CIC - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

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CIC - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़

Central Information Commission - RTI Act 2005, establishment, composition, functions, powers, and 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams

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💡 व्याख्या

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) - संपूर्ण अध्ययन गाइड

केंद्रीय सूचना आयोग की स्थापना सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 12 के तहत 12 अक्टूबर 2005 को हुई। RTI अधिनियम संसद द्वारा 15 जून 2005 को पारित हुआ और 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ। CIC एक स्वतंत्र सांविधिक निकाय है जो नागरिकों के सूचना अधिकार की रक्षा करता है। सूचना का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित माना जाता है। CIC को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं और यह किसी मंत्रालय के अधीन नहीं है, स्वतंत्र निकाय है। इसका बजट कार्मिक मंत्रालय DoPT से आता है। मुख्यालय नई दिल्ली में धारा 12(7) के अनुसार स्थापित है। पहला मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह 2005-2010 थे। पहली महिला मुख्य सूचना आयुक्त दीपक संधू थीं।

संरचना में 1 मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त होते हैं। योग्यता धारा 12(5) के अनुसार सार्वजनिक जीवन के कानून, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, प्रशासन आदि क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्ति हो सकते हैं। संसद या विधानमंडल सदस्य, लाभ का पद धारी, राजनीतिक दल से संबद्ध या व्यवसाय में लगे व्यक्ति नहीं हो सकते। नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिश पर होती है। समिति में प्रधानमंत्री अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता और PM द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री होते हैं। मुख्य सूचना आयुक्त या आयुक्त को शपथ राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति दिलाता है। त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित होता है। हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश के समान है, राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट जांच के बाद हटा सकते हैं। पुनर्नियुक्ति की अनुमति नहीं है।

सीआईसी की संरचना और नियुक्ति समिति

RTI संशोधन अधिनियम 2019 के बाद कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है, पहले 5 वर्ष था अब अधिसूचना द्वारा 3 वर्ष किया गया है। वेतन भत्ते भी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित होते हैं। प्रथम अपील प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास 30 दिन में दायर होती है, दूसरी अपील CIC के पास 90 दिन में धारा 19(3) के तहत दायर होती है। प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को धारा 19(6) के तहत 30 दिन और अधिकतम 45 दिन में निस्तारण करना होता है। CIC का निर्णय बाध्यकारी होता है धारा 19(7) के अनुसार। निर्णय के विरुद्ध अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में रिट दायर हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल 2019 में संविधान पीठ ने निर्णय दिया कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी RTI के दायरे में है। नमित शर्मा मामले 2012-13 में सुप्रीम कोर्ट ने सूचना आयोग में न्यायिक सदस्यता पर टिप्पणी की थी।

सीआईसी की प्रमुख शक्तियां और RTI समय सीमा

धारा 18 के तहत शिकायतों की जांच में CIC को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं जैसे गवाह बुलाना, दस्तावेज मंगाना, शपथ पर पूछताछ, परिसर निरीक्षण। धारा 18(1) के तहत नागरिक सीधे शिकायत कर सकता है जब सूचना नहीं दी गई, समय पर नहीं दी गई, गलत सूचना दी गई या आवेदन लेने से इनकार किया गया। धारा 18(2) के अनुसार शिकायत में प्रथम दृष्टया आधार होना चाहिए। धारा 7(1) सामान्य सूचना 30 दिन में, जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित सूचना 48 घंटे में, तीसरे पक्ष से संबंधित सूचना 40 दिन में देनी होती है जिसमें 30 दिन सामान्य और 10 दिन तीसरे पक्ष की सुनवाई के हैं। धारा 11 के तहत तीसरे पक्ष को 5 दिन में नोटिस देना और 10 दिन में अभ्यावेदन लेना होता है। स्वतः संज्ञान प्रकटीकरण धारा 4(1)(b) में 17 बिंदु हैं। धारा 25 के तहत CIC वार्षिक प्रतिवेदन केंद्र सरकार को देता है। धारा 10(1) में पृथक्करणीयता का सिद्धांत है कि छूट प्राप्त भाग हटाकर शेष सूचना दी जा सकती है। धारा 22 का गैर अवरोधक खंड कहता है कि RTI अधिनियम अन्य कानूनों पर प्रभावी होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य और छूट प्रावधान

धारा 8(1) में छूट प्राप्त सूचनाएं हैं जैसे (a) संप्रभुता अखंडता, (c) संसद विशेषाधिकार उल्लंघन, (e) वैश्वासिक संबंध, (i) मंत्रिमंडल कागजात निर्णय के बाद दी जा सकती है, (j) व्यक्तिगत सूचना जिसमें लोकहित न हो। धारा 8(2) कहती है कि व्यापक लोकहित होने पर 8(1) की छूट के बावजूद सूचना दी जा सकती है। धारा 8(3) के अनुसार 20 वर्ष पुरानी घटना की सूचना अधिकांश छूटों के बावजूद दी जा सकती है सिवाय (a)(c)(i) के। धारा 8(1)(j) व्यक्तिगत निजता से संबंधित है। धारा 2(h) में लोक प्राधिकारी की परिभाषा है। सिद्ध करने का भार कि सूचना छूट प्राप्त है, CPIO पर होता है। धारा 20(1) के तहत बिना कारण आवेदन लेने से इनकार या देरी पर 250 रुपये प्रतिदिन अधिकतम 25000 रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माना लगाने से पहले सुनवाई आवश्यक है। धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। धारा 19(8)(b) के तहत क्षतिपूर्ति का आदेश दिया जा सकता है। धारा 24 के तहत सुरक्षा और खुफिया संगठन दूसरी अनुसूची में छूट प्राप्त हैं जैसे CBI, IB, RAW लेकिन भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन की सूचना देनी होगी। अधिकतम जुर्माना 100 दिन देरी पर 25000 बनता है। धारा 4(1)(b) में 17 बिंदु हैं। धारा 12(3) में चयन समिति का प्रावधान है। नियम बनाने की प्राथमिक शक्ति केंद्र सरकार को है।

