CM & State Council of Ministers - ऑनलाइन प्रैक्टिस क्विज़
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Chief Minister and State Council of Ministers - 50 MCQs with detailed explanations for UPSC, SSC, State PCS and other competitive exams
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💡 व्याख्या
मुख्यमंत्री एवं राज्य मंत्रिपरिषद - संपूर्ण अध्ययन गाइड
मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है। इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 में है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक नाममात्र प्रमुख होता है जबकि मुख्यमंत्री वास्तविक प्रमुख होता है। मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 164(1) के तहत की जाती है। मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। यह संसदीय प्रणाली का राज्य स्तर पर प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री विधान परिषद का सदस्य भी हो सकता है। पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश 1963-67 थीं।
अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद होती है जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होता है। अनुच्छेद 163(2) कहता है कि यदि प्रश्न उठे कि विषय राज्यपाल के विवेक का है या नहीं तो राज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा। अनुच्छेद 163(3) कहता है कि मंत्रियों ने राज्यपाल को क्या सलाह दी इसकी जांच न्यायालय में नहीं होगी। अनुच्छेद 164 में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति शपथ वेतन का प्रावधान है। 164(1) में मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। 164(1A) 91वां संशोधन 2003 के अनुसार मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और न्यूनतम 12 होगा। इसका उद्देश्य दल बदल से बड़ी मंत्रिपरिषद रोकना और छोटे राज्यों में न्यूनतम प्रशासन सुनिश्चित करना है। 164(1) के परंतुक अनुसार छत्तीसगढ़ झारखंड मध्य प्रदेश ओडिशा में जनजातीय कल्याण मंत्री अनिवार्य था, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में जनजातीय कल्याण मंत्री का प्रावधान है। 164(2) सामूहिक उत्तरदायित्व विधानसभा के प्रति। 164(3) शपथ राज्यपाल द्वारा तीसरी अनुसूची के अनुसार। 164(4) गैर विधायक 6 माह तक मंत्री रह सकता है, एस आर चौधरी बनाम पंजाब 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा लगातार दूसरी बार बिना चुनाव लड़े 6 माह का लाभ नहीं लिया जा सकता।
मुख्यमंत्री की प्रमुख शक्तियां और नियुक्ति
मुख्यमंत्री की नियुक्ति में राज्यपाल को सीमित स्वतंत्रता प्राप्त है। सामान्यतः बहुमत दल के नेता को नियुक्त किया जाता है। त्रिशंकु विधानसभा में सरकारिया आयोग 1988 ने वरीयता क्रम दिया - सबसे बड़े दल या गठबंधन को, फिर सबसे बड़े दल को समर्थन सहित, फिर चुनाव पश्चात गठबंधन को। पुंछी आयोग 2010 ने भी वस्तुनिष्ठ मानदंड सुझाए। अनुच्छेद 164(4) के तहत गैर विधायक अधिकतम 6 माह मुख्यमंत्री रह सकता है। बी आर कपूर बनाम तमिलनाडु 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा दंडित व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं बन सकता, संविधान की नैतिकता। मुख्यमंत्री