण तथ्य और न्यायिक टिप्पणियां
निदेशक का कार्यकाल कम से कम 2 वर्ष सुरक्षित है। विनीत नारायण बनाम भारत संघ 1997 मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI को स्वतंत्रता के दिशा निर्देश दिए और CVC को अधीक्षण सौंपा। 2013 में कोयला घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI को पिंजरे में बंद तोता कहा। काजी लेंडुप दोरजी बनाम CBI मामला सिक्किम में सहमति से संबंधित था। CBI जांच का आदेश सीधे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दे सकते हैं जिसके लिए राज्य सहमति आवश्यक नहीं। राज्य की सामान्य सहमति आवश्यक होती है लेकिन न्यायालय आदेश पर नहीं। CVC अधिनियम में 2021 संशोधन के अनुसार CBI और ED निदेशकों का कार्यकाल 2 वर्ष के बाद एक एक वर्ष करके अधिकतम 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। सूचना का अधिकार अधिनियम CBI पर पूरी तरह लागू नहीं है, दूसरी अनुसूची में छूट है केवल भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन की जानकारी दी जा सकती है। CVC अपनी जांच में सिविल कोर्ट की शक्तियां धारण करता है। PIDPI के तहत CVC ही नामित एजेंसी है जो व्हिसल ब्लोअर शिकायत लेती है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत CBI का अधीक्षण CVC के पास है। लोकपाल द्वारा भेजे गए मामलों में CBI अधिकारियों के तबादले के लिए लोकपाल की मंजूरी आवश्यक है। अभियोजन मंजूरी में देरी पर CVC हस्तक्षेप कर सकता है। CVO की नियुक्ति CVC की सहमति से होती है। नियम बनाने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है।
CVC चयन समिति में प्रधानमंत्री अध्यक्ष, गृह मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता सदस्य होते हैं। CBI निदेशक नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री अध्यक्ष, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश होते हैं। CBI विशेष निदेशक की नियुक्ति में CVC की सिफारिश आवश्यक है। ED निदेशक नियुक्ति समिति का अध्यक्ष CVC होता है। CVC अधिनियम के तहत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 3 महीने में देने का प्रावधान है।
- स्थापना 1 अप्रैल 1963 संकल्प द्वारा, SPE 1941, अधिनियम DSPE 1946, मंत्रालय कार्मिक DoPT, गैर संवैधानिक, मुख्यालय नई दिल्ली, पहला निदेशक डी पी कोहली, आदर्श वाक्य उद्योग निष्ठा निष्पक्षता, अकादमी गाजियाबाद
- CVC स्थापना संथानम समिति 1964, वैधानिक 2003, संरचना 1+2, कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष, वेतन UPSC अध्यक्ष समान, हटाना सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश समान, पहले CVC निट्टूर श्रीनिवास राउ, रिपोर्ट राष्ट्रपति को
- नियुक्ति समितियां - CBI निदेशक PM+LoP+CJI, CVC चयन PM+HM+LoP, ED निदेशक अध्यक्ष CVC, विशेष निदेशक में CVC भूमिका, अभियोजन निदेशक नियुक्ति CVC सिफारिश पर
- न्यायिक मामले - विनीत नारायण 1997 स्वतंत्रता निर्देश, पिंजरे में बंद तोता 2013 कोयला घोटाला, काजी लेंडुप दोरजी राज्य सहमति मामला, सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट आदेश पर राज्य सहमति आवश्यक नहीं
- प्रभाग - भ्रष्टाचार निरोधक, आर्थिक अपराध बैंक धोखाधड़ी, विशेष अपराध हत्या आतंकवाद, इंटरपोल NCB CBI, PE बनाम RC अंतर, सामान्य सहमति बनाम विशिष्ट सहमति धारा 6 DSPE
- अन्य तथ्य - RTI से आंशिक छूट, CVC सिविल कोर्ट शक्ति, PIDPI नामित एजेंसी CVC, अधीक्षण भ्रष्टाचार मामलों में CVC, लोकपाल मामलों में तबादला मंजूरी लोकपाल, 2021 संशोधन अधिकतम 5 वर्ष कार्यकाल, CVO नियुक्ति CVC सहमति, नियम बनाने शक्ति केंद्र सरकार
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना CBI | 1 अप्रैल 1963 संकल्प, SPE 1941 |
| अधिनियम | दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 धारा 6 सहमति |
| मंत्रालय | कार्मिक मंत्रालय DoPT |
| प्रकार | गैर संवैधानिक कार्यकारी निकाय |
| प्रमुख | निदेशक कार्यकाल न्यूनतम 2 वर्ष 2021 संशोधन अधिकतम 5 वर्ष |
| पहला निदेशक | डी पी कोहली |
| आदर्श वाक्य | उद्योग निष्ठा निष्पक्षता |
| मुख्यालय अकादमी | नई दिल्ली, अकादमी गाजियाबाद |
| प्रभाग | भ्रष्टाचार निरोधक, आर्थिक अपराध, विशेष अपराध |
| इंटरपोल NCB | CBI |
| CVC स्थापना | संथानम समिति सिफारिश 1964 वैधानिक 2003 |
| CVC संरचना कार्यकाल | 1+2, 4 वर्ष या 65 वर्ष, वेतन UPSC अध्यक्ष समान, पहले CVC निट्टूर श्रीनिवास राउ |
| नियुक्ति समिति CBI निदेशक | PM अध्यक्ष + LoP + CJI |
| CVC चयन | PM अध्यक्ष + HM + LoP |
| महत्वपूर्ण मामले | विनीत नारायण 1997, पिंजरे में बंद तोता 2013, काजी लेंडुप दोरजी |
| PIDPI और अधीक्षण | नामित एजेंसी CVC, भ्रष्टाचार अधिनियम में अधीक्षण CVC के पास |
CBI और CVC से संबंधित प्रावधान परीक्षा में भ्रष्टाचार नियंत्रण तंत्र के रूप में पूछे जाते हैं, विशेषकर नियुक्ति प्रक्रिया कार्यकाल राज्य सहमति और न्यायिक टिप्पणियों पर ध्यान देना आवश्यक है।