UPSC SSC परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु CIC सांविधिक है संवैधानिक नहीं, निर्णय बाध्यकारी, स्वतंत्र निकाय, 2019 संशोधन से कार्यकाल 3 वर्ष, स्वतः संज्ञान ले सकता है, पहली अपील प्रथम अपीलीय प्राधिकारी दूसरी अपील CIC, बजट DoPT से, अपील उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 में।

  • स्थापना 12 अक्टूबर 2005 धारा 12 RTI अधिनियम 2005 पारित 15 जून 2005, मुख्यालय नई दिल्ली 12(7), पहला CIC वजाहत हबीबुल्लाह, पहली महिला दीपक संधू, अनुच्छेद 19(1)(क), सांविधिक निकाय
  • संरचना 1+10, योग्यता धारा 12(5) सार्वजनिक जीवन क्षेत्र, निषेध सांसद विधायक लाभ पद, चयन समिति PM अध्यक्ष LoP सदस्य PM नामित मंत्री, शपथ राष्ट्रपति के समक्ष, त्यागपत्र राष्ट्रपति को, हटाना सुप्रीम कोर्ट जांच समान, पुनर्नियुक्ति नहीं, कार्यकाल 2019 संशोधन बाद 3 वर्ष केंद्र सरकार निर्धारित, वेतन भी केंद्र निर्धारित
  • समय सीमा सामान्य 30 दिन, जीवन स्वतंत्रता 48 घंटे, तीसरा पक्ष 40 दिन, प्रथम अपील 30 दिन, द्वितीय अपील 90 दिन धारा 19(3), FAA निस्तारण 30 दिन अधिकतम 45 दिन 19(6), निर्णय बाध्यकारी 19(7), रिट 226
  • शक्तियां सिविल न्यायालय धारा 18, शिकायत सीधे धारा 18(1), जांच आधार 18(2), जुर्माना 250 प्रतिदिन अधिकतम 25000 धारा 20(1), अनुशासन सिफारिश 20(2), क्षतिपूर्ति 19(8)(b), वार्षिक रिपोर्ट केंद्र सरकार को धारा 25, स्वतः प्रकटीकरण 17 बिंदु 4(1)(b), पृथक्करणीयता 10(1), गैर अवरोधक 22, व्यापक लोकहित 8(2), 20 वर्ष नियम 8(3)
  • छूट धारा 8(1)(a) संप्रभुता, (c) विशेषाधिकार, (e) वैश्वासिक संबंध, (i) मंत्रिमंडल कागजात, (j) व्यक्तिगत, तृतीय पक्ष प्रक्रिया धारा 11, सिद्ध भार CPIO पर, सुरक्षा संगठन छूट धारा 24 दूसरी अनुसूची CBI सहित लेकिन भ्रष्टाचार मानवाधिकार अपवाद, सुभाष चंद्र अग्रवाल 2019 CJI कार्यालय RTI में, नमित शर्मा 2012 न्यायिक सदस्यता
विषयप्रावधान
स्थापना12 अक्टूबर 2005 धारा 12 RTI 2005
संरचना1 मुख्य + 10 सूचना आयुक्त अधिकतम
चयन समितिPM अध्यक्ष, LoP, PM नामित कैबिनेट मंत्री
कार्यकाल 2019 बादकेंद्र सरकार निर्धारित 3 वर्ष अधिसूचना, पुनर्नियुक्ति नहीं
शपथ त्यागपत्र हटानाराष्ट्रपति के समक्ष शपथ, त्यागपत्र राष्ट्रपति को, हटाना सुप्रीम कोर्ट जांच
समय सीमासामान्य 30 दिन, जीवन स्वतंत्रता 48 घंटे, तृतीय पक्ष 40 दिन, प्रथम अपील 30 दिन, द्वितीय अपील 90 दिन
जुर्माना250 प्रतिदिन अधिकतम 25000 धारा 20(1), अनुशासन सिफारिश 20(2), क्षतिपूर्ति 19(8)(b)
शक्तियांसिविल कोर्ट समान धारा 18, बाध्यकारी निर्णय 19(7), रिपोर्ट केंद्र को धारा 25
छूट8(1)(a)(c)(e)(i)(j), व्यापक लोकहित 8(2), 20 वर्ष नियम 8(3), सुरक्षा संगठन छूट 24
अन्यस्वतः प्रकटीकरण 17 बिंदु 4(1)(b), पृथक्करण 10(1), गैर अवरोधक 22, प्रथम CIC वजाहत हबीबुल्लाह

केंद्रीय सूचना आयोग से संबंधित प्रावधान पारदर्शिता और जवाबदेही सिद्धांत पर आधारित हैं और परीक्षा में RTI समय सीमा छूट और शक्तियों से प्रश्न बनते हैं।