की मृत्यु पर पूरी मंत्रिपरिषद गिर जाती है। शपथ राज्यपाल द्वारा, त्यागपत्र राज्यपाल को, वेतन राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित अनुच्छेद 164(5) के तहत और समेकित निधि से दिया जाता है। मुख्यमंत्री विधानमंडल का नेतृत्व, बहुमत दल नेता, मंत्रिपरिषद का प्रमुख, विभाग बंटवारा, बैठक अध्यक्षता, राज्यपाल को सलाह देना, विधानसभा भंग की सलाह, बजट निर्माण में भूमिका, केंद्र राज्य समन्वय, राज्य योजना बोर्ड अध्यक्ष होता है।
मंत्रिपरिषद की संरचना और उत्तरदायित्व
मंत्रिपरिषद में तीन स्तर होते हैं कैबिनेट मंत्री महत्वपूर्ण विभाग प्रमुख, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार या कैबिनेट मंत्री के सहायक, उप मंत्री सहायक भूमिका। उप मुख्यमंत्री का पद संविधान में नहीं है, यह राजनीतिक पद है फिर भी कैबिनेट मंत्री स्तर का होता है। संसदीय सचिव पद को सुप्रीम कोर्ट ने लाभ का पद माना है यदि वेतन भत्ते मिलते हों। किचन कैबिनेट अनौपचारिक निकट सलाहकार समूह है, छाया मंत्रिमंडल भारतीय व्यवस्था में मान्य नहीं ब्रिटिश अवधारणा है। सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ सभी मंत्री संयुक्त रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी हैं, एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास पूरी परिषद को गिराता है। व्यक्तिगत उत्तरदायित्व का अर्थ मंत्री अपने विभाग के लिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल के प्रति उत्तरदायी है। मंत्री का त्यागपत्र या बर्खास्तगी मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल करता है। बजट अस्वीकृत होने पर सामूहिक उत्तरदायित्व के कारण पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागना पड़ता है।
महत्वपूर्ण अनुच्छेद और न्यायिक निर्णय
अनुच्छेद 163 सहायता सलाह, 164 नियुक्ति शपथ वेतन, 166 सरकार के कार्य संचालन राज्यपाल के नाम से और नियम राज्यपाल बनाते हैं, 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्य राज्यपाल को सूचित करना - 167(a) प्रशासन और विधायन प्रस्तावों की सूचना, 167(b) राज्यपाल द्वारा मांगी गई जानकारी देना, 167(c) किसी मंत्री ने व्यक्तिगत निर्णय लिया हो तो परिषद के समक्ष रखना यदि राज्यपाल कहें, 177 मंत्रियों को विधानमंडल में भाग लेने और बोलने का अधिकार, मताधिकार केवल सदस्य होने पर। शमशेर सिंह बनाम पंजाब 1974 सात न्यायाधीश पीठ ने कहा राज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है। एस आर बोम्मई बनाम भारत संघ 1994 में बहुमत परीक्षण विधानसभा में अनिवार्य कहा। एम पी स्पेशल पुलिस बनाम मध्य प्रदेश 2004 में कहा राज्यपाल मंत्री के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति में स्वतंत्र विवेक से कार्य कर सकता है। 91वां संशोधन द्वारा दल बदल के आधार पर अयोग्य व्यक्ति मंत्री भी नहीं बन सकता। मंत्रिपरिषद की बैठकों में गोपनीयता का सिद्धांत लागू होता है। कार्यवाहक सरकार त्यागपत्र या भंग होने के बाद नई सरकार बनने तक सीमित प्रशासनिक कार्य करती है। मुख्य सचिव मुख्यमंत्री का प्रशासनिक सलाहकार होता है। कैबिनेट समितियां मुख्यमंत्री द्वारा बनाई जाती हैं, स्थायी और तदर्थ होती हैं।
- अनुच्छेद - 163 सहायता सलाह प्रधान मुख्यमंत्री 163(2) विवेक अंतिम राज्यपाल 163(3) सलाह न्यायिक जांच से बाहर, 164 नियुक्ति 164(1) प्रसादपर्यंत 164(1A) आकार 15 प्रतिशत न्यूनतम 12 91वां संशोधन 2003 164(2) सामूहिक उत्तरदायित्व 164(3) शपथ राज्यपाल 164(4) गैर विधायक 6 माह 164(5) वेतन विधानमंडल, 166 कार्य संचालन राज्यपाल नाम से नियम राज्यपाल, 167 कर्तव्य सूचना देना, 177 मंत्री अधिकार सदन में बोलना, 163-164 मुख्य
- नियुक्ति कार्यकाल - नियुक्ति राज्यपाल अनुच्छेद 164(1), बहुमत पर निर्भर निश्चित नहीं, गैर विधायक 6 माह अधिकतम, मृत्यु पर पूरी परिषद गिरती है, त्रिशंकु में सरकारिया वरीयता क्रम, पुंछी आयोग वस्तुनिष्ठ मानदंड, बी आर कपूर 2001 दंडित मुख्यमंत्री नहीं, एस आर चौधरी 2001 लगातार 6 माह नहीं
- संरचना - कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और सहायक, उप मंत्री, उप मुख्यमंत्री असंवैधानिक राजनीतिक, संसदीय सचिव लाभ का पद, किचन कैबिनेट अनौपचारिक, छाया मंत्रिमंडल भारतीय में नहीं, सामूहिक उत्तरदायित्व विधानसभा प्रति, व्यक्तिगत मुख्यमंत्री प्रति
- शक्तियां - मंत्रिपरिषद नेतृत्व विभाग बंटवारा बैठक अध्यक्षता, राज्यपाल सलाहकार अनुच्छेद 163, विधानसभा नेतृत्व बहुमत नेता भंग सलाह, बजट भूमिका, केंद्र राज्य समन्वय, योजना बोर्ड अध्यक्ष, अनुच्छेद 167(a)(b)(c) सूचना कर्तव्य, मुख्य सचिव प्रशासनिक कड़ी
- न्यायिक - शमशेर सिंह 1974 राज्यपाल मंत्रिपरिषद सलाह पर, एस आर बोम्मई 1994 बहुमत परीक्षण विधानसभा में, एम पी स्पेशल पुलिस 2004 अभियोजन स्वीकृति विवेक, अविश्वास प्रस्ताव सरकार गिराता है निंदा प्रस्ताव केवल चेतावनी, बजट अस्वीकार सामूहिक उत्तरदायित्व से त्यागपत्र
| विषय | प्रावधान |
|---|---|
| संवैधानिक अनुच्छेद | 163 सहायता सलाह प्रधान मुख्यमंत्री, 164 नियुक्ति शपथ वेतन प्रसादपर्यंत, 166 कार्य संचालन, 167 सूचना कर्तव्य |
| नियुक्ति | राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 164(1), बहुमत दल नेता, गैर विधायक 6 माह |
| आकार 91वां संशोधन 2003 | विधानसभा के 15 प्रतिशत अधिकतम न्यूनतम 12, जनजातीय मंत्री छत्तीसगढ़ झारखंड मध्य प्रदेश ओडिशा परंतुक |
| उत्तरदायित्व | सामूहिक विधानसभा प्रति 164(2), व्यक्तिगत मुख्यमंत्री प्रति, बजट अस्वीकार पर त्यागपत्र |
| संरचना | कैबिनेट, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और सहायक, उप मंत्री, उप मुख्यमंत्री असंवैधानिक |
| वेतन शपथ त्यागपत्र | शपथ राज्यपाल 164(3) तीसरी अनुसूची, वेतन विधानमंडल 164(5) समेकित निधि, त्यागपत्र राज्यपाल को |
| न्यायिक निर्णय | शमशेर सिंह 1974 सलाह बाध्यकारी, बोम्मई 1994 बहुमत परीक्षण सदन में, बी आर कपूर 2001 दंडित नहीं, चौधरी 2001 लगातार 6 माह नहीं, MP पुलिस 2004 अभियोजन स्वीकृति विवेक |
| आयोग सिफारिश | सरकारिया 1988 त्रिशंकु वरीयता क्रम, पुंछी 2010 वस्तुनिष्ठ मानदंड |
| अन्य | पहली महिला सुचेता कृपलानी 1963, मुख्यमंत्री विधानसभा विधान परिषद दोनों से हो सकता है, कार्यवाहक सरकार सीमित कार्य, मुख्य सचिव प्रशासनिक सलाहकार, किचन कैबिनेट अनौपचारिक |
मुख्यमंत्री एवं राज्य मंत्रिपरिषद से संबंधित अनुच्छेद 163 164 167 और 91वां संशोधन परीक्षा में बार बार पूछे जाते हैं, विशेषकर नियुक्ति आकार और उत्तरदायित्व पर।